LPG लदे 8 टैंकरों के लिए भारत ने ईरान से मांगा मार्ग
LPG Cylinder Crisis: LPG-गैस सिलेंडरों की कमी पर मोदी सरकार का कैसा बड़ा कदम ? |
Iran Israel War After Hormuz Strait Closes Petrol Diesel Not Effected Then Why Lpg Shortage In India
होर्मुज बंद होने से पेट्रोल-डीजल पर नहीं फटा आसमान, तो LPG पर इतना हाहाकार क्यों?
LPG Shortage Reason: होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से दुनियाभर में क्रूड ऑयल और नेचुरल गैस का आयात बढ़े पैमाने पर प्रभावित हुआ है, लेकिन भारत में पेट्रोल-डीजल को लेकर इसकी हाय तौबा नहीं हो रही है। लेकिन एलपीजी सिलेंडरों को लेकर अफरातफरी है, जानें LPG पर इतनी मारामारी क्यों?
नई दिल्ली 13 मार्च 2026 । ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमले से बने हालात में क्रूड ऑयल और नेचरल गैस का आयात बढ़े पैमाने पर प्रभावित हुआ है, लेकिन जहां देश में पेट्रोल-डीजल की तंगी की स्थिति नहीं है, वहीं LPG सिलिंडरों के मामले में अफरातफरी है।
पेट्रोल-डीजल में टेंशन कम क्यों ?
भारत अपनी जरूरत का 88% कच्चा तेल आयात करता है। इस आयात का आधा हिस्सा उसी होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता रहा है, जहां से जहाजों का आना-जाना ठप है। युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य से रोज 25 से 27 लाख बैरल कच्चा तेल भारत आ रहा था। युद्ध शुरू होने के बाद भी । तीन चीजों के चलते बड़ा झटका नहीं लगा है।
अमेरिकी प्रतिबंध से रूस से खरीद काफी घटने पर भी 10 लाख बैरल प्रतिदिन की खरीद बनी हुई थी। फिर अमेरिका से 30 दिनों की छूट मिलने पर रूसी तेल की खरीद बढ़कर 16 लाख बैरल प्रतिदिन हो चुकी है। रूसी तेल पहले की तरह सस्ता तो नहीं रहा और इससे खाड़ी देशों से आने वाले तेल की पूरी भरपाई भी नहीं होगी, फिर भी यह राहत है।
2006-07 में जहां 27 देशों से कच्चा तेल आता था, वहीं अब 40 देशों से आ रहा है। सरकार के मुताबिक, आयात का 55% हिस्सा युद्ध के पहले होर्मुज के अलावा दूसरे रास्तों से आ रहा था और अब यह मात्रा करीब 70% हो गई है।
क्रूड ऑयल से पेट्रोल-डीजल बनाने में भारत चौथे स्थान पर है। ग्लोबल रियल टाइम डेटा प्रोवाइडर Kpler के लीड एनालिस्ट (रिफाइनिंग एंड सप्लाई) सुमित रितोलिया ने कहा, ‘भारत रिफाइंड प्रोडक्ट्स का बड़ा एक्सपोर्टर है। 2025 में इनका करीब 11 लाख बैरल प्रतिदिन निर्यात किया था।
LPG पर मारामारी क्यों?
भारत दुनिया में LPG का दूसरा बड़ा कंज्यूमर है। LPG की हर महीने 30 लाख टन की खपत है। इसके 40-45% हिस्सा ही देश में उत्पादन होता है। 55-60% आयात होता है। इसमें से भी 85-90% हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट से आता रहा है। अब यह बाधित है।
सरकार ने 9 मार्च को ESMA में जारी आदेश में रिफाइनरीज से कहा था कि वे LPG उत्पादन बढ़ाएं। उसके बाद से उत्पादन 29% बढ़ चुका। Kpler के सुमित रितोलिया ने कहा, ‘इससे देश में सप्लाई कुल डिमांड की 50% तक पहुंचेगी। पश्चिम एशिया के अलावा बाकी जगहों से LPG मंगाई जा सकती है, लेकिन समय ज्यादा लगता है।’
LPG का रणनीतिक भंडार भारत में नहीं
एक और बड़ी वजह यह कि कच्चे तेल का जैसा रणनीतिक भंडार भारत में है, वैसा LPG का नहीं है। मैंगलोर, पादुर और विशाखापत्तनम के स्ट्रैटेजिक रिजर्स और कमर्शियल भंडार मिलाकर 10 करोड़ बैरल का अतिरिक्त पेट्रोलियम भंडार है।
LPG का भंडार मासिक खपत के आधे से भी कम है। भारत में मैंगलुरु और विशाखापत्तनम में LPG के दो भूमिगत भंडार ही हैं। इनकी क्षमता 1.4 लाख टन है। इससे दो दिनों का काम भी नहीं चल पाता। सप्लाई लगातार उत्पादन और आयात पर टिकी है।
अब होर्मुज पार करेंगे 8 LPG टैंकर, ईरान जंग के बीच भारत ने उठाया बड़ा कदम,गैस की नहीं होगी कमी!
एलपीजी संकट के बीच भारत ने एलपीजी शिपमेंट की सुरक्षित आवाजाही को उच्च स्तरीय बातचीत की है. इसमें एस जयशंकर और अब्बास अराघची में कई बार फोन वार्ता हुई है. सूत्रों के अनुसार, एलपीजी टैंकर फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य के ठीक पहले खड़े हैं.
LPG Cisis: ईरान जंग का असर भारत में भी दिख रहा है. एलपीजी सिलेंडर को लेकर हाय-तौबा मची है. गैस कालाबाजारी चरम पर है. सामान्य जन परेशान है. लोगों को डर सता रहा है कि एलपीजी गैस कमी से उन्हें खाने-पीने की दिक्कत होगी. सरकार का कहना है कि देश में एलपीजी गैस की कमी नहीं है. होर्मुज के बंद होने से इंधन संकट की चिंताओं के बीच सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. बहुत जल्द आठ एलपीजी टैंकर होर्मुज पार कर भारत में होंगे. जी हां, इसको भारत सरकार ने ईरान से बातचीत तेज कर दी है.
दरअसल, एक सरकारी सूत्र ने बताया कि भारत ईरान से बातचीत कर रहा है और उसे जल्द ही LPG की आपूर्ति की उम्मीद है. अधिकारी स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हैं, क्योंकि इस क्षेत्र में हो रही बाधाओं से ऊर्जा शिपमेंट पर लगातार असर पड़ रहा है. बता दें कि ईरान ने जंग के कारण होर्मुज को बंद कर दिया है. हालांकि, उसने भारत को इससे छूट दी है.
होर्मुज के पास 8 टैंकर प्रतीक्षा में
सूत्रों के अनुसार, आठ LPG टैंकर इस समय स्ट्रेट ऑफ होर्मुज यानी होर्मुज जलडमरूमध्य से ठीक पहले खड़े हैं. इन जहाजों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए सरकार ईरान के संपर्क में है. अधिकारियों ने बताया कि ईरानी अधिकारी इस प्रक्रिया में सहयोग कर रहे हैं और उन्हें अपने उन नाविकों की भी चिंता है जो इस समय भारत में हैं. लगभग 250 ईरानी नाविक भारत में हैं, जो अपने घर लौटने का इंतज़ार कर रहे हैं. भारतीय अधिकारियों ने उन्हें रहने की जगह दी है, जबकि उनके लौटने की व्यवस्था की जा रही है।
एलपीजी गैस और तेल संकट टालने को सरकार का क्राइसिस मैनेजमेंट ग्रुप यानी संकट प्रबंधन समूह (Crisis Management Group) पूरी योजना पर काम कर रहा है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भारत को किसी भी तरह की ईंधन कमी का सामना न करना पड़े. अधिकारी स्थिति का जायज़ा ले रहे हैं और LPG कुकिंग गैस की सप्लाई को संभालने को संबंधित अधिकारियों से तालमेल बिठा रहे हैं.
LPG आयात पर भारत की निर्भरता
भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का लगभग 60 से 67 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है. इस आयात का एक बड़ा हिस्सा सऊदी अरब और कतर जैसे खाड़ी देशों के सप्लायरों से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के रास्ते आता है. इस रास्ते में किसी भी तरह की रुकावट देश में LPG की उपलब्धता पर असर डाल सकती है.
भारतीय जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही को कूटनीतिक बातचीत
भारत एलपीजी शिपमेंट को सुरक्षित रास्ता सुनिश्चित करने को उच्च-स्तरीय बातचीत कर रहा है. इसमें विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची में कई बार फ़ोन पर बातचीत हुई है. इतना ही नहीं, अपने ईंधन वाले जहाजों को सुरक्षित वापस लाने को भारत नेवी के एस्कॉर्ट पर भी विचार कर रहा है.

