दून,अलीगढ,उन्नाव:प्रेमियों के लिए पतियों की हत्यायें लेकिन….
हेमलता ने प्रेमी गुफरान के साथ मिलकर की थी पति की हत्या पुलिस का अनावरण !
-पुलिस की जानकारी अनुसार-पत्नी ने अपने प्रेमी से मिलकर रची थी पति की हत्या का षडयंत्र*
*हत्या बाद पुलिस उलझाने को पत्नी ने थाने पर लिखाई थी पति लापता होने की सूचना*
*घटना के संदिग्ध लगने पर घटना के हर पक्ष पर गहनता से जांच के दिये थे निर्देश*
*जांच में मृतक की पत्नी का उसके पडोस में रहने वाले व्यक्ति से प्रेम प्रसंग की मिली जानकारी*
*प्रेमी को पकड़ कठोर पूछताछ में प्रेमी ने उगले सारे रहस्य*
*पति को प्रेम प्रसंग पता चलने पर पत्नी के प्रेमी ने कर दी थी हत्या*
*मृतक को शराब पिलाने नदी किनारे ले गया था अभियुक्त*
*चूहे मारने की दवा मिली शराब पिलाई थी मृतक को, ज्यादा नशा होने पर मृतक का मुंह नदी में डुबोकर की हत्या*
*कोतवाली डोईवाला*पहली जुलाई 2025 हेमलता (पत्नी नरेंद्र सिंह निवासी उज्जवल कॉलोनी बालावाला गूलर घाटी रोड डोईवाला देहरादून ने थाना डोईवाला पर सूचना दी कि उनके पति नरेंद्र सिंह
28 जून 2025 को घर से बिना बताए कहीं चले गए हैं। उन्हे काफी जगह तलाश किया गया मगर कोई जानकारी नहीं मिल पाई। प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना डोईवाला पर गुमशुदगी संख्या 40/25 पंजीकृत कर नरेन्द्र सिंह की तलाश प्रारंभ की गई।
गुमशुदगी की जांच में ही पहली जुलाई 2025 को डोईवाला क्षेत्रान्तर्गत गूलर घाटी नदी में एक अज्ञात शव मिला, जिसकी पुलिस ने पहचान कराई तो शव नरेंद्र सिंह का निकला। मृतक नरेंद्र सिंह की मृत्यु संदिग्ध लगी तो डोईवाला पुलिस ने गहन जांच प्रारंभ की तथा मृतक के घर व घटनास्थल के आसपास आने-जाने वाले मार्गाें पर लगे सीसीटीवी कैमरों व मृतक के मोबाइल की लोकेशन, कॉल डिटेल की छानबीन की।
प्रारंभिक जांच में मृतक के पडोसी गुफरान ( पुत्र इस्लाम निवासी नकरौंदा, थाना डोईवाला, देहरादून ) की भूमिका घटना में संदिग्ध मिली, घटना की विस्तृत जांच और पडोसियों के बयानों से पुलिस को गुफरान का मृतक की पत्नी हेमलता से संबंध तथा इसे लेकर नरेंद्र तथा उसकी पत्नी हेमलता में अकसर लडाई झगडा पता चला। इस संदेह में पुलिस ने गुफरान को बुलाकर उससे कठोरता से पूछा तो उसने नरेन्द्र की पत्नी के साथ योजनापूर्वक नरेन्द्र की हत्या स्वीकार कर ली । पुलिस ने गुफरान से पूछताछ के आधार पर हेमलता को गिरफ्तार किया गया। घटना के सम्बन्ध में थाना डोईवाला पर मुकदमा अपराध संख्या: 186/25 धारा 103(1)/238 /61(2) बीएनएस का अभियोग पंजीकृत किया गया। दोनो अभियुक्तो को न्यायालय में प्रस्तुत कर जेल भेजा गया।
*पूछताछ का विवरण:-*
पूछताछ में गुफरान ने बताया कि उसके मृतक नरेन्द्र की पत्नी हेमलता से संबंध थे, जिसका नरेंद्र को पता चल गया । वह अक्सर शराब के नशे में इसे ले पत्नी पीटता था। इससे मृतक की पत्नी हेमलता परेशान थी, उसने गुफरान से रोना रोया तो उन दोनों ने नरेन्द्र को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।
योजनानुसार 28 जून को गुफरान ने नरेन्द्र को बात करने शराब पर गूलरघाटी नदी बुलाया तथा नरेन्द्र को चूहे मारने की दवा मिली शराब पिला दी। नरेन्द्र नशे में नदी में गिर गया तो गुफरान ने नरेन्द्र का सर पकडकर नदी के पानी में डुबोकर हत्या कर दी तथा शव नदी में फेंक दिया। योजनानुसार तीन दिन बाद मृतक की पत्नी हेमलता ने कोतवाली डोईवाला पर मृतक की गुमशुदगी लिखवा दी ताकि मृतक का शव मिलने पर भी उन पर किसी का शक न जाये।
*विवरण अभियुक्त:-*
1- हेमलता (पत्नी नरेन्द्र सिंह निवासी उज्जवल कॉलोनी, गूलर घाटी रोड, बालावाला, देहरादून, उम्र 35 वर्ष)
2- गुफरान (पुत्र इस्लाम निवासी नकरौंदा, थाना डोईवाला, देहरादून)
*पुलिस टीम 😗
01- निरीक्षक कमल कुमार लुंठी, प्रभारी कोतवाली डोईवाला
02- वरिष्ठ उपनिरीक्षक विनोद सिंह राणा, कोतवाली डोईवाला
03- उपनिरीक्षक रघुवीर कपरवाण, चौकी प्रभारी हर्रावाला
04- महिला उपनिरीक्षक भावना
05- अतिरिक्त उपनिरीक्षक प्रेम सिंह बिष्ट
06- कांस्टेबल दिनेश रावत
07- कांस्टेबल रविंद्र टम्टा
08- कांस्टेबल तरुण चौहान
09- कांस्टेबल सुरेंद्र सिंह
10- कांस्टेबल सलेकचंद
11- कांस्टेबल सुमित कुमार
12- महिला कांस्टेबल बबीता
चरस पिलाई… फिर चाकू से काट दी गर्दन, प्रेमी से कराया पति का कत्ल; शीबा ने खुद सुनाई पूरी कहानी
उन्नाव में शौक पूरे न कर पाने पर पत्नी ने ई-रिक्शा चालक पति की प्रेमी और उसके दोस्त से हत्या करवा दी। दो दिन बाद शव सिल्ट भरे नाले में मिला । पुलिस ने मामले में चौंकाने वाली बातें बताई है।
उत्तर प्रदेश के उन्नाव से एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां एक महिला ने अपनी पति की हत्या प्रेमी और उसके दोस्त से करा दी। पति दोनों के संबंधों में बाधा बन रहा था, साथ ही वह उसके शौक पूरे नहीं कर पा रहा था।
हत्याकांड योजनापूर्वक किया गया। हत्या बाद शव नाले में फेंक दिया। पुलिस ने मामले में मृतक की पत्नी और प्रेमी पकड़ लिये है। प्रेमी के दोस्त की तलाश जारी है।
घटनास्थल पर जांच करती पुलिस
घर से पांच किलोमीटर दूर ई-रिक्शा चालक की हत्या
जानकारी के अनुसार, गंगाघाट कोतवाली के मोहल्ला अखलाक नगर निवासी ई-रिक्शा चालक इमरान उर्फ काले की छह जुलाई की घर से पांच किमी दूर अचलगंज थाना क्षेत्र में हत्या कर दी गई थी। सात जुलाई को अचलगंज थाना क्षेत्र में हाईवे किनारे नाले की पुलिया पर लोगों ने खून फैला देखा तो शक हुआ। पुलिस ने जांच की तो सिल्ट भरे नाले में शव मिला था।
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी पत्नी और उसका प्रेमी
कॉल डिटेल से हत्याकांड खुला
मृतक और उसकी पत्नी शीबा के फोन की कॉल डिटेल निकलवाई तो एक के बाद एक परतें खुलने लगीं। थानाध्यक्ष राजेश पाठक ने बताया कि मृतक इमरान के मोहल्ले से पता चला कि छह जुलाई की रात नौ बजे तुरकिया बदरका निवासी फरमान उर्फ चुन्ना अपने मोहल्ले के साथी रफीक के साथ इमरान को अपनी बाइक से कर्मी बिजलामऊ की ओर जाते देखा गया था।
नाले में शव की तलाश करते हुए
तीन साल पहले शीबा ने इमरान से की थी दूसरी शादी
मृतक के बड़े भाई सलमान ने पूछताछ के दौरान बहू शीबा पर शक जताया तो पुलिस ने उस दिशा में जांच शुरू की। पता चला कि शीबा पहले से शादीशुदा थी। तीन साल पहले शीबा ने इमरान से दूसरी शादी की थी, दोनों के एक बेटी है। भाई ने 18 जून को सऊदी अरब से लौटे फरमान के शीबा के घर आने-जाने की जानकारी दी।
घटनास्थल जांचती पुलिस
प्रेमी से रोज घंटों बात करती थी शीबा
पुलिस ने शीबा से पूछताछ शुरू की तो वह पहले गुमराह करने का प्रयास करती रही। बाद में सर्विलांस की मदद से जब शीबा और फरमान के बीच रोज घंटों बातचीत की पुष्टि हुई तो पुलिस ने फरमान को उठाया और पूछताछ में घटना की सच्चाई सामने आ
Aligarh murder case During firing wife screamed that her husband should not survive today
अलीगढ़ में प्रेमी से मरवा डाला पति: ‘जितनी गोली मारनी है मार…बचने न पाए’, प्रेमी से चिल्लाकर बोली बीवी; खुली कई बातें
पत्नी के विवाहेत्तर संबंधों की जानकारी सुरेश को लंबे समय से थी। कई बार पंचायत तक हुई। बात थाने गई। मामले में खुद पति ने हत्यारोपी मनोज के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी। मगर खुद महिला ने अपने प्रेमी का पक्ष लिया, इसलिए पुलिस उस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकी।
विलाप करती बच्ची और हत्यारोपी महिला और मृतक की फाइल
उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ के बरला में सुरेश हत्याकांड को लेकर नया खुलासा हुआ है। मामले में सीओ बरला गर्वित सिंह के अनुसार पति सुरेश की हत्या से पहले बीना और उसके प्रेमी दोनों में फोन पर लगातार बातचीत भी हो रही थी। बीना अपने पति की लोकेशन मनोज को बता रही थी। घटना से पहले बीना ने ही पति को घर के बाहर बैठने भेजा था। मृतक के भाई विजय जब गोली की आवाज सुनकर दौड़कर आए तो बीना मनोज से कह रही थी कि ‘जितनी गोली मारनी है मार, मगर आज बचने न पाए।’
पत्नी को अंत तक निभाता रहा पति सुरेश
ये सब आठ साल से चल रहा था, मगर पति बेवफा के इस रिश्ते को सिर्फ बच्चों की खातिर निभा रहा था। यह सच घटना के बाद बृहस्पतिवार शाम तक चली पुलिस जांच में उजागर हुआ। आरोपी के मोबाइल में दोनों के आपत्तिजनक वीडियो फोटो देख खुद पुलिस अधिकारी दंग रह गए। पुलिस मुकदमे की मजबूती के लिए इन साक्ष्यों को विवेचना में शामिल करेगी।
पत्नी के विवाहेत्तर संबंधों की जानकारी सुरेश को लंबे समय से थी। कई बार पंचायत तक हुई। बात थाने गई। मामले में खुद पति ने हत्यारोपी मनोज के खिलाफ लिखित शिकायत दी थी। मगर खुद महिला ने अपने प्रेमी का पक्ष लिया, इसलिए पुलिस उस शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं कर सकी।
अगर, कार्रवाई की होती तो शायद हत्या तक बात न पहुंचती, मगर इतने के बावजूद सुरेश अपनी पत्नी को सिर्फ बच्चों की परवरिश की खातिर निभाता रहा। महिला ने तो उसे रास्ते से हटाने की ही ठान रखी थी। एसपी देहात अमृत जैन बताते हैं कि आरोपी के मोबाइल में दोनों के आपत्तिजनक वीडियो-फोटो भी मिले हैं। उन्हें देखकर उजागर हुआ है कि दोनों लंबे समय से इस प्रेम संबंध में थे।
साथ में यह भी देखा जाएगा कि इस षडयंत्र में कोई अन्य तो शामिल नहीं था, उसे भी विवेचना में उजागर होने पर आरोपित बनाया जा सकता है। फिलहाल हत्या व हमले की धारा में मुकदमा लिखा गया है। दोनों को शुक्रवार को जेल भेजा जाएगा।
छोटे भाई के अपराध पर परिवार में चुप्पी
आरोपी मनोज अपने परिवार में दो भाइयों में छोटा है। वह बड़े भाई के साथ घर में रहता था। हत्या बाद परिवार पूरी तरह चुप्पी साधे है। पुलिस पहुंची तो आरोपित के परिवार से भी बातचीत की। इसके बाद न तो परिवार घर से बाहर आया, न वह किसी भी बहाने से थाने पहुंचकर मनोज का हाल चाल लेने आया।
आठ से धोखा दे रही थी पत्नी बीना
पत्नी के प्रेम संबंधों में बाधा बने पति सुरेश की बीना ने गोली मारकर हत्या करा दी। बीना आठ साल से अपने पति को धोखा दे रही थी। पति दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड था। हफ्ते – दस दिन में घर आता था। तीन बच्चों की मां बीना की दीवानगी यहां तक थी कि वह अपने से छह वर्ष छोटे प्रेमी को मिलने बुलाती तो बच्चों व पति को खाने में नींद की गोलियां खिला सुला देती थी। यह पिता की हत्या बाद स्कूल से थाने पहुंचे तीनों बच्चों ने पुलिस से कही। यहां तक कहा कि मां को जेल भेज दो।
कस्बे के मोहल्ला कोठी के स्वर्गीय गोविंद राय के दो बेटों में बड़ा विजय गांव में रहकर मजदूरी करता है। घर के ही बगल में सुरेश सपरिवार रहता था। उसकी शादी फिरोजाबाद के रैपुरा क्षेत्र के बीच का नगला की 30 वर्षीय बीना से 12 वर्ष पहले हुई। तीन बच्चे 10 वर्षीय नीतेश, 8 वर्षीय पुनीत व 6 वर्षीय रोशनी हुए। सुरेश दिल्ली से सप्ताह-दस दिन में छुट्टी लेकर परिवार से मिलने आता। पुलिस के अनुसार बीना के प्रेम संबंध घर से 20 मीटर दूर दुकानदार मनोज से हो गए। पड़ोसी होने से मनोज भी उसके घर आने लगा।
पत्नी को समझाने का प्रयास, लेकिन नहीं मानी
इस तरह की प्रेम कहानी छुपती नही । बीना व मनोज की प्रेम कहानी मोहल्ले से लेकर कस्बे तक में चर्चित हो गई। सुरेश दिल्ली से आया तो उसने पत्नी को समझाने का प्रयास किया। मगर वह नहीं मानी। सामाजिक दबाव बनाने को गांव में पंचायतें कराई गईं।
तीन बार की पंचायत में दोनों को अलग रहने को कहा गया। मगर वे कस्बे से बाहर या फिर रात के अंधेरे में गुपचुप मिलने लगे। जब सुरेश नहीं होता, तब भी या सुरेश घर पर होता था तब भी दोनों मिलते । परिवार को खाने में नींद की गोलियां खिलाकर बीना समय से ही सुला देती थी।
दोनों को पुलिस ने एक होटल में भी दबोचा था
पुलिस उपाधीक्षक गर्वित सिंह के अनुसार जांच में पता चला कि गांव में पंचायत की पाबंदियों के बीच एक बार इन दोनों को अलीगढ़ के एक होटल में पुलिस ने दबोचा था। तब महिला ही पुलिस से इसे यह कहकर बचाकर लाई कि वह अपने काम से लेकर आई थी। इसी तरह एक बार दोनों दिल्ली में पकड़े गए। वहां से भी पुलिस से बचाकर लाई। चार माह पहले भी दोनों गांव में आपत्तिजनक अवस्था में पकड़े गये। तब पुलिस पहुंची। मनोज को पकडक़र थाने लाया गया। मगर वह मनोज के पक्ष में बयान देकर उसे छुड़वाकर लाई। इससे पहले भी दो बार ऐसा हुआ।
अलीगढ़ में पत्नी के प्रेम संबंधों में बाधा बन रहे सुरेश (32 वर्ष) की गोली मारकर हत्या कर दी गई। हत्या उसकी पत्नी बीना के इशारे पर उसके प्रेमी मनोज ने की। आरोपित तमंचा लेकर थाने जा पहुंचा और आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने बीना को भी पकड़ लिया। दोनों ने हत्या मान ली ।
पुलिस क्षेत्राधिकारी बरला गर्वित सिंह के अनुसार मोहल्ला कोठी का सुरेश दिल्ली में सिक्योरिटी गार्ड था। उसकी पत्नी बीना तीन बच्चे लेकर गांव में ही रहती थी। परिजन ने बताया कि आठ वर्ष पहले सुरेश की पत्नी के पड़ोसी परचून दुकानदार अविवाहित युवक मनोज से संबंध हो गए। इन संबंधों का सुरेश व उसके पूरे परिवार ने विरोध किया।
मगर बीना व मनोज ने साथ रहने की ठान ली। तीन दिन पहले सुरेश दिल्ली से गांव आया। वापस जाने की तैयारी में सुरेश सुबह घर के चबूतरे पर बैठकर मोबाइल देख रहा था। तभी मनोज ने उसके सीने में तमंचे से गोली मार दी। सुरेश के बड़े भाई विजय ने मनोज को लोहे का बाट मारने की कोशिश की। मनोज ने उन पर भी फायर कर दिया। कान पर छर्रे लगने से वह घायल हो गए।
बच्चे जबरन स्कूल भेजे
बीना ने हत्या की प्लानिंग में ही बच्चे खुद तैयार कर स्कूल भेजे थे। हालांकि बच्चों ने बारिश व पिता के दिल्ली जाने की बात कहकर स्कूल न जाने की जिद की थी। मगर मां ने जबरन तीनों बच्चे स्कूल भेज दिए। तब ये हत्या हुई। पुलिस पूछताछ में बीना ने बताया कि बच्चे कह रहे थे कि आज दोपहर पापा चले जाएंगे। हम दोपहर तक उनके साथ रहेंगे। आज स्कूल की छुट्टी कर लेते हैं। लेकिन बीना ने जबरन भेज दिया था।
दोनों ने सुरेश की हत्या के लिए बनाए थे दो प्लान
पति रास्ते से हटाने को बीना ने अपने प्रेमी मनोज संग मिलकर जो षडयंत्र रचा, सुनकर खुद पुलिस के होश उड़ गए। एसपीआरए अमृत जैन ने बताया कि दोनों ने सुरेश की हत्या को दो प्लान बनाए थे। पहले रात को नींद में गला दबाकर हत्या की योजना थी। इसमें सफल नहीं हो सके तो बीना ने मनोज को तमंचा दे कहा कि सुरेश को मार कर ही अपनी शक्ल दिखाना। यहां तक कहा कि इतनी गोली मारना कि बचने न पाए। पूछताछ में मनोज ने यह स्वीकार किया है।
आरोपित मनोज 9-30 पर तमंचा लेकर थाने पहुंच गया था। यहां उसने अपना अपराध स्वीकारा। कुछ देर बाद ही पुलिस ने बीना भी पकड ली । घटनास्थल से साक्ष्य संकलन प्रक्रिया के बाद दोनों से थाने पर पूछताछ हुई। पूछताछ में दोनों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने प्लान बनाया था कि अबकी छुट्टी पर आए सुरेश को जिंदा दिल्ली नहीं जाने देना है।
उनका प्लान था कि पहले रात में खाने में नींद की गोलियां देकर सुरेश को नशा करायेंगें। फिर रात में उसकी गला दबाकर हत्या करेंगें। मगर वह प्लान सफल नहीं हो पाया था। तब बीना ने तमंचे का इंतजाम कर मनोज को थमा दिया था।
पति हत्या की हर घटना ‘ट्रेंड’ क्यों बनती है? इस एकतरफ़ा विमर्श को कैसे समझें
सोनम रघुवंशी
Raghuvanshi family
इमेज कैप्शन,मध्य प्रदेश के राजा रघुवंशी की हत्या का आरोप उनकी पत्नी सोनम रघुवंशी पर लगा (फ़ाइल फ़ोटो)
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आजकल अक्सर सुनाई देता है कि स्त्रियों के हाथों पुरुषों के हाथों ख़तरे में है. ख़ासकर ऐसा तब-तब होता दिख रहा है, जब-जब किसी पुरुष की हत्या में उसकी पत्नी या साथी का हाथ होने का संदेह होता है. पिछले कुछ महीनों में ही ऐसी कई ख़बरें सामने आई हैं. देखते ही देखते ये ख़बर माध्यमों और सोशल मीडिया में छा गईं.
ऐसी ख़बरों से ऐसा वातावरण बन जाता है, मानो हर तरफ़, हर स्त्री अपने पति या साथी की हत्या करने की ताक में है.
कुछ घटनाएँ याद करें. एक पुरुष का शव किसी नीले ड्रम में मिला. तो किसी की हत्या शादी के कुछ दिनों बाद ही ख़ास जगह पर ले जाकर कर दी गई. या कहीं दावा किया गया कि किसी पुरुष को पत्नी ने शादी के बाद पहली ही रात में चाकू से धमका दिया.
इसके बाद इन घटनाओं को तरह-तरह के विशेषण हुआ. सोशल मीडिया पर दसियों पोस्ट या वीडियो आ गए. ये वीडियो घटना की गंभीरता बताने को नहीं बल्कि मज़ाहिया ज़्यादा थे.
कुछ महीने पहले उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत की हत्या हुई थी, सौरभ के शव को इसी नीले ड्रम में रखा गया था
फिर तो नीला ड्रम किसी पति को डराने का सामान बन गया. कई वीडियो और पोस्ट तो यही दिखाने के लिए सामने आए. यही नहीं, इससे ऐसा बताने की कोशिश की गई कि हर पत्नी धमका रही है और हर पति डरा-सहमा है.
हालाँकि, इनसे कोई डरा भले न हो, हँसा ज़रूर… क्योंकि ये चुटकुले ही थे. इसलिए इन पर गंभीर चर्चा होने की बजाय सतही तू-तू, मैं-मैं ज़्यादा हुई.
यही नहीं, ऐसा लगा मानो महिलाओं के ख़िलाफ़ बात करने का एक मज़बूत आधार मिल गया. कुछ लोग तो इस लहज़े में बात करते नज़र आए, देखिए हम कहते थे न.. महिलाएँ ऐसी ही होती हैं.
लेकिन क्या मामला इतना ही सीधा है? राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) और दूसरे स्रोतों से मिले आँकड़े यही बताते हैं कि हर उम्र में स्त्रियों को स्त्री होने की वजह से हिंसा झेलनी पड़ती है.. क्या मर्दों के साथ ऐसा होता है? नहीं न.
तो इससे एक और बात साफ़ हुई. हमारे घर-परिवार-समाज में स्त्रियों के साथ हिंसा सामान्य बना दी गई है. इसलिए उस पर तब तक नज़र नहीं जाती जब तक उसमें कुछ असमान्य या ख़ास न हुआ हो. वीभत्स न हो.
लेकिन मर्दों के साथ हिंसा चूँकि आम नहीं है, इसलिए छोटी-बड़ी हर घटना, बड़ी बनाकर पेश की जाती है. मानो पुरुष जाति का अस्तित्व ही ख़तरे में पड़ गया है.
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जी, महिलाएँ भी हिंसा करती हैं
ग्रीष्माइमेज स्रोत,BBC Tamil
इमेज कैप्शन,केरल में एक सत्र न्यायालय ने ग्रीष्मा नाम की 24 साल की एक लड़की को अपने प्रेमी को ज़हर देकर मारने के आरोप में मौत की सज़ा सुनाई थी
यह सच मानने से किसे गुरेज़ होगा कि महिलाएँ भी हिंसा करती हैं.
महिलाएँ उन्हीं विचार, मूल्यों और सामाजिक पैमाने के बीच परवरिश पाती हैं, जिनकी नींव में मर्दों की सत्ता या पितृसत्ता है. सत्ता और ताक़त का पैमाना ख़ास तरह की हिंसक मर्दानगी बनाती है. यही हिंसक और ज़हरीली मर्दानगी, जब चारों तरफ़ फैली हो तो इससे स्त्रियों का बच पाना कैसे मुमकिन है.
किसी को हर तरह से अपने क़ाबू में रखना, गाली देना या मारना या दबा कर रखना या किसी को अपने से नीचा समझना या हत्या कर देना.. ये ज़हरीली मर्दानगी की चंद निशानियाँ हैं. मर्द इन्हीं के सहारे सदियों से अपनी व्यवस्था चलाते आ रहे हैं. यानी ये सत्ता और ताक़त की निशानियाँ हैं.
तो कई स्त्रियाँ इसे ही सही या यही एक रास्ता मानकर इस सत्ता और ताक़त का इस्तेमाल करती हैं. वे भी हिंसा के अलग-अलग रूपों का सहारा लेती हैं.
स्त्री और मर्द पर होने वाली हिंसा
स्त्री-पुरुष हिंसाइमेज स्रोत,ANI
इमेज कैप्शन,साल 2022 में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक व्यक्ति की हत्या के मामले में उसकी पत्नी और सौतेले बेटे को गिरफ़्तार किया था (फ़ाइल फ़ोटो)
छोड़कर पॉडकास्ट आगे बढ़ें
पॉडकास्ट: कहानी ज़िंदगी की
कहानी ज़िंदगी की
मशहूर हस्तियों की कहानी पूरी तसल्ली और इत्मीनान से इरफ़ान के साथ.
एपिसोड
समाप्त
लेकिन क्या दोनों की हिंसा को एक तराज़ू पर तौला जा सकता है?
क़तई नहीं. एक की हिंसा की जड़ में ग़ैरबराबरी, भेदभाव, सत्ता और ताक़त का विचार है. इसने हिंसा की पूरी व्यवस्था बनाकर रखी है. यह व्यवस्था हिंसा के अलग-अलग रूपों को जायज़ या सामान्य बना देती है. इसीलिए हमें स्त्री पर होने वाली हिंसा आसानी से नहीं दिखती. उसे ग़लत मानने में भी अक्सर दिक़्क़त होती है. इसलिए उसे बार-बार दिखाना पड़ता है. बताना पड़ता है कि क़ानून की नज़र में यह ग़लत है.
दूसरी ओर, स्त्री की ओर से की गई हिंसा में ज़्यादातर ऐसा नहीं है. उसमें तात्कालिक कारण या व्यक्तिगत हित-लाभ की ख़्वाहिश ज़्यादा है. यही नहीं, कई बार वह पितृसत्तात्मक व्यवस्था से उपजे हालात का नतीजा भी है.
यही नहीं, जानलेवा हिंसा और अपराध की ऐसी घटनाओं में अक्सर उसके साथ एक या एक से ज़्यादा मर्द सहयोगी होते हैं. यानी मर्द की सक्रिय मदद के बिना ज़्यादातर हिंसक या जानलेवा घटना नहीं होती.
ये भी मुमकिन है, मर्द ही प्रेरक स्रोत हों.
यहाँ यह साफ़ करना ज़रूरी है कि यह बात स्त्री की हिंसा को जायज़ ठहराने के लिए नहीं, बल्कि समझने के लिए की जा रही है.
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स्त्री की हिंसा का चेहरा क्या है
यह बार-बार दोहराने वाली बात है कि हिंसा किसी के भी साथ, किसी भी रूप में हो… वह जायज़ नहीं हो सकती. मगर जब हम हिंसा को स्त्री हिंसा या पुरुष हिंसा के रूप में देखेंगे तो उसकी पड़ताल भी करनी होगी.
जैसे- पिछले दिनों स्त्री हिंसा की आई ख़बरों में एक तीसरे व्यक्ति का ज़िक्र बार-बार आता है. मीडिया में उस तीसरे व्यक्ति की पहचान ‘प्रेमी’ के रूप में की जाती है.
यहाँ ये सवाल उठना लाज़िमी हैं, क्या यह मुद्दा स्त्री के साथी चयन के हक़ से नहीं जुड़ा है? कहीं शादी-शुदा ज़िंदगी में जान लेने वाली हिंसा का रिश्ता इससे भी तो नहीं है?
हमारा परिवार या समाज आमतौर पर स्त्री के साथी चयन के हक़ को नहीं मानता. वह चाहता है कि स्त्री, उसी मर्द को अपना साथी चुने जिसे उसका परिवार उसके लिए चुनता है. यह अक़सर बेमेल जोड़ी की वजह बनती है. स्त्रियाँ इस जबरन लादे गए फ़ैसले के ख़िलाफ़ मज़बूती से खड़ी नहीं हो पातीं. नतीजा, इसका असर हिंसक और जानलेवा अलगाव के रूप में दिखता है. यह आपराधिक हिंसा, व्यक्तिगत है.
दूसरी ओर, इसके साथ यह याद दिलाना बेहद ज़रूरी है कि स्त्रियों द्वारा अपने पतियों या साथी के ख़िलाफ़ की जाने वाली हिंसा और स्त्रियों के ख़िलाफ़ होने वाली हिंसा में ज़मीन आसमान का फ़र्क़ है.
स्त्रियों के साथ होने वाली ज़्यादातर हिंसा… उसके स्त्री होने की वजह से होती है. यह बारीक़ लेकिन अहम फ़र्क़ है. जैसे- कन्या भ्रूण का गर्भपात, पढ़ने से रोकना, बलात्कार, दहेज़ के लिए हत्या… हिंसा का ये रूप स्त्री के साथ ही है. यह लड़कों या पुरुषों के साथ नहीं है. इस फ़र्क़ को अगर नहीं समझा जाएगा तो इसके इलाज भी सही नहीं होंगे
तो यह हिंसा कैसे रोकी जाए
दिल्ली में श्रद्धा वालकर की हत्या का मामला काफ़ी दिन चर्चाओं में रहा था (फ़ाइल फ़ोटो)
हर तरह की हिंसा असहनीय है. अपराध है. अगर पुरुष का स्त्री विरोधी हिंसा ग़लत है तो स्त्री की पुरुष विरोधी हिंसा भी ग़लत है. इसलिए स्त्री विषयक कार्यकर्ता हर व्यक्ति हिंसा मुक्त समाज की बात करता है.
इसमें एक हिंसा के लिए ‘न’ और दूसरी तरह की हिंसा के लिए ‘हाँ’ की कोई गुंजाइश नहीं रहती. इसलिए अगर कोई समझता है कि स्त्रीवादी इस स्त्री की हिंसा की किसी रूप में हिमायती हैं तो वह ग़लत है.
हिंसा की जड़ पहचानें: दूसरी तरफ़ हम देखते हैं कि स्त्रियों सै होती हिंसा के पक्ष में कई तर्क गढ़े रखे हैं. समय-समय पर और घटना के हिसाब से उसका इस्तेमाल होता है. उसको स्त्री होना ही, उससे हिंसा का कारण बन जाता है. तो सबसे पहला पड़ाव यही है कि हिंसा की जड़ तलाशें.
स्त्रियों का अस्तित्व है: स्त्रियों को स्वतंत्र व्यक्तित्व मानें और मानने की आदत डालें. ज़ीवन के भले-बुरे निर्णय लेने दें और उन निर्णयों का सम्मान करें. चाहे वह अपना संगी-साथी चुनने का ही क्यों न हो.
स्त्रियाँ हिंसक न बनें: स्त्रियां भी यह समझें कि अगर कुछ उनके ख़िलाफ़ होता है तो वे बोलें. इनकार करें. उन्हें अपना जीवन तय करने का अधिकार है… लेकिन अपने जीवन को उन्हें किसी का ज़ीवन लेने का अधिकार नहीं है. यह अपराध है जिसकी सज़ा है. वे अपराध कर अपना जीवन खुश नहीं बना सकतीं. इसलिए हिंसा नकारें.
हर हिंसा के ख़िलाफ़ आवाज़: अगर कोलकाता के आरजी कर में बलात्कार की घटना न हो या दिल्ली में चलती बस में सामूहिक बलात्कार न हो तो क्या हम आज स्त्री विरौधी हर हिंसा पर इतना ही शोर मचाते हैं. कतई नहीं. अगर हम वाक़ई हिंसा विरोधी हैं तो हर तरह की हिंसा के ख़िलाफ़ उतनी ही जोरदार आवाज उठाएँ.
डेटा इकट्ठा हों: अपराध के रिकॉर्ड में पत्नियों की पुरुषों से हिंसा अलग से अंकित हों. इससे वह सच समझने में मदद मिलेगी कि असल में सामूहिक रूप से किनकी ज़िंदगी हिंसा की छाया में है.
और सबसे महत्वपूर्ण बात,स्त्रियाँ को हिंसा के सभी रूप नकारने होंगें.हिंसा से हिंसामुक्त बराबरी का समाज नहीं बन सकता. वरना,उनसे होने वाली व्यापक हिंसा यह पुरुष समाज न सिर्फ़ दृष्टिविगत करेगा बल्कि उसके ख़िलाफ़ वातावरण भी बनाएगा.बना भी रहा है.

