लस्ट जिहाद:जमानत निरस्तीकरण बाद मोनालिसा बंजारन और फरमान कहां है?
नाबालिग मोनालिसा से शादी कर फंसे फरमान खान, कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका निरस्त,जाएंगे जेल?
वायरल गर्ल मोनालिसा के पति फरमान की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट ने निरस्त कर दी. कोर्ट ने आरोपित के भागने और साक्ष्यों में छेड़छाड़ की आशंका जताई है.
Farman khan denied Anticipatory Bail (Photo: Instagram @farmankhanmr356)
नई दिल्ली,02 जुलाई 2026, महाकुंभ से वायरल हुईं मोनालिसा ने इसी साल 11 मार्च को अपने बॉयफ्रेंड फरमान खान संग केरल में शादी की थी. उनकी इंटरफेथ मैरिज पर जमकर बवाल हुआ.बताया गया कि मोनालिसा नाबालिग हैं.फरमान पर उन्हें भड़काने के आरोप लगे. हालांकि फरमान ने मीडिया के सामने मोनालिसा के 18 प्लस होने का दावा किया.फिर जांच पड़ताल में सामने आया कि मोनालिसा नाबालिग हैं.अब इस केस में फरमान की मुश्किल और बढ़ गई है.
जेल जाएंगा फरमान?
खरगोन जिले के जिला न्यायालय मण्डलेश्वर की विशेष POCSO कोर्ट ने फरमान की अग्रिम जमानत की याचिका खारिज की.फरमान पर नाबालिग मोनालिसा को केरल ले जाकर शादी करने के आरोप हैं.फरमान पर नाबालिग मोनालिसा को केरल ले जाकर शादी करने का आरोप एक्ट्रेस के माता-पिता ने लगाया था.कोर्ट ने माना कि आरोपी फरार है,साक्ष्यों से छेड़छाड़ की आशंका है. महेश्वर थाने में बीएनएस,सहित अन्य धाराओं में दर्ज मामले में राहत देने से कोर्ट ने इनकार किया है.
महेश्वर पुलिस ने इन धाराओं में केस डायरी पेश की
मोनालिसा के मामले में ऑडियो विभाग के अधिकारी पुलिस महेश्वर श्वेता शुक्ला ने पुलिस थाना महेश्वरी में धारा 137,(2),81,83,87 भारतीय न्याय संहिता और धारा 9 बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम साथ ही धारा 3(2) v,3(2) (va) अजजा,अजा अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की केस डायरी सहित प्रतिवेदन प्रस्तुत किया है.
महेश्वर नगरपरिषद में गलत बर्थडेट
जांच केरल के नयनार देवा मंदिर से शुरु हुई. मंदिर प्रशासन ने जांच में बताया कि मोनालिसा और फरमान की शादी आधार कार्ड में लिखी ऐज के बेसिस पर हुई है.केरल के पुअर गांव के ग्राम पंचायत कार्यालय में इस शादी का पंजीकरण किया गया है.इसमें मोनालिसा के गलत जन्म प्रमाण पत्र को आधार बनाया गया है.जांच टीम ने पाया कि ये गलत जन्म प्रमाण पत्र नगरपालिका महेश्वर से जारी हुआ है.उसके बाद जांच टीम ने तत्काल मध्यप्रदेश महेश्वर के सरकारी मेडिकल अस्पताल का रिकॉर्ड जांचा तो पाया कि मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को शाम 5:50 हुआ था.यानि वो केरल में संपन्न विवाह 11 मार्च,2026 को 16 वर्ष 2 माह और 12 दिन की थी.
साथ ही जांच टीम ने पूर्व में स्थानीय नगरपालिका महेश्वर से जारी जन्म प्रमाण पत्र,जो गलत जन्म तिथि के आधार पर जारी किया गया है,जिसमें मोनालिसा की जन्म तिथि 1/1/2008 लिखाई गई थी,उसे निरस्त करवाने में भी कानूनी प्रावधानों का अध्ययन कर स्थानीय प्रशासन को निर्देश दिया.जन्म प्रमाण पत्र के इस दस्तावेजी प्रमाण ने विवाह के पक्षकारों की साजिश को बेनकाब कर दिया.मोनालिसा के माता-पिता ने उनके रक्त संबंधियों के जाति प्रमाण पत्र भी आयोग को उपलब्ध कराए गए.जिससे ये बात भी साबित हो गई कि मोनालिसा के माता-पिता अनुसूचित जनजाति समुदाय के सदस्य हैं.
महेश्वर के सरकारी रिकार्ड में नाबालिग मोनालिसा
राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग अध्यक्ष अन्तर सिंह आर्य के निर्देश पर गठित जांच दल ने केरल से लेकर मध्य प्रदेश के गांवों तक गहन छानबीन की. 72 घंटे में केरल से लेकर मध्य प्रदेश के महेश्वर तक सारे तार जोड़कर सच को उजागर कर दिया.
मोनालिसा बंजारन और उनके पति फरमान खान के वर्तमान ठिकाने के बारे में पुलिस को कोई सटीक जानकारी नहीं है, क्योंकि वे दोनों अभी फरार हैं। फरमान पर मोनालिसा से नाबालिग अवस्था में शादी करने का आरोप है और मध्य प्रदेश की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) कोर्ट से उसकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी है।
मामले के मुख्य अपडेट्स :
विवाद और आयु: प्रयागराज महाकुंभ में चर्चा में आई 16 वर्षीय मोनालिसा ने 11 मार्च को केरल के एक मंदिर में फरमान खान से शादी कर ली थी जिसमें वहां के कांग्रेस, वामपंथी और मुस्लिम लीग नेता भी शामिल हुए। राष्ट्रीय बाल अधिकार संस्था और राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की जांच में मोनालिसा को नाबालिग पाए जाने के बाद, फरमान के खिलाफ अपहरण और पॉक्सो एक्ट में मुकदमा है।
अग्रिम जमानत याचिका निरस्त: मंडलेश्वर (मध्य प्रदेश) की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने फरमान की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है और कोर्ट ने फरमान के भी फरार होने की पुष्टि की है।
ताजा मीडिया इंटरव्यू और अदालती कार्यवाहियों के अनुसार, मोनालिसा भोसले और फरमान खान अभी केरल में किसी अज्ञात स्थान पर हैं। मध्य प्रदेश पुलिस के डर और लगातार धमकियों के कारण वे छिपे हुए हैं और सुरक्षा कारणों से अपने सटीक पते सार्वजनिक नहीं कर रहे हैं।
⚖️ कोर्ट की ताजा स्थिति (जुलाई 2026)
केरल हाई कोर्ट का फैसला: केरल हाई कोर्ट ने फरमान खान की ‘ट्रांजिट अग्रिम जमानत’ (Transit Anticipatory Bail) की अवधि आगे बढ़ाने से साफ इनकार कर दिया है। फरमान मध्य प्रदेश की स्थानीय अदालत में याचिका लगा चुका, इसलिए अब केरल कोर्ट का क्षेत्राधिकार खत्म हो चुका है।
मध्य प्रदेश पॉक्सो कोर्ट से झटका: इससे पहले 1 जुलाई 2026 को मध्य प्रदेश के मण्डलेश्वर (खरगोन जिला) की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने फरमान की अग्रिम जमानत याचिका को खारिज कर दिया था。 अदालत ने माना कि आरोपी फरार है और सबूतों के साथ छेड़छाड़ होने की आशंका है।
हाई कोर्ट में आयु विवाद: मोनालिसा और फरमान ने मध्य प्रदेश की इंदौर हाई कोर्ट में भी एक याचिका है। उनका आरोप है कि मोनालिसा को नाबालिग साबित करने के उनके पिता ने सरकारी जन्म प्रमाण पत्र के रिकॉर्ड में धोखाधड़ी से बदलाव करवाए । शादी के समय मोनालिसा बालिग थीं।
🔍सुरक्षा और धमकियों का दावा: मोनालिसा ने स्पष्ट किया है कि उन्हें मध्य प्रदेश लौटने में बहुत डर लगता है क्योंकि वहां उनकी जान को खतरा है।फरमान ने बताया कि धमकियों से उनका घर से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।
प्रयागराज महाकुंभ प्रसिद्ध मोनालिसा भोसले और फरमान खान मामले में पुलिस कार्रवाई और अभिलेख विवाद :
1. 📄 दस्तावेजों का मुख्य विवाद (उम्र और जन्म प्रमाण पत्र)
इस पूरे मामले की जड़ दोनों पक्षों के प्रस्तुत अलग-अलग सरकारी अभिलेख और दावे हैं:
जांच एजेंसियों का दावा (नाबालिग): राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की टीम ने मध्य प्रदेश के महेश्वर स्थित सरकारी मेडिकल अस्पताल के रिकॉर्ड खंगाले। इसके अनुसार मोनालिसा का जन्म 30 दिसंबर 2009 को हुआ था, जिसका मतलब है कि 11 मार्च 2026 को शादी के समय उनकी उम्र केवल 16 वर्ष 2 महीने थी। अधिकारियों का कहना है कि केरल में शादी के पंजीकरण को महेश्वर नगरपालिका से जारी एक गलत जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल किया गया था, जिसे अब रद्द करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
मोनालिसा और फरमान का दावा : शादी के समय मोनालिसा ने अपना आधार कार्ड और जन्म प्रमाण पत्र दिखाया था, जिसमें उनकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 होने से वह बालिग (18 वर्ष से ऊपर) सिद्ध होती है।
हाई कोर्ट में धोखाधड़ी का आरोप: मोनालिसा ने इंदौर हाई कोर्ट में याचिका दी है। उनका आरोप है कि उनके पिता और परिवार के सदस्यों ने षड्यंत्र में उनके मूल सरकारी रिकॉर्ड में बदलाव करवाकर उन्हें ‘नाबालिग’ साबित करने की कोशिश की है ताकि उनकी शादी अवैध ठहरायी जा सके। फरमान ने यह भी दावा किया कि पुलिस का दिखाया जा रहा 2009 का जन्म रिकॉर्ड वास्तव में उनके छोटे भाई का है, जिसे उनका बताया जा रहा है।
🚨 2. पुलिस की अगली कार्रवाई (Next Legal & Police Action)
मंडलेश्वर कोर्ट से फरमान खान की अग्रिम जमानत निरस्तीकरण के बाद, मध्य प्रदेश की खरगोन पुलिस कानूनी रूप से काफी मजबूत स्थिति में है।
पुलिस की अगली संभावित रणनीतियां :
गिरफ्तारी को केरल पुलिस से सहयोग: फरमान खान पर महेश्वर (खरगोन) पुलिस थाने में पॉक्सो एक्ट (POCSO) , अपहरण (Kidnapping) और SC/ST एट्रोसिटी एक्ट में बेहद गंभीर आपराधिक मुकदमें हैं। केरल हाई कोर्ट से मिला एक महीने का संरक्षण (ट्रांजिट बेल) समाप्त हो चुका, इसलिए मध्य प्रदेश पुलिस अब केरल पुलिस के सहयोग से फरमान को पकडने को टीमें भेज सकती है।
मोनालिसा को कस्टडी में लेना और मेडिकल टेस्ट: चूंकि पुलिस रिकॉर्ड में मोनालिसा अभी भी नाबालिग (पीड़िता) हैं, इसलिए पुलिस का पहला काम उन्हें खोजना होगा। ढूंढकर, पुलिस को कोर्ट के सामने उनका उम्र निर्धारण मेडिकल टेस्ट (Bone Ossification Test) कराना होगा ताकि वैज्ञानिक रूप से उनकी सही उम्र पता चल सके।
कथन अंकन: मजिस्ट्रेट के सामने मोनालिसा के धारा 164 में बयान होंगें। हालांकि मोनालिसा लगातार फरमान का समर्थन कर रही हैं, लेकिन पॉक्सो एक्ट के कड़े नियमों में यदि लड़की कानूनन नाबालिग है, तो उसकी सहमति का कानूनी महत्व समाप्त हो जाता है।
भगोडा घोषित करने की प्रक्रिया: यदि फरमान पुलिस की पकड़ में नहीं आता, तो पुलिस कोर्ट से उसके गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी करवा आगे चलकर उसकी संपत्ति कुर्क करने या उसे ‘भगोड़ा’ घोषित करने की कार्रवाई (धारा 82/83) भी शुरू कर सकती है।
मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच से मोनालिसा भोसले और फरमान खान की मुख्य रिट याचिका (जन्म प्रमाण पत्र विवाद और एफआईआर को चुनौती) पर सुनवाई की कोई निश्चित अगली तारीख अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, क्योंकि याचिका मई 2026 में ही दायर हुई थी और इसकी कानूनी प्रक्रिया अभी प्रारंभिक चरणों में है।
हालांकि, इस मामले से जुड़ी अन्य अदालती सुनवाइयों और कानूनी घटनाक्रमों की स्थिति नीचे दी गई है:
केरल हाई कोर्ट में अगली सुनवाई (10 जुलाई 2026): केरल हाई कोर्ट ने मोनालिसा को ऑनलाइन धमकियों और नफरत भरे अभियानों से बचाने को अंतरिम पुलिस सुरक्षा प्रदान की है। सुरक्षा से जुड़े इस विशिष्ट कानूनी मुद्दे और याचिका की अगली सुनवाई 10 जुलाई 2026 को होनी तय हुई है।
इंदौर हाई कोर्ट में मुख्य याचिका: वरिष्ठ वकीलों के माध्यम से इंदौर हाई कोर्ट में दायर मुख्य याचिका में, सरकारी रिकॉर्ड में कथित ‘छेड़छाड़’ की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। इस पर अदालत द्वारा राज्य सरकार और पुलिस से जवाब मांगा जाना बाकी है।
अग्रिम जमानत का रास्ता: 1 जुलाई 2026 को मंडलेश्वर की निचली विशेष पॉक्सो कोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद, फरमान खान के वकीलों ने संकेत दिया है कि वे जल्द ही इंदौर हाई कोर्ट में एक नई और नियमित अग्रिम जमानत याचिका (Anticipatory Bail Application) दायर करेंगे। इस नई याचिका के दायर होने के बाद ही इंदौर हाई कोर्ट में जमानत पर सुनवाई की तारीख तय होगी।
केरल हाई कोर्ट ने मोनालिसा भोसले की जान को गंभीर खतरा मानते हुए उन्हें तत्काल पुलिस सुरक्षा देने का आदेश जारी किया है। कोर्ट ने यह फैसला उनकी उस याचिका पर दिया जिसमें उन्होंने खुद को और उनके पति फरमान खान को मिल रही धमकियों और नफरत भरे अभियानों (Online Hate Campaigns) का हवाला दिया था।
मोनालिसा को मिली पुलिस सुरक्षा से जुड़े मुख्य बिंदु और अदालती आदेश इस प्रकार हैं:
🛡️ पुलिस सुरक्षा के आदेश की मुख्य बातें
सुरक्षा की जिम्मेदारी: केरल हाई कोर्ट के जस्टिस बेचू कुरियन थॉमस की एकल पीठ ने एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) को निर्देश दिया है कि वे मोनालिसा के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा को पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करें।
कोर्ट की टिप्पणी: अदालत ने दलीलें सुनने के बाद प्रथम दृष्टया माना कि याचिकाकर्ता (मोनालिसा) के जीवन की सुरक्षा की जानी चाहिए और जब तक इस रिट याचिका का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक सुरक्षा जारी रहेगी। इस मामले की अगली विस्तृत सुनवाई 10 जुलाई 2026 तय है।
व्यस्कता अवलोकन: कोर्ट की एक अन्य पीठ ने अपने शुरुआती अवलोकन में यह भी नोट किया था कि शारीरिक रूप से मोनालिसा प्रथम दृष्टया बालिग (Adult) प्रतीत होती हैं, जिसके आधार पर उन्हें सुरक्षा का पूरा अधिकार है।
⚠️ पुलिस सुरक्षा की मांग क्यों की गई?
जान से मारने की धमकियां: मोनालिसा ने कोर्ट को बताया और मीडिया इंटरव्यू (The News Minute) में भी आरोप लगाया कि उन्हें मध्य प्रदेश लौटने पर “टुकड़े-टुकड़े करने या गोली मार देने” की लगातार धमकियां मिल रही हैं।
घर से निकलना बंद: अंतर-धार्मिक विवाह (Interfaith Marriage) के कारण सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ बड़े पैमाने पर नफरत फैलाई जा रही है, जिससे केरल में भी उनका और फरमान का घर से बाहर निकलना असुरक्षित हो गया था।
🛑 सुरक्षा और गिरफ्तारी का पेच (फरमान खान की स्थिति)
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि पुलिस सुरक्षा केवल मोनालिसा के जीवन की रक्षा के लिए है। उनके पति फरमान खान को गिरफ्तारी से कोई सुरक्षा (Protection from Arrest) अब प्राप्त नहीं है। केरल हाई कोर्ट ने 2 जुलाई 2026 को स्पष्ट कर दिया कि चूंकि मध्य प्रदेश की विशेष कोर्ट ने फरमान की अग्रिम जमानत खारिज कर दी है, इसलिए अब मध्य प्रदेश पुलिस उन्हें गिरफ्तार करने को पूरी तरह स्वतंत्र है।
केरल हाई कोर्ट के इस सुरक्षा आदेश का मध्य प्रदेश पुलिस की कार्रवाई और मामले की कानूनी स्थिति पर बहुत गहरा असर पड़ेगा, जिसे समझना महत्वपूर्ण है। पुलिस सुरक्षा के तौर-तरीकों और इसके कानूनी प्रभावों का पूरा विवरण नीचे दिया गया है:
👮 केरल पुलिस द्वारा सुरक्षा के तौर-तरीके
चूंकि मोनालिसा और फरमान वर्तमान में केरल के कोच्चि (एर्नाकुलम जिला) में रह रहे हैं, इसलिए केरल पुलिस निम्नलिखित तरीकों से सुरक्षा सुनिश्चित कर रही है:
स्थानीय पुलिस की निगरानी: एर्नाकुलम सेंट्रल पुलिस की एक विशेष टीम मोनालिसा के रहने के स्थान की निगरानी करती है ताकि कोई अज्ञात व्यक्ति उन तक न पहुंच सके।
इमरजेंसी रिस्पॉन्स: मोनालिसा को स्थानीय पुलिस अधिकारियों और संकटकालीन हेल्पलाइन के सीधे संपर्क नंबर दिए गए हैं, ताकि किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर वे तुरंत पुलिस को बुला सकें।
सोशल मीडिया और डिजिटल सुरक्षा: पुलिस उनके खिलाफ ऑनलाइन मिल रही धमकियों के आईपी एड्रेस (IP Addresses) और अकाउंट्स की भी जांच कर रही है ताकि धमकी देने वालों पर कार्रवाई की जा सके।
⚡ मध्य प्रदेश पुलिस की कार्रवाई पर इसका क्या असर पड़ेगा?
मोनालिसा को मिली इस सुरक्षा के बाद मध्य प्रदेश की खरगोन (महेश्वर) पुलिस के लिए कार्रवाई करना काफी पेचीदा हो गया है:
मोनालिसा को जबरन ले जाना नामुमकिन: कानूनन मोनालिसा अभी मध्य प्रदेश पुलिस के रिकॉर्ड में एक ‘नाबालिग अपहृत लड़की’ (Victim) हैं। सामान्य परिस्थितियों में पुलिस उन्हें बरामद करके तुरंत मध्य प्रदेश ले आती। लेकिन अब, चूंकि केरल हाई कोर्ट ने उन्हें सुरक्षा दी है, मध्य प्रदेश पुलिस केरल जाकर मोनालिसा को उनकी इच्छा के विरुद्ध जबरन अपनी कस्टडी में नहीं ले सकती।
फरमान खान की गिरफ्तारी पर रोक नहीं: कोर्ट ने सुरक्षा केवल मोनालिसा को दी है। फरमान खान पर दर्ज पॉक्सो (POCSO) और अपहरण के आपराधिक मामले अभी भी प्रभावी हैं। मध्य प्रदेश पुलिस केरल पुलिस को अग्रिम जमानत खारिज होने का अदालती आदेश दिखाकर फरमान खान को गिरफ्तार करने की कार्रवाई कर सकती है और केरल पुलिस कानूनन इसमें बाधा नहीं बनेगी।
बयान दर्ज करने की प्रक्रिया: यदि मध्य प्रदेश पुलिस मोनालिसा के बयान दर्ज करना चाहती है, तो उन्हें या तो केरल जाकर महिला पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में ऐसा करना होगा या फिर केरल हाई कोर्ट से इसके लिए विशेष अनुमति लेनी होगी।
📅 10 जुलाई 2026 की सुनवाई में क्या होगा?
केरल हाई कोर्ट में 10 जुलाई 2026 को होने वाली अगली सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण है:
इस दिन केरल पुलिस कोर्ट को अपनी स्टेटस रिपोर्ट सौंपेगी कि उन्होंने मोनालिसा को क्या सुरक्षा दी है।
मध्य प्रदेश सरकार के वकील भी कोर्ट के सामने अपना पक्ष रख सकते हैं कि लड़की नाबालिग है, इसलिए उसे बाल कल्याण समिति (CWC) या उसके माता-पिता को सौंपा जाना चाहिए।
फरमान खान की संभावित गिरफ्तारी और इस पूरे कानूनी विवाद के बीच, मोनालिसा के पास उपलब्ध कानूनी विकल्प और केरल बाल कल्याण समिति (CWC) की भूमिका इस मामले की अगली दिशा तय करेगी:
⚖️ 1. फरमान खान की गिरफ्तारी की स्थिति में मोनालिसा के पास कानूनी विकल्प
यदि मध्य प्रदेश पुलिस फरमान खान को गिरफ्तार कर लेती है, तो मोनालिसा निम्नलिखित कानूनी रास्ते अपना सकती हैं:
इंदौर हाई कोर्ट में तत्काल याचिका: मोनालिसा अपने वकीलों के माध्यम से मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में एक ‘बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका’ (Habeas Corpus Petition) या तत्काल सुरक्षा की गुहार लगा सकती हैं। वह कोर्ट के सामने खुद उपस्थित होकर यह गवाही दे सकती हैं कि वह अपनी मर्जी से फरमान के साथ रह रही हैं और उन पर कोई दबाव नहीं है।
उम्र जांच (Medical Test) की मांग: मोनालिसा की तरफ से कोर्ट में यह मांग की जा सकती है कि उनके कागजी जन्म प्रमाण पत्र के विवाद को दरकिनार कर, वैज्ञानिक तरीके से उनकी सही उम्र का पता लगाने के लिए ‘बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट’ (Bone Ossification Test) कराया जाए। यदि इस मेडिकल टेस्ट में उनकी उम्र 18 वर्ष या उससे अधिक आती है, तो फरमान पर लगे पॉक्सो (POCSO) एक्ट के आरोप तुरंत कमजोर हो जाएंगे।
धारा 164 का अनुकूल बयान: मजिस्ट्रेट के सामने दर्ज होने वाले बयान (Statement under Section 164 CrPC) में मोनालिसा यह रुख बनाए रख सकती हैं कि उनका अपहरण नहीं हुआ था। हालांकि नाबालिग होने की स्थिति में सहमति मायने नहीं रखती, लेकिन लड़की का सकारात्मक बयान आरोपी को भविष्य में नियमित जमानत दिलाने में बहुत मददगार साबित होता है।
🏢 2. केरल बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee – CWC) की भूमिका
चूंकि मध्य प्रदेश पुलिस के दस्तावेजों के अनुसार मोनालिसा अभी भी एक ‘नाबालिग’ (Minor) हैं, इसलिए केरल की स्थानीय बाल कल्याण समिति (CWC) इस मामले में एक स्वतंत्र और बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है:
अस्थाई संरक्षण (Safe Custody): यदि मध्य प्रदेश पुलिस केरल पहुंचकर फरमान को गिरफ्तार करती है, तो वह मोनालिसा को सीधे अपने साथ मध्य प्रदेश नहीं ले जा सकती। कानूनन, उन्हें मोनालिसा को केरल की स्थानीय CWC के सामने पेश करना होगा।
शेल्टर होम या सुरक्षित आवास: CWC मोनालिसा की काउंसलिंग करेगी और उनकी सुरक्षा को देखते हुए उन्हें केरल के ही किसी सुरक्षित सरकारी शेल्टर होम (Nirbhaya Home) या नारी निकेतन में रखने का आदेश दे सकती है, जब तक कि उनकी उम्र का अंतिम फैसला अदालत द्वारा नहीं हो जाता।
माता-पिता को सौंपने से इनकार का अधिकार: आमतौर पर CWC नाबालिग को उसके माता-पिता को सौंपती है। लेकिन, चूंकि मोनालिसा ने अपने माता-पिता से अपनी जान को खतरा बताया है और केरल हाई कोर्ट ने भी उन्हें सुरक्षा दी है, इसलिए CWC उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध मध्य प्रदेश में उनके परिवार को सौंपने से इनकार कर सकती है।
