नेपाल में फिर अस्थिरता, बालेन शाह की अनुभवहीनता कि रबी लामिछाने से टकराव?

  • नेपाल में अप्रैल 2026 की स्थिति के अनुसार, बालेन शाह के नेतृत्व वाली नई सरकार के सामने शुरुआती अस्थिरता और कड़ी चुनौतियां हैं। 2025 के ‘GenZ आंदोलन’ और भ्रष्टाचार-विरोधी वादों के साथ सत्ता में आई इस युवा टीम को महीनेभर में ही व्यापक विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।
    नेपाल में मौजूदा अस्थिरता और प्रमुख विवाद (अप्रैल 2026):
    जनता का आक्रोश और विरोध: बालेन शाह सरकार के कुछ फैसलों, विशेष रूप से भारत से आयातित 100 रुपये से अधिक के सामान पर कठोर कस्टम्स ड्यूटी (सीमा शुल्क) और छात्र संघों को प्रतिबंधित करने के प्रयास से काठमांडू सहित अन्य शहरों में व्यापक विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं।
    भ्रष्टाचार के आरोप और गृह मंत्री का इस्तीफा: भ्रष्टाचार के खिलाफ “जीरो टॉलरेंस” के वादे के साथ सरकार बनने के बावजूद, बालेन शाह के मंत्रिमंडल पर ही सवाल उठने लगे हैं। गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने पदभार ग्रहण के 26 दिन बाद ही भ्रष्टाचार और वित्तीय अनियमितता के आरोपों के बीच त्यागपत्र दे दिया।
    अनुभवहीनता पर सवाल: आलोचक इस युवा सरकार को प्रशासन चलाने में ‘अनुभवहीन’ बता रहे हैं, जो भ्रष्टाचार से निपटने के बजाय आंतरिक चुनौतियों और मंत्रियों के इस्तीफे से घिरी हुई है।
    रबी लामिछाने से टकराव/गठबंधन: रबी लामिछाने की ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी’ (RSP) और बालेन शाह ने मिलकर चुनाव लड़ा और 2026 में भारी जीत दर्ज की थी। हालाँकि, लामिछाने पर खुद सहकारी धोखाधड़ी (Cooperative Fraud) के मामले हैं और उन पर संसद में निलंबन की तलवार लटकी है। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं में सत्ता संघर्ष और लामिछाने के विवादास्पद अतीत को लेकर पर्दे के पीछे खींचतान भी है।
    निष्कर्ष:
    बालेन शाह सरकार इस समय अपनी साख बचाने की लड़ाई लड़ रही है। भ्रष्टाचार के खिलाफ जांच (2006 से अब तक) का आदेश देकर उन्होंने बड़े नेताओं को निशाने पर लिया है, वहीं खुद की सरकार के भीतर मंत्रियों के त्यागपत्र से शासन पर सवाल उठ रहे हैं।

Balen Shah Imported Pm Rift With Rabi Lamichhane What People Saying Nepal Political Circles
बालेन शाह इंपोर्टेड पीएम हैं, रवि लामिछाने से खटपट शुरू? नेपाल में भारत को लेकर क्या चल रहा है
नेपाल में बालेन शाह की सरकार एक महीने के भीतर ही स्थायित्व को लेकर संदेहों में घिर चुकी है। दो-दो मंत्रियों को गलत वजहों से बाहर होना पड़ा है। भारत और चीन को लेकर भी इसकी नीतियों पर सवाल उठ रहे हैं।
नई दिल्ली: नेपाल में बालेन शाह की सरकार बने एक महीने भी नहीं हुए हैं। लेकिन, महीने भर के अंदर ही दो-दो मंत्रियों को इस्तीफा देना पड़ा है और वो भी भ्रष्टाचार या भाई-भतीजावाद जैसे आरोपों में। नेपाल की जनता ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) को बहुत बड़ा जनादेश देकर सत्ता में बिठाया है। ऐसे में जेन-जी (Gen-Z) आंदोलन के बाद बनी सरकार के अस्तित्व पर सवालिया निशान लग गया है। नेपाल में मौजूदा राजनीतिक हालात और भविष्य की संभावनाओं पर एनबीटी ऑनलाइन ने काठमांडू के शीर्ष पॉलिटिकल सर्किल में एक सूत्र से खास बात की है, जिन्होंने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं।

नेपाल में महीनेभर में ही हिलने लगी बालेन शाह सरकार

नेपाल में राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी नेता बालेन शाह ने 27 मार्च, 2026 को ही कमान संभाली है। पहले 13वें दिन श्रम मंत्री दीपक कुमार शाह को पत्नी को एक पद दिलाने के आरोपों में अपना पद छोड़ना पड़ा। फिर 26वें दिन में गृहमंत्री सूडान गुरुंग भ्रष्टाचार के आरोपों में त्यागपत्र देने को मजबूर हो गए।

राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में भयंकर मतभेद
सरकार बनते ही ‘राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के प्रमुख रबी लामिछाने और प्रधानमंत्री बालेन शाह में खटपट शुरू हो गई। बालेन शाह को लगता है कि पार्टी को इतना बड़ा बहुमत उनके चेहरे के दम पर मिला है,इसी से रबी लामिछाने कहीं न कहीं उपेक्षित हो रहे हैं।’

इंपोर्टेड पीएम हैं बालेन शाह। वो तो काठमांडू का मेयर बनने की वजह से चेहरा बने। उन्हें तो राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी में बाहर से लाया गया है..। जेन-जी आंदोलन ने भी उन्हें चमकाया। मधेसियों के समर्थन ने राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी को सत्ता दिलाने में बड़ा रोल निभाया।
काठमांडू के टॉप पॉलिटिकल सर्किल से जुड़े सूत्र

बालेन शाह ने बनाया सरकार में दबदबा
उन्होंने बताया कि सत्ता में आने के बाद सरकार बनाने में पूरी तरह से बालेन शाह का दबदबा रहा। रबी लामिछाने के लोगों को मंत्रिमंडल में प्रभावशाली भूमिका नहीं मिली। गृहमंत्री सूडान गुरुंग का इस्तीफा उसी से जुड़ा हुआ है, जो बालेन शाह के आदमी थे। उन्होंने जेन-जी आंदोलन को लेकर भी बड़ा संदेह जाहिर किया है।

नेपाल में हुआ जेन-जी आंदोलन प्रायोजित था। उसमें बालेन शाह की बड़ी भूमिका लग रही है। धीरे-धीरे यह संदेह सही सिद्ध होता लग रहा है। जो भ्रष्टाचार मिटाने के नाम पर आए थे, वे सारे के सारे खुद ही भ्रष्टाचार में घिरते जा रहे हैं। आगे क्या होगा कहना बहुत मुश्किल है। सरकार के पास बड़ा बहुमत तो है। बालेन शाह को नेपाल के लोगों ने ही गद्दी पर बिठाया है, इसके आगे क्या होगा, सरकार की स्थिरता कितने दिन रह पाएगी, कह नहीं सकते।
काठमांडू के टॉप पॉलिटिकल सर्किल से जुड़े सूत्र

भारत को लेकर नेपाल में क्या चल रहा है
इसके अलावा उन्होंने भारत-नेपाल के संबंधों को लेकर मौजूदा सरकार के कार्यकाल में उठाए जा रहे कदमों पर भी सवाल उठाए हैं।
भारत को लेकर नेपाल में एक नया नियम बनाया गया है कि भारत से खरीदे जाने वाले 100 नेपाली रुपये से ज्यादा कीमत वाले सामानों पर कस्टम ड्यूटी लगेगी।
सूत्र के अनुसार सीमावर्ती इलाकों में इसको लेकर सरकार के प्रति बहुत जल्दी भरोसा उठने लगा है। लोग यह सोच रहे हैं कि बालेन शाह की सरकार बनाकर बहुत बड़ी गलती कर दी।
नेपाल और भारत के सीमावर्ती इलाकों के लोगों में रोटी-बेटी का संबंध है, लेकिन मौजूदा व्यवस्था से बॉर्डर इलाके में अशांति का माहौल बन रहा है।
सूत्र के अनुसार नेपाल में जेन-जी आंदोलन से लेकर अभी तक की परिस्थितियों के बारे में भारतीय एजेंसियों को जरूर सबकुछ जानकारी होगी, लेकिन वह अबतक शांत क्यों हैं, यह भी हैरानी वाली बात है।

नेपाल से किस बात पर चिढ़ा है चीन?
उन्होंने बताया कि तिब्बत वाले मुद्दे पर चीन पहले से ही इस सरकार से चिढ़ा हुआ बैठा है।
गृहमंत्री सूडान गुरुंग भी तिब्बत के अधिकारों के पैरोकार रहे हैं और उनकी जिस तरह से कुर्सी गई है, उसमें वह वाला दृष्टिकोण भी शामिल हो गया है।

Balen Shah Is Inexperienced Indian Experts Says After Two Ministers Resign Within Month
नेपाल प्रधानमंत्री बालेन शाह अनुभवहीन: एक महीने में दो मंत्रियों के त्यागपत्र पर विशेषज्ञ बोले- छवि खराब हुई
नेपाल में एक महीने में दो मंत्रियों के त्यागपत्र बाद प्रधानमंत्री बालेन शाह पर सवाल उठ रहे हैं। दो भारतीय विशेषज्ञों ने इसे बालेन शाह की अनुभवहीनता से जोड़ा है।ताजा त्यागपत्र  नेपाल के गृहमंत्री सुदन गुरुंग का है। इससे पहले नेपाल के श्रम, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीप कुमार साह हटाये जा चुके हैं।

नेपाल के गृह मंत्री सुदन गुरुंग ने अपने कार्यकाल के दौरान वित्तीय आचरण से संबंधित आरोपों के बाद त्यागपत्र दे दिया। गुरुंग का त्यागपत्र एक विवादास्पद व्यवसायी से उनके कथित व्यापारिक संबंधों और शेयरों के लेन-देन को लेकर बढ़ती आलोचनाओं के बीच आया है। उन्हें 27 मार्च को गृह मंत्री नियुक्त किया गया था। इससे पहले बालेन शाह ने पद का दुरुपयोग कर पत्नी को लाभ पहुंचाने के आरोप में श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीप कुमार साह को हटा दिया था। इस बीच विशेषज्ञों का कहना है कि एक महीने पहले गठित सरकार में दो मंत्रियों के भ्रष्टाचार के आरोप में इस्तीफे ने पीएम बालेन शाह की छवि को नुकसान पहुंचाया है।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह

ब्रह्मा चेलानी ने बालेन शाह पर साधा निशाना

भारतीय कूटनीतिक विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी ने एक्स पर लिखा, “नेपाल सरकार की भ्रष्टाचार-विरोधी छवि को झटका: 27 मार्च को सत्ता संभालने के बाद से, प्रधानमंत्री बालेन्द्र “बालेन” शाह के नेतृत्व वाली नेपाल की नई सरकार को शुरुआती “बढ़ती चुनौतियों” और बाधाओं का सामना करना पड़ा है। आज गृह मंत्री सुदन गुरुंग का इस्तीफा इस नई सरकार के लिए एक बड़ा झटका है। जिस सरकार ने भ्रष्टाचार के प्रति “जीरो टॉलरेंस” के वादे पर भारी जीत हासिल की थी, उसके गृह मंत्री — जो कानून-व्यवस्था के प्रमुख होते हैं — का मनी-लॉन्ड्रिंग के एक संदिग्ध व्यक्ति से वित्तीय संबंधों के चलते इस्तीफा देना, उसकी नैतिक साख को गंभीर नुकसान पहुंचाता है।”

बालेन शाह की अनुभवहीनता पर व्यंग्य 

वहीं,IDSA की कार्यकारी परिषद के पूर्व सदस्य और जेएनयू-बीएचयू समेत कई विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर रह चुके सुख देव मुनि ने एक्स पर लिखा, “मात्र 35 दिनों के भीतर, नेपाली प्रधानमंत्री बालेन को अपने दो मंत्रियों को विदा करना पड़ा। यह उनके सहयोगियों के चयन में उनकी अनुभवहीनता को उजागर करता है। योग्य और सक्षम उम्मीदवारों के वादे से परे जाकर, उन्होंने ऐसे कैबिनेट सहयोगियों को चुना जो उनके पसंदीदा और उनके इशारों पर चलने वाले थे।”

सुदन गुरुंग ने इस्तीफे को लेकर क्या कहा

सुदन गुरुंग ने सोशल मीडिया पर पोस्ट में लिखा कि उन्होंने अपने वित्तीय आचरण से संबंधित मामलों की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और पद पर रहते हितों का टकराव टालने को पद से त्यागपत्र दे दिया है। उन्होंने कहा, “मेरे लिए, पद से बढ़कर नैतिकता है, और जनविश्वास से बड़ी कोई शक्ति नहीं है। देश में ‘Gen-Z’ आंदोलन, जो सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहा है, ने भी यही संदेश दिया है कि सार्वजनिक जीवन स्वच्छ होना चाहिए और नेतृत्व जवाबदेह होना चाहिए।” गुरुंग ने फेसबुक पर एक पोस्ट में लिखा “अगर कोई मेरे 46 भाइयों और बहनों के खून और बलिदान से बनी सरकार पर सवाल उठाता है, तो उसका जवाब नैतिकता है।”

दीप कुमार साह पर क्या आरोप थे

नेपाल के पूर्व श्रम, रोजगार एवं सामाजिक सुरक्षा मंत्री दीप कुमार साह पर आरोप था कि उन्होंने अपनी पत्नी का कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद उन्हें स्वास्थ्य बीमा बोर्ड में सदस्य के रूप में पुनर्नियुक्त कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। आरएसपी अध्यक्ष रवि लामिछाने ने साह के खिलाफ कार्रवाई को कहा था। साह को हटा प्रधानमंत्री बालेन शाह ने श्रम मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार अपने पास ले लिया है।

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