IDFC फर्स्ट,AU स्माल बैंक फ्राड:590 करोड़ रु.के 556 रिकवर, 4 पकड़े,100 करोड़ की कड़ी जुड़ी भाई-बहनों की फर्म से

IDFC फर्स्ट बैंक घोटाला: नायब सरकार का सर्जिकल एक्शन, 24 घंटे में वापस आए 556 करोड़ रुपये; ACB जांच शुरू

हरियाणा सरकार की आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल बैंक संबद्ध 590 करोड़ रुपये के घोटाले में त्वरित कार्रवाई

590 करोड़ के घोटाले में 556 करोड़ रुपये की वसूली।

मुख्यमंत्री सैनी ने उच्च स्तरीय जांच समिति की घोषणा की।

बैंक कर्मचारियों और अज्ञात पर पंचकूला में FIR दर्ज।

गिरफ्तार लोगों में दो पूर्व IDFC फर्स्ट बैंक कर्मचारी हैं, अन्य दो एक साझेदारी फर्म के मालिक 

चंडीगढ़ 25/ 23 फरवरी 2026 । आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल बैंक से जुड़े 590 करोड़ रुपये के घोटाले में सरकार का सर्जिकल एक्शन काम कर गया। 24 घंटे में 556 करोड़ रुपये सरकारी खातों में वापस आ गए हैं, जिसमें 22 करोड़ रुपये का ब्याज भी शामिल है।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंगलवार को विधानसभा में पूरी राशि की रिकवरी की जानकारी देते हुए कहा कि प्रदेश सरकार हर पैसे की निगरानी और सुरक्षा को लेकर जीरो टॉलरेंस नीति पर काम कर रही है। उन्होंने इस गंभीर मामले पर वित्त सचिव की अध्यक्षता में उच्च स्तरीय कमेटी बनाने की घोषणा की। कमेटी न केवल गड़बड़ी में शामिल सरकारी कर्मचारियों–अधिकारियों की भूमिका की छानबीन करेगी, बल्कि ऐसे मामलों को भविष्य में रोकने को मजबूत निगरानी तंत्र, वित्तीय प्रोटोकाल और तकनीकी सुरक्षा उपायों पर भी अपनी सिफारिशें देगी।

कांग्रेस विधायक ने सदन में किया हंगामा
बजट सत्र के तीसरे दिन कांग्रेस ने विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। इस पर मुख्यमंत्री ने सीधा पलटवार किया कि पूर्व सरकारों में गड़बड़ियों की फाइलें दबा दी जाती थीं, इसलिए घोटाले सामने ही नहीं आते थे। हमारी सरकार में पारदर्शिता है।  हमने पूरा पैसा रिकवर कर लिया है। कोई भी छूटेगा नहीं। मुख्यमंत्री के  इस बयान पर कांग्रेस विधायकों ने सदन में हंगामा किया, लेकिन रिकवरी और ताबड़तोड़ एक्शन की टाइमलाइन से विपक्ष रक्षात्मक स्थिति में आ गया।

गलत तरीके से रकम इधर-उधर ट्रांसफर की
सरकार के मुताबिक यह गड़बड़ी चंडीगढ़ स्थित दो बैंकों में हुई। आइडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा के अलावा यूटी के ही सेक्टर-32 के एयू स्माल फाइनांस बैंक में यह गड़बड़ी सामने आई। प्रारंभिक तथ्यों के अनुसार कुछ कर्मचारियों ने सरकारी खातों से अनधिकृत और गलत तरीके से रकम इधर-उधर ट्रांसफर की। शक है कि इस खेल में कुछ बाहरी लोग भी शामिल थे।

ऐसी गड़बड़ियां आमतौर पर बैंकिंग सिस्टम में आंतरिक ‘फ्लैगिंग’ से पकड़ी जाती हैं, और इसी तकनीकी अलर्ट से इस पूरे मामले का पता चला। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने स्टाक एक्सचेंज को सूचना देकर माना कि उसके कुछ कर्मचारियों ने सरकारी खातों में अनधिकृत ट्रांजेक्शन किए हैं। इसमें बैंक ने चार संदिग्ध कर्मचारी तत्काल सस्पेंड किये।

धोखाधड़ी से जुड़े सभी दस्तावेज साझा 
एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी से फारेंसिक आडिट शुरू कराया। संदिग्ध ट्रांजेक्शन वाले खातों को चिह्नित करने को अन्य बैंकों को रिकाल रिक्वेस्ट भेजी और पूरी घटना की जानकारी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया तक पहुंचाई।

20 फरवरी को बैंक की स्पेशल फ्राड मानिटरिंग कमेटी की बैठक बुलाई गई, जबकि 21 फरवरी को आडिट कमेटी और बोर्ड आफ डायरेक्टर्स की महत्वपूर्ण बैठक हुई, जिसमें धोखाधड़ी से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकवरी प्लान साझा किए गए।

वहीं, विधानसभा में मामला उठने के बाद भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने पंचकूला सेक्टर-17 थाने में एफआइआर की है। एफआइआर नंबर 4 में आइडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्माल बैंक के कर्मचारियों के साथ-साथ अज्ञात व्यक्ति आरोपित बनाए गए हैं।

केस पीसी एक्ट और आर्थिक अपराध की गंभीर धाराओं में हुआ है। जांच डीएसपी शुक्रपाल को सौंप दी गई है। साथ ही, विजिलेंस विभाग भी अपनी समानांतर जांच कर रहा है।

कमेटी करेगी कार्रवाई की सिफारिश
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि वित्त सचिव की अध्यक्षता में जांच को हाई लेवल कमेटी बनाई है। बेशक, सरकार का पैसा वापस आ गया है लेकिन कमेटी पता लगाएगी कि इस गोलमाल में हरियाणा सरकार के कौन अधिकारी व कर्मचारी संलिप्त थे।

साथ ही, कमेटी ऐसे अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई की सिफारिश करेगी। इसके अलावा भविष्य को मजबूत वित्तीय सुरक्षा ढांचा तैयार करने को लेकर भी कमेटी अपनी सिफारिशें सरकार को देगी।

टेक्निकल ट्रैकिंग ने खोला राज
जांच सूत्रों के अनुसार सरकारी विभागों के खातों में कुछ अनियमित ट्रांजेक्शन होने लगे थे। इसके बाद बैंक की प्रारंभिक जांच में पता चला कि कुछ ट्रांजेक्शन बिना अधिकृत अनुमति हुए।

रकम कई खातों में बांटी गई और बाहरी लोगों की भूमिका संदिग्ध दिखाई दी। बैंक ने गड़बड़ी की पुष्टि की तो तुरंत सरकार को सूचना दी गई और फिर रिकवरी प्रक्रिया शुरू हुई।

हरियाणा के राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने बुधवार को कहा कि उसने 590 करोड़ रुपये के IDFC फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले में चार लोग गिरफ्तार किये हैं।
अधिकारियों के हवाले से पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, गिरफ्तार लोगों में दो पूर्व IDFC फर्स्ट बैंक कर्मचारी हैं, जबकि अन्य दो एक साझेदारी फर्म के मालिक हैं।
गिरफ्तारियां मंगलवार शाम IDFC फर्स्ट बैंक धोखाधड़ी मामले की जारी जांच में हुईं।
इससे पहले द इंडियन एक्सप्रेस ने खबर दी थी कि लगभग 100 करोड़ रुपये के “संदिग्ध” ट्रांसफर एक ऐसी फर्म को किए जाने के बाद, जो चंडीगढ़ की एक महिला और उसके भाई के स्वामित्व में है, अधिकारी उनकी तलाश में थे।
रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से यह भी कहा गया था कि पंचकूला के एक पूर्व प्रबंधक जांच के केंद्र में थे। यह कर्मचारी छह महीने से अधिक समय पहले बैंक छोड़ चुका था।
इससे पहले भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने इस मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी, जबकि राज्य सरकार ने धोखाधड़ी की जांच के लिए एक समिति का गठन किया था।
रविवार को IDFC बैंक ने बताया था कि उसके कर्मचारियों और अन्य लोगों ने हरियाणा सरकार के खातों में 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है।
मंगलवार को हरियाणा के मुख्यमंत्री Nayab Singh Saini ने राज्य विधानसभा को बताया कि इस मामले में राज्य सरकार को देय लगभग 556 करोड़ रुपये की राशि वसूल कर ली गई है।
सैनी ने सदन में कहा, “लगभग 556 करोड़ रुपये, जिसमें करीब 22 करोड़ रुपये ब्याज शामिल है, 24 घंटे में वापस आ गए।”
उन्होंने कहा, “मैं सदन के समक्ष स्पष्ट करना चाहता हूं कि हरियाणा सरकार के विभागों से संबंधित पूरी राशि हमारे खातों में जमा कर दी गई है… वसूली 24 घंटे में कर ली गई।”
उन्होंने बताया कि बैंक ने सरकार को अवगत कराया कि यह घटना मुख्य रूप से चंडीगढ़ स्थित बैंक की एक विशेष शाखा से संबंधित है, जिसमें मध्य और निचले स्तर के चार से पांच बैंक कर्मचारी शामिल थे, जिन्होंने मिलकर यह कृत्य किया।
विपक्ष के नेता Bhupinder Singh Hooda और हरियाणा कांग्रेस प्रमुख Rao Narender Singh ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है।

हरियाणा सरकार के कुछ कर्मचारियों और आइडीएफसी फर्स्ट बैंक के अधिकारियों ने मिलीभगत कर राज्य सरकार के साथ करीब 590 करोड़ रुपये की बड़ी धोखाधड़ी की थी। हरियाणा के कई प्रशासनिक विभागों ने इस बैंक में अपने खाते खुलवाए हुए थे।

अब सारे खाते बंद किए जाएंगे। इस संबंध में राज्य सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों को आदेश दिये। बैंक अधिकारियों व सरकारी कर्मचारियों की मिलीभगत से खुर्दबुर्द बड़ी रकम की जानकारी मिलने पर बैंक ने स्वयं सरकार को सूचना दे कार्रवाई में चार अधिकारियों निलंबित कर दिये ।

हरियाणा सरकार ने निर्देश दिए कि आइडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्माल फाइनांस बैंक में खाते तुरंत प्रभाव से बंद करवा दें। राज्य सरकार को आशंका है कि अन्य प्राइवेट बैंकों में भी ऐसी धोखाधड़ी हो सकती है, इसलिए सभी विभागों को खातों की राशि का मिलान करने के आदेश हुए हैं।

आइडीएफसी फर्स्ट बैंक की चंडीगढ़ शाखा में हरियाणा सरकार से यह धोखाधड़ी हुई । बैंक ने कहा कि उसकी चंडीगढ़ ब्रांच के कुछ कर्मचारी हरियाणा सरकार के विभाग से जुड़े अकाउंट से 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी में शामिल थे।

जांच पूरी होने तक उन्हें निलंबित कर दिया गया। इस पूरे मामले का पता तब चला जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना बैंक अकाउंट बंद कर उसके पैसे दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने को आइडीएफसी फर्स्ट बैंक को अनुरोध पत्र दिया।

जब बैंक ने प्रक्रिया शुरू की तो उसे अकाउंट में मौजूद बैलेंस और सरकारी विभाग के बताए बैलेंस में बड़ा अंतर दिखा। गहनता जांच से पता चला कि अंतर करीब 590 करोड़ रुपये का है। आइडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्माल फाइनांस बैंक को हरियाणा सरकार ने तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक ब्लैक लिस्टेड कर दिया।

आइडीएफसी फर्स्ट बैंक ने पाया कि चंडीगढ़ ब्रांच के कुछ कर्मचारियों ने जानबूझकर रिकार्ड में हेराफेरी की, ताकि फ्राड किया जा सके और किसी को शक न हो पाए। बैंक का कहना है कि धोधाखड़ी में शामिल कर्मचारियों व अधिकारियों पर दीवानी और अपराधिक मुकदमें भी होंगें।

इस फ्राड में शामिल बाहरी लोगों पर भी बैंक व जांच एजेंसियों की निगाह है। बैंक ने मामले की गंभीरता देखते हुए अपनी बोर्ड कमेटी की मीटिंग बुलाई। मीटिंग में फ्राड के मामलों की निगरानी करने वाली स्पेशल कमेटी के सामने पूरी रिपोर्ट रखी गई।

बैंक पूरे मामले की गहराई से जांच कराने को एक बाहरी स्वतंत्र एजेंसी  नियुक्त करने की प्रक्रिया में है, जो पूरे मामले का फोरेंसिक आडिट करेगी।

साथ ही पुलिस प्रशासन को भी लिखित शिकायत दी गई। बैंक ने उन दूसरे बैंकों को भी रिकाल रिक्वेस्ट भेजी है जहां इस धोखाधड़ी का पैसा ट्रांसफर होने का संदेह है, ताकि वहां वे अकाउंट्स फ्रीज किये जा सकें।

अब सिर्फ प्रशासनिक सचिव ही बैंक खाते खोलने को अधिकृत
दूसरी तरफ, हरियाणा के वित्त विभाग ने सरकारी विभागों को सिर्फ राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही खाते खोलने के आदेश दिए हैं। हरियाणा सरकार ने कहा है कि अब प्रदेश सरकार आइडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्माल फाइनांस बैंक में संचालित सभी सरकारी खाते बंद करेगी।

सभी विभागों और बोर्ड-निगमों को इन बैंकों में जमा राशि निकालकर खाते बंद करने को कहा गया है। केवल राष्ट्रीयकृत बैंकों में ही खाते खोले जा सकेंगें। निजी बैंकों में खाता खोलना भी पड़ा तो पहले ठोस कारण बताते हुए वित्त विभाग से मंजूरी लेनी पड़ेगी।

वित्त विभाग की ओर से सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों, उपायुक्तों, बोर्ड-निगमों और सरकारी कंपनियों व स्वायत्त निकायों के प्रबंध निदेशकों, मुख्य प्रशासकों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ विश्वविद्यालयों के रजिस्ट्रार और मंडलायुक्तों को निर्देश किए जा चुके हैं।

विभागीय योजनाओं-परियोजनाओं और कार्यक्रमों को बैंक खाते खोलने की स्वीकृति देने को प्रशासनिक सचिवों को अधिकृत किया गया है।

31 मार्च तक करना होगा सारे सरकारी खातों का मिलान
हरियाणा के वित्त विभाग ने कहा है कि कुछ बैंक विभागों और निगमों की सावधि जमा की शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं। कई मामलों में देखा गया है कि लचीली जमा या उच्च ब्याज दर वाले अन्य सावधि जमा साधनों में धनराशि रखने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद बैंक बचत खातों में धनराशि रोक रहे हैं। इसके परिणामस्वरूप सरकार को वित्तीय हानि हो रही है।

कई विभाग और निगम संबंधित बैंकों के साथ अपने सावधि जमा और बैंक खातों का नियमित रूप से मिलान नहीं कर रहे, जिससे इस तरह की अनियमितताओं का समय पर पता नहीं चल पा रहा है। इन्हें सावधि जमा (फिक्स्ड डिपाजिट) अनुमोदित नियमों और शर्तों के अनुसार ही करने को कहा गया है।

सभी सावधि जमा और संबंधित बैंक खातों का मासिक आधार पर मिलान होगा। संबंधित बैंकों के साथ तुरंत विसंगतियों का विषय उठाकर गंभीर अनियमितताओं की रिपोर्ट वित्त विभाग को देनी होगी। सभी विभागों और बोर्ड-निगमों को 31 मार्च तक अपने बैंक खातों का मिलान कर चार अप्रैल तक अनुपालन रिपोर्ट वित्त विभाग को भेजने को कहा गया है।

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