धन्नीपुर. मस्जिद

अयोध्या में अब भव्य नहीं, बेहद छोटी बनेगी मस्जिद ! फंड संकट की वजह से बदलना पड़ा पूरा खाका

अयोध्या में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद धन्नीपुर में प्रस्तावित मस्जिद परियोजना का आकार फंड की भारी कमी और मुस्लिम समुदाय की बेरुखी के चलते छोटा कर दिया गया है. इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) ने भव्य परिसर की मूल योजना को छोड़कर अब केवल एक छोटी मस्जिद बनाने का फैसला किया है.

अयोध्या में अब भव्य नहीं, बेहद छोटी बनेगी मस्जिद ! फंड संकट की वजह से बदलना पड़ा पूरा खाका
अयोध्या विवाद के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत दी गई जमीन पर प्रस्तावित मस्जिद परियोजना को फंड की कमी और मुस्लिम समुदाय की बेरुखी के कारण छोटा कर दिया गया है. इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) के अनुसार, मस्जिद परिसर का निर्माण अब मूल योजना के एक छोटे हिस्से के रूप में ही किया जाएगा. जो परियोजना कभी एक भव्य और विशाल परिसर के रूप में सोची गई थी, वह अब वित्तीय संकट के चलते बेहद सीमित रूप में धरातल पर उतरेगी. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अयोध्या के धन्नीपुर गांव में मुस्लिम समुदाय को 5 एकड़ जमीन आवंटित की गई थी. यह स्थान अयोध्या के राम मंदिर वाली जगह से लगभग 25 किलोमीटर दूर लखनऊ-गोरखपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित है.

फंड की भारी कमी की वजह से लिया फैसला
उत्तर प्रदेश के अयोध्या में पांच एकड़ के भूखंड पर भव्य मस्जिद, 300 बिस्तरों का मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल और एक पुस्तकालय बनाने की मूल योजना तैयार की गई थी. इस पूरी परियोजना के निर्माण के लिए गठित इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) ने अब अपनी मूल योजना को पूरी तरह छोड़ दिया है. आईआईसीएफ के अध्यक्ष जुफर अहमद फारूकी ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से इस पर खुलकर बात की है.

जिसमें फारूकी ने बताया है कि समुदाय में इस परियोजना को लेकर खास रुचि नहीं देखी जा रही है. उम्मीद के मुताबिक चंदा नहीं मिलने के कारण अब पहले से काफी छोटी मस्जिद बनाने का ही फैसला लिया गया है.
बता दें कि मूल खाके के अनुसार, यहां न केवल पारंपरिक मस्जिद का निर्माण नहीं होना था, बल्कि इसे एक जन हितकारी कैंपस के तौर विकसित किया जाना था. इस बड़ी ढांचागत योजना में मुख्य मस्जिद के समानांतर स्थानीय आबादी की स्वास्थ्य जरूरतों को पूरा करने के लिए एक आधुनिक 300 बिस्तरों वाला मल्टी-स्पेशियलिटी अस्पताल, एक समृद्ध केंद्रीय पुस्तकालय, एक सामुदायिक रसोई (कम्युनिटी किचन) और भारत-इस्लामिक सांस्कृतिक अनुसंधान केंद्र स्थापित करने का लक्ष्य रखा गया था. इस पूरी योजना का मुख्य उद्देश्य इस विवादित मुद्दे के निपटारे के बाद परिसर को एक बड़े सामाजिक, शैक्षिक और स्वास्थ्य केंद्र के रूप में स्थापित करना था, जो अब अधर में लटक गया है.
ये भी पढ़ें: धीरज धर्म मित्र अरु नारी… चढ़ावा चोरी पर चंपत राय ने चिट्ठी से तोड़ी चुप्पी

3 से 5 करोड़ रुपये के बजट की जरूरत
फाउंडेशन के सचिव अतहर हुसैन के अनुसार, अब परिसर में केवल एक छोटी मस्जिद का निर्माण किया जाएगा. इस संशोधित योजना के लिए भी लगभग 3 करोड़ से 5 करोड़ रुपये के फंड की आवश्यकता है. हालांकि, फाउंडेशन अब तक केवल 1.5 करोड़ रुपये का चंदा ही जुटा पाया है. यह राशि मूल भव्य परियोजना को पूरा करने के लिए नाकाफी साबित हुई, जिसके कारण ट्रस्ट को अपने कदम पीछे खींचने पड़े.

आपके लिए और..
यूपी में आज से 12 लाख शिक्षकों को कैशलेस इलाज की सुविधा, सीएम योगी वाराणसी से ‘गुरु जी’ को देंगे तोहफा
‘राम को काल्पनिक बताने वाले आज अयोध्या की बात कर रहे हैं’, चित्रकूट में योगी का कांग्रेस पर तीखा वार
कैंसर ने छीना बेटा तो ढाल-बने सास-ससुर, बहू का किया ‘कन्यादान’, भोपाल में भावुक करने देने वाली कहानी
नक्शे की मंजूरी और प्रशासनिक अड़चनों का सामना
परियोजना के समय पर शुरू न हो पाने और बजट से जुड़ी समस्याओं के पीछे केवल चंदे की कमी नहीं, बल्कि प्रशासनिक और तकनीकी अड़चनें भी एक बड़ी वजह रही हैं. इंडो-इस्लामिक कल्चरल फाउंडेशन (IICF) के पदाधिकारियों के अनुसार, अयोध्या विकास प्राधिकरण (ADA) से मस्जिद और पूरे परिसर के नक्शे (मैप) को पास कराने की प्रक्रिया में लंबा वक्त लगा. शुरुआत में इस पांच एकड़ की जमीन के लैंड यूज (भू-उपयोग) को बदलने और फिर विकास शुल्क (डेवलपमेंट चार्ज) के रूप में एक बड़ी राशि जमा करने की तकनीकी बाध्यता सामने आई थी. हालांकि बाद में विकास प्राधिकरण ने इस नक्शे को मंजूरी दे दी, लेकिन तब तक फंड की कमी और डिजाइन में बदलाव की जरूरत के कारण जमीनी काम शुरू नहीं हो सका. अब नए और बेहद छोटे स्वरूप के लिए ट्रस्ट को अपनी प्राथमिकताओं में बड़ा फेरबदल करना पड़ रहा है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *