लेंसकार्ट में लगा है दो बडे मुस्लिम निवेशकों का पैसा

Lenskart Ownership: ‘बुरके को हां, तिलक-टीके को ना’ विवादों में घिरी लेंसकार्ट कंपनी में किनका पैसा लगा है? दो हैं बडे मुस्लिम निवेशक 

मुम्बई 22 अप्रैल 2026। ‘हिजाब को हां, बिंदी-तिलक को ना’ विवाद से चर्चा में आई कंपनी पर केवल पीयूष बंसल का स्वामित्व नहीं है, बल्कि इसमें कई दिगगजों का पैसा लगा है. एक बड़ा निवेशक खाड़ी देश अबूधाबी से भी है. कुछ और नाम जानकर आप चौंक सकते हैं।

Lenskart Row: ‘शार्क टैंक’ फेम पीयूष बंसल की कंपनी लेंसकार्ट में किन दिग्‍गजों का पैसा लगा है?

नासिक में TCS धर्मांतरण मामले के बीच एक और विवाद ने इन दिनों सबका ध्‍यान खींचा है- वो है आईवियर कंपनी लेंसकार्ट का ड्रेसकोड विवाद (Lenskart Row) . ‘बुरके को हां, तिलक-टीके को ना’ विवाद की शुरुआत हुई, सोशल मीडिया पर इंटरनल गाइडलाइन वायरल होने से, जिसमें आरोप लगाया गया कि कंपनी ने ‘बुरका’ या ‘हिजाब’ पहनने की अनुमति तो दी है, लेकिन कर्मचारियों के माथे पर ‘तिलक’ या ‘टीका’ लगाने पर पाबंदी लगाने की कोशिश की.

सोशल मीडिया पर ‘Boycott Lenskart’ हैशटैग ट्रेंड करने लगा तो कंपनी के को-फाउंडर पीयूष बंसल को सफाई देने आगे आना पड़ा. कंपनी ने नया ड्रेसकोड भी जारी किया है, जिसमें ये बताने की कोशिश की गई है कि लेंसकार्ट धार्मिक आधार पर भेदभाव के पक्ष में नहीं.

इतना सब कुछ होने के बावजूद सोशल मीडिया पर लेंसकार्ट विवाद की ‘आग’ पूरी तरह बुझी नहीं है. इस बीच लोग ये भी सर्च कर रहे हैं कि ये कंपनी आखिर है किसकी और इसमें किन लोगों का पैसा लगा है. आइए समझने की कोशिश करते हैं.

देश की सबसे बड़ी आईवियर रिटेलर कंपनी
लेंसकार्ट की शुरुआत साल 2010 में पीयूष बंसल, अमित चौधरी और सुमित कपाही ने की थी. पीयूष बंसल, जिन्हें लोग ‘शार्क टैंक इंडिया’ के जज के तौर पर घर-घर में जानते हैं, इस कंपनी का मुख्य चेहरा हैं. एक छोटे से स्टार्टअप से शुरू हुई ये कंपनी आज भारत की सबसे बड़ी आईवियर रिटेलर बन चुकी है, जिसकी पहुंच जापान और दक्षिण-पूर्व एशिया तक है. कंपनी के पास फिलहाल भारत में 2,000 से ज्यादा स्टोर्स हैं.

किन दिग्गजों का लगा है पैसा?Lenskart Shareholding Pattern:
लेंसकार्ट ने ‘यूनिकॉर्न’ कंपनी के रूप में अपनी पहचान बनाई है. पिछले साल ये शेयर बाजार में लिस्‍ट भी हो गई. इसकी सफलता के पीछे दुनिया भर के बड़े निवेशकों का हाथ है. कंपनी ने अब तक कई राउंड में फंडिंग जुटाई.

फाउंडर्स/प्रमोटर ग्रुप (Peyush Bansal, Neha Bansal वगैरह):

बंसल भाई-बहन की संयुक्‍त हिस्‍सेदारी करीब 14% से 16% के आसपास बताई जाती है. ESOP के ज़रिए इसे थोड़ा बढ़ाने की योजना भी बनी है.सॉफ्टबैंक (SoftBank): जापानी निवेश दिग्गज सॉफ्टबैंक इस कंपनी के सबसे बड़े शेयरधारकों में से एक है. करीब 16-20 फीसदी हिस्‍सेदारी के साथ ये कंपनी में सबसे बड़ा संस्थागत निवेशक है. रतन टाटा (Ratan Tata): दिवंगत दिग्गज उद्योगपति रतन टाटा ने शुरुआती दिनों में ही लेंसकार्ट पर भरोसा जताया था. 2016 में रतन टाटा ने व्‍यक्तिगत स्‍तर पर पर्सनल/फैमिली ऑफिस (RNT Associates) के जरिए इसमें निवेश किया था. हालांकि 2021 में उन्‍होंने अपना स्‍टेक बेचकर एग्जिट कर लिया. अजीम प्रेमजी (Azim Premji): अजीम प्रेमजी की फैमिली‑ऑफिस इन्वेस्टमेंट फर्म प्रेमजी इन्वेस्ट की 2023–25 के बीच लगभग 11% के आसपास हिस्सेदारी बताई गई है. हालांकि उनके एग्जिट प्‍लान की भी खबरें सामने आई थीं. अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी (ADIA): खाड़ी देश के इस सॉवरेन वेल्थ फंड ने साल 2023 लेंसकार्ट में भारी निवेश किया. प्राइवेट इक्विटी इनसाइट्स के अनुसार, इसने 10% हिस्‍सेदारी के लिए 500 मिलियन डॉलर का निवेश किया, जिससे कंपनी की वैल्युएशन 4.5 बिलियन डॉलर के पार पहुंच गई.टेमासेक (Temasek): सिंगापुर की सरकारी निवेश कंपनी टेमासेक का भी इसमें बड़ा हिस्सा है. ये कंपनी के शुरुआती राउंड से ही निवेशक है. बाद में इसने 2023-24 में और पैसा डालकर हिस्सेदारी बढ़ाई. 2024 में Temasek और Fidelity ने मिलकर 200 मिलियन डॉलर की सेकेंडरी डील की. अन्य निवेशक (Other Investors): लेंसकार्ट में और भी कंपनियों का पैसा लगा है. इनमें केदार कैपिटल (Kedaara Capital), क्रिस कैपिटल (ChrysCapital), चिराते वेंचर्स, TR Capital, Alpha Wave Global/Incubation जैसे नाम भी शामिल हैं.
साफ है कि लेंसकार्ट किसी एक व्‍यक्ति या एक फैमिली की कंपनी नहीं है, बल्कि ग्‍लोबल पार्टनर और इन्‍वेस्‍टर्स वाला एक यूनिकॉर्न स्‍टार्टअप है.

विवाद का असर कंपनी के शेयरों पर भी
ताजा विवाद का असर कंपनी के शेयरों पर भी देखा गया. अभी कुछ ही दिन पहले की बात है, जब कंपनी के शेयरों ने रिकॉर्ड बनाया था. 15 अप्रैल को इंट्राडे में लेंसकार्ट के शेयर 559.80 रुपये का ऑल टाइम हाई बनाया था. विवाद और वीकेंड के बाद जब सोमवार को बाजार खुले तो मार्केट में तेजी के बावजूद कंपनी के शेयर 4% तक फिसल गए थे. पिछले सत्र में 534.85 के स्‍तर पर बंद हुए शेयर सोमवार को 530.05 पर खुले, लेकिन इंट्राडे के दौरान 508.70 तक गिर गए थे. बंसल की सफाई और नए दिशानिर्देश के बाद मंगलवार को रिकवरी दिखी. शेयर 1.88 प्रतिशत उछाल के साथ 542 रुपये के पार बंद हुए.

लेंसकार्ट के सनातन विरोधी आदेश पर भड़का बजरंग दल, उज्जैन का शोरूम बंद कराने की दी चेतावनी
लेंसकार्ट कंपनी के कथित आदेश का मामला अब तूल पकड़ते जा रहा है. देश के कोने-कोने से आदेश का जमकर विरोध किया जा रहा है. उज्जैन में बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने लेंसकार्ट के शोरूम पर पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की है. साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर उनके मांग का विरोद किया गया तो संगठन व्यापार बंद करा देंगे.

लेंसकार्ट कंपनी के सनातन विरोधी आदेश का मामला अब तूल पकड़ते जा रहा है. देश के कोने-कोने से आदेश का जमकर विरोध किया जा रहा है. हिंदू संगठन के सदस्य लेंसकार्ट कंपनी के कथित आदेश पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. कुछ ऐसी ही तस्वीर सामने आई है उज्जैन से बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने लेंसकार्ट के शोरूम पर पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया और नारेबाजी की है. साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी है कि अगर उनके मांग का विरोद किया गया तो संगठन व्यापार बंद करा देंगे.

उज्जैन में लेंसकार्ट को लेकर विरोध
धार्मिक नगरी उज्जैन में एक बार फिर धार्मिक आस्था और पहचान को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. लेंसकार्ट कंपनी के कथित आदेश के बाद बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने शहर के फ्रीगंज स्तिथ शोरूम पर पहुंचकर जमकर विरोध प्रदर्शन किया है. शोरूम के मैन गेट पर हिन्दू देवी देवताओं की तस्वीर चिपकाकर खुली चेतवानी देते हुए कहा गया है अगर ये तस्वीरें हटी तो व्यापार बंद करा दिया जाएगा….साथ ही स्टॉफ को तिलक लगाया और भगवा दुप्पटा भी पहनाया….

हिंदू स्टाफ को लगाया गया तिलक
कार्यकर्ताओं ने शोरूम में मौजूद स्टाफ को तिलक भी लगाया साथ ही भगवा दुप्पटा भी पहनाया. कार्यकर्ताओं ने लेंसकार्ट के आदेश को हिंदू आस्था का अपमान बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई है. विरोध के दौरान उन्होंने शोरूम के स्टाफ को तिलक लगाकर प्रतीकात्मक संदेश भी दिया और कहा कि हिंदू अपनी पहचान के साथ ही काम करेगा, किसी भी प्रकार का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जाएगा.

लेंसकार्ट के आदेश का इतना विवाद क्यों
मामला उस कथित बयान से जुड़ा है, जिसमें कहा गया है कि स्टाफ शोरूम में हिजाब या पगड़ी पहनकर काम कर सकते हैंस लेकिन तिलक और कलावा पहनकर आने वाले कर्मचारियों को नहीं रखा जाएगा. इस बयान के सामने आने के बाद हिंदू संगठनों में भारी नाराजगी देखने को मिली है.संगठन के पदाधिकारी विक्की राठौर जिला सह सयोजक बजरंग दल ने आरोप लगाया कि इस तरह की सोच न सिर्फ अनुचित है बल्कि समाज में विभाजन पैदा करने वाली भी है. कार्यकर्ताओं ने साफ चेतावनी दी है कि भविष्य में यदि इस तरह के बयान या नियम लागू किए गए तो शोरूम का संचालन मुश्किल हो जाएगा.

सूरत में Lenskart कंपनी की ड्रेस कोड पर बजरंग दल का बवाल, स्टोर में घुसकर कर्मचारियों के माथे पर लगाया तिलक

lenskart controversy: अब सूरत में Lenskart कंपनी की ड्रेस कोड पर बजरंग दल का बवाल, स्टोर में घुसकर कर्मचारियों के माथे पर लगाया तिलकlenskart controversy: यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ, जब Lenskart की ‘एम्प्लॉयी ग्रूमिंग पॉलिसी’ का एक दस्तावेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा. इस दस्तावेज में कथित तौर पर कर्मचारियों को बिंदी, तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोकने की बात कही गई थी. विवाद बढ़ता देख कंपनी ने सफाई देते हुए माफी मांगी और नई गाइडलाइन जारी करने की बात कही, लेकिन इसके बावजूद विरोध थमता नजर नहीं आ रहा है.

अब सूरत में Lenskart कंपनी की ड्रेस कोड पर बजरंग दल का बवाल, स्टोर में घुसकर कर्मचारियों के माथे पर लगाया तिलक
सूरत में Lenskart के ड्रेस कोड को लेकर शुरू हुआ विवाद अब सड़कों तक पहुंचने के साथ ही यह मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. दरअसल, सरथाणा जकातनाका इलाके में स्थित Lenskart के स्टोर पर सोमवार को राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने पहुंचकर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया. इन कार्यकर्ताओं ने कंपनी की कथित गाइडलाइन को हिंदू धार्मिक आस्था के खिलाफ बताते हुए नारेबाजी की. इसके बाद स्टोर के ग्लास पर स्वस्तिक का चिन्ह बनाया और फिर वहां मौजूद कर्मचारियों के माथे पर तिलक लगाकर विरोध दर्ज कराया. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसी भी कंपनी को कर्मचारियों की धार्मिक पहचान और आस्था में हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है.

दरअसल, यह पूरा विवाद उस समय शुरू हुआ, जब Lenskart की ‘एम्प्लॉयी ग्रूमिंग पॉलिसी’ का एक दस्तावेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा. इस दस्तावेज में कथित तौर पर कर्मचारियों को बिंदी, तिलक जैसे धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोकने की बात कही गई थी, जिसके बाद लोगों में आक्रोश फैल गया. सोशल मीडिया पर कंपनी की आलोचना होने लगी और इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला बताया गया. विवाद बढ़ता देख कंपनी ने सफाई देते हुए माफी मांगी और नई गाइडलाइन जारी करने की बात कही, लेकिन इसके बावजूद विरोध थमता नजर नहीं आ रहा है.

कंपनी पर लगाए जा रहे हैं इस तरह के आरोप
इस पूरे मामले ने तब और गंभीर रूप ले लिया, जब सूरत के रहने वाले युवक झील वघासिया ने कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए. झील वघासिया का दावा है कि उन्हें केवल तिलक और शिखा रखने की वजह से नौकरी से वंचित कर दिया गया. उन्होंने बताया कि उन्हें Lenskart की ओर से नौकरी के लिए कॉल आया था और उन्होंने सूरत के वेसु इलाके में इंटरव्यू भी दिया था, जहां उन्हें किसी भी तरह की धार्मिक पाबंदी के बारे में नहीं बताया गया, लेकिन जब वह मुंबई के ट्रेनिंग सेंटर पहुंचे, तो वहां कंपनी के अधिकारियों ने उन्हें साफ तौर पर कह दिया कि अगर उन्हें नौकरी जारी रखनी है, तो उन्हें तिलक हटाना होगा और शिखा कटवानी होगी.

झील वघासिया के अनुसार, उन्होंने कंपनी को समझाने की कोशिश की कि तिलक और शिखा उनकी धार्मिक पहचान और आस्था का हिस्सा है. इससे उनके काम पर कोई असर नहीं पड़ता है, लेकिन कंपनी के अधिकारियों ने उनकी एक नहीं सुनी और यहां तक कह दिया कि यदि उन्होंने इन धार्मिक प्रतीकों को नहीं हटाया, तो उन्हें नौकरी नहीं दी जाएगी. इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उनके हाथ पर बने धार्मिक टैटू को हटाने तक की बात कही गई. अंततः अपनी आस्था के साथ समझौता करने से इनकार करने पर उन्हें ट्रेनिंग सेंटर से बाहर कर दिया गया.

इस कथित आरोप के बाद राष्ट्रीय बजरंग दल के कार्यकर्ता सक्रिय हो गए और उन्होंने सूरत में विरोध प्रदर्शन कर कंपनी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया. कार्यकर्ताओं ने मांग की है कि कंपनी सार्वजनिक रूप से माफी मांगे और भविष्य में ऐसी किसी भी गाइडलाइन को लागू न करने का स्पष्ट आश्वासन दे. फिलहाल, यह मामला धार्मिक स्वतंत्रता और कॉर्पोरेट नियमों के बीच टकराव का प्रतीक बनता जा रहा है, जिस पर अब व्यापक बहस छिड़ गई है.

देशभर में हो रहे इतने विवाद के बाद अब देखना होगा कि कंपनी प्रबंधन इस पूरे मामले पर आधिकारिक रूप से क्या सफाई देता है ।

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