वर्ष 2026 पहली तिमाही में 3,995 नई भारतीय कंपनियाँ जुड़ी दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स से

भारतीय व्यवसायों के लिए वैश्विक विकास मंच के रूप में दुबई की भूमिका हुई और मजबूत

वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 3,995 नई कंपनियाँ दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स से जुड़ीं

देहरादून, 19 मई, 2026 – दुबई चैंबर्स से संचालित तीन चैंबरों में से एक, ‘दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स’ ने घोषणा की है कि वर्ष 2026 की पहली तिमाही के दौरान 3,995 नई भारतीय कंपनियाँ चैंबर में शामिल हुई हैं। यह उल्लेखनीय वृद्धि चुनौतीपूर्ण वैश्विक व्यापारिक परिस्थितियों के बीच भारत और दुबई के बीच लगातार मजबूत होते आर्थिक और कारोबारी संबंधों को दर्शाती है।
मार्च 2026 के अंत तक दुबई चैंबर ऑफ कॉमर्स के सक्रिय सदस्यों के रूप में पंजीकृत भारतीय कंपनियों की कुल संख्या बढ़कर 84,088 हो गई है, जिससे दुबई में सबसे बड़े विदेशी व्यापारिक समुदाय के रूप में भारत की स्थिति और अधिक मजबूत हुई है। भारतीय कंपनियों की लगातार बढ़ती उपस्थिति इस बात को दर्शाती है कि वे व्यापार की निरंतरता, वैश्विक विस्तार और दीर्घकालिक विकास के लिए दुबई को एक भरोसेमंद, स्थिर और रणनीतिक कारोबारी केंद्र के रूप में देख रही हैं।
दुबई चैंबर्स के प्रेसिडेंट एवं सीईओ  मोहम्मद अली राशिद लूटा के मुताबिक: “तेजी से जटिल होती वैश्विक अर्थव्यवस्था में कंपनियाँ अब उन बाजारों को प्राथमिकता दे रही हैं, जो स्पष्ट नीतियाँ, भरोसेमंद कारोबारी माहौल और निरंतर विकास की क्षमता प्रदान करते हैं। भारतीय व्यवसायों की लगातार बढ़ती मौजूदगी इस बात का प्रमाण है कि वे दीर्घकालिक सफलता के लिए दुबई पर कितना विश्वास करते हैं। दुबई कंपनियों को विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, चुस्त कारोबारी वातावरण और वैश्विक कनेक्टिविटी उपलब्ध कराता है, जिससे वे बदलती वैश्विक परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ सकें।”

जॉयलुक्कास ग्रुप के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. जॉय अलुक्कास ने कहा: “पिछले 39 वर्षों से यूएई हमारी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं की मजबूत नींव रहा है। यहाँ की दूरदर्शी नेतृत्व क्षमता ने हमेशा मुझे प्रभावित किया है। वैश्विक परिस्थितियों में हर संकट और बदलाव के दौरान यूएई सरकार ने व्यापार समुदाय के साथ मजबूती से खड़े रहकर निरंतरता, सुरक्षा, स्पष्टता और अटूट सहयोग प्रदान किया है। इसी साझेदारी ने मेरे आत्मविश्वास को मजबूत किया और आगे बढ़ने की प्रेरणा दी है। ”
इंडियन बिजनेस एंड प्रोफेशनल काउंसिल के चेयरमैन सिद्धार्थ बालचंद्रन के मुताबिक: “लगातार बदलती और कई बार अस्थिर वैश्विक परिस्थितियों के बीच दुबई एक दुर्लभ स्थिरता का प्रतीक बनकर उभरा है। मेरे जैसे व्यापक आर्थिक दृष्टिकोण रखने वाले निवेशकों के लिए यही वह सबसे महत्वपूर्ण आधार है, जिसकी हम सबसे पहले तलाश करते हैं। दुबई और यूएई की दूरदर्शी नीतियों पर मेरा गहरा विश्वास है, क्योंकि यहाँ की शासन व्यवस्था जमीनी वास्तविकताओं से जुड़ी सोच पर आधारित है और सरकार लगातार लोगों तथा उद्योग जगत की आवश्यकताओं को समझते हुए निर्णय लेती है। निरंतर संवाद और सहभागिता की यही संस्कृति दुबई की आर्थिक व्यवस्था की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है, जिसके परिणामस्वरूप मेरे निवेश के मूल्यांकन में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। ”
ऐपकॉर्प होल्डिंग के चेयरमैन एवं अपैरल ग्रुप के मालिक नीलेश वेद के अनुसार: “वैश्विक स्तर पर कारोबार कर रहे भारतीय व्यवसायों के लिए अवसरों के साथ-साथ स्थिरता और गतिशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है, और दुबई इन दोनों मोर्चों पर लगातार अग्रणी बना हुआ है। यूएई नेतृत्व की दूरदर्शी सोच, मजबूत बैंकिंग व्यवस्था, व्यापार-अनुकूल नीतियाँ और निजी क्षेत्र के प्रति निरंतर सहयोग ने विकास और विस्तार के लिए एक बेहद भरोसेमंद और सक्षम कारोबारी वातावरण तैयार किया है।”
दुबई का कारोबारी माहौल स्पष्ट नीतियों, विश्वस्तरीय बुनियादी ढाँचे, पारदर्शी संवाद व्यवस्था और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर आधारित है, जो कंपनियों को बिना किसी बाधा के अपने विकास पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करता है। मार्च में दुबई सरकार द्वारा घोषित 1 बिलियन एईडी के आर्थिक प्रोत्साहन पैकेज ने वित्तीय दबाव को कम करने और बाजार में नकदी प्रवाह बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *