मानेका गांधी के खिलाफ,कब,कहां,किसने लगाये थे नारे ‘बेटी है सरदार की, देश के गद्दार की’?

Kanchan Gupta Remined Rahul Gandhi Slogans Against Maneka Gandhi While Patriarchy Remark
‘बेटी है सरदार की, देश के गद्दार की’, मेनका गांधी के खिलाफ लगने वाले नारे कंचन गुप्ता ने दिलाए याद, कांग्रेस पर निशाना
राहुल गांधी की पितृसत्तात्मक के खिलाफ रैली के बाद भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने एक बेहद पुरानी घटना के बारे में याद दिलाया है। ये घटना मेनका गांधी से जुड़ी है, जब अमेठी से राजीव गांधी के खिलाफ निर्दलीय मैदान में उतर गई थीं।

नई दिल्ली 26 अगस्त 2026 : राहुल गांधी ने पुणे में ‘छात्रों की गूंज’ नामक एक कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें कांग्रेस नेता ने महिलाओं से पितृसत्तात्मक व्यवस्था छोड़ने की अपील की। इस कार्यक्रम में राहुल गांधी ने मनुस्मृति पर भी जमकर निशाना साधा और कहा कि मनुस्मृति महिलाओं को हमेशा दूसरे के अधीन मानती है। राहुल के इस बयान पर अब भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ने निशाना साधा है। कंचन गुप्ता ने वो दौर याद दिलाया है, जब राजीव गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ रहीं मेनका गांधी के खिलाफ विवादित नारे लिखे गए थे।
Rahul maneka gandhi and kanchan gupta
राहुल गांधी की रैली के बाद कंचन गुप्ता ने याद दिलाया मेनका गांधी से जुड़ा किस्सा

लेफ्टिनेंट कर्नल की बेटी हैं मेनका
कंचन गुप्ता ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि मेनका गांधी के खिलाफ इस नारे को कांग्रेस और राजीव गांधी का समर्थन हासिल था। और नारा था ‘बेटी है सरदार की, देश के गद्दार की’। कंचन गुप्ता आगे लिखते हैं कि मेनका गांधी, लेफ्टिनेंट कर्नल तरलोचन सिंह आनंद की बेटी और संजय गांधी की विधवा हैं। भारतीयों में इतिहास की समझ बहुत कम होती है, इसलिए लोगों की स्मृति बहुत कमजोर होती है।

अमेठी की दीवारों पर लिखे नारे
दरअसल, साल 1984 के लोकसभा चुनाव में मेनका गांधी उत्तर प्रदेश के अमेठी निर्वाचन क्षेत्र से राजीव गांधी के खिलाफ निर्दलीय ही चुनाव में उतर गई थीं। मेनका के पिता तरलोचन सिंह आनंद एक सिख (सरदार) थे। ये वो दौर था, जब ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद देश में सिखों के खिलाफ माहौल बना दिया गया था। इसी दौरान अमेठी की दीवारों पर मेनका गांधी के खिलाफ यह नारा लिखा गया था।

कांग्रेस सांसद ने उठाया था विषय 
हालांकि, खुद कांग्रेस सांसद ने साल 2005 में संसद के अंदर यह विषय उठाया था। तब लोकसभा में नानावती आयोग की रिपोर्ट पर चर्चा चल रही थी। वही, रिपोर्ट जिसमें 1984 में हुए सिख विरोधी दगों का जिक्र था। इस दौरान कांग्रेस सांसद पवन कुमार बंसल संसद में खड़े होकर यह बता रहे थे कि किस तरह सिखों के खिलाफ नफरत फैलाई गई। इस दौरान उन्होंने इस नारे का भी जिक्र किया था।
(अक्षय श्रीवास्तव)

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