उत्तराखण्ड श्रमिक स्वास्थ्य पहल बनी अन्य राज्यों की प्रेरक, उ.प्र. टीम आई समझने
मुख्यमंत्री धामी की श्रमिक स्वास्थ्य पहल बनी दूसरे राज्यों के लिए प्रेरणा, उत्तर प्रदेश की टीम ने किया उत्तराखण्ड के मॉडल का अध्ययन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जुलाई में की थी श्रमिकों को कार्यस्थल पर स्वास्थ्य जांच सुविधा उपलब्ध कराने की शुरुआत
मुख्यमंत्री धामी श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना में 60 हजार निर्माण श्रमिकों को मिल चुकी स्वास्थ्य जांच सुविधा
देहरादून 17 अक्टूबर 2026। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार की श्रमिक कल्याण को मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (CMSSY) अन्य राज्यों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। इसी क्रम में शनिवार को देहरादून में उत्तर प्रदेश के अपर श्रमायुक्त जुनैद अहमद के नेतृत्व में आई टीम ने उत्तराखण्ड पहुंचकर योजना की कार्यप्रणाली और क्रियान्वयन व्यवस्था का अध्ययन किया। टीम ने विशेष रूप से निर्माण श्रमिकों को उनके कार्यस्थल पर ही स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के उत्तराखण्ड मॉडल की जानकारी प्राप्त की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 23 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री कैम्प कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में श्रमिक कल्याण योजनाओं का शुभारंभ करते हुए श्रमिकों के स्वास्थ्य परीक्षण को दो मोबाइल मेडिकल वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया था। इस पहल से निर्माण श्रमिकों को उनके कार्यस्थल एवं आवास स्थल पर ही एक्स-रे, ईसीजी सहित 44 प्रकार की निःशुल्क स्वास्थ्य जांच तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों से परामर्श की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने इससे पहले योजना की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिए थे कि स्वास्थ्य जांच में जिन श्रमिकों में किसी बीमारी की पहचान होती है, उनके समुचित उपचार की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले पात्र श्रमिकों तक भी स्वास्थ्य सेवाओं और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर विशेष जोर दिया था।
उत्तर प्रदेश से आए अधिकारियों के साथ आयोजित बैठक में उत्तराखण्ड के श्रमायुक्त एवं उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के सचिव प्रकाश चन्द्र दुम्का ने योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि योजना से पंजीकृत निर्माण श्रमिकों एवं उनके पात्र आश्रितों को स्वास्थ्य जांच की सुविधा उपलब्ध कराने के साथ ही गंभीर बीमारियों की समय रहते पहचान, चिकित्सकीय परामर्श और आवश्यकता के अनुसार उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफरल की व्यवस्था की जा रही है।
श्रमायुक्त दुम्का ने बताया कि राज्य में उपलब्ध संसाधनों और व्यवस्थाओं के प्रभावी उपयोग से बिना अतिरिक्त पूंजीगत निवेश के अब तक लगभग 60 हजार पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को स्वास्थ्य जांच की सुविधा प्रदान की जा चुकी है। तकनीकी नवाचार, बेहतर प्रबंधन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय से योजना का प्रभावी क्रियान्वयन किया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश की टीम ने योजना की तकनीकी संरचना, श्रमिकों के पंजीकरण एवं सत्यापन, स्वास्थ्य जांच शिविरों के संचालन, जांच रिपोर्ट उपलब्ध कराने, गंभीर बीमारियों की पहचान और उपचार को रेफरल व्यवस्था की जानकारी प्राप्त की। इस दौरान उत्तर प्रदेश में भी इसी प्रकार की व्यवस्था विकसित करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्रमिक स्वास्थ्य सुरक्षा योजना के क्रियान्वयन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिली है। उत्तराखण्ड की यह पहल श्रमिकों को उनके कार्यस्थल पर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ ही समय रहते बीमारियों की पहचान और उपचार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उत्तर प्रदेश की टीम का यह अध्ययन भ्रमण दोनों राज्यों के बीच श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में अनुभवों के आदान-प्रदान और बेहतर कार्यप्रणालियों को अपनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर उत्तराखण्ड भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के उप श्रमायुक्त विपिन कुमार तथा वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञ श्रीमती दुर्गा चमोली उपस्थित रहीं।


