चुनाव पूर्व धामी सरकार का एक और दांव: निकाहनामे का प्रारूप तैयार, एक ही शादी
उत्तराखंड में ‘निकाहनामे’ का ड्राफ्ट तैयार, एक से ज्यादा शादी नहीं, चुनाव से पहले धामी सरकार का बड़ा दांव
उत्तराखंड सरकार ने निकाहनामे के नए ड्राफ्ट में कई बदलाव हैं.
उत्तराखंड में ‘निकाहनामे’ का ड्राफ्ट तैयार
देहरादून 16 अक्टूबर 2026 : उत्तराखंड में UCC (Uniform Civil Code) के बाद अब निकाहनामे की बारी है. धामी सरकार की इस पहल में निकाह कराने वाले काजी-मौलवियों के पंजीकरण से लेकर महिलाओं के अधिकारों तक पर जोर है. चुनाव पूर्व इस पग के राजनीतिक अर्थ भी ढूंढे जा रहे हैं.
पूरे देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर अब उत्तराखंड में देश के पहले सरकार अनुमोदित निकाहनामे को लेकर भी तैयारी शुरू हो गई है. धामी सरकार की इस पहल में निकाह कराने वाले काजी और मौलवियों के पंजीकरण से लेकर निकाह अभिलेख अधिक व्यवस्थित करने तक की बात हो रही है. विधानसभा चुनाव पूर्व यह पहल राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है. सरकार और वक्फ बोर्ड इसे व्यवस्था सुधार की कोशिश बता रहे हैं. वहीं मुस्लिम समाज में निकाह की मौजूदा प्रक्रिया और नए नियमों को लेकर कई सवाल भी हैं.
उत्तराखंड में ‘निकाहनामे’ का ड्राफ्ट तैयार
UCC बाद निकाहनामे में परिवर्तन की तैयारी: उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद अब निकाहनामे को लेकर नई व्यवस्था प्रक्रिया शुरू हो गई है. अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास के मुताबिक, सरकार निकाहनामे को अधिक मजबूत बनाना चाहती है. इसके लिए निकाह कराने वाले मौलवियों का पंजीकरण करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि निकाह की प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी न आए और वैवाहिक संबंध से जुड़े दस्तावेज मजबूत रहें.
निकाहनामे का ड्राफ्ट तैयार
UCC के अनुरूप ही तैयार हो रही निकाहनामे का प्रस्ताव: उन्होंने कहा कि सरकार इस दिशा में काम कर रही है और आने वाले दो से तीन महीने में इससे जुड़ी प्रक्रिया और दूसरी जानकारियां सामने आ सकती हैं. दरअसल, उत्तराखंड में UCC लागू होने के बाद विवाह, तलाक और वैवाहिक संबंधों से जुड़े कई नियमों में बदलाव आया है. अब निकाहनामे को भी इसी व्यवस्था के अनुरूप तैयार करने की बात हो रही है.
उत्तराखंड में जल्द लागू होगा निकाहनामा
वक्फ बोर्ड की पहल: वक्फ बोर्ड की ओर से इस मामले में पहल की जा रही है. इसमें निकाह कराने वाले काजी और मौलवियों की पहचान दर्ज करने, निकाह के समय जरूरी जानकारी जुटाने और दस्तावेजों को अधिक व्यवस्थित बनाने जैसे मुद्दे शामिल हैं. हालांकि, प्रस्तावित निकाहनामे का अंतिम स्वरूप क्या होगा, इसके नियम क्या होंगे और इसे लागू करने का तरीका क्या रहेगा, यह अभी स्पष्ट होना बाकी है.
सरकार का बयान: अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास ने कहा कि इस पहल को लेकर अभी तक किसी विशेष समुदाय की ओर से विरोध सामने नहीं आया है. उन्होंने UCC लागू किए जाने का उदाहरण देते हुए कहा कि उस समय भी विरोध की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.
खजान दास, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री, उत्तराखंड-
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड देश का पहला राज्य बना जहां UCC लागू किया गया. गुजरात, असम, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में भी इस दिशा में काम हो रहा है.
– खजान दास, अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री, उत्तराखंड –
काजी-मौलवी का पंजीकरण और निकाह में गवाहों की जानकारी पर जोर: उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स का कहना है कि राज्य में UCC लागू हुए करीब डेढ़ साल हो चुका है और लोग इसे अपना रहे हैं. अब निकाहनामे के नियमों में भी बदलाव की जरूरत है, ताकि विवाह से जुड़े दस्तावेज और प्रक्रिया नई व्यवस्था के अनुरूप हों.
निकाहनामे के नए ड्राफ्ट में कई बदलाव किए गए.
काजी या मौलवी को दी जाएगी विशिष्ट पहचान संख्या: उनका कहना है कि निकाह कराने वाले काजी या मौलवी की पहचान दर्ज होनी चाहिए और निकाह के दौरान गवाहों की जानकारी भी स्पष्ट रूप से दर्ज की जानी चाहिए. शादाब शम्स के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था में निकाह कराने वाले काजी या मौलवी को एक विशिष्ट पहचान संख्या यानी UID दिए जाने की बात है.
निकाह के दौरान गवाहों के आधार कार्ड और पते का विवरण दर्ज करने की व्यवस्था भी बनाई जा सकती है. इससे निकाह से जुड़े रिकॉर्ड को व्यवस्थित रखने और किसी तरह की धोखाधड़ी की आशंका कम करने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही निकाहनामे को UCC की व्यवस्था से जोड़ने और विवाह प्रमाण-पत्र हासिल करने की प्रक्रिया को आसान बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है.


कानून का उद्देश्य परिवारों को टूटने से बचाना: शादाब शम्स ने तीन तलाक पर रोक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कानून का उद्देश्य परिवारों को टूटने से बचाना और लोगों को अपने रिश्ते बनाए रखने के लिए प्रेरित करना है. शादाब शम्स ने हलाला और इद्दत जैसे मुद्दों पर भी बात की. उन्होंने कहा कि महिलाओं के मानसिक और शारीरिक शोषण से जुड़ी शिकायतों को रोकने के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी किए जाएंगे. इद्दत के नाम पर महिलाओं पर जबरदस्ती नहीं होनी चाहिए.
UCC के बाद निकाहनामे की बारी
UCC में बेटियों और बेटों को संपत्ति में समान अधिकार दिए गए: उन्होंने यह भी कहा कि UCC में बेटियों और बेटों को संपत्ति में समान अधिकार दिए गए हैं, जिससे महिलाओं को मजबूती मिलेगी. हालांकि, हेल्पलाइन और निकाहनामे से जुड़ी नई व्यवस्थाओं के औपचारिक नियम और उनकी कानूनी स्थिति सामने आने के बाद ही इनके लागू होने की पूरी तस्वीर साफ होगी.
पहल किसी के खिलाफ नहीं, UCC पोर्टल से जुड़ सकता है निकाहनामा: वक्फ बोर्ड के अधिवक्ता एससी बिरमानी इस पूरी पहल के कानूनी पहलुओं को देख रहे हैं. उनका कहना है कि वक्फ बोर्ड समाज और सरकार के बीच एक सेतु की तरह काम कर रहा है.
इस पहल का मकसद किसी समुदाय या व्यक्ति का विरोध करना नहीं, बल्कि समाज में मौजूद बुराइयों को दूर करना और निकाह से जुड़ी प्रक्रिया को बेहतर बनाना है. आने वाले समय में लोग इस व्यवस्था की उपयोगिता को समझेंगे और इसकी सराहना भी करेंगे.


वहीं, इस्लामिक जानकार और पत्रकार मोहम्मद शाहनज़र का कहना है कि मुस्लिम समाज में निकाह को धार्मिक परंपराओं से जुड़ा मामला माना जाता है. जैसे दूसरे धर्मों में विवाह अपने-अपने रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न होते हैं, उसी तरह मुस्लिम समाज में भी निकाह की अपनी प्रक्रिया है.
उन्होंने बताया कि मस्जिदों में निकाह का रजिस्टर पहले से रखा जाता है. इसमें दूल्हा-दुल्हन का नाम, उम्र, माता-पिता की जानकारी, गवाहों के हस्ताक्षर और निकाह कराने वाले मौलवी का विवरण दर्ज होता है. इसकी प्रतियां दोनों पक्षों को दी जाती हैं और जरूरत पड़ने पर इन्हें कानूनी कार्रवाही में भी प्रस्तुत किया जाता है.
-डॉ. शालिनी अली, राष्ट्रीय संयोजिका, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच-
यदि सरकार इस प्रक्रिया को और व्यवस्थित करती है और काजियों को आधिकारिक मान्यता देने की व्यवस्था बनाती है, तो इससे निकाह कराने वाले लोगों को भी फायदा हो सकता है. उन्हें सरकारी स्तर पर पहचान मिल सकती है और उनके काम को एक औपचारिक व्यवस्था से जोड़ा जा सकता है. ऐसे में नई व्यवस्था बनाते समय निकाह के मौजूदा रिकॉर्ड, कानूनी जरूरतों और लोगों की व्यावहारिक परेशानियों को भी ध्यान में रखना जरूरी होगा.
– मो. शाहनज़र, इस्लामिक जानकर और पत्रकार –
मुस्लिम राष्ट्रीय मंच ने किया स्वागत, महिलाओं के अधिकारों पर दिया जोर: मुस्लिम राष्ट्रीय मंच की राष्ट्रीय संयोजिका डॉ. शालिनी अली ने उत्तराखंड वक्फ बोर्ड की इस पहल का स्वागत किया है. उनका कहना है कि देशभर में मुस्लिम महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ऐसे प्रयास जरूरी हैं. उन्होंने कहा कि UCC लागू होने से आम नागरिकों के साथ-साथ महिलाओं को भी अपने अधिकारों के मामले में मजबूती मिली है.
निकाहनामे को बेहतर बनाने की व्यवस्था से लड़कियों को विवाह से पहले अपनी बात रखने का अवसर मिल सकता है. इसमें लड़की निकाह से पहले अपनी शर्तें रख सकती है. वह उन शर्तों को पढ़ सकती है, उनमें बदलाव कर सकती है और अपनी सहमति के बाद निकाह कबूल कर सकती है. इस तरह की व्यवस्था से लड़कियों में अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और शादी के बाद की जिंदगी को लेकर उनकी स्थिति मजबूत हो सकती है.
– डॉ. शालिनी अली, राष्ट्रीय संयोजिका, मुस्लिम राष्ट्रीय मंच –
उन्होंने कहा कि बेटियों को अपने भविष्य से जुड़े फैसलों में अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिलना चाहिए. हालांकि, प्रस्तावित निकाहनामे में किन शर्तों को शामिल किया जा सकेगा, उनकी कानूनी मान्यता क्या होगी और नई व्यवस्था मौजूदा धार्मिक व कानूनी प्रक्रियाओं के साथ किस तरह काम करेगी, इन सवालों पर अभी और स्पष्टता की जरूरत है. सरकार की ओर से अंतिम नियम सामने आने के बाद ही यह साफ होगा कि निकाहनामे में बदलाव किस तरह लागू किए जाएंगे.
चुनाव से पहले क्यों अहम है यह पहल: उत्तराखंड में निकाहनामे को लेकर शुरू हुई यह कवायद केवल दस्तावेजों में बदलाव तक सीमित नहीं है. UCC लागू करने के बाद धामी सरकार अब उससे जुड़ी व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रही है. आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भी यह मुद्दा अहम माना जा रहा है, क्योंकि इसका सीधा संबंध मुस्लिम समाज, महिलाओं के अधिकारों, धार्मिक परंपराओं और विवाह से जुड़े कानूनी नियमों से है. सरकार और वक्फ बोर्ड इसे निकाह की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने, काजी-मौलवियों की पहचान तय करने और महिलाओं के अधिकारों को मजबूत करने की पहल के रूप में पेश कर रहे हैं.
वहीं, इस व्यवस्था की सफलता इस बात पर भी निर्भर करेगी कि नए नियम कितने स्पष्ट होते हैं और आम लोगों के लिए उनका पालन करना कितना आसान रहता है. फिलहाल, खजान दास के मुताबिक अगले दो से तीन महीने में प्रक्रिया से जुड़ी तस्वीर सामने आ सकती है. इसके बाद ही पता चलेगा कि निकाहनामे का नया स्वरूप क्या होगा और इसे जमीन पर उतारने के लिए सरकार किस तरह आगे बढ़ेगी.
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उत्तराखंड निकाहनामे का नया ड्राफ्ट
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