गौहत्या में मुंशाद,अबुजर व आस मोहम्मद को सुनाई 10 वर्ष कैद,8 लाख अर्थदंड
देश में गाय गौमाता के रूप में पूजनीय…मुजफ्फनगर कोर्ट ने गौहत्या में मुंशाद,अबुजर और आस मोहम्मद को सुनाई 10 वर्ष कारावास,8 लाख अर्थदण्ड
Three accused of cow slaughter were sentenced to 10 years each, court said cow is in heart of every sanatani
मुजफ्फरनगर में गौहत्या के एक मामले में तीन दोषियों को 10 साल की सजा और 8 लाख रुपये अर्थदण्ड की सजा सुनाई गई है. कोर्ट ने कहा है कि गाय से हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हुई हैं.
मुजफ्फनगर 19 जुलाई 2026। गौहत्या के मामले में मुजफ्फनगर में अपर जिला एवं सत्र न्यायालय फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 ने तीन दोषियों को 10 साल की सजा और 8 लाख रुपए अर्थदण्ड लगाते हुए कहा कि गाय को ‘गौमाता’के रूप में पूजा जाता है और सनातन धर्म में इसका धार्मिक महत्व है. एडिशनल सेशन जज रवि कुमार दिवाकर ने कहा कि प्रत्येक सनातनी के हृदय में गौमाता के प्रति श्रद्धा का जो भाव है, वह पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ रहा है.विकास की अंधी दौड़ के बीच भी आज गौमाता का दर्जा वही है. पहली रोटी गाय को देने की परंपरा है. बता दें कि गौहत्या के एक मामले में मुजफ्फरनगर के बुदीना कलां निवासी मुंशाद, अबुजर और आस मोहम्मद को उत्तर प्रदेश गौ हत्या निवारण अधिनियम की धारा 3, 5 और 8 में दोषी ठहराया गया है.
भारत में गाय को ‘गौमाता’ का दर्जा प्राप्त है- कोर्ट
टाइम्स ऑफ इंडिया में छपी खबर के अनुसार अपने आदेश में कोर्ट ने कहा कि भारत में गाय को ‘गौमाता’ का दर्जा प्राप्त है और हिंदू धर्म में इसकी गहरी धार्मिक मान्यता है. गौहत्या हिंदू समाज के एक बड़े वर्ग की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है. इसकी वजह से सामाजिक सद्भाव और शांति के लिए भी खतरा पैदा होता है. कोर्ट ने ये भी कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय का स्थान केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि देश की सामाजिक संरचना, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण से गहराई से भी ये जुड़ा हुआ है. अदालत ने माना कि अवैध गौहत्या एक गंभीर और सामाजिक रूप से अंसवेदनशील अपराध है. गायों की रक्षा करना संवैधानिक कर्तव्य है. गोकशी के मामले में कोर्ट ने तीन लोगों को 10 साल की सजा सुनाई है. बता दें कि 24 जनवरी 2021 में तितावी पुलिस स्टेशन के अंतर्गत बुदिना कलां गांव के एक घर से 55 किलो गोमांस, गाय की खाल, सिर, खुर और गौहत्या के उपकरण बरामद हुए थे.
गोकशी सामाजिक रूप से संवेदनशील प्रकरण- कोर्ट
कोर्ट ने अपने फैसले में लिखा कि गोकशी सामाजिक रूप से संवेदनशील प्रकरण है. भारत में गाय को गोमाता का दर्जा मिला है और वह पूजनीय है. इससे हिन्दू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं. और सामाजिक शांति और सौहार्द भंग होने का खतरा रहता है. शास्त्रों में भी इसका उल्लेख है. हिन्दू धर्म में इसकी महत्ता को इससे भी समझा जा सकता है कि घर में पहली रोटी गाय की निकलती है. प्रत्येक सनातनी के हृदय में गौमाता का सम्मान है.
Muzaffarnagar: गोकशी के तीन दोषियों को 10-10 साल की सज़ा, कोर्ट ने कहा.. हर सनातनी के हृदय में गोमाता
मुज़फ्फरनगर के तितावी थाना क्षेत्र के बुड़ीना खुर्द गांव में गोकशी के पांच साल पुराने मामले में तीन दोषियों को अदालत ने 10-10 साल के कारावास की सजा सुनाई। आठ-आठ लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत ने इस मामले में लिखा की प्रत्येक सनातनी के हृदय में गोमाता है और पहले रोटी गाय को देने की परंपरा है।
गोकशी के तीन आरोपियों को मिली 10-10 साल की सज़ा
गोकशी के तीनों दोषियों को सज़ा सुनाते हुए अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 के पीठासीन अधिकारी रवि कुमार दिवाकर ने लिखा कि प्रत्येक सनातनी के हृदय में गोमाता के प्रति श्रद्धा का जो भाव है, वह पीढ़ी-दर-पीढ़ी अनवरत प्रवाहित रहता है। आज के समय में जब विकास की अंधी दौड़ में परंपराएं पीछे छूट रही हैं तो भी गोमाता की प्रासंगिकता बनी हुई है। पहले रोटी गाय को देने की परंपरा है।
मकान में होती मिली थी गोकशी
तितावी थाने के पुलिस उपनिरीक्षक रोहताश कुमार ने 24 जनवरी 2021 को प्राथमिकी दर्ज कराई थी। पुलिस ने रात करीब सवा आठ बजे बुड़ीना खुर्द गांव के मकान में छापा मारकर गोकशी का मामला पकड़ा। अभियुक्त मुंशाद, अबूजर और आस मोहम्मद के खिलाफ 12 मई 2023 को आरोपपत्र दाखिल किया गया था।
पुलिस के आरोपों को मिली चुनौती
अभियोजन पक्ष ने पांच और बचाव पक्ष ने सफाई साक्ष्य के लिए तीन गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि पुलिस के आरोप गलत है। दूसरे समुदाय के पड़ोसी की गवाही भी दिलाई। शनिवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायालय/फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या-3 ने तीनों अभियुक्तों पर दोष सिद्ध करते हुए सजा सुनाई है।
अदालत ने कहा..गाय पूरे विश्व की माता, समाज को जोड़कर रखा
अदालत ने फैसले में लिखा कि गोकशी सामाजिक रूप से संवेदनशील प्रकरण है। भारत में गाय को गोमाता का दर्जा प्राप्त है और हिंदू धर्म में गाय अत्यधिक पूजनीय है। गोकशी से बहुसंख्यक हिंदू समाज की धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, जिससे सामाजिक सौहार्द और शांति भंग होने का खतरा रहता है। शास्त्रों में उल्लेख है कि गाय पूरे विश्व की माता है। यह भी देखा जाता है कि रात में जो भोजन बनता है वह पहले गोमाता को खिलाया जाता है, इससे हिंदू धर्म में गाय की महत्ता को समझा जा सकता है। जब इस पवित्र परंपरा पर कोई आघात होता है तो वह केवल धार्मिक भावनाओं को आहत नहीं करता है बल्कि उस सभ्यतागत सूत्र को भी तोड़ने का प्रयास करता है, जिस पर भारतीय समाज की नींव टिकी है। गोवंश संरक्षण संबंधी विधिक प्रावधानों का पालन प्रत्येक नागरिक का विधिक दायित्व है और उसका उल्लंघन विधि की अवहेलना है। ऐसे मामलों में न्यायालय की भूमिका केवल अपराध का निर्णय करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि कानून का शासन प्रभावी बना रहे और प्रत्येक व्यक्ति यह समझे कि विधि का उल्लंघन किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
मुज़फ्फरनगर के तितावी थाना क्षेत्र के बुड़ीना खुर्द गांव में गोकशी के पांच साल पुराने मामले में तीन दोषियों को अदालत ने 10-10 साल के कारावास की सजा सुनाई। आठ-आठ लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया। अदालत ने इस मामले में लिखा की प्रत्येक सनातनी के हृदय में गोमाता है और पहले रोटी गाय को देने की परंपरा है।
