दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे कल जनता को समर्पित करेंगे पीएम मोदी,दिल्ली-UP-UK सब की बल्ले-बल्ले

PM Narendra Modi Will Inaugurate Doon-Delhi Expressway On 14th From Dehradun
प्रतीक्षा समाप्त, दून-दिल्ली एक्सप्रेसवे कल जनसमर्पित करेंगे प्रधानमंत्री मोदी, ढाई घंटे में पूरी होगी यात्रा

दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर एक्सप्रेसवे बागपत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर होते हुए दून के आशारोड़ी को जोड़ेगा। इसमें 100 से ज्यादा अंडरपास, कई फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज और टनल बनाई गई है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे (210 किलोमीटर) एक 6-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे है, जो दिल्ली (अक्षरधाम) और दून के बीच यात्रा के समय को 6.5 घंटे से घटाकर मात्र 2.5-3 घंटे कर देता है। ₹12,000 करोड़ की लागत वाले इस प्रोजेक्ट में 12 किलोमीटर का वाइल्डलाइफ एलिवेटेड कॉरिडोर, 370 मीटर की डाट काली टनल और 100 किलोमीटर/घंटा की गति सीमा (कार) मुख्य आकर्षण हैं।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे की प्रमुख विशेषताएँ:

समय की बचत और कनेक्टिविटी: यह एक्सप्रेसवे दिल्ली से देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश और मसूरी तक की दूरी बेहद सुगम बना देगा, जिससे वीकेंड टूरिज्म को बढ़ावा मिलेगा।वाइल्डलाइफ-फ्रेंडली डिज़ाइन: राजाजी नेशनल पार्क के पास 12 किलोमीटर का एलिवेटेड सेक्शन और दो 200-मीटर लंबे हाथी अंडरपास सहित 6 अतिरिक्त एनिमल पास बनाए गए हैं, ताकि वन्यजीवों की आवाजाही बाधित न हो।

एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे: 6-लेन वाला यह हाईवे (8 लेन तक विस्तार योग्य) एक्सेस-कंट्रोल्ड है, इसमें केवल 16 एंट्री-एग्जिट पॉइंट्स होंगे, जिससे बिना रुके तेज गति(100किलोमीटर/घंटा) यात्रा हो पायेगी।

आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर: इसमें 370 मीटर लंबी डाट काली सुरंग, 113 अंडरपास, 5 रेलवे ओवरब्रिज और 12 वे-साइड सुविधाएं (वाशरूम, मेडिकल यूनिट, आदि) शामिल हैं।

सुरक्षित और स्मार्ट सफर: एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) से लैस, यह एक्सप्रेसवे दुर्घटनाओं को कम करने और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।यह परियोजना न केवल यात्रा को आसान बनाएगी, बल्कि उत्तर प्रदेश के बागपत, शामली और सहारनपुर जैसे क्षेत्रों में आर्थिक विकास और पर्यटन को भी गति देगी।

देहरादून 13 अप्रैल 2026। वर्षों की प्रतीक्षा समाप्त हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल मंगलवार को देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेस का लोकार्पण करेंगे। इसके साथ ही दून से दिल्ली की दूरी मात्र ढाई से तीन घंटे की रह जाएगी।

11,963 करोड़ की लागत से बना 210 किलोमीटर लंबा दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर कई अर्थों में विशेष है। दिसंबर 2021 में एक्सप्रेसवे का निर्माण शुरू हुआ था, जो पूरा होने के बाद अब उद्घाटन को तैयार है।  एक्सप्रेसवे पर 100 से ज्यादा अंडरपास, कई फ्लाईओवर, रेलवे ओवरब्रिज और टनल बनाई गई है। इसके साथ ही दून-दिल्ली का सफर भी सुगम हो जाएगा।
12 किमी वाइल्डलाइफ कॉरिडोर ने बनाया विशिष्ट
एक्सप्रेसवे पर सबसे विशेष और महत्वपूर्ण शिवालिक पहाड़ियों  मोहंड में बना 12 किलोमीटर लंबा वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, जो एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड कॉरिडोर माना जा रहा है। इस कॉरिडोर को ऐसे बनाया गया है कि वाहन भी फर्राटा भरेंगें और वन्यजीव गतिविधियां भी प्रभावित नहीं होगी, वन्यजीवों को वाहनों की आवाज भी सुनाई नहीं देगी। इसको विधिवत साउंड प्रूफ शीट लगाई गई हैं।

प्रधानमंत्री रुप में 28वीं बार उत्तराखंड आगमन मोदी का
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत को उत्तराखंड तैयार है। प्रधानमंत्री रुप में मोदी मंगलवार को 28वीं बार उत्तराखंड आएंगे। वें 213 किलोमीटर लंबे दून-दिल्ली ऐलिवेटेड एक्सप्रेस-वे का उपहार देंगें। इसके अलावा एक हजार मेगावाट क्षमता के देश के पहले वेरिएबल स्पीड पंप स्टोरेज संयंत्र का भी लोकार्पण करेंगें। प्रदेश सरकार लोकार्पण समारोह स्मरणीय बनाने की तैयारियों में जुटी है। मोदी, प्रधानमंत्री बन पांच बार केदारनाथ आ चुके, बदरीनाथ व मुखबा का भी भ्रमण भी कर चुके । मार्च में उत्तरकाशी जिले में मां गंगा के शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा पहुंचकर प्रधानमंत्री ने शीतकालीन यात्रा की थी।

 

उत्तराखंड से प्रधानमंत्री मोदी का कर्म और मर्म का संबंध 
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उत्तराखंड से कर्म और मर्म का संबंध रहा है। उत्तराखंड उनके हृदय में बसता है। उनके प्रवास पर देवभूमिवासी उत्साहित हैं। उनके मार्गदर्शन में दो लाख करोड़ रुपए से अधिक की विकास योजनाएं धरातल पर उतर चुकी। कनेक्टिविटी में क्रांति आई है। चारधाम ऑलवेदर रोड परियोजना, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना, केदारनाथ एवं हेमकुंट साहिब रोपवे परियोजना, देहरादून-दिल्ली एलिवेटेड रोड जैसी बड़ी परियोजनायें स्वीकृत हुई।
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

 

नाम का इतिहास, मां डाट काली मंदिर है विशेष 
उत्तराखंड में प्रवेश करते ही शिवालिक तलहटी में मां डाट काली मंदिर मोदी के प्रस्तावित पूजन कार्यक्रम से चर्चाओं में है। विशेष यह कि मंदिर का एक हिस्सा उत्तर प्रदेश तो दूसरा उत्तराखंड में है। मान्यता है कि देहरादून-सहारनपुर राजमार्ग पर अंग्रेज टनल  निर्माण कर रहे थे तो बार-बार बाधा आ रही थी। एक रात निर्माणरत इंजीनियर के सपने में मां काली आईं और उनके कहने पर 1804 में पिंडी स्थापित की गयी। मंदिर का नाम मां डाट काली पडा। मान्यता है कि नया वाहन लेने पर चुनरी बंधवाने पर माता रानी स्वयं भक्त और वाहन की रक्षा करती हैं। देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे लोकार्पण भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मां डाट काली मंदिर में दर्शन-पूजन कर ही करेंगें।

कॉरिडोर से मंदिर जाने को विशेष निर्माण
एक्सप्रेसवे पर वाहनों की गति और भक्तों की सुविधा को एलिवेटेड कॉरिडोर से मां डाट काली मंदिर जाने को विशेष मार्ग  निर्मित किया गया है। एनएचएआई ने कॉरिडोर से ही मंदिर जाने को वायाडक्ट बनाया। अब सहारनपुर दिशा से आते श्रद्धालु मंदिर को यही मार्ग प्रयोग करेंगें।

विकास का नया प्रतीक! उत्तराखंड की पांचों ऊंगलियां घी में

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का लोकार्पण से उत्तराखंड के विकास के नए द्वार खुलेंगे। यह एक्सप्रेसवे दिल्ली-एनसीआर से कनेक्टिविटी ढाई घंटे करेगा।

  • दिल्ली-देहरादून यात्रा का समय घटकर ढाई घंटे होगा।
  • पर्यटन, उद्योग, कृषि क्षेत्रों को नई ऊर्जा मिलेगी।
  • निवेश और रोजगार के अवसरों में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे लोकार्पण के साथ ही उत्तराखंड के संभावनाओं के नए कपाट खुलेंगे। यह एक्सप्रेसवे राज्य के चहुंमुखी और संतुलित विकास को नई गति देगा।

दिल्ली यात्रा का समय घटकर मात्र ढाई घंटे रह जाएगा। उत्तराखंड की दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के 25 बड़े आर्थिक केंद्रों से सीधा संपर्क और राज्य में पर्यटन, उद्योग, कृषि और सेवा क्षेत्र को नई ऊर्जा और विस्तार मिलेगा। निवेश को बढ़ावा मिलने के साथ रोजगार अवसर भी उल्लेखनीय रूपसे बढेंगें। एक्सप्रेसवे उत्तराखंड को पारंपरिक पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था से आगे बढ़ा विकास का नया माडल बनायेगा। राज्य की फसलें व उत्पाद बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंचेंगेें। उत्तराखंड अधिक सुलभ पर्यटन राज्य बनेगा। यह एक्सप्रेसवे वाहनों को गति देने के साथ ही प्रदेश की अर्थव्यवस्था, विकास व संभावनाओं को नई दिशा देगा।

वीकेंड टूरिज्म को मिलेगी नई उड़ान

दिल्ली से देहरादून की यात्रा का समय छह घंटे से घटकर ढाई घंटे होने से वीकेंड टूरिज्म बढेगा। मसूरी, ऋषिकेश, हरिद्वार और चारधाम रूट पर पर्यटकों की संख्या बढ़ने से होटल, होमस्टे, ट्रांसपोर्ट और गाइड सेवाओं में सीधा राजस्व बढ़ेगा। राज्य की अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार पर्यटन अब सालभर चलेगा।

निवेशकों का बढ़ेगा भरोसा, उद्योग भरेंगें रफ्तार

हरिद्वार और देहरादून के औद्योगिक क्षेत्रों को दिल्ली-एनसीआर के बाजार से तेज और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी। इससे मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स की सप्लाई चेन मजबूत होगी और लाजिस्टिक्स लागत घटेगी। नए निवेशकों को राज्य अधिक आकर्षक बनेगा, विशेषकर फार्मा, एफएमसीजी व फूड प्रोसेसिंग सेक्टर में विस्तार की संभावनाएं मजबूत होंगी।

बाजार तक तेज होगी फल-सब्जियों की पहुंच

उत्तराखंड के फल, सब्जियां व डेयरी उत्पाद अब कम समय में दिल्ली-एनसीआर, हरियाणा और पंजाब तक पहुंच सकेंगें। इससे नुकसान का प्रतिशत घटकर किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा। एक्सप्रेसवे किनारे कोल्ड स्टोरेज और एग्री-लाजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास की राह आसान होगी।

निवेशकों को मिलेगा नया ठिकाना

देहरादून और आसपास रियल एस्टेट की मांग बढेगी। बेहतर कनेक्टिविटी से दिल्ली-एनसीआर के निवेशक यहां सेकेंड होम और कमर्शियल प्रापर्टी में रुचि दिखायेंगें। इससे निर्माण क्षेत्र को गति मिलेगी । स्थानीय आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी।

रोजगार के नए अवसरों से हाथों को काम

पर्यटन, ट्रांसपोर्ट, होटल, निर्माण और सेवा क्षेत्र में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। स्थानीय युवाओं को राज्य में ही रोजगार मिलने से पलायन नियंत्रण होगा। साथ ही छोटे व्यवसाय और स्टार्टअप भी प्रोत्साहित होंगें।

आस्था को गति, यात्रा होगी सुगम

हरिद्वार और ऋषिकेश तक आसान पहुंच से चारधाम यात्रा का समय घटेगा और जाम की समस्या समाप्ति से यात्रा प्रबंधन बेहतर होगा और श्रद्धालुओं की संख्या बढेगी।

दूरी घटेगी, सुविधाएं बढ़ेंगी, जीवन आसान

बेहतर सड़क कनेक्टिविटी से स्वास्थ्य और शिक्षा सेवाओं तक पहुंच आसान होगी। आपातकालीन सेवाओं की गति बढ़ेगी। दूरस्थ क्षेत्रों का जुड़ाव मजबूत होने से क्षेत्रीय संतुलन भी होगा।

 रेल और हवाई मार्ग की तुलना में खर्च और सुविधा कैसी रहेगी?

इस एक्सप्रेसवे से दिल्ली से देहरादून छह घंटे यात्रा अब मात्र 2.5 घंटे में संभव होगी।  दिल्ली से हरिद्वार की दूरी 5 घंटे से घटकर 2 घंटे रह जाएगी। तो अब देखें ट्रेन, हाईवे या हवाई जहाज किससे सफर सस्ता होगा; समय और पैसे की दृष्टि से?

एक्सप्रेसवे vs ट्रेनः किसमें कम समय 

ट्रेन से तुलना करें, तो अभी इस रूट पर सबसे तेज ट्रेन वंदे भारत है, जो 4 घंटे 45 मिनट में देहरादून पहुंचती है। अगर आप एक्सप्रेसवे से जायें, तो यह दूरी 2.5 घंटे में पूरी होगी।  एक्सप्रेसवे से करीब 2 घंटे से ज्यादा की बचत होगी। अब आगे किराए की बात करते हैं।

एक्सप्रेसवे vs ट्रेनः किससे कम रुपये

ट्रेन का किराया 1075 रुपये (AC चेयर कार), 1900 रुपये (एग्जीक्यूटिव) है। अगर कैब से सफर करें, तो कैब किराया 2700 रुपये से लेकर 7400 रुपये तक हो सकता है। ये आपकी गाड़ी पर निर्भर करेगा कि आपने कितनी लग्जरी और कितने सीट वाली गाड़ी बुक की है। इस हिसाब से अगर आप 4 लोगों के ग्रुप में सफर कर रहे हैं, तो आपके लिए कैब का खर्च प्रति व्यक्ति कम पड़ सकता है, जबकि अकेले सफर करने के दौरान ट्रेन फिर भी सस्ती रहेगी।

एक्सप्रेसवे vs फ्लाइटः किसमें कम समय लगेगा?

दिल्ली से देहरादून फ्लाइट से सफर करने में करीब 1 घंटा 10 मिनट लगता है, जबकि एक्सप्रेसवे में 2.5 घंटे। समय के लिहाज से पहली मरतबा हवाई जहाज से सफर करना फायदेमंद सौदा लगेगा, लेकिन असल में इसमें ज्यादा समय लग सकता है। क्योंकि, एयरपोर्ट पहुंचने, चेक-इन और अन्य कामों में लगने वाले समय को जोड़ दें, तो कुल समय बढ़ जाता है। ऐसे में एक्सप्रेसवे का 2.5 घंटे का सफर ज्यादा सुविधाजनक और किफायती विकल्प बन सकता है।

एक्सप्रेसवे vs फ्लाइटः किसमें कम रुपये लगेंगे?

हवाई टिकट 4000 रुपये से शुरु होता है। जबकि कैब 2700 रुपये से शुरु होती है। अकेले भी यात्रा करें, तो एक्सप्रेसवे बेहतर विकल्प होगा। 4 लोगों का ग्रुप हो तो पूरी तरह से फायदे का सौदा है।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के शुरू होने से यात्रा न सिर्फ तेज होगी, बल्कि कई मामलों में सस्ती भी रहेगी। ग्रुप ट्रैवल को सड़क सबसे सस्ती। सोलो ट्रैवल को ट्रेन अभी भी बेहतर, लेकिन समय और सुविधा  से एक्सप्रेसवे सबसे संतुलित विकल्प बनकर उभर रहा है।

 रूट और विशेषता

एक्सप्रेसवे दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर से शुरू होकर देहरादून तक जाएगा।  बागपत, बड़ौत, मुजफ्फरनगर, शामली और सहारनपुर के अलावा हरिद्वार को एक अलग कनेक्टिविटी (स्पर) भी होगी । यह चारधाम हाईवे से भी जुड़ेगा, जिससे उत्तराखंड के धार्मिक और पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी।

 

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