वापस भागने की सुरंगों में पानी भर दिया…फंस गए पहलगाम के आतंकवादी…यूं हुआ 26 निर्दोषों के हत्यारों का अंत
पहलगाम हमले के आतंकवादी वापस पाकिस्तान न भाग सकें, इसके लिए उनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले गुप्त सुरंगों को पानी से भर दिया गया था। ये सुरंग 8 किलो मीटर के दायरे में बने हुए थे।
नई दिल्ली 31 जुलाई 2025।: पहलगाम आतंकी हमले वाले दिन ही केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह कश्मीर पहुंच गए थे। उन्होंने एक उच्च-स्तरीय बैठक में उसी दिन निर्देश दिया कि किसी भी सूरत में हमलावर पाकिस्तान नहीं भागने चाहिए। शाह ने सुरक्षा बलों को यह सुनिश्चित करने को कहा कि आतंकवादी ‘वापस पाकिस्तान लौटने में सफल नहीं होने चाहिए।’ बस यहीं से आतंकवादियों को हर हालत में भारत में ही घेरने की योजना तैयार कर ली गई। आखिरकार सोमवार को पहलगाम हमले के तीनों गुनहगार श्रीनगर के पास ऑपरेशन महादेव में ढेर कर दिए गए।
गुप्त सुरंगों में भरा पानी,फंस गए आतंकी
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अमित शाह के निर्देशों के आधार पर सुरक्षा एजेंसियों ने ऐसे 8 किलो मीटर रास्ता पहचाना, जिससे आतंकी आते-जाते थे। इसी प्रक्रिया में उन्हें कुछ गुप्त सुरंगें मिलीं, जिसे सीमापार से आवागमन को घुसपैठिये उपयोग कर रहे थे। यह पता चलते ही सुरक्षा बलों ने उन सुरगों को पानी से भर दिया। इसका परिणाम ये हुआ कि आतंकवादियों को वापस पाकिस्तान की ओर लौटने का रास्ता ही बंद हो गया।
तीन महीने से छिपे हुए थे आतंकवादी
क्योंकि, आतंकवादियों के भागने का रास्ता बंद कर दिया गया था, इसलिए वह पाकिस्तान लौट नहीं पाए। इस बीच सुरक्षा बलों ने उनके खिलाफ एक सघन अभियान छेड़ दिया और आखिकार उन्हें ट्रैक करनें में सफलर रहे और उन्हें सोमवार को श्रीनगर के पास जंगलों में मार गिराया गया। 22 अप्रैल को पहलगाम हमले को अंजाम देने के बाद तीनों आतंकवादी सुलेमान, अफगानी और जिबरान छिपे हुए थे।
बैलिस्टिक रिपोर्ट से हुई बुलेट की पुष्टि
बता दें कि मंगलवार को गृहमंत्री अमित शाह ने ऑपरेशन सिंदूर पर बहस के दौरान लोकसभा में पहलगाम के तीनों गुनहगारों के मारे जाने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, ‘संदेह की कोई गुंजाइश नहीं है। मेरे पास बैलिस्टिक रिपोर्ट है। 6 वैज्ञानिकों ने इसे क्रॉस-चेक किया है और वीडियो कॉल पर मुझे इस बात की पुष्टि की है कि पहलगाम में चले बुलेट और इन बंदूकों (आतंकियों के पास से बरामद)से फायर किए गए बुलेट 100 फीसदी मैच कर गए हैं।’ पहलगाम हमले में लश्कर के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने बैसरन घाटी में धर्म पूछकर 25 पर्यटकों को मार दिया था। इस आतंकी हमले में एक स्थानीय नागरिक की भी की हत्या कर दी गई थी।
Entered 3 Years Ago Made Dachigam Forests Hideout What Did Three Terrorists Of Pahalgam Do Before Going To Hell
3 साल पहले घुसपैठ…दाचीगाम जंगलों को बनाया ठिकाना…पहलगाम के तीनों आतंकियों ने जहन्नुम पहुंचने से पहले क्या किया
श्रीनगर में महादेव चोटी के पास मारे गए लश्कर-ए-तैयबा के तीनों पाकिस्तानी आतंकवादियों ने तीन साल पहले ही घुसपैठ कर ली थी और 22 अप्रैल को पहलगाम में आतंकवादी हमले में 26 निर्दोषों को मार डाला था ।
श्रीनगर में महादेव चोटी के नजदीक मारे गए तीनों पाकिस्तानी आतंकवादियों के बारे में रोज नए-नए तथ्य सामने आ रहे हैं। लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के इन्हीं तीनों आतंकियों ने 22 अप्रैल को पहलगाम की बैसरन घाटी में 25 पर्यटकों और एक स्थानीय की निर्मम हत्या कर दी थी। यह पाकिस्तान में इस कदर जंगलों में लंबे समय तक रहने को ट्रेंड किए गए थे कि सुरक्षा बलों को उन्हें ठिकाना लगाने में तीन महीने से भी ज्यादा लग गए। पाकिस्तानी एजेंसियों ने अपना चेहरा छिपाने को इन्हें लश्कर के मुखौटा संगठन द रेजिस्टेंस फोर्स (TRF) का नकाब ओढ़ाया था। लेकिन, पहलगाम की घटना के बाद पहले अमेरिका ने इसे वैश्विक आतंकी संगठन घोषित किया और फिर संयुक्त राष्ट्र ने भी माना कि पहलगाम की धरती को बेगुनाहों के खून से लाल करने वाले दहशतगर्द टीआरएफ से ही जुड़े हैं।
बहुत अचूक रणनीति से ढेर हुए गुनहगार
हमने आपको इससे पहले तीन रिपोर्ट दी है। पहले में यह बताया गया है कि पहलगाम हमले के जिम्मेदार तीनों आतंकियों को वापस सीमा पार जाने से रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने कैसे उन सुरंगों को पानी से भर दिया, जिनका फायदा उठाकर उन्होंने भारत में घुसपैठ किया था। फिर यह रिपोर्ट दी कि किस तरह से खानाबदोशों ने दाचीगाम जंगलों में छिपे इन आतंकियों तक पहुंचने में सेना, सीआरपीएफ और जम्मू और कश्मीर पुलिस की संयुक्त टीम की मदद की, जिससे ऑपरेशन महादेव चलाकर 25 भारतीय और एक विदेशी नागरिक की हत्या का बदला लिया गया।
तीन साल से भारत में छिपे थे आतंकवादी
अब इस रिपोर्ट में आप जानेंगे कि टीआरएफ के तीनों आतंकी सुलेमान उर्फ फैजल जट्ट, हमजा अफगानी और जिबरान पहलगाम हमले से तीन साल पहले ही भारत में घुसपैठ कर चुके थे और 28 जुलाई को सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे जाने से पहले इतने बड़े हमले से पहले कैसी तैयारी की थी। द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक ये तीनों ही आतंकी पाकिस्तान से लगभग तीन साल पहले भारत में घुस चुके थे। मतलब, उन्होंने इतने बड़े हमले से पहले तीन साल तक पक्की तैयारी की और तब जाकर आतंकी हमला किया।
पिछले साल दो ग्रुप में बंट गए थे आतंकी
रिपोर्ट के अनुसार पिछले साल इन आतंकवादियों ने खुद को दो ग्रुप में बांट लिया। इनमें से एक ग्रुप लश्कर कमांडर सुलेमान ने अपने हाथों में रखा और दूसरे की कमान एक और पाकिस्तानी आतंकवादी मूसा को दी गई। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार, ‘पिछले साल ही लश्कर के कुछ नए-नए घुसपैठिये सुलेमान के साथ जोड़ दिए गए और वही कश्मीर घाटी में सक्रिय थे।’
आतंकियों का एक ग्रुप जम्मू क्षेत्र में सक्रिय
जिन तीनों आतंकवादियों ने 22 अप्रैल को पहलगाम हमला किया, उनके बारे में कहा जा रहा है कि ये हमले के बाद से ही दाचीगाम जंगलों के ऊपरी इलाकों में छिपकर रह रहे थे। यह क्षेत्र श्रीनगर शहर के बाहरी इलाके में कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। सुलेमान इससे पहले सेंट्रल कश्मीर के गांदरबल जिले के गगनगीर घाटी में एक कंस्ट्रक्शन साइट पर हुए आतंकी हमले में भी शामिल था, जिसमें सात लोग मारे गए थे। रिपोर्ट के अनुसार 2021 से करीब 20 से 25 कुख्यात आतंकवादियों के पाकिस्तान से जम्मू और कश्मीर में घुसपैठ करने की आशंका है। इनमें से एक ग्रुप पिछले कुछ महीनों से जम्मू क्षेत्र में सक्रिय है और कई हमले कर चुका है, जो कि पिछले दो दशकों से किसी बड़ी आतंकी हमलों से अछूता रहा है।
दाचीगाम जंगलों में प्लानिंग में छिपे थे
एक अधिकारी के अनुसार सुरक्षा बलों ने आतंकियों के ‘अल्ट्रा हाई फ्रीक्वेंसी वायरलेस’ संवाद को 22 मई से ही पकड़ना शुरू कर लिया था, लेकिन उन्हें डिकोड नहीं किया जा सका था। ये सिंग्नल जंगलों के इलाके से ही मिल रहे थे। जिस जगह तीनों आतंकी मारे गये हैं, उस लोकेशन को 22 जुलाई को ही ट्रैक कर लिया गया था और उनकी चौतरफा घेराबंदी शुरू हो गई थी कि वे कहीं जंगलों का फायदा उठाकर फिर गुम न हो जाएं। क्योंकि, दाचीगाम फॉरेस्ट रेंज में दो तरफ से भागने का रास्ता है। एक दक्षिण कश्मीर में अनंतनाग जिले के पहलगाम में और दूसरा गांदरबल जिले में। इसी से 11 जुलाई को आतंकियों का लोकेशन पहलगाम की बैसरन घाटी के करीब मिलने की रिपोर्ट आ चुकी थी।

