नोयडा हिंसा के पीछे षडयंत्र क्यों माना जा रहा?,300 गिरफ्तार

नोएडा प्रोटेस्ट में अब तक 300 गिरफ्तार, पुलिस का दावा- फर्जी हैंडल से फैलाई गई अफवाह
नोएडा में उग्र प्रदर्शन के बाद पुलिस ने कठोर कार्रवाई में 300 से अधिक गिरफ्तारियां की है । 100 से ज्यादा से पूछताछ हो रही है. जांच में सोशल मीडिया से अफवाह फैलाकर हिंसा भड़काने के षड्यंत्र के संकेत हैं, जिसमें 50 से अधिक फर्जी हैंडल सक्रिय मिले. उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स इनकी जांच कर रही है. सरकार ने शांति की अपील करते हुए कठोर कार्रवाई का भरोसा दिया है.

पुलिस के अनुसार फर्जी हैंडल 24 घंटे के भीतर बनाए गए.

नोएडा में हुए उग्र प्रदर्शन के बाद पुलिस एक्शन मोड में है. आगजनी और तोड़फोड़ के मामले में अब तक 300 लोग गिरफ्तार किये जा चुके, जबकि 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ हो रही है. फैक्ट्रियों के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर अराजक तत्व पहचाने जा रहे हैं । निकट भविष्य में अन्य लोगों पर भी कठोर कार्रवाई होनी है.

नोएडा हिंसा के पीछे सुनियोजित षड्यंत्र सामने आ रहा है. पुलिस के अनुसार प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि पूरे घटनाक्रम को भड़काने को सोशल मीडिया का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हुआ. अफवाहों से वातावरण तनावपूर्ण बनाने की कोशिश हुई, इससे स्थिति बिगड़ी. सूत्रों के अनुसार, हिंसा से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर झूठी और भ्रामक जानकारी तेजी से फैलाई गई.

जांच में यह भी सामने आया है कि करीब 50 से अधिक फर्जी हैंडल सिर्फ 24 घंटे में बने और अफवाह फैलाने को सक्रिय हुए. इन हैंडल्स से लगातार भड़काऊ संदेश, वीडियो और पोस्ट शेयर हुए, जिससे लोगों में भ्रम और आक्रोश बढ़ा. UP STF अब इन सभी हैंडल्स के डिजिटल फुटप्रिंट्स ट्रैक कर रही है.

बताते है कि इन फर्जी अकाउंट्स का उद्देश्य वातावरण अस्थिर कर लोगों को उकसाना था. जैसे-जैसे ये पोस्ट वायरल हुईं, स्थानीय स्तर पर तनाव बढ़ता गया और अंतत: हिंसा में बदल गया. जांच एजेंसियां अब इन सोशल मीडिया हैंडल्स की पहचान कर इनके पीछे के नेटवर्क का पता लगाने में जुट गई हैं.

मामले की गंभीरता देख उत्तर प्रदेश सरकार ने उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (UP STF) भी सक्रिय कर दिया है. STF को विशेष रूप से उन की पहचान करने और कार्रवाई करने का जिम्मा सौंपा गया है, जो अफवाह फैलाने में शामिल थे.

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों से सतर्क रहें.

दो एक्स (X) हैंडल्स के खिलाफ एफआईआर
पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर भ्रामक और भड़काऊ सूचनाएं फैलाने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा रही है. अब तक दो एक्स (X) हैंडल्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इसके अलावा 50 से अधिक हैंडल चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें पिछले 24 घंटों में बनाया गया और जो अफवाह फैलाने में सक्रिय थे. प्रारंभिक जांच में यह एक संगठित साजिश की ओर इशारा करता है.

पाकिस्तान कनेक्शन की जांच की मांग
नोएडा में हुई हिंसा को लेकर उत्तर प्रदेश के श्रम मंत्री अनिल राजभर ने बड़ा बयान दिया है कि इस षड्यंत्र का उद्देश्य प्रदेश का विकास और शांति व्यवस्था बाधित करना हो सकता है. मंत्री ने यह भी कहा कि हाल ही में मेरठ और नोएडा से चार संदिग्ध आतंकी गिरफ्तार हुए हैं, जिनके तार पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से जुड़े बताए गए हैं, इसलिए पाकिस्तान कनेक्शन की भी जांच हो रही है.

अनिल राजभर ने श्रमिकों से शांति बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि सरकार उनकी हर मांग पर बातचीत को तैयार है और किसी भी समस्या का समाधान संवाद से ही निकाला जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि उग्र आंदोलन से बचना जरूरी है.

उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर हैं और लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं. सरकार का पूरा फोकस वार्ता से समाधान निकालने और प्रदेश में कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर है.

पुलिस का आया बयान
पुलिस का कहना है कि नोएडा में चल रहे श्रमिक आंदोलन को लेकर उत्तर प्रदेश पुलिस मुख्यालय से लगातार उच्चस्तरीय निगरानी हो रही है. पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण और अपर पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) अमिताभ यश कंट्रोल रूम से हालात पर नजर बनाए हैं और वरिष्ठ अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दे रहे हैं.

प्रशासन के अनुसार, राज्य सरकार के निर्देश पर नोएडा पुलिस और प्रशासन श्रमिकों, कंपनी प्रबंधन और अन्य संबंधित पक्षों से लगातार बातचीत और समन्वय बनाए हैं, ताकि स्थिति का शांतिपूर्ण और न्यायसंगत समाधान निकाला जा सके. अधिकारियों का कहना है कि बातचीत से ही विवाद को सुलझाने पर जोर दिया जा रहा है.

वहीं, प्रभावित इलाकों में लोगों को परेशानी से बचाने और यातायात को सुचारु रखने को रूट डायवर्जन हुआ है. प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अनावश्यक रूप से प्रभावित क्षेत्रों की ओर न जाएं और वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें.

पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने को व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए हैं. स्थानीय पुलिस बल के साथ-साथ पीएसी, पैरामिलिट्री फोर्स और वरिष्ठ अधिकारियों की तैनाती संवेदनशील इलाकों में है. नोएडा ही नहीं, बल्कि आसपास के जनपदों में भी स्थिति पर कड़ी नजर है.

इन सभी संदिग्ध हैंडल्स की डिजिटल जांच उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (STF) करेगी. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि अफवाह और  दुष्प्रचार से कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों पर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

महंगाई के इस दौर में एक आम मजदूर के लिए घर चलाना किसी चुनौती से कम नहीं है. दिल्ली-NCR के औद्योगिक इलाकों (नोएडा, गुरुग्राम, फरीदाबाद) में काम करने वाले लाखों प्रवासी मजदूर आज बेहतर वेतन की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं. उनका कहना है कि कमरे का किराया और खाने-पीने के खर्च के बाद हाथ में कुछ नहीं बचता. ऐसे में आइए जानते हैं, दिल्ली से लेकर बिहार तक क्या है न्यूनतम मजदूरी.

दिल्ली: देश में सबसे बेहतर भुगतान
अकुशल (Unskilled): 19,846 प्रति माह (763 प्रतिदिन)
अर्द्ध-कुशल (Semi-skilled): 21,813 प्रति माह (839 प्रतिदिन)
कुशल (Skilled): 23,905 प्रति माह (919 प्रतिदिन)
ग्रेजुएट स्टाफ: जो क्लर्क या सुपरवाइजर स्नातक हैं, उन्हें कम से कम 25,876 रुपये प्रति माह (995 प्रतिदिन) मिलना अनिवार्य है.

उत्तर प्रदेश: जनसंख्या अधिक, पर मजदूरी कम?
उत्तर प्रदेश में दरों में सुधार तो हुआ है, लेकिन यह दिल्ली के मुकाबले काफी कम है. यहां की दरें कुछ इस प्रकार हैं:

अकुशल: 11,313 प्रति माह (435.14 प्रतिदिन)
अर्द्ध-कुशल: 12,120 प्रति माह (478.65 प्रतिदिन)
कुशल: 13,940.37 प्रति माह (536.16 प्रतिदिन)
बिहार: नई दरों से कितनी मिली राहत?
बिहार में भी 1 अप्रैल 2026 से VDA (Variable Dearness Allowance) जोड़कर नई दरें लागू कर दी गई हैं.

अकुशल – 13080 प्रतिमाह (प्रतिदन 436.00 रुपये)
अर्द्ध-कुशल – 13560 प्रतिमाह (प्रतिदन 452.00 रुपये)
कुशल – 16530 प्रतिमाह (प्रतिदन 551.00 रुपये)
अति-कुशल – 20,160 प्रतिमाह (प्रतिदन 672.00 रुपये)
आंकड़ों पर गौर करें तो दिल्ली और उत्तर प्रदेश – बिहार की मजदूरी में जमीन-आसमान का अंतर है. जहां दिल्ली में एक अकुशल मजदूर महीने के लगभग 20,000 कमा सकता है, वहीं उत्तर प्रदेश में यह आंकड़ा 11,000 के आसपास सिमट जाता है. यही कारण है कि भारी संख्या में लोग बिहार और उत्तर प्रदेश से पलायन कर दिल्ली-NCR का रुख करते हैं. हालांकि, NCR में रहने की लागत (Cost of Living) भी उतनी ही अधिक है.

नोएडा मजदूर आंदोलन के पीछे कौन? केंद्र सरकार अलर्ट; श्रम मंत्रालय का आया बयान

नोएडा में भड़के मजदूर आंदोलन ने अब दिल्ली तक हलचल तेज कर दी है। केंद्र सरकार ने इस हिंसा के पीछे बड़े ‘राजनीतिक हाथ’ का संदेह जताया है।

  • उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान में मजदूर आंदोलन तेज।
  • वेतन वृद्धि और सामाजिक सुरक्षा मुख्य मांगें।

उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में वेतन बढ़ोत्तरी समेत सामाजिक सुरक्षा के कई बिंदुओं को लेकर मजदूरों के आंदोलनों व उग्र प्रदर्शनों ने केंद्र तक को सतर्क कर दिया। दरअसल, हरियाणा से शुरू आग उत्तर प्रदेश पहुंच चुकी है। हरियाणा से सटे राजस्थान के इक्के दुक्के स्थानों पर छिटपुट घटना होकर फिलहाल शांत है।

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में न्यूनतम वेतन देश में सबसे अधिक है और लपटें यहां तक नहीं पहुंची हैं, लेकिन गर्माती राजनीति में कुछ भी असंभव नहीं माना जा रहा है। ऐसे में भाजपा के लिए परेशानी बढ़ेगी क्योंकि ये चारो राज्य भाजपा शासित हैं। ऐसे में अगर जरूरत महसूस हुई तो औपचारिक अनौपचारिक रूप से केंद्रीय स्तर पर इन राज्यों की बैठकें कर स्थिति को संभालने की कोशिश होगी।

हरियाणा में क्‍या हुआ था?
हरियाणा के मानेसर में कुछ दिन पहले हुए मजदूर आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने न्यूनतम वेतन बढ़ाकर स्थिति संभाल ली। यूं तो यह सबसे आसान रास्ता है, लेकिन जानकारों का मानना है कि वर्तमान हालात में जब पश्चिम एशिया की स्थिति के कारण काफी अस्थिरता है और इसका कोई पता नहीं कि हालात कब सामान्य होंगे तो कोई भी कदम व्यापक विचार विमर्श के बाद ही होने चाहिए।

खासकर ऐसे मामलों में जहां दायरा राज्य से बाहर भी जाता हो। हरियाणा सरकार ने न्यूनतम वेतन बढ़ाने से पहले न तो मजदूर संगठनों से बात की और न ही केंद्रीय श्रम मंत्रालय या फिर साथी पड़ोसी राज्यों से।

उद्योगों को भी साथ लेकर चलने की जरूरत है और मजदूरों का ध्यान रखने की भी। मजदूरों की सामाजिक सुरक्षा में कोई कमी नहीं होनी चाहिए लेकिन उद्योगों की भी सुरक्षा होनी चाहिए।

पिछले कुछ दिनों से उत्तर प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में जिस तरह आग फैली है उसमें राजनीतिक मंशा देखी जा रही है क्योंकि अगले साल की शुरूआत में ही वहां चुनाव है। राजस्थान में भी न्यूनतम वेतन अपेक्षाकृत कम है लेकिन वहां भिवाड़ी के अलावा किसी स्थान पर कोई घटना नहीं हुई और अब शांत है।

केंद्रीय श्रम मंत्रालय ने क्‍या कहा?
केंद्रीय श्रम मंत्रालय के अधिकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश इस मामले को खुद संभाल सकता है। लेकिन जरूरत हुई तो राज्यों के साथ चर्चा भी होगी और मदद भी की जाएगी।

 

8 घंटे की शिफ्ट और 20 हजार वेतन, नोएडा में कर्मचारियों का हिंसक प्रदर्शन

नोएडा के विभिन्न सेक्टरों में श्रमिकों का वेतन वृद्धि और बेहतर कार्यस्थल की मांगों को लेकर प्रदर्शन हिंसक हो गया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कानून हाथ में लेने वालों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।

नोएडा के विभिन्न सेक्टरों (Noida Protest News) में श्रमिकों का उग्र प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। ये श्रमिक बीते कई दिनों से वेतन वृद्धि सहित कई मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे थे। जब इनकी कंपनी प्रबंधन से बातचीत असफल रही तो यह आंदोलन सोमवार सुबह को उग्र हो गया।

प्रदर्शनकारियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया। इस कारण इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की दो गाड़ियों समेत पांच वाहनों को आग के हवाले कर दिया। कई जगहों पर पत्थरबाजी भी की गई।

इसी बीच, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi) ने औद्योगिक क्षेत्रों में श्रमिकों के लिए सम्मानजनक मानदेय, सुरक्षित कार्य वातावरण और समय पर समस्याओं के समाधान के कड़े निर्देश दिए।

10 बिंदुओं में जानें अब तक क्या हुआ?
1. कहां-कहां प्रदर्शन हुआ?

प्रदर्शन मुख्य रूप से नोएडा के Phase 2, Sector 60, Sector 62 और Sector 84 में हुआ। यह प्रदर्शन मदरसन नामक कंपनी के पास अधिक उग्र हो गया। सबसे ज्यादा हिंसा Hosiery Complex (Phase 2) में देखी गई।

2. मजदूर क्यों प्रदर्शन कर रहे थे?

नोएडा के विभिन्न कंपनियों में काम करने वाले कामगारों का आरोप था कि 12 हजार रुपये महीने देकर उनसे रोज 12-12 घंटे काम करवाया जाता था। वे 20 हजार रुपये महीने देने और 8 घंटे वर्किंग आवर तय करने की मांग कर रहे हैं। वे बेहतर काम के माहौल की भी मांग कर रहे थे।

3. प्रदर्शन कैसे हिंसक हुआ?

शुरुआत में श्रमिकों का आंदोलन शांतिपूर्ण था, लेकिन पुलिस से झड़प होने के बाद मजदूरों ने पथराव, तोड़फोड़ और आगजनी शुरू कर दी।

4. क्या-क्या नुकसान हुआ?

कई गाड़ियों को आग लगा दी गई। संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया और पथराव हुआ। एक कार पूरी तरह जल गई। पुलिस के वाहनों को भी क्षति पहुंचाया गया।

5. ट्रैफिक पर कितना असर?

प्रदर्शन के कारण दिल्ली-नोएडा बॉर्डर पर ट्रैफिक पूरी तरह ठप हो गया। कई किलोमीटर लंबी गाड़ियों की कतारें लग गईं। सुबह के पीक आवर में हजारों लोग फंस गए। ट्रैफिक पुलिस को एडवाइजरी जारी की गई।

6. किन सड़कों पर असर पड़ा?

नेशनल हाईवे-9 और चिल्ला बॉर्डर से नोएडा लिंक रोड ब्लॉक हो गया। फरीदाबाद तक भी ट्रैफिक प्रभावित हुआ।

7. पुलिस ने क्या किया?

पुलिस ने नोएडा के विभिन्न इलाकों में भारी बल तैनात किया। सीनियर अधिकारी मौके पर हैं। बैरिकेडिंग की गई और चेकिंग बढ़ाई गई। न्यूनतम बल का इस्तेमाल करते हुए स्थिति को काबू में करने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारियों से हिंसक न होने की अपील की गई।

8. सरकार ने क्या किया था?

सीएम योगी आदित्यनाथ ने आंदोलन को देखते हुए कंपनी कर्मचारियों को न्यूनतम वेतनमान जारी किए जाने के निर्देश दिए थे। रविवार को डीएम मेधा रूपम ने अधिकारियों के साथ बैठक की थी। रविवार को ही प्रशासन ने मजदूरों के लिए कुछ राहत घोषित की- जैसे डबल ओवरटाइम पे, साप्ताहिक छुट्टी, 10 तारीख तक सैलरी और नवंबर 30 से पहले बोनस। लेकिन इसके बावजूद श्रमिकों का गुस्सा शांत नहीं हुआ।

9. अभी स्थिति क्या है?

पुलिस का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है। चिल्ला बॉर्डर फिर से खोल दिया गया है। प्रशासन ने अफवाहों पर विश्वास न करने की अपील की है और सामान्य स्थिति बहाल करने का प्रयास जारी है।

10. मुख्यमंत्री योगी की क्या है प्रतिक्रिया?

प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा कि कानून को हाथ में लेने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी। प्रदेश में जो भी कानून को हाथ में लेने का काम करेगा, उन्हें जेल में डाल दिया जायेगा।

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