बंगाल डिंब’क्रेसी:संडे हो या मंडे,TMC नेता रोज खा रहे सड़े अंडे
‘ये बंगाल की डिंबक्रेसी है…’, संडे हो या मंडे महीने भर से टीएमसी के नेताओं को रोज पड़ रहे हैं अंडे
बंगाल में विरोध का नया ट्रेंड पैदा हुआ है- अंडा अटैक. इसे डिंबक्रेसी भी कहा जा रहा है. गुस्सा और नाराजगी जताने का ये तरीका तत्काल सोशल मीडिया पर वायरल होता है और इसे खूब प्रचार मिलता है. अब इस ट्रेंड से परेशान TMC नेता ने अमित शाह को चिट्ठी लिखी है.
नई दिल्ली,16 जून 2026,पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र यानी Democracy अब अंडों यानी कि डिंब से परिभाषित होने लगी है. शायद इसी से लोग अब मजाक में कहने लगे हैं कि यहां डेमोक्रेसी नहीं, ‘डिंब’क्रेसी चलती है. बंगाली भाषा में अंडा ‘डिंब’ कहा जाता है.
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद लोगों ने राजनीतिक विरोध का एक अलग प्रतीक गढ़ लिया है. ये प्रतीक है अंडा यानी डिंब.
लोकतंत्र में जनता अपनी पसंद-नापसंद वोट से जताती है. संसद में विपक्ष सवालों से सरकार को घेरता है. सड़कों पर प्रदर्शनकारी नारे लगाते हैं. लेकिन पश्चिम बंगाल की राजनीति ने विरोध का एक अलग ही प्रतीक गढ़ लिया है. ये प्रतीक है अंडा. 4 मई को बंगाल के नतीजे आने के बाद से ही संडे हो या मंडे टीएमसी नेताओं को रोज जनता अंडे मार रही है.
ममता बनर्जी के घर के बाहर कुणाल घोष पर अंडों से हमला
बंगाल में अंडा सिर्फ भोजन नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिरोध का हथियार भी बन चुका है.
‘ये जनता का प्रतिवाद है’
बंगाल भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने राज्य में पनपती ‘डिंब’क्रेसी पर कहा,
“भारत में डेमोक्रेसी है, लेकिन बंगाल में डिंबक्रेसी है, डिंब माने अंडा. अब अंडा वाले के दुकान में जाएं तो दो तरह का अंडा मिल रहा है, वो पूछता है, आपको खाना है या मारना है, मारने वाले अंडे का दाम ज्यादा है.”
उन्होंने जनता की नाराजगी का दोष टीएमसी नेताओं पर मढ़ते हुए कहा कि बंगाल में अंडा कल्चर आ गया है, और इसके जिम्मेदार हैं ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी. वे कहते थे डीजे बजाएंगे अब डीजे बजा रहे हैं अंडे से. अंडे से डीजे बज रहा है. ये है ‘डिमो’क्रेसी. डिंबक्रेसी एक तरह का डेमोक्रेसी है.
उन्होंने कहा कि इन लोगों ने 15 साल अत्याचार किया है, ये प्रतिवाद है सामान्य जन का. और ये आसनसोल में भी शुरू होगा.
अंडा अटैक यानी विरोध का अलग ट्रेंड
दरअसल 2026 के विधानसभा चुनावों में BJP की भारी जीत के बाद TMC नेता जनता के बीच जाते हैं, तो उन्हे “चोर-चोर” नारों और अंडों की बौछार का सामना करना पडता हैं. पश्चिम बंगाल में सत्ता पलटने पर विरोधियों पर हिंसा की खबरें आती हैं, लेकिन इस बार विरोध का ट्रेंड अलग है. सोनारपुर में अभिषेक बनर्जी पर अंडे, कुनाल घोष पर कलकत्ता में अंडा, मदन मित्रा और अन्य नेताओं पर इसी तरह के हमले. उनकी महिला नेत्रियों के पतियों पर अंडे।
ये अलग-अलग घटनाएं नहीं, बल्कि एक पैटर्न हैं. भाजपा इसे जनता का गुस्सा बताती है तो टीएमसी इसे पार्टी नेताओं पर हमला जता रही है.
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना में 4 मई को नतीजों के बाद पहली बार अभिषेक बनर्जी पर अंडे फेंके गए.
सोनारपुर में लोगों के एक समूह ने उनके खिलाफ “चोर चोर” नारे लगाए और विरोध किया. इसमें अभिषेक पर अंडों के अलावा जूते और पत्थर तक फेंके गए, हाथापाई हुई.
बाद में दौरे में अंडों से बचने को अभिषेक बनर्जी छाते की ओट लेते नजर आए.
छोटे-बड़े नेताओं पर हो रहे हमले
इसके बाद टीएमसी नेताओं पर अंडों से हमलों का ऐसा सिलसिला शुरू हुआ ममता बनर्जी के घर के बाहर तक जा पहुंचा. मंडे को कुणाल घोष जनता के गुस्से का शिकार बने. सोमवार को कुणाल घोष के ऊपर एक युवक ने अंडों से हमला किया.
कुणाल घोष ममता बनर्जी के घर के बाहर मीडिया से बात कर रहे थे, तभी खचाक से एक अंडा उनके सिर पर लगा.
मंडे के बाद ट्यूजडे को भी टीएमसी नेताओं पर अंडा अटैक नहीं रुका. पश्चिम बर्धमान जिले के रानीगंज में तृणमूल कांग्रेस नेता सौमित्र बनर्जी जैसे ही थाने से बाहर पुलिस की गाड़ी में बैठने के लिए बाहर निकले उस पर पहले से तैयार लोगों ने अंडा फेंक दिया.
इस नेता पर आरोप है कि इसने 2 साल पहले आरजी कर मामले में विरोध कर रहे BJP कार्यकर्ताओं पर अटैक करवाया था.
इससे पहले 7 जून को टीएमसी नेता मदन मित्रा पर उनके ही विधानसभा में अंडे पड़े थे. मदन मित्रा अपनी ही विधानसभा क्षेत्र कमारहाटी में एक सरकारी कार्यक्रम में पहुंचे थे, जहां उग्र भीड़ ने उन पर अंडों से हमला कर दिया. इस हंगामे के बाद उन्हें अपना कार्यक्रम बीच में ही छोड़कर उल्टे पैर वापस लौटना पड़ा.
सौगत रॉय की चिट्ठी, महुआ की वार्निंग
अंडा अटैक से परेशान टीएमसी नेता सौगत रॉय ने केंद्रीय मंत्री गृह अमित शाह को चिट्ठी लिखी है और एग अटैक को बंद करने की मांग की है. सौगत रॉय ने कहा कि शिकायत के बावजूद इन मामलों में कार्रवाई नहीं हुई है.
वहीं टीएमसी की फायरब्रांड नेता महुआ मोइत्रा ने एक वीडियो जारी कर कहा है कि यदि कोई उन पर अंडे या टमाटर फेंकता है तो वह वीडियो फुटेज से चेहरा पहचानकर कानूनी कार्रवाई करेंगी और मामले को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाएंगी.
अंडे ही क्यों?
रिपोर्ट के अनुसार डिंबक्रेसी के इस दौर में बंगाल में सड़े अंडों की कीमत बढ़ गई है. दरअसल अंडों से घातक चोट तो नहीं लगती लेकिन ये शिकार शक्ल की शक्ल बिगाड़ देता है. सड़ा अंडा तो और भी खतरनाक होता है, और इससे कपड़े तो खराब होते ही हैं बदबू भी आती है. अगर सड़ा हुआ अंडा कपड़ों पर फूट जाए तो बदबू से छुटकारा पाना आसान नहीं होता

इसका विधिक पक्ष भी है। कोई कार्यकर्ता पत्थर या लाठी चलाता है, तो उस पर दंगा भड़काने या जानलेवा हमले जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा हो सकता है. लेकिन कानूनी भाषा में अंडा फेंकने को मामूली हमला और विरोध का प्रतीक माना जाता है.इसमें कोई कठोर धारा नहीं लगती.
बंगाल की राजनीति वैसे भी प्रतीकों की राजनीति रही है. कभी दीवारों पर लिखे नारे सत्ता की दिशा तय करते थे, कभी जुलूस और धरने राजनीतिक तापमान मापते थे. अब अंडा भी उसी परंपरा का हिस्सा बनता दिखता है. यह विरोध का ऐसा माध्यम है जो कैमरे में तुरंत कैद होता है और सोशल मीडिया पर कुछ ही मिनटों में हजारों लाखों लोगों तक पहुंच जाता है. मामला कलकत्ता हाई कोर्ट गया तो वहां से पुलिस को निर्देश दिये गये
लेकिन भाजपा ने पल्ला झाड लिया कि कैसे पता करें किस टी एम सी कार्यकर्ता या विरोधी अथवा नाराज सामान्य जन की जेब में अंडा है।
उन्होने व्यंग्य किया कि हमें विदेशों में अंडा ट्रेक करने वाली मशीन ढूंढकर आयात करने का समय दें।

