राम मंदिर चढ़ावा मामला:आठ जनों पर छह धाराओं में मुकदमा,दो बंदी
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में मुकदमा… 2 बंदी; देखें पुलिस प्राथमिकी में किस-किसका नाम?
प्राथमिकी राम मंदिर ट्रस्टी कृष्ण मोहन ने कराई है.
अयोध्या 25 जून 2026 : अयोध्या के राम मंदिर के चढ़ावा चोरी मामले में अब ताबड़तोड़ कार्रवाई शुरू हो गयी है. गुरुवार को ही इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट की शिकायत पर चोरों के खिलाफ पहली पुलिस प्राथमिकी हुई और अब आरोपितों की पकड़ भी शुरू हो गई है. पुलिस ने अब तक दो आरोपित पकड़े हैं .
चढ़ावा चोरी मामले में ट्रस्ट की ओर से कराई गई प्राथमिकी में आठ आरोपित नामांकित है. इनमें से दो आरोपित अनुकल्प मिश्रा और लवकुश मिश्रा बंदी हैं. जबकि, ट्रस्ट महासचिव चंपत राय के ड्राइवर टिन्नू यादव भागा हुआ है. बाकी आरोपितों की धरपकड़ को भागदौड हो रही है.
सूत्रों के अनुसार, CCTV में कुछ चोर चढ़ावे से चोरी करते दिखे थे, जिन पर मुकदमा कराया गया है. इस पूरे मामले में यह पहली पुलिस प्राथमिकी है. यह प्राथमिकी ऐसे समय हुई है, जब राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला गरमाया हुआ है और हाल में ही SIT ने इस मामले में शुरुआती जांच रिपोर्ट सौंपी है.
8 नामांकित आरोपितों पर पुलिस प्राथमिकी
अब सूत्रों ने बताया कि CCTV में चोरी करते दिखे और उनकी सहायता करने वालों पर पुलिस प्राथमिकी हुई है . प्राथमिकी में आठ नामांकित आरोपित हैं, जबकि कुछ अज्ञात लोगों को भी आरोपित बनाया गया है. प्राथमिकी में रमाकांत यादव उर्फ टिन्नू यादव, लव कुश और अनुकल्प मिश्रा का नाम भी है. ये सारे नाम वे हैं, जिनका सीधे तौर पर कैश से लेना-देना था. हालांकि, इसमें चंपत राय का नाम नहीं है.
प्राथमिकी में किस-किसका नाम?
1-रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव
2-लवकुश मिश्रा, (गिरफ्तार)
3-अनुकल्प मिश्रा, (गिरफ्तार)
4-अविनाश शुक्ला
5-मनीष यादव
6-रमाशंकर मिश्र
7-सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
8-करुणेश पांडे
जानिए कौन हैं वादी ट्रस्ट सदस्य श्री कृष्ण मोहन?
बता दें कि राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के अवकाश प्राप्त अधिकारी हैं, जो अब समाजसेवी संस्थाओं से जुड़े हुए हैं. पिछले साल ही उन्हें दिवंगत कामेश्वर चौपाल की जगह ट्रस्ट का सदस्य नामित किया गया था. वह चौपाल की तरह अनुसूचित जाति से आते हैं. कृष्ण मोहन ने साल 1970 में लखनऊ यूनिवर्सिटी से एम-एससी की है और पांच से छह सालों तक वह एटामिक एनर्जी पर शोध की दिशा में सक्रिय रहे.
RSS से भी जुड़े हैं कृष्ण मोहन
साल 1978 में उन्हें भारतीय वन सेवा में महाराष्ट्र काडर को चुना गया था. साल 2012 में सेवानिवृत्त के बाद वह हरदोई लौटे और तभी से समाजसेवा कार्य में जुड़ गए. बता दें कि कृष्ण मोहन राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) से संबद्ध हैं. श्रीराम जन्मभूमि के सदस्य कृष्ण मोहन मूल रूप से उत्तर प्रदेश के हरदोई के ही हैं. अब राम मंदिर चंदा चोरी में FIR के बाद उनकी चर्चा फिर से तेज हो गई है।
6 धाराओं में प्राथमिकी
बताया जा रहा है कि यह प्राथमिकी श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर हुई है. बताया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) में मुकदमा लिखा गया है.
1-धारा 3(5): जब कई लोग मिलकर कोई आपराधिक काम करते हैं और उनका उद्देश्य एक ही होता है, तो उस काम के लिए हर व्यक्ति वैसे ही जिम्मेदार होता है जैसे कि उसने वह काम अकेले किया हो.
2-धारा 61: जब दो या उससे ज्यादा लोग किसी विधि विरुद्ध काम करने या करवाने को, या किसी ऐसे काम को विधि विरुद्ध तरीकों से करने या करवाने को, जो खुद विधि विरुद्ध नहीं है, एक सामान्य उद्देश्य के साथ सहमत होते हैं, तो ऐसे समझौते को आपराधिक षड्यंत्र कहा जाता है.
3- धारा 306: जो कोई व्यक्ति क्लर्क या नौकर है, या क्लर्क या नौकर के रूप में काम कर रहा है, और अपने मालिक या नियोक्ता के अधिकार में मौजूद किसी संपत्ति की चोरी करता है, तो उसे सात साल तक की किसी भी तरह की जेल और अर्थदण्ड हो सकता है.
4-धारा 316 (5): जो कोई भी, जिसे किसी भी तरह से कोई संपत्ति सौंपी गई हो, या जिसे किसी संपत्ति पर अधिकार दिया गया हो- चाहे वह सरकारी कर्मचारी के तौर पर हो या बैंकर, व्यापारी, फैक्टर, ब्रोकर, वकील या एजेंट के तौर पर अपने काम के दौरान- और वह उस संपत्ति के मामले में विश्वासघात करता है, तो उसे आजीवन कारावास या दस साल तक की किसी भी तरह की जेल और अर्थदण्ड हो सकता है.
5- धारा 317 (4): जो कोई भी आदतन ऐसी संपत्ति प्राप्त करता है या उसका लेन-देन करता है, जिसके बारे में उसे पता हो या यह मानने का कारण हो कि वह चोरी की संपत्ति है, तो उसे आजीवन कारावास या किसी भी प्रकार के कारावास की सजा दी जाएगी, जिसकी अवधि दस साल तक हो सकती है, और उस पर अर्थदण्ड भी लगाया जाएगा.
6- धारा 317 (5): जो कोई भी जानबूझकर ऐसी संपत्ति को छिपाने, ठिकाने लगाने या हटाने में मदद करता है, जिसके बारे में उसे पता हो या यह मानने का कारण हो कि वह चोरी की संपत्ति है, तो उसे किसी भी तरह की जेल हो सकती है जो तीन साल तक बढ़ सकती है, या अर्थदण्ड हो सकता है, या दोनों हो सकते हैं.
दो दिन पहले SIT ने सौंपी थी रिपोर्ट
राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में कथित अनियमितताओं और गबन के आरोप सामने आने के बाद 13 जून को सरकार ने तीन सदस्यों की SIT बनाई थी.
लगातार 6 दिन तक SIT ने मंदिर प्रवास किया था और कई लोगों से पूछताछ की थी. जांच में SIT ने मंदिर प्रशासन, सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मियों, ट्रस्ट से संबद्ध लोगों और अन्य संबंधित व्यक्तियों 60+ लोगों से पूछताछ की. टीम ने चढ़ावे की गिनती, उसके रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था और कथित अनियमितताओं से जुड़े विभिन्न पक्षों की जांच की.
SIT के अध्यक्ष विजय विश्वास पंत ने बताया कि यह गोपनीय जांच है और अभी केवल प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी गई है. उन्होंने साफ किया कि जांच अभी जारी है और कई बिंदुओं पर पड़ताल हो रही है. अंतिम रिपोर्ट तैयार होने के बाद उसे सरकार को सौंपा जाएगा.
राम मंदिर में बदली व्यवस्था
SIT जांच के बाद मंदिर परिसर में दान राशि की काउंटिंग और कलेक्शन से जुड़े कई परिवर्तन हुए हैं. जिन कर्मचारियों पर पहले यह जिम्मेदारी थी, उन्हें अभी दूसरे कामों में लगाया गया है.
अब दान पत्र के नकद गणना में मंदिर परिसर में कार्यरत विश्वसनीय कर्मचारियों के साथ-साथ बैंक के नए कर्मचारी भी शामिल किये गये हैं, ताकि प्रक्रिया को और ज्यादा पारदर्शी बनाया जा सके. पैसों की गिनती प्रक्रिया पर निगरानी को नया CCTV सिस्टम लगाया गया है. सभी नकदी गणना क्षेत्रों की कैमरा निगरानी हो रही है और इसको अलग नियन्त्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है.
दान राशि की गिनती और गणना कक्ष में प्रवेश को लेकर अब नियम और कड़े कर दिए गए हैं. पूरी तलाशी के बाद ही कर्मचारियों को गणना कक्ष में प्रवेश दिया जाएगा. गणना कक्ष से बाहर निकलने के समय भी शत-प्रतिशत जांच व्यवस्था की गई है.
सूत्रों के अनुसार, अब बैंक में नकद जमा करते समय तीन व्यक्ति क्रॉस वेरिफिकेशन करेंगे. सभी के हस्ताक्षर भी अनिवार्य किए हैं, ताकि प्रक्रिया में किसी तरह की गड़बड़ी की आशंका न रहे.

