अमरीकी वीजा प्रतिबंध की परिधि में आये पाकिस्तान, बांग्लादेश, ईरान जैसे 75 देश

अमेरिका ने इन 75 देशों के ख़िलाफ़ किया महत्वपूर्ण फ़ैसला, पाकिस्तान भी शामिल

न्यूयार्क 15 जनवरी 2026। अमेरिका ने जिन 75 देशों को लेकर यह फ़ैसला किया है, उनमें से कइयों को लेकर आश्चर्य जताया जा रहा है अमेरिका ने 75 देशों से आने वाले लोगों पर इमिग्रेंट वीज़ा प्रोसेसिंग पर अनिश्चितकालीन रोक लगाने की घोषणा की है. 21 जनवरी 2026 से लागू हो रहे ट्रंप प्रशासन के इस आदेश से अमेरिका में क़ानूनी तौर पर एंट्री के रास्ते और सीमित हो जाएंगे.ट्रंप प्रशासन के इस दायरे में आए दक्षिण एशियाई देशों में पाकिस्तान भी शामिल है.

हाल के दिनों में वीज़ा पाबंदी को लेकर अमेरिका का ये सबसे कड़ा क़दम है.अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने बुधवार को कहा कि सरकार इस व्यवस्था का दुरुपयोग  ख़त्म करना” चाहती है.

इसके अलावा प्रतिबंध सूची में शामिल शुरुआती 19 देशों के प्रवासियों के लिए शरण के मामलों, नागरिकता प्रक्रिया और ग्रीन कार्ड आवेदनों पर भी रोक लगा दी गई है.

अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रमुख उप प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने कहा, “विदेश मंत्रालय अपने अधिकारों का इस्तेमाल करेगा ताकि ऐसे संभावित प्रवासियों को अयोग्य घोषित किया जा सके, जो अमेरिका पर बोझ बन सकते हैं और अमेरिकी जनता की उदारता का दोहन कर सकते हैं.”

पिगॉट ने बताया कि वीज़ा प्रक्रिया अस्थायी रूप निलंबित की गई है ताकि अपनी दोबारा समीक्षा की जा सके और ऐसे विदेशी नागरिकों के प्रवेश को रोका जा सके, जो वेलफे़यर और सार्वजनिक लाभ योजनाओं पर निर्भर हो सकते हैं.

व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेट्री केरोलिन लेविट ने फॉक्स न्यूज़ की ख़बर को शेयर करते हुए इसकी जानकारी दी है. उन्होंने लिखा है कि सोमालिया, रूस और ईरान समेत 75 देशों के लोगों के लिए अमेरिका ने वीज़ा प्रोसेसिंग पर रोक लगा दी है.

एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, विदेश विभाग ने कांसुलर अधिकारियों को प्रभावित देशों से आने वाले लोगों के इमिग्रेंट वीज़ा आवेदनों को रोकने के निर्देश दिए हैं.

हालांकि यह रोक नॉन-इमिग्रेंट, यानी अस्थायी पर्यटक या कारोबारी वीज़ा पर लागू नहीं होगी.

हाल के महीनों में, विदेश मंत्रालय ने उन देशों से होने वाले इमिग्रेशन पर पाबंदियां बढ़ाई हैं, जिन्हें ट्रंप प्रशासन ने राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ख़तरा माना है.

इनमें रूस, ईरान, अफ़ग़ानिस्तान और अफ़्रीका के कई देश शामिल हैं.

नवंबर में वॉशिंगटन डीसी में नेशनल गार्ड के दो सदस्यों पर गोलीबारी के मामले में अफ़ग़ानिस्तान से आए एक प्रवासी पर आरोप लगने के बाद ट्रंप प्रशासन ने 19 देशों के नागरिकों के प्रवेश पर रोक या कड़ी सीमाएं लगा दी थीं.

दिसंबर में इस यात्रा प्रतिबंध का दायरा पांच और देशों तक बढ़ा दिया गया, साथ ही फ़लिस्तीनी अथॉरिटी की ओर से जारी दस्तावेजों पर यात्रा करने वालों को भी इसमें शामिल कर लिया गया है.

कुवैत और थाईलैंड के नाम पर भी हैरानी जताई जा रही है
दक्षिण एशिया के जो देश इस लिस्ट में शामिल हैं, उनमें पाकिस्तान भी है.

हाल के दिनों में अमरिका और पाकिस्तान के बीच रिश्ते काफ़ी सुधरते दिखे थे. पाकिस्तान ने तो ट्रंप को शांति का नोबेल सम्मान देने की सिफ़ारिश की थी.

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने अमेरिका जाकर राष्ट्रपति ट्रंप से मुलाक़ात की थी.

वहीं ट्रंप ने जनरल मुनीर का व्हाइट हाउस में स्वागत किया था. ट्रंप ने पाकिस्तान में निवेश करने की भी बात की थी.

अब पाकिस्तान के लोगों के लिए वीज़ा प्रतिबंध से हज़ारों पाकिस्तानियों की अमेरिकी यात्रा, पढ़ाई और वर्क प्लान को झटका लग सकता है. पाकिस्तानी बड़ी संख्या में अमेरिकी वीज़ा के लिए आवेदन करते हैं.

हालांकि इस्लामाबाद पॉलिसी रिसर्च इंस्टिट्यूट के कार्यकारी निदेशक हुसैन नदीम को लगता है कि पाकिस्तान इस लिस्ट में लंबे समय तक नहीं रहेगा. नदीम ने एक्स पर लिखा है, ”पाकिस्तान इस सूची में ज़्यादा समय तक नहीं रहेगा; संभावना है कि इस फ़ैसले की समीक्षा कर इसे बदला जाएगा. लेकिन जिस तथ्य पर ध्यान जाना चाहिए वह यह है कि ट्रंप प्रशासन ने शुरुआत में ही पाकिस्तान को वीज़ा फ्रीज़ सूची में रखा.”

”यह अपने आप में दो बातें साफ़ करता है. अमेरिका की विदेश नीति की सोच में पाकिस्तान की वास्तविक स्थिति क्या है, उसे अमेरिका के कुछ सबसे संकटग्रस्त देशों और विरोधियों के साथ एक ही श्रेणी में रखा जा रहा है. यह भी दर्शाता है कि पाकिस्तान का सैन्य शासन कितना भोला और हताश है, जो ट्रंप की “पीठ थपथपाने” वाली टिप्पणियों और “पसंदीदा फ़ील्ड मार्शल” जैसे बयानों को किसी रणनीतिक उपलब्धि या द्विपक्षीय संबंधों में गहराई का संकेत मान बैठा.”

दक्षिण एशिया की जियोपॉलिटिक्स पर गहरी नज़र रखने वाले विश्लेषक माइकल कुगलमैन ने इस लिस्ट में पाकिस्तान के नाम होने पर लिखा है, ”पाकिस्तान उन 75 देशों में शामिल है, जिन पर ट्रंप प्रशासन ने कथित तौर पर अनिश्चितकाल को वीज़ा प्रक्रिया पर रोक लगा दी है. पाकिस्तान और अमेरिका के बीच हालिया संबंधों में आई गर्माहट भी इसे इस फ़ैसले से नहीं बचा सकी. सूची में बांग्लादेश, भूटान और नेपाल भी शामिल हैं.”

इससे पहले कुगलमैन ने एक्स पर लिखा था कि भारत में अमेरिका के नवनियुक्त राजदूत दोनों देशों के बीच संबंधों को पटरी पर लाने के लिए गंभीर कोशिश कर रहे हैं.

कुगलमैन ने लिखा था, ”भारत में राजदूत के रूप में पदभार संभालने के बाद से सर्जियो गोर लगातार यह संकेत देते रहे हैं कि भारत-अमेरिका संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की उनकी इच्छा है. ट्रंप के व्हाइट हाउस में उनके प्रभाव और पहुंच को देखते हुए यह साझेदारी को एक सकारात्मक संकेत है. हालांकि, दिल्ली में भरोसा और सद्भाव दोबारा हासिल करना एक लंबी और कठिन प्रक्रिया सिद्ध हो सकती है।

हाल के महीनों में पाकिस्तान से अमेरिका के संबंध पटरी पर आते दिखे थे
अमेरिकी अख़बार वाल स्ट्रीट जर्नल के कॉलमिस्ट सदानंद धुमे ने एक्स पर इस लिस्ट में कुछ देशों के नाम पर हैरानी जताई है. उन्होंने लिखा है, ”मुझे स्टेट डिपार्टमेंट की अस्थायी वीज़ा प्रतिबंध सूची में कुवैत, थाईलैंड, ब्राज़ील और उरुग्वे को देखकर हैरानी हुई. ये देश अपेक्षाकृत समृद्ध माने जाते हैं.”

”वहीं पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल का इस सूची में होना कोई आश्चर्य की बात नहीं है. भूटान एक दिलचस्प मामला है, अमेरिका में मौजूद कई भूटानी शरणार्थी वास्तव में नस्ली रूप से नेपाली हैं, जिन्हें 1990–92 के दौरान भूटान से बाहर कर दिया गया था.”

हाल के दिनों में अमेरिका और पाकिस्तान की बढ़ती क़रीबी को भारत के ख़िलाफ़ भी देखा जा रहा था लेकिन अमेरिका में पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने पीटीआई को दिए इंटरव्यू में इसका विश्लेषण अलग तरह से किया है.

जॉन बोल्टन ने  कहा, “मेरा मानना है कि भारत–अमेरिका संबंध संभवतः 21वीं सदी में हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक संबंध हैं. लेकिन पाकिस्तान से निपटना भी अप्रासंगिक नहीं है.”

”ख़ासकर इसलिए कि चीन पाकिस्तान में, विशेष रूप से पाकिस्तानी सेना के साथ अपनी पकड़ मज़बूत करने की कोशिश कर रहा है. यह मुझे बेहद चिंताजनक लगता है और ज़ाहिर है कि यह भारत के लिए भी चिंता का विषय है.”

बोल्टन ने कहा, ”इसलिए हमारे हित जुड़े हुए हैं. अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान और अन्य समूहों के ख़िलाफ़ पाकिस्तान के साथ हमारे कुछ साझा हित भी हैं. मेरा मानना है कि अगर हम पाकिस्तान के साथ काम कर सकें और उन्हें यह याद दिला सकें कि चीन उनके लिए भी उतना ही ख़तरा है, जितना भारत के लिए तो आगे बढ़ने का यही एक आधार हो सकता है. मुझे नहीं पता कि यह ट्रंप की सोच है या नहीं लेकिन अगर मैं उन्हें सलाह दे रहा होता तो यही कहता.”

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ ने डोनाल्ड ट्रंप के लिए शांति का नोबेल सम्मान देने की भी सिफ़ारिश की थी
इन देशों के लिए इमिग्रेशन वीज़ा प्रोसेसिंग पर लगी रोक
1-अफ़ग़ानिस्तान(Afghanistan)
2-अल्बानिया(Albania)
3-अल्जीरिया(Algeria)
4-एंटीगुआ और बारबुडा(Antigua and Barbuda)
5-आर्मेनिया(Armenia)
6-अज़रबैजान(Azerbaijan)
7-बहामास(Bahamas)
8-बांग्लादेश(Bangladesh)
9-बारबाडोस(Barbados)
10-बेलारूस(Belarus)
11-बेलीज़(Belize)
12-भूटान(Bhutan)
13-बोस्निया(Bosnia and Herzegovina)
14-ब्राज़ील (Brazil)
15-म्यांमार (बर्मा)(Myanmar (Burma)
16-कंबोडिया(Cambodia)
17-कैमरून(Cameroon)
18-केप वर्डे(Cape Verde)
19-कोलंबिया(Colombia)
20-कोट डी आइवर(Côte d’Ivoire) (Ivory Coast)
21-क्यूबा(Cuba)
22-डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ़ कांगो(Democratic Republic of the Congo)
23-डोमिनिका(Dominica)
24-मिस्र (Egypt)
25-इरिट्रिया(Eritrea)
26-इथियोपिया(Ethiopia)
27-फिजी(Fiji)
28-गाम्बिया(Gambia)
29-जॉर्जिया(Georgia)
30-घाना(Ghana)
31-ग्रेनेडा(Grenada)
32-ग्वाटेमाला(Guatemala)
33-गिनी(Guinea)
34-हैती(Haiti)
35-ईरान(Iran)
36-इराक (Iraq)
37-जमैका(Jamaica)
38-जॉर्डन(Jordan)
39-कज़ाख़िस्तान(Kazakhstan)
40-कोसोवो(Kosovo)
41-कुवैत(Kuwait)
42-किर्गिज़स्तान(Kyrgyzstan)
43-लाओस(Laos)
44-लेबनान(Lebanon)
45-लाइबेरिया(Liberia)
46-लीबिया(Libya)
47-मैसेडोनिया(North Macedonia)
48-मोल्दोवा(Moldova)
49-मंगोलिया(Mongolia)
50-मोंटेनेग्रो(Montenegro)
51-मोरक्को(Morocco)
52-नेपाल(Nepal)
53-निकारागुआ(Nicaragua)
54-नाइजीरिया(Nigeria)
55-पाकिस्तान(Pakistan)
56-रिपब्लिक ऑफ़ कांगो(Republic of the Congo)
57-रूस(Russia)
58-रवांडा(Rwanda)
59-सेंट किट्स और नेविस(Saint Kitts and Nevis)
60-सेंट लूसिया(Saint Lucia)
61-सेंट विंसेंट और ग्रेनेडाइंस(Saint Vincent and the Grenadines)
62-सेनेगल(Senegal)
63-सिएरा लियोन(Sierra Leone)
64-सोमालिया(Somalia)
65-दक्षिण सूडान(South Sudan)
66-सूडान( Sudan)
67-सीरिया(Syria)
68-तंज़ानिया(Tanzania)
69-थाईलैंड(Thailand)

70-टोगो(Togo)
71-ट्यूनीशिया(Tunisia)
72-युगांडा(Uganda)
73-उरुग्वे(Uruguay)
74-उज़्बेकिस्तान(Uzbekistan)
75-यमन(Yemen)

अमेरिकी ट्रंप प्रशासन ने 14 जनवरी 2026 को घोषणा की है कि 21 जनवरी 2026 से 75 देशों के नागरिकों के लिए इमिग्रेंट वीजा (स्थायी निवास/ग्रीन कार्ड संबंधित) की प्रोसेसिंग अनिश्चितकाल को निलंबित कर दी जाएगी।यह रोक मुख्य रूप से “पब्लिक चार्ज” नियम में लगाई गई है, यानी उन आवेदकों को टारगेट किया जा रहा है जिनके अमेरिका में सरकारी सहायता (welfare/public benefits) पर निर्भर होने की संभावना ज्यादा मानी जाती है।

नोट: यह रोक केवल इमिग्रेंट वीजा (permanent residency) पर लागू है। टूरिस्ट, स्टूडेंट, बिजनेस आदि नॉन-इमिग्रेंट वीजा (temporary visas) पर अभी कोई सामान्य रोक नहीं है (हालांकि कुछ देशों पर पहले से अलग प्रतिबंध चल रहे हैं)

यह सूची Reuters, NPR, The Guardian, Bloomberg और अन्य प्रमुख मीडिया स्रोतों से कन्फर्म  है। यह नीति अनिश्चितकालीन है और स्टेट डिपार्टमेंट के रिव्यू होने तक चलेगी।इन देशों के ग्रीन कार्ड/परमानेंट रेसिडेंसी के लिए अभी नई अप्लिकेशन प्रोसेस नहीं होगी। स्थिति बदल सकती है, इसलिए आधिकारिक US State Department वेबसाइट या US Embassy से लेटेस्ट सूचना पर निर्भर रहें.

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