बाइबल पढ़ेंगें तभी तो समझ आयेगी ईसाइयों की “पोपलीला”
यहोवा_का_सनकपन
बाइबल के जितना पाखण्ड वाली किताब असल में बहुत कम हिन्दू है जो बाइबल पढ़ते है, अतः ये ईसाइयों की “पोपलीला” समझ ही नही पाते!
बाइबल मे ऐसी-ऐसी गप्प कहानियाँ लिखी है कि पढ़कर हॉलिवुड की फिल्में देखने का अनुभव होता है!
जैसे बाइबल निर्गमन-7/17-19 मे लिखा है कि मूसा (Moses) ने अपनी लाठी नील नदी मे डाल दी, और नदी का पूरा जल खून बन गया!
बाइबल निर्गमन-10/21 मे लिखा है की मूसा ने अपना हाथ ऊपर उठाया और पूरे मिश्र मे अंधेरा छा गया!
मै कुछ उदाहरण भी देता हूँ-
पहली बात तो यहोवा महिला विरोधी भी था, बाइबल लैव्यव्यवस्था-12/1-5 मे यहोवा ने फरमाया है कि यदि स्त्री पुत्र पैदा करती हैं तो वह 7 दिन पूर्ण अशुद्ध रहेगी, और 33 दिन शुद्ध होने मे लगेगा, लेकिन यदि महिला पुत्री पैदा करे तो 14 दिन अशुद्ध और 66 दिन शुद्ध होने मे लगेगा!
मै पूँछता हूँ.. क्यों भाई यहोवा! क्या लड़की पैदा करने की वजह से महिला अधिक अपवित्र हो जाती हो?
यही नही इस सनकी यहोवा ने लैव्यव्यवस्था-15/19-30 मे कहा है कि यदि स्त्री मासिकधर्म मे हो तो उसे कोई छूये तो छूने वाला पूरे दिन अशुद्ध रहेगा!
जो कोई उस बिछौने को छुये जिस पर वह बैठी हो, वो भी सांझ तक अशुद्ध रहेगा!
यहोवा का कहना है कि जब स्त्री का ऋतुकाल खत्म हो तो वो दो कबूतर के बच्चों को लेकर याजक के पास जाये और उनकी बलि चढ़वाकर यहोवा से अपने मासिक-धर्म की अशुद्धता का प्रायश्चित करे!
क्यो यहोवा जी! आपकी नजर मे मासिक-धर्म कोई पाप है जो स्त्री उसका प्रायश्चित है! और यदि पाप है तो आपने स्त्रियों मे क्यों माहवारी बनायी, आखिर कर्ता-धर्ता तो आप ही हो?
आगे यहोवा ने ईशनिन्दा का नियम भी बनाया है!
यहोवा ने बाइबल लैव्यव्यवस्था-24/16 मे कहा है कि- “जो कोई यहोवा की निन्दा करें, उसे निश्चित ही मार डाला जाये! सारी मंडली उस पर पथराव करे और उसे मार डाले”
यह ईशनिन्दा इस्लाम से पहले इस सनकी यहोवा ने ही चालू किया था और इसी के अनुसार मूसा ने शलोमीत के बेटे को पत्थर से मरवाया भी था, क्योंकि उसने भी यहोवा का अपमान किया था!
यही नही इतिहास मे बाइबल के खिलाफ बोलने के लिये गैलेलियो और कॉपरनिकस जैसे खगोलशास्त्रियों को कठोर दण्ड दिया जा चुका है!
दूसरी बात यहोवा दयालु भी नही था, यहोवा ने आगे (19-20) कहा है कि जो जैसा अपराध करे, उसके साथ भी वैसा ही किया जाये!
आँख के बदले आँख!
अंग-भंग के बदले अंग-भंग!
दाँत के बदले दाँत!
यहाँ सोचने वाली बात है कि कुरान भी इसी से प्रभावित है!
कुरान-2/178 मे लिखा है-
“ऐ ईमान वालो, तुम पर हत्या का किसास (बदला) लेना अनिवार्य किया जाता है। स्वतन्त्र व्यक्ति के बदले स्वतन्त्र व्यक्ति, दास के बदले दास, महिला के बदले महिला।”
अब जरा सोचो कि इन्ही तथाकथित यहोवा के स्वघोषित पुत्र यीशु ने New testament मे कहा है कि तुम अपने दुश्मनों को भी माफ कर दो!
बाप कह रहा है बदला लो, और बेटा बोल रहा था माफ कर दो!
शायद बाप की आज्ञा न मानने की वजह से ही बेटे के शरीर मे यहोवा ने होलसेल के भाव मे होल करवाकर क्रास पर लटकवा दिया था!
विश्वास करो, यीशु को मरवाने मे यहोवा का ही हाथ था! यहोवा ने लैव्यव्यवस्था-26/14-16 मे कहा है कि जो मेरी आज्ञा नही मानेगा, मै उसे बेचैन करूँगा!
उसे क्षयरोग और ज्वर से पीड़ित करूँगा!
उसकी आँखों को धुँधली कर दूँगा!
अब ईसा ने इनकी आज्ञा नही मानी थी, अतः उन्हे इस सनकी ने क्रास पर ही लटकवा दिया!
वैसे यहोवा ने अपने निन्दक को मार डालने का आदेश भले ही दिया है, फिर भी मै यहोवा की निन्दा करता हूँ, मै डंके की चोट पर कहता हूँ कि यहोवा सनकी और बेवकूफ था, और उससे भी अधिक बेवकूफ वो ईसाई हैं जो इस यहोवा को पूजते हैं!
सच तो यह है कि यहोवा के अन्दर कोई भी ईश्वरीय-गुण नही था!
ईसाई धर्म वास्तव मे सबसे अधिक पाखण्डी धर्म हैं, पर चालाक ईसाइयों ने अपने पाखण्डों को आधुनिकता की चादर छुपा कर रखा हैं!
✍🏻
पवन प्रजापति
