राम मंदिर चंदा चोरी SIT की जांच पूरी, चंपत राय का जाना तय

राम मंदिर चंदा चोरी मामला: SIT की जांच पूरी, सचिव से 3 घंटे बंद कमरे में पूछताछ
अयोध्या राम मंदिर चंदे में कथित हेराफेरी के मामले की जांच जारी है. बताया जा रहा है कि इस मामले में एसआईटी की जांच का दायरा केवल फंड की गड़बड़ी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि मंदिर ट्रस्ट की खरीदी जमीन की भी जांच हो रही है.

एसआईटी जांच से जुड़ीं जानकारियां रोजाना मुख्यमंत्री कार्यालय को भी भेज रही है.

लखनऊ,21 जून 2026,अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे में कथित हेरफेर के मामले में गठित एसआईटी ने अपनी जांच पूरी कर ली है. सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने लगभग 140 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट तैयार की है, जिसमें जुटाए गए साक्ष्यों और तथ्यों का विस्तार से उल्लेख किया गया है.

जांच से जुड़े करीब 20 सदस्य अभी भी मंदिर परिसर में मौजूद हैं और अंतिम प्रक्रियाओं में जुटे हुए हैं. एसआईटी अभी इनवेस्टिगेशन जारी रखेगी.

सूत्रों के मुताबिक राम मंदिर के सचिव से भी बंद कमरे में करीब तीन घंटे तक पूछताछ की गई. जांच रिपोर्ट में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं और जिम्मेदारियों को चिन्हित किए जाने की बात सामने आ रही है.

राम मंदिर में चढ़ावा चोरी को लेकर CM योगी सख्त, विपक्ष पर साधा निशाना
सूत्रों का दावा है कि एसआईटी रिपोर्ट के आधार पर कई लोगों पर कार्रवाई की गाज गिर सकती है. मंदिर से जुड़े कुछ सेवादारों की सेवाएं समाप्त किए जाने की संभावना भी जताई जा रही है.

वहीं, स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने ट्रस्ट के पदाधिकारियों और मंदिर के अधिकारियों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश दिया है. मंदिर से जुड़े सूत्रों ने यह जानकारी दी है.

सूत्रों का कहना है कि एसआईटी की जांच सिर्फ फंड की कथित हेराफेरी तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अलग-अलग फेज में मंदिर ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई जमीन और मंदिर के लिए निर्माण सामग्री की खरीद को भी शामिल किया गया है. ट्रस्ट के कामकाज के तौर-तरीकों पर सवाल उठाए गए हैं.

आरोप लगे थे कि मंदिर ट्रस्ट ने मार्केट रेट से ज्यादा कीमत पर जमीनें खरीदी थीं. इस विषय को समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी समेत कई अलग-अलग राजनीतिक दलों ने उठाया था.

अयोध्या राम मंदिर में मिले दान के गलत इस्तेमाल के आरोपों के बाद,मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को एसआईटी गठित की थी. एसआईटी में लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत,पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं.

राम मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था और भीड़ में कोई कमी नहीं

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दान राशि को लेकर उठे विवाद का मामला अब देशभर में चर्चा का विषय बन चुका है. करोड़ों राम भक्तों की नजर इस पूरे मामले में चल रही एसआईटी जांच की रिपोर्ट पर टिकी हुई है. जांच का आज सातवां दिन है, वहीं मंदिर परिसर में टीम लगातार मामले से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही है.

एसआईटी जांच बीच भी राम मंदिर में श्रद्धालुओं की आस्था और भीड़ में कोई कमी देखने को नहीं मिल रही . बड़ी संख्या में भक्त रामलला के दर्शन को पहुंच रहे हैं. हालांकि, दान काउंटर पर पहले की तुलना में सन्नाटा जरूर दिखाई दे रहा है.

वहीं दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं का कहना है कि विवाद या जांच से उनकी आस्था प्रभावित नहीं हुई है। वे पहले भी दान कर रहे थे और आगे भी करते रहेंगे, क्योंकि उनकी श्रद्धा भगवान राम के प्रति है.

अयोध्या के संतों का भी कहना है कि कुछ लोग इस मामले को लेकर भ्रम फैला रहे हैं. संतों का मानना है कि राम जन्मभूमि पर श्रद्धालुओं की आस्था मजबूत है और भक्तों के आने-जाने या दान करने में कोई बड़ी कमी नहीं आई है.

चंपत राय ‘सबके निशाने पर’!  क्लीन चिट या भुगतेंगे राम मंदिर परिसर  चढ़ावा चोरी का परिणाम?
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोपों के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय सवालों के घेरे में हैं. मंदिर निर्माण में उनकी बड़ी भूमिका रही है, लेकिन अब चढ़ावे में कथित गड़बड़ियों की जांच चल रही है. अयोध्या के कई संत और राम मंदिर आंदोलन से जुड़े पुराने चेहरे भी खुलकर सवाल उठा रहे हैं. अब सबकी नजर एसआईटी की रिपोर्ट पर है.

राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बीच चंपत राय की भूमिका और भविष्य पर चर्चा बढ़ गई है
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव और नए राम मंदिर के सर्वेसर्वा चंपत राय सबके निशाने पर हैं. और निशाने पर होना लाजिमी भी है, क्योंकि अगर राम मंदिर को खड़ा कर बनवाने का श्रेय चंपत राय को मिला है, तो चढ़ावा चोरी में हुई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी भी उन्हीं की होगी.

यूं तो RSS और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े पूर्णकालिक प्रचारक चंपत राय बेहद सख्त और ईमानदार माने जाते रहे हैं, लेकिन जिद्दी और किसी की न सुनने वाले व्यक्ति की उनकी छवि ने उन्हें राम मंदिर से जुड़े एक अनकंप्रोमाइजिंग शख्स के तौर पर स्थापित कर दिया. राम मंदिर बनने से पहले तक चंपत राय मंदिर निर्माण के लिए समर्पित सबसे बड़े चेहरों में शामिल हो चुके थे.

जिन्होंने अपना पूरा जीवन मंदिर निर्माण के नाम कर दिया, उन्हें काम के प्रति समर्पित और अयोध्या का बड़ा जानकार भी माना गया. चूंकि कई दशकों से अयोध्या ही चंपत राय की कर्मभूमि रही है, ऐसे में अयोध्या के तमाम साधु-संतों, छावनियों, अखाड़ों और संत समाज से उनका अच्छा तालमेल बन गया था. लेकिन जब मंदिर निर्माण की बारी आई, तो चंपत राय ने अयोध्या के ज्यादातर साधु-संतों की बातों को नहीं माना. चाहे ट्रस्ट का गठन हो या मंदिर निर्माण, राम मंदिर आंदोलन से जुड़े कई नेताओं और संतों को राम जन्मभूमि ट्रस्ट और मंदिर निर्माण प्रक्रिया से दूर रखा गया.

राम मंदिर ट्रस्ट के गठन के समय से ही ज्यादातर साधु-संत और मंदिर आंदोलन से जुड़े पुराने लोग इस बात से नाराज थे कि मंदिर आंदोलन में जिन लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया,जिन्होंने लाठियां और गोलियां खाईं,जिन साधु-संतों,मठों और छावनियों ने राम मंदिर आंदोलन में अपनी भूमिका निभाई,उन्हें पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया.

जब राम जन्मभूमि ट्रस्ट का गठन हुआ, तो उसके अध्यक्ष छोटी छावनी के महंत नृत्य गोपाल दास जरूर बनाए गए, लेकिन उनकी भूमिका एक पदेन अध्यक्ष तक ही सीमित कर दी गई. सारी ताकत और अधिकार चंपत राय में निहित थे. अयोध्या के कई मठों के महंत राम जन्मभूमि ट्रस्ट बनने के बाद से ही चंपत राय से नाराज चल रहे थे, लेकिन चूंकि सरकार ने चंपत राय को काफी अधिकार दे रखे थे, इसलिए सभी चुप ही रहते थे.

कई मौके ऐसे आए जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नाराजगी भी दिखाई दी. खासकर धर्मध्वजा आरोहण के वक्त चंपत राय के काम करने के तरीके को लेकर सरकार की नाराजगी सामने आई थी.

ट्रस्ट में अध्यक्ष और कोषाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद मौजूद हैं. मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी भी ट्रस्ट में रहे. अयोध्या के डीएम भी इसके ट्रस्टी होते हैं. लेकिन कहा जाता है कि चंपत राय अकेले सब पर भारी थे. इसलिए ट्रस्ट के ज्यादातर सदस्यों ने मंदिर के कामकाज और फैसलों से अपनी दूरी बना ली थी.

अब जबकि चढ़ावे में चोरी का मामला तूल पकड़ चुका है और चंपत राय पर सवाल उठने लगे हैं, उन्हें कटघरे में खड़ा किया जाने लगा है, तो वर्षों से नाराज पुराने आंदोलन से जुड़े बड़े चेहरे, संत और महंत भी उनके खिलाफ खुलकर सामने आ गए हैं. चाहे विनय कटियार हों, संतोष दुबे हों या छोटी छावनी के महंत कमल नयन दास, सभी ने चंपत राय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया.

विनय कटियार ने तो साफ कह दिया था कि चंपत राय ने अपराध किया है और वह जल्द ही चढ़ावे में हुई चोरी का खुलासा करेंगे. हालांकि बाद में उन्होंने यू-टर्न ले लिया और चुप हो गए.

सभी को मालूम है कि चंपत राय अक्खड़, जिद्दी और किसी की न सुनने वाले हो सकते हैं, लेकिन भ्रष्ट नहीं हो सकते. क्योंकि दशकों से राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों ने उनका सादगी भरा जीवन देखा है, जो आज भी जारी है. लेकिन चढ़ावे में चोरी का मामला लोगों की आस्था से इस तरह जुड़ गया है कि लोग चंपत राय को क्लीन चिट देने को तैयार नहीं हैं.

वजह साफ है कि अब तक ट्रस्ट और पूरा राम मंदिर परिसर उनकी ही देखरेख में चलता रहा है. अगर उनकी जानकारी के बिना भी चढ़ावे में चोरी हुई, तो जिम्मेदारी उनकी तो बनती ही है.

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर इतने गंभीर सवाल खड़े हो चुके हैं कि अगर चंपत राय को क्लीन चिट मिल भी जाती है, तो भी ट्रस्ट में उनका बने रहना अब लगभग असंभव माना जा रहा है.

राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष और प्रधानमंत्री के बेहद करीबी माने जाने वाले नृपेंद्र मिश्र ने भी मंदिर के कामकाज में व्याप्त बड़ी गड़बड़ियों की बात स्वीकार की, लेकिन चंपत राय के जीवन को निष्कलंक करार दिया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भले ही अपने कार्यक्रम से चंपत राय को दूर रखा, लेकिन उन्होंने भी कहा कि किसी का चरित्र हनन नहीं होना चाहिए. इशारा चंपत राय की ओर ही माना गया.

अब ऐसा लगता है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को नए सिरे से पुनर्गठित किया जा सकता है. एक नया प्रोफेशनल सिस्टम लागू किया जा सकता है. और इतने सवाल उठने के बाद चंपत राय, अनिल मिश्रा जैसे लोग ट्रस्ट से दूरी बना सकते हैं.

लेकिन नजर इस बात पर जरूर रहेगी कि क्या SIT इस पूरे चढ़ावा चोरी मामले में इन बड़े चेहरों, जिनमें चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव जैसे नाम शामिल हैं, को कहीं दोषी करार देती है या नहीं.

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