राहुल गांधी के “छात्रों की गूंज” का “झूठ की गूंज ” पर हाथों-हाथ फैक्ट-चेक,पकडे पांच झूठ
झूठ, झूठ, झूठ… राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में 5 सवाल जिसपर मचा घमासान, क्या है इनकी सच्चाई?
Rahul Gandhi Indore Chhatron Ki Goonj: मध्य प्रदेश के इंदौर में राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दावों पर ‘झूठ की गूंज’ नाम के एक एक्स पेज ने तीखा फैक्ट-चेक किया. MPPSC के 87:13 फॉर्मूले, 2019 के ओबीसी आरक्षण अध्यादेश, अडानी के साथ कांग्रेस शासित राज्यों के व्यापार, एनएसयूआई नेता को सामान्य छात्र बताने और एकलव्य स्कूलों के आंकड़ों को आधार बनाकर राहुल के पांचों दावों पर एक एक कर सफाई दी गई.
इंदौर 19 सितंबर 2026। मध्य प्रदेश के इंदौर में कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान दिए गए बयानों पर सियासी पारा पूरी तरह हाई हो चुका है. यहां छात्रों के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल बड़े-बड़े दावे कर रहे थे. वहीं दूसरी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक्टिव ‘झूठ की गूंज’ नामक एक पेज पर राहुल गांधी के भाषण में किए गए दावों की एक-एक कर धज्जियां उड़ाई जा रही थी. राहुल के दावों की परत उधेड़ते हुए उनका कड़ा फैक्ट-चेक इस पेज के जरिए किया गया. आइए सिलसिलेवार तरीके से जानते हैं उनके 5 चर्चित दावे और उनकी जमीनी हकीकत क्या है.
राहुल गांधी का प्रोग्राम इंदौर में हुआ.
1. MPPSC भर्तियों और 87:13 फॉर्मूले पर दावा
• राहुल गांधी का दावा: राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि पिछले आठ वर्षों में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की सभी भर्तियों में 13% पदों को होल्ड पर रखा गया है, जिससे 4.87 लाख पद पेंडिंग पड़े हैं.
• फैक्ट-चेक: इस एक्स पेज ने दावे को पूरी तरह गलत बताया. कहा गया कि मध्य प्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग का 87:13 का फॉर्मूला पिछले आठ साल से नहीं, बल्कि 29 सितंबर 2022 यानी महज चार साल पहले आया था. यह विवाद कांग्रेस के कार्यकाल में 2019 में 27% ओबीसी आरक्षण बढ़ाने से शुरू हुआ था. नियुक्तियां 87% पदों पर जारी रहीं और केवल लगभग 10,000 पद ही इस कानूनी पेच से प्रभावित हुए हैं, न कि 4.87 लाख पद.

2. ओबीसी आरक्षण और 2019 का अध्यादेश
• राहुल गांधी का दावा: मार्च 2019 में कांग्रेस सरकार ने ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% किया था, लेकिन बीजेपी सरकार ने कोर्ट का हवाला देकर इसे रोक दिया.
• फैक्ट-चेक: झूठ की गूंज नामक इस पेज की तरफ से दावा किया गया कि आरक्षण पर रोक भाजपा सरकार ने नहीं बल्कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कमलनाथ सरकार के कार्यकाल में ही 19 मार्च 2019 को लगा दी थी. सरकार ने बिना कानूनी पहलुओं को समझे जल्दबाजी में यह नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसके बाद कोर्ट ने कॉलेज एडमिशन में रोक लगाई. बाद में 2021 में भाजपा सरकार ने अन्य भर्तियों में इसे लागू भी किया.



3. अडानी समूह के निवेश और कांग्रेस शासित राज्य
• राहुल गांधी का दावा: अडानी समूह को मिलने वाले सरकारी ठेकों और पैसों को सीधे तौर पर केंद्र सरकार के साथ जोड़ा जाता है.
• फैक्ट-चेक: झूठ की गूंज ने सवाल उठाया कि अगर अडानी के हर डील में सरकार की मिलीभगत है तो कांग्रेस शासित राज्य क्यों उनके साथ बिजनेस कर रहे हैं? कर्नाटक में कांग्रेस सरकार ने बेंगलुरु टनल-रोड प्रोजेक्ट में अडानी को सबसे कम बोली लगाने वाला माना है. इसके अलावा, तेलंगाना में कांग्रेस सरकार ने 12,400 करोड़ रुपये के एमओयू साइन किए हैं और केरल में भी पोर्ट प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है.
4 -असली छात्र बनाम राजनीतिक चेहरे
छात• राहुल गांधी का दावा: कार्यक्रम में असली छात्रों को मंच पर लाकर उनकी समस्याएं दिखाने का दावा किया गया.
• फैक्ट-चेक: इस एक्स पेज की तरफ से जब छानबीन की गई तो पता चला कि छात्रों की आवाज बनकर सामने आए तनय शर्मा, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के छात्र होने के साथ-साथ एनएसयूआई (NSUI) के पूर्व राज्य प्रवक्ता भी रह चुके हैं. उन्हें पूरी तरह apolitical (गैर-राजनीतिक) छात्र के रूप में पेश करना सच्चाई से कोसों दूर था.
- 5. आदिवासी शिक्षा और एकलव्य स्कूलों का सच
• राहुल गांधी का दावा: मोदी सरकार आदिवासियों को शिक्षा से दूर रखना चाहती है और उन्हें केवल अपने पक्ष का समर्थक बनाना चाहती है.
• फैक्ट-चेक: झूठ की गूंज पेज की तरफ से कहा गया कि देश में एकलव्य मॉडल रेजिडेंशियल स्कूलों (EMRS) की संख्या 2014-15 में 129 थी, जो बढ़कर अगस्त 2026 तक 511 हो गई है. इन स्कूलों में छात्रों की संख्या 40,000 से बढ़कर लगभग 1.5 लाख तक पहुंच चुकी है. इसके अलावा, प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना से लाखों आदिवासी छात्र लाभान्वित हो रहे हैं.
त्वरित सवाल- जवाब
मध्य प्रदेश में MPPSC भर्तियों और 87:13 फॉर्मूले पर राहुल गांधी के दावे की क्या सच्चाई है?
फैक्ट-चेक के अनुसार, मध्य प्रदेश सामान्य प्रशासन विभाग का 87:13 फॉर्मूला आठ साल पहले नहीं बल्कि 29 सितंबर 2022 को लागू हुआ था। इस कानूनी पेच से केवल 10,000 पद प्रभावित हुए हैं, न कि राहुल गांधी द्वारा बताए गए 4.87 लाख पद।
इंदौर के कार्यक्रम में राहुल गांधी के उठाए गए ओबीसी आरक्षण विषय पर क्या तथ्य सामने आए?
दावा किया गया था कि भाजपा सरकार ने ओबीसी आरक्षण रोका है, लेकिन वास्तव में 19 मार्च 2019 को कमलनाथ सरकार के कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने कानूनी पहलुओं को समझे बिना जल्दबाजी में जारी अधिसूचना पर रोक लगाई थी।
राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में मंच पर नजर आए तनय शर्मा की वास्तविक पहचान क्या थी?
जांच में पता चला कि छात्रों की आवाज के रूप में मंच पर पेश किए गए तनय शर्मा माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय के छात्र होने के साथ-साथ एनएसयूआई के पूर्व राज्य प्रवक्ता भी हैं, जिन्हें एक पूरी तरह से गैर-राजनीतिक छात्र बताया गया था।
‘सिस्टम को स्टूडेंट नहीं, अंधभक्त चाहिए…’, इंदौर से राहुल गांधी का सरकार पर बड़ा हमला
इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी ने शिक्षा, रोजगार, पेपर लीक और छात्रों के सवालों को लेकर अपनी बात रखी. कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के छात्रों ने भी भर्ती, हॉस्टल और पढ़ाई से जुड़ी समस्याएं सामने रखीं.
‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में राहुल गांधी. (Photo: X/ @INCIndia)
मध्य प्रदेश के इंदौर में शनिवार को ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम हुआ. छात्रों से बात करते हुए राहुल गांधी ने सवाल पूछने की आदत, शिक्षा व्यवस्था, बेरोजगारी, पेपर लीक, भर्ती और देश की संस्थाओं के कामकाज पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि ‘सिस्टम को स्टूडेंट नहीं, अंधभक्त चाहिए’. राहुल गांधी का कहना था कि छात्र जिज्ञासु होता है, वह सवाल करता है, वजह जानना चाहता है. इसी वजह से वह सिस्टम से जवाब मांगता है.
राहुल गांधी ने कहा कि छात्र किसी बात को सिर्फ इसलिए स्वीकार नहीं करता कि उसे ऊपर से ऐसा बता दिया गया है. वह पूछता है कि किसी व्यक्ति को किसी बड़ी संस्था की जिम्मेदारी कैसे मिल गई. इसी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह के बेटे का जिक्र किया. उन्होंने सवाल किया कि वह क्रिकेट एसोसिएशन के चेयरमैन कैसे बने. राहुल गांधी ने इसे मेरिट और योग्यता के सवाल से जोड़ते हुए कहा कि छात्रों को ऐसे मामलों पर सवाल पूछना चाहिए.
भाषण में देश के बड़े कारोबार, न्यायपालिका, चुनाव आयोग और दूसरी संस्थाओं का भी जिक्र आया. उनका तर्क था कि छात्र यह पूछता है कि संस्थाएं अपना काम ठीक से क्यों नहीं कर रही हैं. उनके मुताबिक, यही सवाल करने की आदत स्टूडेंट को अलग बनाती है. वह किसी बात को आंख बंद करके मानने की जगह उसके पीछे की वजह समझना चाहता है.
‘स्टूडेंट निडर होता है, सवाल करता है’
राहुल गांधी ने छात्र और ‘अंधभक्त’ के बीच का फर्क समझाने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि स्टूडेंट के भीतर जिज्ञासा होती है. वह दूसरों की बात सुनता है, अपनी राय रखता है, जरूरत पड़ने पर सवाल करता है और नई जानकारी मिलने पर अपनी सोच पर भी विचार कर सकता है.
इसके उलट ‘अंधभक्त’ शब्द का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने कहा कि ऐसी सोच सवाल करने से बचती है. राहुल गांधी ने नफरत, अहंकार और डर का भी जिक्र किया. महिलाओं के सम्मान की बात करते हुए उनका कहना था कि स्टूडेंट महिलाओं की इज्जत करता है, जबकि अंधभक्त वाली सोच महिलाओं के अपमान तक पहुंच सकती है.
पेपर लीक से लेकर नौकरी तक सवाल
शिक्षा व्यवस्था पर बात करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि छात्र यह जानना चाहता है कि स्कूल-कॉलेजों की हालत खराब क्यों है, इंफ्रास्ट्रक्चर ठीक क्यों नहीं है, पेपर लीक क्यों हो रहे हैं और युवाओं को रोजगार क्यों नहीं मिल रहा है.
शिक्षा को उन्होंने किसी एहसान की तरह नहीं, बल्कि हर छात्र का हक बताया. स्कूल से कॉलेज, यूनिवर्सिटी से रोजगार तक की पूरी कड़ी मजबूत होने की जरूरत बताई गई. भाषण में शिक्षा के बजट, छात्रवृत्ति और शिक्षकों के खाली पदों का भी जिक्र हुआ. दावा किया गया कि इन कमियों का सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है.
मध्य प्रदेश के छात्रों ने भी बताई अपनी परेशानी
कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए छात्रों ने अपनी समस्याएं सामने रखीं. धार के एक छात्र ने आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं, जमीन के पट्टों, खाली सरकारी पदों और हॉस्टल की स्थिति का मुद्दा उठाया. उसने खरगोन में पट्टे रद्द होने की बात कही, वहीं बालाघाट में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी का सवाल भी रखा.
देवास से आए एक छात्र ने MPPSC और भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी समस्याएं बताईं. उसने दावा किया कि भर्ती के मुद्दे उठाने वाले छात्रों पर केस किए गए और जेल भी भेजा गया. उसने पेपर लीक से जुड़ी शिकायतें भी सामने रखीं.
छात्रों ने इंदौर में पढ़ाई करने वाले युवाओं की दूसरी परेशानियां भी बताईं. इनमें कमरों का बढ़ता किराया, सरकारी हॉस्टल में सीटों की कमी, रहने की सुविधाएं और पढ़ाई का बढ़ता खर्च शामिल है.
यूनिवर्सिटी और पढ़ाई की सुविधाओं पर भी सवाल
माखनलाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी के एक छात्र ने मास्टर्स में दाखिले को लेकर शिकायत रखी. उसका आरोप था कि अच्छी ग्रेड होने के बावजूद उसे प्रवेश नहीं मिला. इंटरव्यू की स्कोर शीट मांगने पर उसे बताया गया कि ऐसी स्कोर शीट रखी ही नहीं गई है.
एक कृषि छात्र ने कॉलेज में स्थायी शिक्षकों की कमी, क्लासरूम और लड़कियों के लिए जरूरी सुविधाओं का विषय उठाया. एक छात्रा ने छात्रवृत्ति, आवास की मदद और सरकारी हॉस्टल में सीट नहीं मिलने की परेशानी बताई.
‘स्टूडेंट देश की नींव है’
अपने संबोधन के आखिर में राहुल गांधी ने छात्रों को देश की नींव बताया. उन्होंने कहा कि शिक्षा कोई सुविधा नहीं, बल्कि हर छात्र का अधिकार है. उनके मुताबिक, स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी और फिर रोजगार तक का रास्ता मजबूत करना सरकार की जिम्मेदारी है.
इंदौर के इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने छात्रों के सवालों को शिक्षा, रोजगार और संस्थाओं के कामकाज से जोड़कर अपनी बात रखी. वहीं मध्य प्रदेश के छात्रों ने भी अपने-अपने इलाकों की समस्याएं सामने रखीं.
‘राहुल गांधी का कार्यक्रम झूठ फैलाने की कवायद’
राहुल गांधी के इंदौर कार्यक्रम पर मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पलटवार किया. उन्होंने आरोप लगाया कि ‘छात्रों की गूंज’ के नाम पर सही मायने में छात्रों से सवाल-जवाब करने के बजाय कांग्रेस के एजेंडे को आगे बढ़ाया गया. उनका कहना था कि नेता विपक्ष जैसे जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को युवाओं के सामने तथ्यों के साथ बात रखनी चाहिए. मोहन यादव ने राहुल गांधी के कार्यक्रम को लेकर कहा कि इसमें लोगों को गुमराह करने वाली बातें की गईं.
स्कूल शिक्षा को लेकर मोहन यादव ने कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि 2002-03 में स्कूलों का ड्रॉपआउट रेट 16 फीसदी था, जबकि अब राज्य में जीरो ड्रॉपआउट की स्थिति हासिल करने का दावा किया गया है. शिक्षा बजट का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 2002-03 तक यह करीब 2,000 करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 38,658 करोड़ रुपये हो गया है. उन्होंने सवाल उठाया कि कांग्रेस के शासन में छात्रों को यूनिफॉर्म, साइकिल, स्कूटर या लैपटॉप जैसी सुविधाएं कितनी दी गईं. मोहन यादव ने कहा कि उनकी सरकार बच्चों की पढ़ाई को लेकर ऐसी योजनाओं पर जोर दे रही है.


