मानवाधिकार,ईसाईयों ने अमेरिका में क्या-क्या किया?
जैसे मुस्लिमों का आक्रमण भारत में हुआ कुछ वैसा ही ईसाइयों का अमेरिकी महाद्वीप पे हुआ।
इन दिनों मैं अमेरिकी महाद्वीप में कुछ ज्यादा ही रुचि ले रहा हूँ। और इसमें से मेक्सिको कुछ ज्यादा ही ध्यानाकृष्ट कर रहा है मेरा।
पूरी दुनिया में चर्चों ने कुछ इस कदर हौवा मचाया हुआ है कि जो कुछ भी दुनिया को दिया वो सिर्फ ईसाइयों और यूरोप ने ही दिया.. नही तो इसके बिना सब अंधेरे में मर रहे थे.. कहीं कुछ नहीं था.. कहीं कोई इससे ज्यादे सिविलाइजड नहीं थे.. कोई कल्चर नहीं था और न कुछ था.. पूरा का पूरा अंधकारमय था.. ज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित करने वाले यूरोपियन और ईसाई ही थे।.. जैसे भारत संपेरों और गँवारों का देश था वैसे ही उत्तरी दक्षिणी अमेरिका का भी बस यही हाल था।.. और इन सब से भी बुरा हाल अफ्रीकी देशों का।.. ये रिलीजियन का झंडा ले कर विश्व के कोने कोने में कूद पड़े और प्रभु के ज्ञान को फैलाने के लिए कुछ भी कर गुजरने को लग गए।
मेक्सिको में सबसे पहले आगमन होता है स्पेनिश लोगों का। सन 1519 में फरवरी महीना। नेतृत्वकर्ता हरनैन कोर्टेज (Hernan Cortez) .. अपने साथ 11 बड़े जहाजी बेड़े, 500 लड़ाके, 13 घोड़े और कुछ तोपें। मात्र दो सालों में मने 1521 तक में जिसे आज मेक्सिको सिटी बोला जाता है को कब्जा कर लिया।
और जिस वक्त वो आया था उस वक़्त चोलुआ (शहर) मेक्सिको का सबसे बड़ा दूसरा शहर था। व्यापार का केंद्र था, जहां आस पड़ोस के मूल अमेरिकी व्यापार करते थे। .. कब्जा जमाने के लिए इन्होंने हिंसा और कत्लेआम को चुना।.. यूरोपियन इतिहासकार के अनुसार कोर्टेज ने सिर्फ 3 घण्टे में 3 हजार लोगों को मौत के घाट उतार दिया। लेकिन स्थानीय लोगों की माने तो इन तीन घण्टों में 30 हजार लोगों को मार दिया गया था। और इस हत्याकांड का उद्देश्य ये था कि स्थानीय लोग सरेंडर कर दे और ये जो कहे वो सुने और मानने को बाध्य हो।
शहर में कब्ज़ा जमाने के बाद इनके जितने भी पुराने धार्मिक पूजा स्थल थे सबको तोड़ दिया और उसको लूट लिया। और उसके स्थान पे चर्च खड़ा कर दिया जो इस बात का परिचायक होता कि क्रिश्चनिटी ने इस पर विजय पाई है।.. एज़्टेक (मेक्सिकन, माया) लोग पूजा स्थल के तौर पे पिरामिड बनाते थे.. उन सभी पिरामिडों को इन ईसाई आतताइयों ने ध्वस्त कर दिया। और फाइनली चोलुआ के एक पहाड़ी की चोटी पे सबसे बड़ा चर्च Iglesia de Nuestra Señora de los Remediosa का निर्माण कर दिया जो अब तक विराजमान है। जो इस बात का द्योतक था कि हमने पूरे मेक्सिको को क्रिश्चनिटी के अंदर ला दिया है। और आज ईसाइयों का सबसे बड़ा गैदरिंग चर्च यही है मेक्सिको में।
बात तो यहाँ तक ठीक थी.. लेकिन अब पता चल रहा कि वो कोई मामूली पहाड़ी नहीं थी,बल्कि वो एक विशाल पिरामिड थी।.. ऐसा पिरामिड और मानव निर्मित मोन्यूमेंट जो विश्व में सबसे बड़ी थी और आज तक है। ये पिरामिड गिज्जा के पिरामिड से चार गुना ज्यादा बड़ा है। ऐसे ऐसे रहस्य सामने आ रहे कि बड़के विद्वान वालों के लिए अनसुलझे पहेली हैं अभी तक।
ये पिरामिड मूल अमेरिकी लोगों के लिए आस्था का सबसे बड़ा केंद्र था.. हजारों सालों से लाखों लोग यहां इकट्ठे होते थे और अपने धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करते थे।.. और यूरोपियन लोगों को ये ज्ञात भी था।.. जब कोर्टेज चोलुआ पहुँचा और शहर को कब्जा किया और पहाड़ी पे सबसे बड़ा चर्च खड़ा कर दिया तब बताया जाता कि वो पहाड़ी नॉर्मल पहाड़ी जैसा ही था.. गाछ वृक्षों से ढंका हुआ.. वे टॉप पे जा के चर्च निर्माण कर दिया। लेकिन वहाँ के लोगों की माने तो बाहरी घुसपैठियों और आक्रमणकारियों से अपने पवित्र स्थल और उसके रहस्यों को बचाने के लिए इन लोगों ने इस स्थान को बालू मिट्टी से तोप दिया। लेकिन श्रद्धा बिल्कुल भी कम नहीं हुई थी। लोग फिर भी पहाड़ी के सामने इकट्ठे होते और अपने अनुष्ठान पूरी करते। और इसी चीज को ध्यान में रख कर उसके टॉप पे चर्च बना दिया गया। ताकि सामूहिक रूप से लोगों के मन को और विश्वास को क्रिश्चनिटी से जोड़ सके।
लेकिन ये रेत और मिट्टी में दबा हुआ पिरामिड आखिर कितना दिन तक छुपा रहता ? 1910 में एक अस्पताल के बेस के निर्माण के लिए जब खुदाई होने लगी तो इसके सुरंग पाए गए.. और फिर निकल के सामने आई दुनिया की सबसे बड़ी मेन मेड मोन्यूमेंट। जिसके रहस्य आज तक बस सुलझाए ही जा रहे हैं।
खैर ! .. जब शहर पे कैथोलिक स्पेनिश लोगों का कब्जा हो गया तो वहाँ जबरदस्ती क्रिश्चनिटी थोपी जाने लगी.. मूल भाषाओं को दबाए जाने लगा.. समूह समूह में धर्म परिवर्तन किया जाने लगा।.. ऐसे प्रचार प्रसार कि तुम लोग अभी तक कुछ थे ही नहीं, अंधकार में जी रहे थे,तुम्हें इस अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने के लिए स्वयं येशु मसीह आये हैं तुम्हारे यहाँ।.. सबसे ज्यादा टारगेट उन्हें किया गया जो यंग थे और अपने पारंपरिक रिचुअल्स से अंजान थे.. उनमें ईसायत भरी गई कूट कूट के जो बिल्कुल ही अपने जड़ों से कट गए।.. एक बार तो इन परिवर्तित जवान लड़कों को सामुहिक रूप से मार भी दिया गया और प्रचार कुछ ऐसा हुआ कि ये ईश्वर की राह में शहीद हुए हैं और उन सब को हीरो की तरह प्रचार प्रसार किया गया। जो बहुत बड़ा कारक बना कनवर्जन का।
आज 500 सालों में स्तिथि कुछ ऐसी है कि वहाँ की 93% आबादी क्रिश्चन हैं।उनमें से 83% रोमन कैथोलिक वाले।.. स्पेनिश वहाँ की राष्ट्रीय भाषा है। इंडिजिनस भाषाएं तो विलुप्ति के कगार पर हैं।
जैसे-जैसे मिट्टी की परतें हट रही है वैसे-वैसे ही नए-नए रहस्य बाहर आ रहे हैं और उनमें से जो सबसे ज्यादा विश्व के किन्हीं सभ्यता से नजदीकी संबंध जान पड़ता है तो वो भारत है।
मिट्टी से उभरती और निकलती इतिहास सो कॉल्ड मॉडर्न लोगों को औकात बता रही है, जिसे ये अंधकार में रहने वाले गंवार समझते थे और हैं।
इन यूरोपियन और क्रिस्तान लोगों ने भारतीयों के माइंड सेट पे भी इस तरह का हमला किया है कि इन्हें बस इनकी ही बातें फूल प्रूफ सही लगती है बाकी सब बकवास।.. लेकिन हमारा गौरवमय इतिहास इसकी धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है और उड़ेगी ही।
हम अंधकार में रहने वाले और अशिक्षित लोग रहते तो इतनी रहस्यमय चीजों का निर्माण ही नहीं कर सकते थे जो आज के मॉडर्न से मॉडर्न इंजीनियरिंग के लिए पेच का विषय बना हुआ है।
अब जरा मेक्सिको और भारत का भी कम्पेयर कर लीजिए.. क्या हम मेक्सिको की दिशा में अग्रसर नहीं है ??
कुछ सालों में न हमारे पास अपनी संस्कृति होगी, न धर्म होगा और न अपनी कोई भाषा। और ये सब बलि चढ़ेगी केवल और केवल मॉडर्निटी के चक्कर में जिसे वो चाहते ही है।
सोचिये,विचारिये,मनन कीजिये ।
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संघी गंगवा
खोपोली
