निराश्रित कुत्ते
भारत में आवारा कुत्तों की देखभाल की जिम्मेदारी किसकी, किस राज्य में कितनी संख्या है, जानें – STRAY DOGS
सुप्रीम कोर्ट के हाल ही में दिल्ली-एनसीआर के सभी आवारा कुत्तों को आश्रय केंद्रों में भेजने के निर्देश के बाद नई बहस छिड़ गई है.
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भारत में आवारा कुत्तों की देखभाल की जिम्मेदारी किसकी, किस राज्य में कितनी संख्या है, जानें
हैदराबाद: सुप्रीम कोर्ट ने 11 अगस्त को अपने एक फैसले में कहा कि भारत में आवारा कुत्तों के काटने की समस्या से निपटना बेहद जरूरी है. साथ ही आवारा कुत्तों की स्थिति को ‘बेहद गंभीर’ बताया. सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) के सभी आवारा कुत्तों को पकड़कर आठ सप्ताह के भीतर समर्पित आश्रयों (नगर निकायों द्वारा स्थापित) में भेजा जाए. इसके बाद पूर्व केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी जैसी पशु अधिकार कार्यकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की आलोचना की और इस कदम को ‘तर्कहीन’ बताया.
सुप्रीम कोर्ट का आदेश आश्रयों की क्षमता, वित्त पोषण, पशु चिकित्सा और कर्मचारियों की जरूरतों, दीर्घकालिक कल्याण और गोद लेने की योजनाओं पर तत्काल व्यावहारिक प्रश्न भी उठाता है. सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि 5000 आवारा कुत्तों के लिए आश्रय स्थल बनाए जाएंगे, और कुत्तों की नसबंदी के लिए पर्याप्त मानव संसाधन भी उपलब्ध होंगे.
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सभी आवारा कुत्तों को कनॉट प्लेस स्थित आश्रय गृह में भेजने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश के खिलाफ पशु प्रेमियों का प्रदर्शन (ANI)
लेकिन यह संख्या बहुत कम है, क्योंकि पशुपालन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, नवंबर 2023 तक दिल्ली में 55,000 से ज्यादा आवारा कुत्ते थे. इसका मतलब है कि आश्रय योजना दिल्ली के बमुश्किल 10 प्रतिशत कुत्तों की देखभाल कर पाएगी.
ऐसे में सवाल उठता है कि आवारा जानवरों की देखभाल की जिम्मेदारी किसकी है? भारत में आवारा कुत्तों की स्थिति क्या है? कुत्तों के काटने से कितनी मौतें होती हैं. आइए एक-एक कर इन सवालों को समझते हैं…
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 246(3)
संविधान के अनुच्छेद 246(3) के तहत, राज्य सरकारें पशुओं के संरक्षण और कल्याण की देखरेख करती हैं, जिसमें बीमारियों की रोकथाम भी शामिल है. अनुच्छेद 243(W) और 246, मुख्य रूप से पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम के माध्यम से, आवारा कुत्तों पर नियंत्रण का दायित्व स्थानीय निकायों को सौंपते हैं. अप्रैल 2025 में जारी एक सरकारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, भारतीय पशु कल्याण बोर्ड (AWBI) ने आवारा कुत्तों की आबादी प्रबंधन, रेबीज उन्मूलन और मानव-कुत्ते संघर्ष को कम करने के लिए संशोधित पशु जन्म नियंत्रण (ABC) मॉड्यूल प्रकाशित किया है.
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आवारा कुत्ते (ANI)
देश में आवारा कुत्तों की स्थिति?
पशुपालन विभाग की नवंबर 2023 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में 1 करोड़ 53 लाख 4 हजार 345 आवारा कुत्ते हैं. यानी आवारा कुत्ते देश की कुल मानव आबादी का लगभग 1% हैं. उत्तर प्रदेश में आवारा कुत्तों की संख्या सबसे ज्यादा (2,059,261) है, दूसरे स्थान पर ओडिशा (1,734,399) और महाराष्ट्र (1,276,399) तीसरे स्थान पर है. इन तीन राज्यों, राजस्थान, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और मध्य प्रदेश सहित सात राज्यों में दस-दस लाख से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं. गुजरात में 9,31,170 कुत्ते हैं.
शीर्ष मेट्रो शहरों में, बेंगलुरु 2.8 लाख कुत्तों के साथ शीर्ष स्थान पर है, इसके बाद दिल्ली (55,462), मुंबई (50,799), चेन्नई (24,827), कोलकाता (21,146) और हैदराबाद (10,553) का स्थान है.
पशुपालन विभाग की इसी रिपोर्ट के अनुसार, मणिपुर, दादरा और नगर हवेली, और लक्षद्वीप में एक भी आवारा कुत्ता नहीं है. मिजोरम में सबसे कम 69 कुत्ते हैं, और उसके बाद नगालैंड में 342 कुत्ते हैं.
शीर्ष 10 राज्य
राज्य आवारा कुत्तों की संख्या
उत्तर प्रदेश 20,59,261
ओडिशा 17,34,399
महाराष्ट्र 12,76,399
राजस्थान 12,75,596
कर्नाटक 11,41,173
पश्चिम बंगाल 11,40,165
मध्य प्रदेश 10,09,076
गुजरात 9,31,170
बिहार 6,96,142
आंध्र प्रदेश 4,71,884
कुत्तों के काटने का खतरा
भारत में कुत्तों द्वारा इंसानों को काटना, उन्हें बुरी तरह घायल करना या यहां तक कि उनकी मौत का कारण बनना एक आम बात हो गई है. 2022 और 2024 के बीच, भारत में कुत्तों के काटने की कुल 89,58,143 घटनाएं दर्ज की गईं. 2022 में, 21.8 लाख कुत्तों के काटने की घटनाएं दर्ज की गई थीं, और यह संख्या लगातार बढ़ती गई, 2023 में 30.5 लाख कुत्तों के काटने की घटनाएं दर्ज की गईं, और 2024 में 37.1 लाख कुत्तों के काटने की घटनाएं दर्ज की गईं, जो 2022 से 2024 तक 45% की वृद्धि दर्शाती हैं.
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आवारा कुत्ते (ANI)
महाराष्ट्र में कुत्तों के काटने की सबसे ज्यादा घटनाएं दर्ज की गईं. 2022-2024 की अवधि में राज्य में 13.5 लाख कुत्तों के काटने के मामले सामने आए. इसके बाद तमिलनाडु 12.8 लाख कुत्तों के काटने की घटनाएं दर्ज की गईं और गुजरात इसी अवधि में 8.4 लाख कुत्तों के काटने के मामले सामने आए. हालांकि, उत्तर प्रदेश में कुत्तों की संख्या सबसे अधिक है, फिर भी इसी अवधि में यहां 5.85 लाख कुत्तों के काटने के मामले दर्ज किए गए.
लद्दाख, मिजोरम, नगालैंड और अंडमान एवं निकोबार में कुत्तों के काटने के मामले 10,000 से भी कम हैं, जबकि केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप एकमात्र ऐसे क्षेत्र है, जहां कुत्तों के काटने का एक भी मामला दर्ज नहीं किया गया है.
शीर्ष 10 राज्य (2022-2024 तक)
राज्य कुत्ते के काटने के मामले
महाराष्ट्र 13,51,155
तमिलनाडु 12,86,658
गुजरात 8,40,737
कर्नाटक 7,57,565
आंध्र प्रदेश 6,49,680
बिहार 6,47,683
उत्तर प्रदेश 5,85,291
तेलंगाना 3,33,935
राजस्थान 3,32,105
ओडिशा 3,25,036
रेबीज से होने वाली मौतें
रेबीज एक घातक बीमारी है जो हाइड्रोफोबिया का कारण बनती है. यह संक्रमित जानवर द्वारा मनुष्यों को काटने या पंजा मारने से फैलती है. हालांकि कई जानवरों से यह बीमारी फैल सकती है, लेकिन वैश्विक स्तर पर, मनुष्यों में रेबीज फैलने का मुख्य कारण कुत्ते माने जाते हैं. अमेरिकी रोग नियंत्रण केंद्र के अनुसार, रेबीज के कारण दुनिया भर में हर साल लगभग 59,000 मौतें होती हैं.
सरकारी रिपोर्ट के अनुसार, 2022-2024 के बीच तीन वर्षों की अवधि में, भारत में कुल 125 लोग रेबीज से मर चुके हैं. 2022-2024 की अवधि में रेबीज से 35 मौतों के साथ महाराष्ट्र इस सूची में सबसे ऊपर है. इसी अवधि में कर्नाटक में रेबीज से 12 मौतें हुईं, उसके बाद मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में 9-9 मौतें हुईं. इसी अवधि में 9 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों में रेबीज से कोई मृत्यु नहीं हुई, जबकि शेष राज्यों में कम से कम एक मृत्यु हुई.
शीर्ष 10 राज्य (2022-2024 तक)
राज्य रेबीज से मौतें
महाराष्ट्र 35
कर्नाटक 12
मध्य प्रदेश 09
तमिलनाडु 09
उत्तर प्रदेश 09
बिहार 06
मणिपुर 06
हिमाचल प्रदेश 05
मेघायल 05
आंध्र प्रदेश 04
