दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर: सुविधा बढी तो सावधानियां भी जरुरी वरना….

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे तैयार है लेकिन यात्रियों को कुछ बातों का ध्यान रखना होगा। गूगल मानचित्र नए मार्ग पर भटका सकता है, इसलिए एक्सप्रेसवे के संकेतों का पालन करें। नए खंड पर अभी पानी और ईंधन की सुविधा उपलब्ध नहीं है। वाहन चालक अपनी यात्रा के लिए इनकी विशेष तैयारी करके चलें। मोटरसाइकिल सवारों को इस नए एक्सप्रेसवे पर जाने की अनुमति नहीं मिलेगी। उन्हें पुराने रास्ते से ही यात्रा करने की सलाह दी गई है।

Dehradun-Delhi Expressway Transport Department Issued Safety Points during Driving
Dehradun-Delhi Expressway: सफर होगा सुहाना, पर वाहन धीरे ही चलाना; इन बातों का जरूर रखें
एक्सप्रेसवे में देहरादून में प्रवेश करते समय आशारोड़ी के नजदीक मार्ग पर लगातार तेज ढाल है। यहां पर वाहनों की गति सीमा पर ध्यान देना होगा।

दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर विधिवत संचालन मंगलवार दोपहर से शुरू हो गया। एक्सप्रेसवे पर वाहन संचालन के समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसको लेकर परिवहन विभाग ने सुझाव दिए हैं। एक्सप्रेसवे में देहरादून में प्रवेश करते समय आशारोड़ी के नजदीक मार्ग पर लगातार तेज ढाल है। यहां पर वाहनों की गति सीमा पर ध्यान देना होगा। दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर विधिवत संचालन मंगलवार दोपहर से शुरू हो जाएगा। इस एक्सप्रेसवे पर वाहन संचालन के समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, इसको लेकर परिवहन विभाग ने सुझाव दिए हैं।

उप परिवहन आयुक्त शैलेश तिवारी ने बताया कि एक्सप्रेसवे में देहरादून में प्रवेश करते समय आशारोड़ी के नजदीक मार्ग पर लगातार तेज ढाल है। यहां पर वाहनों की गति सीमा पर ध्यान देना होगा। वाहन को धीरे-धीरे सावधानी पूर्वक चलाया जाए। एलिवेटेड रोड पर अनावश्यक हॉर्न न बजाएं।

ये भी दिए सुझाव
– रात में कहीं पर वाहन को मोड़ना या रुकना मना है।
– एक्सप्रेस वे पर रिवर्स पर वाहन न चलाएं न ही यूटर्न लें।
– अगर एग्जिट छूट जाए तो अगला इंटरचेंज लेना होगा।
– कार की गति सौ और भारी वाहन की गति सीमा अस्सी तय है।
– बाई लेन भारी वाहन, मिडिल लेन सामान्य ड्राइविंग, दाई लेन ओवरटेक के लिए।
– बार-बार लेन बदलने से बचें, मोड़ पर ओवर टेक करने से बचें।
– इमरजेंसी में वाहन साइड सोल्डर में लगाएं, हजार्ड लाइट ऑन करें।
– किसी भी इमरजेंसी में मदद चाहिए तो हेल्पलाइन नंबर पर फोन करें।
– टनल में में प्रवेश करते समय वाहन की लाइटें ऑन कर लें।
– डाटकाली मंदिर के निकट मार्ग पर टनल है, इसके पूर्व और बाद में ध्यानपूर्वक चलें।

Toll will be collected at five places on Delhi-Dehradun Expressway
UP: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस वे पर पांच जगह वसूला जाएगा टोल, जान लें कहां-कहां और कितना देना होगा टैक्स
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को एक्सप्रेसवे का लोकार्पण कर दिया। दिल्ली से देहरादून तक कार के लिए एक तरफ से 675, जबकि राउंड ट्रिप के 1010 रुपये देने होंगे। अभी केवल एक पर ही टोल वसूली हो रही है, बाकी पर जल्द ही शुरू हो जाएगी।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस-वे –
लंबे इंतजार के बाद आखिकार दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर अधिकारिक रूप से वाहनों का संचालन शुरू हो गया है। 210 किमी के इस एक्सप्रेसवे पर कुल पांच टोल प्लाजा बनाए गए हैं। कारों के लिए एक तरफ से 675 रुपये और 24 घंटे के अंदर राउंड ट्रिप पूरी होने पर 1010 रुपये शुल्क वसूला जाएगा। इन टोल दरों को लेकर यह देश के महंगे एक्सप्रेसवे में शुमार हो गया है। हालांकि शहरों के बीच कम हुई दूरी और समय की बचत इसे जेब पर भारी नहीं पड़ने देगी।

अक्षरधाम से लोनी बार्डर तक 18 किमी का हिस्सा टोल फ्री रहेगा। पहला टोल प्लाजा बागपत और लोनी की सीमा में टेक्नोसिटी में बनाया गया है। इसके बाद दूसरा टोल शामली के बुटराडा में स्थित है। इसके बाद के तीनों टोल प्लाजा सहारनपुर जिले की सीमा में बड़गांव के जैनपुर, छुटमलपुर के चमारीखेड़ा और बिहारीगढ़ के गणेशपुर में बनाए गए हैं।

सहारनपुर जिले में केवल 47 किलोमीटर की दूरी तय करने के लिए तीन बार टोल चुकाना पड़ेगा। हालांकि अभी एक्सप्रेसवे पर पांचों टोल प्लाजा में केवल चमारीखेड़ा में कार से 85 रुपये वसूले जा रहे हैं, बाकी चारों टोल प्लाजा पर जल्द ही वसूली शुरू कर दी जाएगी।

टोल शुल्क के दृष्टिगत यह एक्सप्रेसवे देश के महंगे रास्तों में शुमार हो गया है। इसके विकल्प के रूप में देहरादून से वाया देवबंद होकर दिल्ली जाने के लिए चार टोल पर कार को 475 रुपये शुल्क चुकाना पड़ता है। जबकि वाया भगवानपुर, छपार होते हुए देहरादून से दिल्ली जाने के लिए 410 रुपये शुल्क देना पड़ा है। इस मार्ग पर भी चार टोल प्लाजा हैं। लेकिन यह दोनों रास्ते एक्सप्रेसवे से 50 किमी लंबे और पांच से छह घंटे की यात्रा के बाद दिल्ली पहुंचाते हैं। जबकि एक्सप्रेसवे पर ढाई घंटे में दिल्ली पहुंच रहे हैं। ऐसे में महंगा टोल डीजल-पेट्रोल से होने वाली बचत के चलते जेब पर भारी नहीं पड़ेगा।

Delhi dehradun Expressway Starts Know Eligibility For Fastag Monthly Pass And Toll Discount Rules
Delhi-Dehradun Expressway: दिल्ली से देहरादून जाने में FASTag एनुअल पास का लाभ मिलेगा या नहीं, जानें जरूरी डिटेल
Delhi-Dehradun Expressway Opens: दिल्ली से देहरादून और मसूरी समेत उत्तराखंड के और भी शहरों को जाने वालों के लिए आज 14 अप्रैल 2026 का दिन बेहद खास है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस का शुभारंभ कर दिया है। अब दिल्ली से देहरादून सिर्फ ढाई घंटे में पहुंच सकेंगे। इसके साथ ही एक बड़ा सवाल यह है कि क्या फास्टैग एनुअल पास का लाभ इस एक्सप्रेसवे पर मिलेगा? आइए, इस बारे में विस्तार से जानते हैं।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस की आधिकारिक शुरुआत हो गई है और अब दिल्ली से देहरादून, ऋषिकेष, मसूरी और धनौल्टी जाने वालों के लिए रास्ता काफी आसान हो गया है और सफर के घंटे भी काफी कम हो जाएंगे। इन सबके बीच एक जरूरी बात यह है कि क्या दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस पर एनुअल फास्टैग का लाभ लोगों को मिलेगा, तो इसका जवाब है हां, जरूर मिलेगा। दरअसल, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेस को भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बनाया है और इसपर आप एनुअल फास्टैग पास का लाभ लेकर हजारों रुपये बचा सकते हैं।

हर ट्रिप पर अच्छी-खासी टोल राशि की बचत
फास्टैग एनुअल पास आप 3,075 रुपये में बना सकते हैं और यह पास 200 ट्रिप के लिए मान्य है। हर एक टोल प्लाजा क्रॉस करने पर आपका एक ट्रिप कम हो जाता है। अब मान लीजिए कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर एक तरफ का टोल 675 रुपये है और आप अगर 24 घंटे के अंदर रिटर्न होते हैं तो आपको 1,010 रुपये चुकाने होंगे। लेकिन अगर आपके पास फास्टैग एनुअल पास है तो फिर आपकी यात्रा फ्री में हो जाएगी, क्योंकि 210 किलोमीटर लंबे दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को एनएचएआई ने बनाया है।

वीकेंड ट्रिप पर देहरादून-मसूरी जाने वालों की मौज
आपको बता दें कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को नैशनल हाइवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने लगभग 12,000 करोड़ रुपये की लागत से बनाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अप्रैल 2026 को इसका उद्घाटन किया। इस एक्सप्रेस से दिल्ली और यूपी के साथ ही उत्तराखंड के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी। जो लोग वीकेंड ट्रिप में दिल्ली से देहरादून या मसूरी या अन्य आसपास की जगहें घूमने का मन बना रहे हैं, वो अगर कार से ट्रैवल करते हैं और उनके पास फास्टैग का एनुअल पास है तो फिर टोल चार्ज से बच जाएंगे।

पैसे के साथ समय की भी बचत
यहां एक जरूरी बात बता दें कि दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर फास्टैग-बेस्ड कुल 4 टोल प्लाजा हैं। आप एनुअल पास का इस्तेमाल कर 200 बार बिना किसी चार्ज के टोल क्रॉस कर सकेंगे। जो लोग टोल प्लाजा के आस-पास रहते हैं, वे लगभग 330 में लोकल पास ले सकते हैं। पहले दिल्ली से देहरादून जाने में बाय रोड करीब 6-7 घंटे लग जाते थे, लेकिन एक्सप्रेसवे खुल जाने से यह दूरी महज ढाई से तीन घंटे में पूरी की जा सकती है। आप फास्टैग एनुअल पास को NHAI की ऑफिशियल वेबसाइट के जरिये या राजमार्ग यात्रा ऐप की मदद से एक्टिवेट करा सकते हैं।

 

ये गलती न करें आप, इनसे भी जरा बचकर
देहरादून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर से गुजरते वक्त 12 किलोमीटर का तक मिलेगा अद्भुत अनुभव, लेकिन कई बातों का रखना होगा
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर पर रहें सावधान

दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को उद्घाटन के बाद आधिकारिक रूप से खोल दिया गया है. करीब 112 किलोमीटर लंबा यह आधुनिक मार्ग अब उत्तराखंड और दिल्ली के बीच यात्रा को पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा सुगम और तेज बना रहा है. इस एक्सप्रेसवे के खुलते ही यात्रियों पर्यटकों और स्थानीय लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है.

काफी संख्या में लोग इस नए एक्सप्रेसवे या कोरिडॉर का अनुभव लेने के लिए निकल रहे हैं. यह कॉरिडोर न केवल समय की बचत करता है. बल्कि, सफर को भी बेहद आरामदायक और सुविधाजनक बनाएगा. हालांकि, अभी इस मार्ग पर कई आवश्यक सुविधाएं पूरी तरह विकसित नहीं हो पाई हैं. जैसे खाने-पीने के ठिकाने, विश्राम स्थल और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं.

इसके बावजूद लोग इस मार्ग की खूबसूरती और तेज रफ्तार का आनंद लेने के लिए उत्साहित नजर आ रहे हैं. जो इसे खास बना रहा है, लेकिन इस मार्ग पर चलते समय आप कुछ बातों को ध्यान जरूर रखें. खासकर एलिवेटिड रोड पर जहां बंदरों की एक बड़ी फौज आपको मिल सकती है. यहां पर आपको विशेष सावधानी बरतनी होगी.

जंगलों के बीच से गुजरता एक्सप्रेसवे
शिवालिक की वादियों में 12 किलोमीटर का अद्भुत अनुभव: इस पूरे मार्ग का सबसे खास और आकर्षक हिस्सा 12 किलोमीटर लंबा वो कॉरिडोर है, जो शिवालिक पहाड़ियों के बीचों-बीच से होकर गुजरता है. ऊंचाई पर बना यह मार्ग यात्रियों को ऐसा अनुभव कराता है, मानो वो पहाड़ों के ऊपर से उड़ते हुए गुजर रहे हों.

चारों ओर फैली हरियाली, पहाड़ों की श्रृंखला और प्राकृतिक सुंदरता… इस सफर को यादगार बना देती है. यही कारण है कि इस हिस्से में लोग रुककर फोटो खींचने, वीडियो बनाने और प्रकृति का आनंद लेने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन यही उत्साह कई बार खतरे का कारण बन जाता है.

तेज गति से चलने वाले इस मार्ग पर अचानक वाहन रोकना बेहद जोखिम भरा हो सकता है. पीछे से आ रही गाड़ियां तेज रफ्तार में होती हैं और अचानक रुकावट से गंभीर दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है. प्रशासन लगातार लोगों से अपील कर रहा है कि वे इस आकर्षण में पड़कर अपनी और दूसरों की जान जोखिम में न डालें।

देहरादून दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर का नजारा (फोटो- NHAI)
उद्घाटन से पहले दुर्घटनाओं ने बढ़ाई चिंता और चेतावनी: इस कॉरिडोर के उद्घाटन से पहले ही एलिवेटेड सड़क पर एक सड़क हादसा सामने आया था. जिसने प्रशासन की चिंता को और बढ़ा दिया. इस घटना के बाद परिवहन विभाग, वन विभाग और पुलिस विभाग तीनों ने मिलकर यात्रियों के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं.

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से गुजरते वाहन
विभाग का कहना है कि यह मार्ग भले ही आधुनिक और सुरक्षित तकनीक से तैयार किया गया हो, लेकिन इसकी संरचना और आसपास का वातावरण इसे संवेदनशील भी बनाता है. ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है.

प्रशासन ने साफ तौर पर कहा है कि नियमों का पालन ही इस मार्ग पर सुरक्षित यात्रा की कुंजी है. लगातार निगरानी और गश्त के जरिए भी लोगों को सतर्क किया जा रहा है. ताकि, किसी भी तरह की दुर्घटना से बचा जा सके.

बंदर और लंगूर बने नई चुनौती: यह कॉरिडोर राजाजी नेशनल पार्क और शिवालिक से होकर गुजरता है. जिसके कारण यहां वन्यजीवों की सक्रियता हमेशा रहती है. खासतौर पर बंदर और लंगूर इस मार्ग पर बड़ी संख्या में देखे जाते हैं. जंगल के बीच से गुजरने और ऊंचाई पर बने होने की बावजूद भी ये जानवर आसानी से एक्सप्रेसवे पर पहुंच जाते हैं.जो कभी भी अचानक सामने आ सकते हैं. उनकी यह गतिविधि वाहन चालकों के लिए खतरा पैदा कर सकती है. कई बार ये जानवर समूह में सड़क पर आ जाते हैं. जिससे तेज रफ्तार वाहनों को संभालना मुश्किल हो सकता है. यही वजह है कि प्रशासन और वन विभाग लगातार लोगों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं.

“लोगों को वैसे तो हर मार्ग पर चलना ही सावधानी से चाहिए. किसी भी स्थिति में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए. उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड वन विभाग की टीम इस पूरे इलाके में लगातार गश्त कर रही है.”- राजीव धीमान, मुख्य वन अधिकारी, शिवालिक क्षेत्र

क्यूं आ रहे हैं बंदर? राजाजी राष्ट्रीय पार्क के पूर्व निदेशक सनातन सोनकर बताते हैं कि ‘बंदर और लंगूर ऐसे जानवर हैं, जिन्हें किसी एक जगह सीमित नहीं किया जा सकता.’ उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘जहां बड़े जानवर जैसे हाथी निर्धारित रास्तों से गुजरते हैं, वहीं बंदर और लंगूर अपनी फुर्ती एवं छलांग लगाने की क्षमता के कारण कहीं भी पहुंच सकते हैं.’

Delhi Dehradun Economic Corridor
पेड़ पर आराम फरमाता लंगूर
‘यह इलाका उनका प्राकृतिक आवास है और वे इसे आसानी से छोड़ने वाले नहीं हैं. ऐसे में ये जरूरी है कि इंसान अपनी आदतों में बदलाव लाए और इन परिस्थितियों के अनुरूप सतर्कता बरतें.’ साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि इन जानवरों को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी उपायों पर विचार किया जाना चाहिए. साथ ही वे कहते हैं कि ‘लोग गाड़ी रोक कर इन्हें कुछ खाने के लिए तो बिल्कुल न दें।

लगूरों की टोली
परिवहन विभाग की एडवाइजरी, हर नियम का पालन जरूरी: परिवहन विभाग ने इस मार्ग पर सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं. विभाग ने स्पष्ट रूप से कहा है कि बीच रास्ते में वाहन रोकना, गलत दिशा में गाड़ी चलाना, वाहन चलाते समय मोबाइल का उपयोग करना और सड़क किनारे बिना वजह पार्किंग करना पूरी तरह प्रतिबंधित है.

पैदल चलने की भी अनुमति नहीं है. यदि किसी आपात स्थिति में वाहन रोकना पड़े तो उसे सड़क के किनारे सुरक्षित स्थान पर लगाकर संकेत लाइट चालू करें और सहायता के लिए हेल्पलाइन या गश्ती दल से संपर्क करें. इसके अलावा सीट बेल्ट का उपयोग अनिवार्य बताया गया है और वाहन चलाते समय पूरी तरह सतर्क रहने की सलाह दी गई है.

रात में ड्राइविंग और ढलान वाले क्षेत्रों में बरतें अतिरिक्त सावधानी: परिवहन विभाग का कहना है कि रात के समय इस मार्ग पर वाहन चलाते हुए विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है. सामने से आ रहे वाहनों के दौरान हल्की रोशनी का उपयोग करें और सड़क पर बने संकेतों पर ध्यान दें. यदि थकान या नींद महसूस हो, तो यात्रा जारी रखने के बजाय कुछ समय के लिए रुककर आराम करना बेहतर है

देहरादून में प्रवेश करते समय आशारोड़ी के पास लगातार ढलान वाला क्षेत्र है. जहां वाहन की गति को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी हो जाता है. तेज रफ्तार यहां दुर्घटना का कारण बन सकती है. इसलिए चालक को पूरी सतर्कता के साथ वाहन चलाना चाहिए.

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शिवालिक की वादियों से गुजरता दिल्ली देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर (फोटो- NHAI)
सुरंग, मोड़ और निर्माण स्थलों पर विशेष ध्यान जरूरी: देहरादून के प्रवेश द्वार पर डाटकाली मंदिर के पास सुरंग का हिस्सा भी इस मार्ग का एक महत्वपूर्ण बिंदु है. यहां वाहन चलाते समय सुरंग में प्रवेश से पहले लाइट चालू करना जरूरी है और सुरंग के अंदर तथा बाहर निकलते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए.

इसके अलावा मोड़ या घुमावदार रास्तों पर ओवरटेक करने से बचने की सख्त सलाह दी गई है. क्योंकि, यह दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन सकता है. जहां-जहां निर्माण कार्य चल रहा है, वहां लगे संकेतों का पालन करना अनिवार्य है. आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी बनाए रखना भी बेहद जरूरी है. ताकि, अचानक ब्रेक लगने की स्थिति में टक्कर से बचा जा सके.

Delhi Dehradun Economic Corridor
दिल्ली-देहरादून एलिवेटेड कॉरिडोर
वन्यजीव संरक्षण और स्वच्छता का रखें ध्यान: चूंकि यह मार्ग जंगल के नजदीक से गुजरता है, तो इसलिए अनावश्यक हॉर्न बजाने से बचने और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशील रहने की अपील की गई है. रात के समय विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है. क्योंकि, उस समय जानवरों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं.

इसके साथ ही सड़क पर कचरा न फेंकने और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की भी सख्त हिदायत दी गई है. ये न केवल पर्यावरण के लिए जरूरी है, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी देहरादून में उद्घाटन मौके पर जनता से यह अपील कर चुके हैं।

इसलिए यात्रियों को हर नियम का पालन करते हुए सतर्कता के साथ सफर करना चाहिए. हम लगातार स्पष्ट संदेश दे रहे हैं कि यदि लोग नियमों का पालन करेंगे तो यह मार्ग न केवल सुरक्षित रहेगा, बल्कि लंबे समय तक लोगों को सुविधा और आनंद प्रदान करता रहेगा.

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