ईसाई बने 16 हिंदू-सिख परिवार वापस मूल धर्म में

भिलाई में 15 साल बाद सिख धर्म में घर वापसी, बीमारी के दौर में बदला था धर्म
भिलाई में एक सिख परिवार ने अपने मूल धर्म में वापसी की. गुरुद्वारे में विशेष कीर्तन कर उनकी सिख धर्म में वापसी कराई गई.
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भिलाई सिख धर्म में वापसी
दुर्ग भिलाई: एक सिख परिवार ने करीब 15 साल बाद अपने मूल धर्म में वापसी की. कैंप 2 स्थित गुरुद्वारे में विशेष दीवान के दौरान कीर्तन, गुरबाणी और अरदास के साथ पूरे विधि-विधान से परिवार ने दोबारा सिख धर्म अपनाया. इस दौरान संगत की बड़ी उपस्थिति रही और  बेहद भावुक वातावरण नजर आया.

पति की बीमारी में बदल लिया था धर्म

वहीं परिवार की मुखिया प्रीति कौर ने संगत के सामने अपनी पूरी कहानी साझा की.उन्होंने बताया कि वर्षों पहले उनके पति की गंभीर बीमारी के चलते परिवार मानसिक और आर्थिक रूप से बेहद परेशान था. इसी दौरान कुछ लोगों ने उनके पति के इलाज और स्वस्थ होने का भरोसा दिलाया, जिसके प्रभाव में आकर उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था. लेकिन समय के साथ परिवार ने आत्ममंथन किया और अपने पूर्वजों की परंपरा में लौटने का निर्णय लिया.

सिख धर्म में वापसी
गुरुद्वारे में कीर्तन, गुरबाणी और अरदास के बीच घर वापसी
प्रीति कौर ने सर्व समाज के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह से संपर्क कर अपनी इच्छा जताई, जिसके बाद गुरुद्वारे में विशेष आयोजन किया गया. इस दौरान परिवार के चार सदस्यों ने विधिवत घर वापसी की. कार्यक्रम के दौरान कई लोगों की आंखें नम हो गईं और संगत ने परिवार का स्वागत किया.

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सिख धर्म में वापसी करने वाला परिवार
सिख यूथ सेवा समिति एवं सर्व समाज कल्याण सेवा समिति का प्रयास
सिख यूथ सेवा समिति एवं सर्व समाज कल्याण सेवा समिति लगातार ऐसे प्रयास कर रही हैं, जिनके तहत सिख समाज से दूर हुए लोगों को फिर से जोड़ा जा रहा है. इससे पहले सुपेला गुरुद्वारा में भी दो परिवारों की घर वापसी कराई जा चुकी है. समिति के अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह ने कहा कि आगे भी ऐसे प्रयास जारी रहेंगे और जरूरतमंद परिवारों की हर संभव मदद की जाएगी.

jharkhand hazaribaghHazaribagh 15 Families Return To Sanatan Dharma In Chauparan Ghar Wapsi
हजारीबाग में 15 परिवारों की ‘घर वापसी’: ईसाई धर्म छोड़ फिर अपनाया सनातन, बोले- जड़ों का हुआ एहसास
झारखंड के हजारीबाग जिले में 15 परिवारों ने सनातन धर्म में ‘घर वापसी’ कर ली। ईसाई धर्म छोड़ 15 परिवारों ने फिर से सनातन धर्म अपनाते हुए कहा कि हमें अपनी जड़ों का एहसास हुआ। इसी वजह से हमने वापसी की है।

झारखंड के हजारीबाग जिले से सामाजिक समरसता की एक बड़ी खबर सामने आई है। जिले के चौपारण प्रखंड में रविवार को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान 15 परिवारों ने ईसाई धर्म को त्यागकर स्वेच्छा से सनातन धर्म में ‘घर वापसी’ की। हिंदू धर्म की विराट संस्कृति और ‘वसुधैव कुटुंबकम्’ की भावना से प्रेरित होकर इन परिवारों ने अपनी पुरानी जड़ों की ओर लौटने का निर्णय लिया।

हजारीबाग जिले में 15 परिवारों ने सनातन धर्म में वापसी कर ली।

सांस्कृतिक मूल्यों और सामाजिक एकजुटता पर जोर
चौपारण प्रखंड के ग्राम चक्रसार और बजरंग क्लब दादपुर परिसर में सामाजिक समरसता एवं पारंपरिक सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत करने के उद्देश्य से ग्रामीण बैठकों का आयोजन किया गया था। इस बैठक में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, सामाजिक कार्यकर्ता और ग्रामीण शामिल हुए। बैठकों का मुख्य उद्देश्य समाज में आपसी भाईचारा और अपनी विरासत के संरक्षण पर चर्चा करना था।

ईसाई मिशनरी के प्रभाव में आकर अपनी मूल संस्कृति से दूर हो गए थे’
ग्राम चक्रसार और सिंहपुर के इन परिवारों ने बताया कि वे पूर्व में ईसाई मिशनरी पादरियों के प्रभाव में आकर अपनी मूल संस्कृति से दूर हो गए थे। उन्होंने स्वीकार किया कि इससे वे अपने पारंपरिक रीति-रिवाजों और पूर्वजों की परंपराओं को भूलने लगे थे। समय के साथ अपनी जड़ों के प्रति जागरूकता बढ़ी और उन्होंने सर्वसम्मति से हिंदू धर्म में लौटने का फैसला किया।

मंत्रोच्चारण और विधि-विधान से भव्य स्वागत
घर वापसी करने वाले परिवारों का ग्रामीणों ने पारंपरिक विधि-विधान और वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ स्वागत किया। इस दौरान वातावरण भक्तिमय और उत्साहपूर्ण रहा। कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने संदेश दिया कि समाज में प्रेम, सौहार्द और एकजुटता ही सबसे बड़ी शक्ति है।

इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस अवसर पर यवनपुर पंचायत की मुखिया जानकी यादव, दादपुर पंचायत के पूर्व मुखिया प्रतिनिधि अरविंद सिन्हा, विहिप-बजरंग दल के संजय सिंह, शेखर गुप्ता, शंभु साव, संजीव सिंह तथा चौपारण इकाई के अनेक सदस्य मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और आपसी सहयोग पर बल दिया।

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