कृषि विशेषज्ञ और नीतिज्ञ भी जुड़ेंगें भाकियू (सर्व) सदस्यता अभियान में:अनिल शर्मा
देहरादून/ऋषिकेश 06 नवंबर। भारतीय किसान यूनियन (सर्व) के
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा उत्तराखंड प्रभारी अनिल शर्मा ने कहा कि संगठन को मजबूत बनाने को शीघ्र ही हर प्रदेश में सदस्यता अभियान चलाकर कृषि क्षेत्र के विविध पक्षों के विशेषज्ञों,नीतिकारों और अनुभवी जनों को जोड़ने की प्रक्रिया तेज की जायेगी.

उन्होने यहां चंद्रेश्वर पब्लिक स्कूल में आयोजित पद नियुक्ति प्रमाणपत्र समारोह के बाद पत्रकारों से बातचीत में कहा कि कृषि क्षेत्र जितना विस्तृत है,उतनी ही इसकी समस्याए भी उलझी हुई हैं. सरकार की प्राथमिकताएं समय के साथ बदलती रहती हैं. इसलिए इन समस्याओं के समाधान को भारतीय किसान यूनियन (सर्व) की शक्ति और सक्रियता दोनों बढाने को रात-दिन काम किया जा रहा है.
इसके पूर्व कार्यक्रम में यूनियन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष
प्रमोद कुमार शर्मा ने कहा कि कृषि और कृषक डॉक्टर स्वामीनाथन फार्मले से ही जीवित रह सकती है जिसमें किसान को अन्नोपादन की लागत का कम से कम डेढ गुणा मूल्य प्राप्ति सुनिश्चित हो. उन्होने पूरे देश के लिए एक एम एस पी को अव्यवहारिक बताते हुए कहा कि एक ही अन्न की उत्पादन लागत हर राज्य में भिन्न है.
अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पर्यावरणविद तथा भाकियू (सर्व) के उत्तराखंड प्रदेश संयोजक डॉक्टर विनोद जुगलान ने कहा कि अंधाधुंध शहरीकरण और औद्योगिकीकरण से कृषि भूमि घटी जरुर है लेकिन अभी भी न केवल पूरी दुनिया का पेट भरा जा सकता है बल्कि किसानों की आर्थिकी भी सुधारी जा सकती है.जरूरत कृषि विशेषज्ञों के जमीन से जुडने की है. उन्होने कहा कि बिगड़ते पर्यावरण और बदलती जलवायु के कारण कृषि उत्पादन घट रहा है. इसलिए कृषि कल्याण के लिए पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में भी काम करने की आवश्यकता है.
युवा संत महाराज रविदास ने कहा कि कृषि और कृषक समस्याओं से उदासीन कृषि नीति नियामकों के कारण किसान कष्ट और आपदा में है.परिश्रम से अन्नोपादन करने वाला कृषक ज्यादा समझदारी और संवेदनशीलता की अपेक्षा करता है. इसलिए किसान अधिकाधिक संगठित होकर नीतिकार पर दबाव बनायें क्योंकि लोकतंत्र में अपनी समस्याओं के समाधान का यही एकमात्र उपाय है.
प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष सेवानिवृत्त अधिशासी अभियंता (विद्युत) महेंद्र सिंह ने उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र में सेवा काल के अपने अनुभव बताते हुए कहा कि मैदानी और पर्वतीय क्षेत्र की कृषि की समस्याओं में जमीन-आसमान का अंतर है. उनका समाधान भी उसी स्तर पर करना होगा.
राष्ट्रीय वरिष्ठ प्रवक्ता रवींद्र नाथ कौशिक
ने सावधान किया कि सामान्य किसान को अपने काम से बहुत अधिक समय नही मिलता .ऐसे में उनके नाम से सत्ता की राजनीति करना और दबाव गुट बनाकर स्वार्थ सिद्धि आसान हो गयी है जिससे स्थितियां उलझ गई है. भाकियू (सर्व) को व्यवसायिक खेती के साथ परंपरागत कृषकों,विशेषकर सीमांत कृषकों की आवाज भी बनना चाहिए.

भाकियू (सर्व) के प्रदेश महामंत्री तथा उत्तराखंड बॉडी बिल्डर्स ऐसोसियेशन अध्यक्ष
राजीव थपलियाल ने कहा कि राज्य के पर्वतीय क्षेत्र की कृषि की विशिष्ट समस्याओं और विशेषकर उन्ही के लिए आवाज उठाने वालों की बहुत कमी है. यूनियन को इस रिक्त-स्थान की पूर्ति करनी चाहिए.
ऋषिकेश जिला संरक्षक महंत निर्मल दास ने कहा कि भारत को कृषि प्रधान देश कहा जाता है और हममे से अधिकांश की पृष्ठभूमि खेती किसानी की ही है. इसलिए इस क्षेत्र की समस्याओं को समझना कठिन नही है लेकिन इनके समाधान को अनुकूल राजनीतिक वातावरण बनाने के लिए सक्रियता की आवश्यकता है.
प्रदेश प्रवक्ता राजकमल गोयल
ने कहा कि कृषि पैदावार बढाने को रासायनिक खाद के अंधाधुंध प्रयोग से खाद्यान्न विषाक्तता की समस्या पर तेजी से कार्य करने की आवश्यकता है. उन्होने कहा कि कृषक जैविक खेती करना चाहते हैं लेकिन उन्हे जानकारी और प्रोत्साहन दोनों ही नही मिलते.
कार्यक्रम में यूनियन की प्रदेश प्रभारी कनक बडथ्वाल, प्रदेश संगठन मंत्री विजेंद्र दत्त चमोली टिहरी जिलाध्यक्ष मनोज शर्मा ,ऋषिकेश जिला महासचिव नीरज यादव आदि भी थे.
कार्यक्रम में
राष्ट्रीय संरक्षक डॉक्टर उमादत्त शर्मा और
राष्ट्रीय सलाहकार कमलेश कुमार शर्मा के कार्यक्रम तथा नवमनोनीत पदाधिकारियों के लिए शुभकामना संदेश भी पढ़कर सुनाये गये.

