पंकज पचौरी को लेटरल एंट्री के जरिए केंद्रीय सचिव रैंक का दर्जा देकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का ओएसडी (कम्युनिकेशन संचार और मीडिया) बनाया गया था

दोगलपंथी क्या होती है ये देखिए

आप लोग इन्हें पहचानते हैं कि भूल गए??
यह पंकज पचौरी हैं।

जब एनडीटीवी वामपंथियों का जीबी रोड कोठा हुआ करता था तब यह उस कोठे में मुख्य तबला वादक, यानी मुख्य संपादक थे।

जो कांग्रेस और राहुल गांधी आज लेटरल एंट्री की विरोध कर रहे हैं तो इन पंकज पचौरी को लेटरल एंट्री के जरिए केंद्रीय सचिव रैंक का दर्जा देकर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का ओएसडी (कम्युनिकेशन संचार और मीडिया) बना दिया गया।

जबकि पंकज पचौरी ना भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी थे ना कभी सिविल सर्विस दिए थे।

और पंकज पचौरी की लैटरल एंट्री के लिए कानून में यह बदलाव किया गया कि जिस पोस्ट पर पंकज पचौरी को लाया गया उसके लिए एक योग्यता थी कि वह सिविल सर्विस पास किया हो यानी भारतीय सूचना सेवा का अधिकारी हो या फिर किसी मुख्यमंत्री का 10 साल मीडिया संचार और सूचना प्रभारी रहा हो।

लेकिन पंकज पचौरी के लिए सारे नियम हटा दिए गए और इन्हें सिर्फ इसलिए प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह का OSD नियुक्त कर दिया गया क्योंकि यह एनडीटीवी के कोठे में तबला बजाते थे और ग्राहक भी खोजते थे।

इनका मुख्य काम यह था कि भारत का चैनल कौन सी खबर दिखाएगी यह पंकज पचौरी निर्धारित करते थे।

उसके बाद इन्होंने यह काम किया कि उस वक्त जब हर रोज लाखों, हजारों, सैकड़ों करोड़ के घोटाले सामने आते थे और हर एक नया घोटाला पुराने वाले घोटाले से 10 गुना ज्यादा बड़ा होता था तब लोग पीएमओ के ट्विटर हैंडल पर सवाल पूछने लगे।

फिर इन्होंने चुन-चुन कर सारे हैंडल  ब्लॉक करने शुरू कर दिये।

उसके बाद इन्होंने एक गुजरात हाई कोर्ट के वकील को भी ब्लॉक किया।

वह वकील गुजरात हाई कोर्ट गया।

फिर गुजरात हाई कोर्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय के तरफ से उस वक्त अभिषेक मनु सिंघवी आए। उन्होंने बड़ी दलीलें दी । हाईकोर्ट ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति सेक्सुअल हैरेसमेंट कर रहा है, गंदे सवाल पूछ रहा है तब आप उस पर कानूनी कार्रवाई करिए, लेकिन यदि कोई आपसे घोटाले के बारे में सवाल पूछ रहा है तो आप उसे ब्लॉक नहीं कर सकते।

पीएमओ का ट्विटर हैंडल निजी प्रॉपर्टी नहीं है । वह भारत के नागरिकों के लिए बना है और उन्होंने सारे ब्लॉक ट्विटर हैंडल का ब्लॉक खोलने का आदेश दिया।

आज राहुल गांधी लैटरल एंट्री का विरोध कर रहे है।

आपको पता होगा कि डॉक्टर मनमोहन सिंह सरकार के ऊपर सोनिया गांधी का एक नेशनल एडवाइजरी काउंसिल NAC बनाई गई थी।

NAC क्या था?

उसके सभी सदस्यों को कैबिनेट सचिव रैंक दिया गया था, सबको दिल्ली में आवास दिए गए थे, सबको 10 लाख रुपए सैलरी, अन्य भत्ते व फ्लाइट का भाड़ा सब कुछ दिया गया था।

और उस नेशनल एडवाइजरी काउंसिल में दुनिया भर के छटेले लुख्खे लुख्खी वामपंथी माओवादी थे जैसे हर्ष मन्दर, तीस्ता सेतलवाड, शबनम हाशमी, योगेंद्र यादव, मिहिर शाहन, फराह नकवी, ज्यां द्रेज, हर्ष, माधव गाडगिल, अरुणा रॉय, अनु आगा और मिराई चटर्जी जैसे लोग थे।

सोनिया गांधी को नेशनल एडवाइजरी काउंसिल का अध्यक्ष बना कर उन्हें केंद्रीय कैबिनेट मंत्री का दर्जा दे दिया गया था और इसके सभी सदस्यों को कैबिनेट सचिव का दर्जा दे दिया गया था।

भारत सरकार के कैबिनेट से पारित किया गया कोई भी कानून बिना इस नेशनल एडवाइजरी काउंसिल के अनुमोदन के लागू नहीं हो सकता था।

लोगों को याद होगा ,राहुल गांधी ने डॉक्टर मनमोहन सिंह सरकार के एक ऑर्डिनेंस को मंच से फाड़ दिया था।

और आज दोगले कांग्रेसी और प्रपंची राहुल गांधी लैटरल एंट्री का विरोध कर रहे हैं।
–साभार

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