AI निर्मित वीडियो नही है अल्मोड़ा के रवि टम्टा का उड़नखटोला
उत्तराखंड के युवक ने बना डाली उड़ने वाली कार, सोशल मीडिया पर लोग बोल रहे- हमारे यहां टैलेंट की कमी नहीं
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में रहने वाले रवि टम्टा ने करीब 1 मिनट तक हवा में उड़कर भारत के पहले पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल का सफल टेस्ट कर लिया है.
अल्मोड़ा के रहने वाले रवि टम्टा ने भारत के पहले पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल का सफल परीक्षण किया.X@KailashVashi
Viral Video: सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से ट्रेंड कर रहा है, जिसमें एक युवक नीले रंग की सिंगल सीटर गाड़ी में बैठकर हवा में उड़ते हुए नजर आ रहा है. दिखने में ये बहुत छोड़ी सी है और इसमें पहियों के बजाय चारों तरफ कुल 8 पंखड़ियां लगी हुई हैं. इन्हीं की मदद से वो हरे भरे घास के मैदान से टैक ऑफ करता है और 20 फीट की ऊंचाई पर पूरे ग्राउंड का चक्कर लगाकर वापस उसी जगह सुरक्षित लैंड कर लेता है. ठीक 1 मिनट 37 सेकंड के इस वीडियो को लोग खूब पसंद कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर लिख रहे हैं कि सरकार मदद करे या न करे, लेकिन प्रतिभाएं गतिशील होकर अपना काम करती रहती हैं.
बिजली से चलती है ये गाड़ी, आर्मी हेलीपैड पर हुआ टेस्ट
वीडियो की पड़ताल की गई तो पता चला कि ये वीडियो गुरुवार सुबह उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले में आर्मी हेलीपैड पर शूट हुआ है. इस उड़ने वाली गाड़ी को रवि टम्टा चला रहा था, जो हपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का फाउंडर और सीईओ है. ये प्रोटोटाइप उन्हीं की कंपनी ने बनाया है, जिसका आज उन्होंने सफल परीक्षण किया है. रवि पिछले कई सालों से इसे बनाने में लगे थे, जो पूरी तरह बिजली से चले, एकदम सुरक्षित हो और मॉर्डन हो. यह टेस्ट पास होने से उनकी सालों की मेहनत रंग लाई है.
‘ये भारत में बना पहला पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल है’
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार रवि टम्टा ने बताया कि भारत में बना ये पहला पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल है. उनके मुताबिक जिस दूरी को सड़क मार्ग से तय करने में करीब 40 मिनट लगते हैं वही दूरी हवा के रास्ते इस वाहन से करीब 12 मिनट में पूरी की जा सकती थी. रवि का कहना है कि वे अभी इस मशीन को और ज्यादा सुरक्षित और ताकतवर बनाने के लिए आगे कई और टेस्ट करेंगे. उनका विजन है कि ऐसी तकनीक को विकसित करना है जिससे जिससे लोग छोटी दूरी की यात्रा को सड़क के साथ-साथ हवाई रास्ते भी जा सकें.
पहले भी कर चुके हैं कई प्रयोग
ये रवि टम्टा का पहला प्रयोग नहीं है. इससे पहले रवि ने एक स्टिक भी बनाई थी, जिसका इस्तेमाल आज उत्तराखंड फॉरेस्ट डिपार्टमेंट में हो रहा है. यह स्टिक मोबाइल चार्ज करती है, टॉर्च का काम करती है. उन्होंने 2007 में बोतल में ही बैट्री बनाकर बल्ब जलाया था. साल 2019 में उन्होंने एक इलेक्ट्रोलाइट पंप मशीन बनाने का दावा किया था, जिससे इलेक्ट्रिक वाहन कम समय में चार्ज किये जा सकते थे.
अल्मोड़ा के एक छोटे से गांव से निकला सपना… आज आसमान में उड़ रहा है।
उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले के काफलीखान गांव के रहने वाले युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने HAPIDA SKYNeX नाम के इलेक्ट्रिक पर्सनल फ्लाइंग व्हीकल का सफल प्रोटोटाइप टेस्ट किया है। (The Economic Times)
लेकिन यह रवि का पहला प्रयोग नहीं है।
पहाड़ और गांव की रोज़मर्रा की चुनौतियों को करीब से देखते हुए उन्होंने इससे पहले भी मोबाइल चार्ज करने वाले जूते, स्मार्ट बांस की छड़ी, बांस प्रोसेसिंग मशीन, टायर पंचर सॉल्यूशन और इलेक्ट्रिक व्हीकल चार्जिंग से जुड़े इनोवेशन पर काम किया। उनकी कंपनी Hapida का फोकस ही ऐसे समाधान विकसित करना है, जो पहाड़ी और ग्रामीण जीवन आसान बना सकें।
शायद यही वजह है कि SKYNeX का सपना सिर्फ़ हवा में उड़ने वाली मशीन बनाने तक सीमित नहीं है।
पहाड़ों में जहाँ 40 किलोमीटर का सफर सड़क से करीब डेढ़ घंटे ले सकता है, वहाँ इस तरह की aerial mobility भविष्य में दूरी और समय दोनों कम करने की संभावना रखती है। )
रवि टम्टा की एयर कार की सच्चाई!
उत्तराखंड के एक युवा ने 6 अगस्त को एक एरियल सिंगल सीटर व्हेकिल के प्रोटोटाइप की सफल उड़ान भरी।
शुरू में सबने बड़ी तारीफ की लोगों को लगा कि संसार में ऐसा पहला व्हीकल बना कर रवि टम्टा ने चमत्कार कर दिया, वह भी तब जब वह इंजीनियरिंग पढ़ा ही नहीं है।
फिर इंटरनेट से पता चला कि ठीक ऐसे ही हूबहू एरियल व्हीकल संसार में बहुत से देशों में उड़ रहे हैं।
तो स्वाभाविक रूप से आलोचना होने लगी।
मुझे जो जानकारी है उसके अनुसार रवि ने इंटरनेट पर उपलब्ध ओपन सोर्स से यह व्हीकल बनाया है।
उसका डिजाइन भले ही मिलता जुलता हो पर नया है।
यह ऐसा है जैसे कोई नई कंपनी कार बनाए। तो जाहिर है वह कार के डिजाइन पर ही काम करेगी। इंजिन की टेक्नोलॉजी तो पहले से ही उपलब्ध है। टायर की टेक्नोलॉजी भी पहले से उपलब्ध है तो वह कम्पनी कहीं से इन्हें खरीदकर अपने मॉडल पर फिट करेगी न कि पूरा नया इंजिन बनाएगी या टायर, नट, बोल्ट आदि बनाएगी।
मेरे पास जी जो कार है वह मारुति की है। उसमें इंजिन फिएट का लगा है, टायर MRF के, ऐसे ही सारी चीजें किसी और कंपनी की है। बस डिजाइन और पैनल्स मारुति के हैं। पर कंपनी तो मारुति की ही हुई न!
ऐसे ही रवि ने अगर सॉफ्टवेयर, मोटर्स, बैटरी आदि किसी अन्य कंपनी की प्रयोग की हैं तो इसमें गलत ही क्या है? सारा संसार यही करता है। इसीलिए अलग अलग कंपनियों के सेम प्रोडक्ट्स बहुत अधिक मिलते जुलते हैं।
रवि ने जो बनाया है वह उसका मॉडल है। और जो जो लोग बना रहे हैं या बना चुके हैं वे सब उसी टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर रहे हैं जो धीरे धीरे एवॉल्व हुई है जिसे हम ड्रोन टेक्नोलॉजी कह रहे हैं। इसका विकास किसी एक ने नहीं किया बल्कि कइयों का योगदान इसमें हैं।
इस पूरे प्रकरण में गलती सिर्फ उन लोगों की है जो अज्ञानता के कारण यह समझ बैठे कि सारा कुछ रवि ने ही बनाया। गोया रवि को तो प्लास्टिक भी बनाना था, खान से खोदकर लोहा भी खुद लाना था, तारें भी खुद बनानी थीं, आदि आदि।
रवि ने जो किया वह बिरले ही कर पाते हैं। इसलिए रवि जीनियस है, सच्चा वैज्ञानिक है और सच्चा इनोवेटर है।
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