राहुल गांधी और सुकन्या प्रकरण क्या था? कोर्ट में क्या हुआ, किसे मिली फटकार?

राहुल गाँधी: बलात्कार के आरोप बेबुनियाद

राहुल गाँधी

इमेज स्रोत,AP राहुल ने कहा है कि ऐसे आरोपों के मामले गंभीरता से लिए जाने चाहिए

बीबीसी, प्रकाशित

कांग्रेस महासचिव राहुल गाँधी ने उत्तर प्रदेश में एक लड़की और उसके माँ-बाप को अवैध तरीके से बंधक बनाकर रखने और लड़की से बलात्कार के आरोपों से इनकार करते हुए उच्चतम न्यायालय में एक शपथ पत्र दाखिल किया है.

राहुल ने कहा, “अपने पर लगाए गए बलात्कार और अपहरण के आरोपों से मैं पूरी तरह इनकार करता हूँ. ये दोनों आरोप पूरी तरह ग़लत, तुच्छ, तंग करने वाले और छवि को खराब करने के लिए सुनियोजित ढंग से लगाए गए आरोप हैं.”

शपथ पत्र में कहा गया है, “हम आदरपूर्वक कहना चाहते हैं कि इस तरह के आरोपों के मामले गंभीरता से देखे जाने चाहिए.”

उच्चतम न्यायालय ने पिछले साल छह अप्रैल को राहुल गाँधी, उत्तर प्रदेश सरकार और चार अन्य लोगों को नोटिस जारी किया था.

उसी के जवाब में राहुल गाँधी ने ये शपथ पत्र दाखिल किया.

मध्य प्रदेश से समाजवादी पार्टी के एक पूर्व विधायक किशोर समरीते ने राहुल गाँधी पर इस तरह के आरोप लगाए थे.

उस समय राहुल गाँधी पर यौन शोषण के आरोप लगाने के चलते समरीते पर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 50 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था. समरीते ने उसे भी चुनौती दी थी.

उच्च न्यायालय ने पूर्व विधायक के विरुद्ध सीबीआई जाँच की भी सिफ़ारिश की थी जिस पर न्यायमूर्ति वीएस सिरपुरकर और टीएस ठाकुर की खंड पीठ ने रोक लगा दी थी और सभी पक्षों से चार हफ़्तों में जवाब दाखिल करने के लिए कहा था.

यदि बात “अमेठी की सुकन्या देवी” वाले पुराने मामले की  हैं, तो यह एक 2006 के आसपास का गंभीर और विवादित आरोप-प्रकरण था, जिसमें राहुल गांधी का नाम भी आरोपों में लिया गया था।
आरोप लगाने वाली महिला का नाम सुकन्या देवी बताया गया था। कुछ रिपोर्टों में उन्हें अमेठी के एक स्थानीय कांग्रेस नेता की बेटी बताया गया। �
ऑपइंडिया
आरोप था कि 2006 में अमेठी में सुकन्या देवी के साथ बलात्कार हुआ और इस मामले में राहुल गांधी तथा उनके कुछ मित्रों पर आरोप लगाए गए। �
ऑपइंडिया
लेकिन महत्वपूर्ण बात यह है कि यह आरोप सिद्ध नहीं हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बाद में अदालत ने मामले को खारिज कर दिया था। इसलिए इसे राहुल गांधी द्वारा अपराध किए जाने के स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं होगा।
यह मामला बाद के वर्षों में राजनीतिक विवादों के दौरान फिर से सोशल मीडिया और राजनीतिक बयानों में उठता रहा।

राहुल गांधी और सुकन्या देवी के बीच कोई व्यक्तिगत, पारिवारिक या वास्तविक संबंध नहीं है। यह नाम 2011 में एक कानूनी और राजनीतिक विवाद के कारण चर्चा में आया था, जिसे न्यायालय और जांच एजेंसियों ने पूरी तरह मनगढ़ंत और झूठा पाया।
​विवाद की पृष्ठभूमि और कानूनी तथ्य
​झूठे आरोप: 2011 में मध्य प्रदेश के पूर्व विधायक किशोर समरीते ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका (Habeas Corpus) दायर की थी। याचिका में कुछ अज्ञात ब्लॉग्स और वेबसाइट्स के हवाले से यह मनगढ़ंत आरोप लगाया गया था कि अमेठी की ‘सुकन्या देवी’ नामक युवती और उसके परिवार को राहुल गांधी ने अवैध हिरासत में रखा है।
​सीबीआई जांच: अदालत के निर्देश पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने जांच की। जांच में सामने आया कि याचिका में दिए गए पते, नाम और आरोप पूरी तरह फर्जी और काल्पनिक (fictitious) थे। संबंधित परिवार ने भी ऐसे किसी भी आरोप का पूरी तरह खंडन किया।
​अदालत का फैसला: इलाहाबाद हाईकोर्ट और बाद में अक्टूबर 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को राजनीति से प्रेरित, दुर्भावनापूर्ण और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग माना। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर भारी जुर्माना लगाया और अदालत का समय बर्बाद करने तथा छवि खराब करने की साजिश के तहत कार्रवाई के निर्देश दिए।
​न्यायिक और जांच रिपोर्ट के अनुसार यह मामला केवल राजनीतिक दुर्भावना से गढ़ा गया एक निराधार आरोप था।

मूल न्यायिक रिकॉर्ड और सुप्रीम कोर्ट के 2012 के फैसले को देखकर इस प्रकरण की स्थिति स्पष्ट की है। पिछली प्रतिक्रिया में एक महत्वपूर्ण बात पर्याप्त स्पष्ट नहीं थी: “सुकन्या देवी के साथ बलात्कार” को अदालत ने राहुल गांधी से किया गया सिद्ध अपराध नहीं माना था।
सुकन्या देवी–राहुल गांधी प्रकरण की वास्तविक टाइमलाइन
1. कथित घटना — 3 दिसंबर 2006
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दर्ज है कि कुछ वेबसाइटों पर यह दावा प्रकाशित हुआ था कि 3 दिसंबर 2006 की रात अमेठी में राहुल गांधी और उनके छह विदेशी मित्रों ने सुकन्या देवी के साथ बलात्कार किया। इन्हीं इंटरनेट रिपोर्टों को बाद में आधार बनाया गया। �
Indian Kanoon
ध्यान देने वाली बात है कि सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में इसे “alleged occurrence” यानी कथित घटना के रूप में दर्ज किया गया है, स्थापित अपराध के रूप में नहीं।
2. 2009 में पहली याचिका
इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई, जिसमें सुकन्या देवी और उनके माता-पिता के कथित गायब होने तथा उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखने जैसे आरोप लगाए गए। हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल 2009 को याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि FIR दर्ज कराने जैसी कार्रवाई के लिए आरोपों के साथ विश्वसनीय और ठोस प्रथमदृष्टया साक्ष्य होना चाहिए, जो वहां नहीं था। �
Orderlaw
3. 2011 में किशोर समरीते की याचिका
पूर्व सपा विधायक किशोर समरीते ने 2011 में स्वयं को सुकन्या देवी, उनके पिता बलराम सिंह और मां सुमित्रा देवी का “next friend” बताते हुए हाईकोर्ट में habeas corpus याचिका दायर की। उन्होंने दावा किया कि तीनों को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है। �
Indian Kanoon
लेकिन पुलिस ने बलराम सिंह, उनकी पत्नी और उनकी बेटी को अदालत के सामने पेश किया। बलराम सिंह के बयान के अनुसार उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ कभी ऐसी शिकायत नहीं की थी और न ही किसी को उनके behalf पर याचिका दायर करने के लिए अधिकृत किया था। �
S3WaaS
4. “सुकन्या” और बलराम सिंह के परिवार की पहचान पर बड़ा सवाल
सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में एक महत्वपूर्ण तथ्य है: पुलिस जांच में बलराम सिंह की बेटी का नाम किर्ती सिंह पाया गया। अदालत के सामने पेश की गई बेटी ने कथित सुकन्या देवी के रूप में लगाए गए आरोपों का समर्थन नहीं किया। रिकॉर्ड में यह भी है कि बलराम सिंह ने पुलिस को बताया कि 2006 में कुछ लोग उनके घर आए थे और सुकन्या देवी की तस्वीर दिखाकर पूछा था कि क्या वह उनकी बेटी है; परिवार ने बताया कि तस्वीर वाली लड़की उनकी बेटी नहीं थी। �
S3WaaS
5. हाईकोर्ट ने क्या किया?
लखनऊ बेंच ने किशोर समरीते की 2011 वाली याचिका को गंभीर रूप से गलत और आधारहीन माना तथा ₹50 लाख का जुर्माना लगाया। इसमें ₹25 लाख कथित रूप से किर्ती सिंह और ₹20 लाख राहुल गांधी को देने का आदेश था। �
Indian Kanoon
6. सुप्रीम कोर्ट का 18 अक्टूबर 2012 का फैसला
यही सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के ₹50 लाख वाले आदेश को संशोधित किया, लेकिन उसने यह भी पाया कि याचिकाकर्ताओं ने झूठे तथ्यों, गलत दावों और अदालत की प्रक्रिया के दुरुपयोग के जरिए मामला खड़ा किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 3 दिसंबर 2006 की कथित घटना के संबंध में याचिकाओं में लगाए गए आरोप विश्वसनीय साक्ष्य से समर्थित नहीं थे। �
Juris Codex +1
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों याचिकाओं से जुड़े “next friends” पर ₹5-5 लाख की exemplary costs लगाई और CBI को इस बात की जांच जारी रखने का निर्देश दिया कि राहुल गांधी को फंसाने की कोई साजिश रची गई थी या नहीं। �
Juris Codex
निष्कर्ष
इसलिए इस मामले को इस तरह समझना सबसे सही है:
2006 में राहुल गांधी पर सुकन्या देवी के साथ गैंगरेप का आरोप लगाने वाली इंटरनेट रिपोर्टें सामने आईं। बाद में इन्हीं आरोपों के आधार पर अदालत में याचिकाएं दाखिल हुईं। लेकिन सुकन्या देवी और उनके परिवार को लेकर लगाए गए दावों का समर्थन करने वाला विश्वसनीय साक्ष्य अदालत के सामने नहीं आया। संबंधित परिवार को पुलिस ने अदालत में पेश किया और उन्होंने ऐसे आरोपों से इनकार किया। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में याचिकाओं को अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना और राहुल गांधी को फंसाने की कथित साजिश की जांच का निर्देश दिया। �
Indian Kanoon +1
इसलिए “राहुल गांधी का सुकन्या देवी से बलात्कार सिद्ध हुआ” कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में ऐसा कोई दोषसिद्धि निर्णय नहीं है।

—�⁠“सुकन्या देवी आखिर कौन थीं, उनके पिता बलराम सिंह कौन थे, 2006 में किन वेबसाइटों ने यह खबर चलाई और CBI जांच का बाद में क्या हुआ?” यह इस पूरे विवाद की सबसे दिलचस्प कड़ी है।

 

इस प्रकरण की आगे की कड़ी देखने पर तस्वीर काफी स्पष्ट होती है। सबसे महत्वपूर्ण स्रोत 18 अक्टूबर 2012 का सुप्रीम कोर्ट का फैसला, Kishore Samrite v. State of U.P. है। �
S3WaaS +1
“सुकन्या देवी” वास्तव में कौन थीं?
यहाँ सबसे बड़ा विवाद यही था। याचिका में सुकन्या देवी नाम की युवती और उसके माता-पिता को अमेठी का परिवार बताया गया था। आरोप था कि 3 दिसंबर 2006 को राहुल गांधी और उनके छह मित्रों ने युवती का अपहरण कर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया और बाद में परिवार को बंधक बना लिया।
लेकिन CBI की जांच में जिस परिवार को इस दावे से जोड़ा गया, उसके पिता बलराम सिंह ने आरोपों का समर्थन नहीं किया। सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, पुलिस ने बलराम सिंह, उनकी पत्नी और बेटी को खोजकर अदालत के सामने पेश किया। जांच में बेटी का नाम कीर्ति सिंह सामने आया, न कि सुकन्या देवी। बलराम सिंह ने कहा कि उनकी पत्नी और बेटी के नाम याचिका में गलत बताए गए थे। �
S3WaaS
आरोपों का स्रोत क्या था?
CBI ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि इस कथित घटना के संबंध में तीन विदेशी वेबसाइटों पर सामग्री प्रकाशित हुई थी। इन्हीं वेबसाइटों की सामग्री को किशोर समरीते की याचिका में आधार बनाया गया था। CBI के अनुसार, वेबसाइटों का मूल IP पता ट्रेस नहीं हो पाया था। �
S3WaaS +1
CBI ने यह भी कहा कि जिस लड़की और उसके परिवार के नाम-पते याचिका में दिए गए थे, वे मौजूद नहीं पाए गए। सरकारी रिकॉर्ड और स्थानीय निकायों से सत्यापन में भी ऐसा पता/परिवार नहीं मिला। �
Moneycontrol +1
फिर किशोर समरीते की भूमिका क्या थी?
पूर्व सपा विधायक किशोर समरीते ने 2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में habeas corpus याचिका दायर करके दावा किया कि लड़की और उसके माता-पिता को अवैध रूप से बंदी बनाया गया है।
हाईकोर्ट ने मामले को गंभीर रूप से आधारहीन पाया और ₹50 लाख का जुर्माना लगाया। साथ ही CBI को यह जांचने को कहा कि राहुल गांधी को फंसाने की कोई साजिश तो नहीं थी। �
S3WaaS
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश में संशोधन किया, लेकिन याचिका को आधारहीन और न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग मानने वाली मूल चिंता बनाये रखी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से ₹5 लाख की exemplary cost लगाई और राहुल गांधी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की बात कही। �
vLex +1
“विदेशी साजिश” वाली बात कितनी प्रमाणित हुई?
यहाँ सावधानी जरूरी है।
CBI ने 2012 में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसे विदेशी स्रोत/वेबसाइट और कथित फंडिंग का सुराग मिला है। उसने यह भी कहा कि समरीते की याचिका को कुछ अन्य लोगों से धन मिलने के संकेत मिले थे। �
The Times of India +1
लेकिन इसे यह कहना कि “विदेशी सरकार ने राहुल गांधी को बदनाम करने की साजिश की थी”, उपलब्ध रिकॉर्ड से कहीं आगे की बात होगी। सुप्रीम कोर्ट ने CBI को संभावित साजिश की जांच जारी रखने को कहा था; यह स्वयं सुप्रीम कोर्ट का किसी विदेशी सरकार को दोषी ठहराने का फैसला नहीं था। �
The Economic Times
एक और राजनीतिक मोड़
2012 में किशोर समरीते ने यह दावा भी किया था कि उन्हें यह याचिका दाखिल करने के लिए तत्कालीन सपा नेतृत्व, विशेषकर मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव, ने प्रेरित किया  था। हालांकि यह उनका दावा था; इसे अदालत से सिद्ध तथ्य के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। �
The New Indian Express +1
सार: उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर “अमेठी की सुकन्या देवी” प्रकरण राहुल गांधी के खिलाफ सिद्ध बलात्कार का मामला नहीं था। जांच में कथित पीड़िता/परिवार की पहचान और पता ही विवादित/गलत पाए गए, संबंधित परिवार ने आरोपों की पुष्टि नहीं की, और सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में मामले को आधारहीन न्यायिक कार्यवाही माना। �
S3WaaS
�⁠सुप्रीम कोर्ट के फैसले के वे 8–10 महत्वपूर्ण पैराग्राफ सरल हिंदी में, मूल रिकॉर्ड के संदर्भ के साथ, —इससे यह साफ हो जाता है कि अदालत ने सुकन्या, कीर्ति सिंह, बलराम सिंह और कथित वेबसाइटों के बारे में वास्तव में क्या कहा था।

18 अक्टूबर 2012 के सुप्रीम कोर्ट का मूल फैसला, Kishore Samrite v. State of U.P.  फैसले के महत्वपूर्ण हिस्से क्रमवार । �
Indian Kanoon +1
1. आरोप आया कहाँ से?
किशोर समरीते ने 2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उनका दावा था कि उन्हें कुछ वेबसाइटों से जानकारी मिली कि 3 दिसंबर 2006 की रात अमेठी में राहुल गांधी और उनके छह विदेशी मित्रों ने सुकन्या देवी से बलात्कार किया।
याचिका में तीन वेबसाइटों का उल्लेख था—Indybay, Arizona Indymedia और Intellibriefs। �
Indian Kanoon
2. सुकन्या देवी का पता क्या दिया गया था?
याचिका में सुकन्या देवी, उनके पिता बलराम सिंह और मां सुमित्रा देवी का पता अमेठी में Medical Chowk, Sanjay Gandhi Marg बताया गया था।
जांच में पुलिस ने पाया कि दिया गया पता ही गलत था और वहां ऐसा स्थान मौजूद नहीं था। �
Indian Kanoon
3. फिर बलराम सिंह कौन निकले?
पुलिस को एक बलराम सिंह मिले, जो उस पते पर पहले रहते थे लेकिन बाद में गांव हरदौइया चले गए थे।
उनकी पत्नी का नाम सुशीला सिंह था और उनकी सबसे बड़ी बेटी का नाम कीर्ति सिंह था—सुकन्या देवी नहीं। कीर्ति उस समय लगभग 21 वर्ष की थीं और उन्होंने B.Sc. किया था। �
Indian Kanoon +1
4. बलराम सिंह ने क्या कहा?
यह बहुत महत्वपूर्ण हिस्सा है।
बलराम सिंह ने पुलिस को बताया कि 2006 में कुछ लोग स्वयं को मीडिया वाला बताते हुए उनके अमेठी स्थित घर आए थे। उन्होंने सुकन्या देवी की तस्वीर दिखाकर उनकी पत्नी से पूछा था कि क्या यह उनकी बेटी है।
बलराम सिंह की पत्नी ने अपनी बेटी को सामने लाकर बताया कि तस्वीर वाली लड़की उनकी बेटी नहीं है। �
Indian Kanoon
5. क्या बलराम सिंह ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया?
नहीं।
सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में साफ दर्ज है कि बलराम सिंह ने किशोर समरीते के दावे का समर्थन नहीं किया बल्कि पूरे कथानक का खंडन किया और कहा कि उनकी पत्नी और बेटी के नाम भी गलत तरीके से इस्तेमाल किए गए थे। �
Indian Kanoon
6. CBI को कथित घटना के बारे में क्या मिला?
CBI ने सीमित जांच के आधार पर सुप्रीम कोर्ट को बताया कि 3 दिसंबर 2006 को वैसी कोई घटना होने का प्रमाण नहीं मिला, जैसी याचिका में बताई गई थी।
CBI के अनुसार, याचिका में दिए गए व्यक्तियों और पतों में कई बातें फर्जी/अस्तित्वहीन पाई गईं। �
Indian Kanoon
7. तीन वेबसाइटों का क्या हुआ?
CBI ने बताया कि जिन तीन वेबसाइटों का उल्लेख किया गया था, वे भारत के बाहर होस्ट की गई थीं और उनका मूल IP address ट्रेस नहीं हो पाया। इसलिए उस दिशा में जांच आगे नहीं बढ़ सकी। �
vLex
यहाँ एक महत्वपूर्ण सावधानी है: इससे यह स्वतः सिद्ध नहीं होता कि किसी विदेशी सरकार ने यह कहानी गढ़ी थी। इतना रिकॉर्ड में है कि वेबसाइटों का मूल स्रोत ट्रेस नहीं हो सका।
8. कीर्ति सिंह का नाम क्यों आया?
क्योंकि जिस परिवार को याचिका में “बलराम सिंह–सुकन्या देवी–सुमित्रा देवी” के रूप में प्रस्तुत किया गया था, वास्तविक परिवार में बेटी का नाम कीर्ति सिंह मिला।
अदालत ने माना कि एक वास्तविक युवती की पहचान को इस तरह की याचिका में इस्तेमाल करने से उसकी प्रतिष्ठा को गंभीर नुकसान पहुंचा। �
Indian Kanoon
9. हाईकोर्ट ने क्या किया?
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने किशोर समरीते की याचिका को गंभीर रूप से आधारहीन माना और ₹50 लाख का जुर्माना लगाया। उसमें ₹25 लाख कीर्ति सिंह और ₹20 लाख राहुल गांधी को दिए जाने थे।
हाईकोर्ट ने CBI को राहुल गांधी को कथित रूप से फंसाने की साजिश की जांच करने को भी कहा। �
Indian Kanoon
10. सुप्रीम कोर्ट का अंतिम निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट ने 18 अक्टूबर 2012 को हाईकोर्ट के आदेश में संशोधन किया, लेकिन याचिका को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग से जुड़ा माना। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता ने पर्याप्त सत्यापन किए बिना गंभीर आरोप लगाए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित याचिकाओं पर exemplary costs भी लगाईं। �
Indian Kanoon +1
सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष
इस फैसले से चार बातें अलग-अलग रखना जरूरी है:
आरोप: राहुल गांधी पर सुकन्या देवी के साथ बलात्कार का आरोप लगाया गया था।
स्रोत: मुख्य आधार कुछ विदेशी वेबसाइटों की सामग्री थी।
जांच: जिस परिवार को सुकन्या देवी का परिवार बताया गया, उसकी पहचान/पता और आरोपों की पुष्टि नहीं हुई; बलराम सिंह ने आरोपों का समर्थन नहीं किया।
अदालती निष्कर्ष: उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर यह राहुल गांधी के खिलाफ सिद्ध बलात्कार का मामला नहीं था; अदालत ने संबंधित याचिकाओं को न्यायिक प्रक्रिया के दुरुपयोग के रूप में देखा। �
Indian Kanoon +1
सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला — Kishore Samrite v. State of U.P.⁠�
यदि आपका उद्देश्य इस मामले पर तथ्य-जांच/समाचार लेख तैयार करना है, तो अगला महत्वपूर्ण सवाल है: 2006 में वे तीन वेबसाइटें वास्तव में क्या प्रकाशित कर रही थीं और उस खबर का मूल लेखक/स्रोत कौन था? यही इस पूरे प्रकरण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।

 

 

 

GPT

जी। मैंने मूल न्यायिक रिकॉर्ड और सुप्रीम कोर्ट के 2012 के फैसले को देखकर इस प्रकरण की स्थिति स्पष्ट की है। पिछली प्रतिक्रिया में एक महत्वपूर्ण बात पर्याप्त स्पष्ट नहीं थी: “सुकन्या देवी के साथ बलात्कार” को अदालत ने राहुल गांधी द्वारा किया गया सिद्ध अपराध नहीं माना था।
सुकन्या देवी–राहुल गांधी प्रकरण की वास्तविक टाइमलाइन
1. कथित घटना — 3 दिसंबर 2006
सुप्रीम कोर्ट के फैसले में दर्ज है कि कुछ वेबसाइटों पर यह दावा प्रकाशित हुआ था कि 3 दिसंबर 2006 की रात अमेठी में राहुल गांधी और उनके छह विदेशी मित्रों ने सुकन्या देवी के साथ बलात्कार किया। इन्हीं इंटरनेट रिपोर्टों को बाद में आधार बनाया गया। �
Indian Kanoon
ध्यान देने वाली बात है कि सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में इसे “alleged occurrence” यानी कथित घटना के रूप में दर्ज किया गया है, स्थापित अपराध के रूप में नहीं।
2. 2009 में पहली याचिका
इलाहाबाद हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल की गई, जिसमें सुकन्या देवी और उनके माता-पिता के कथित गायब होने तथा उन्हें अवैध रूप से हिरासत में रखने जैसे आरोप लगाए गए। हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल 2009 को याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि FIR दर्ज कराने जैसी कार्रवाई के लिए आरोपों के साथ विश्वसनीय और ठोस प्रथमदृष्टया साक्ष्य होना चाहिए, जो वहां नहीं था। �
Orderlaw
3. 2011 में किशोर समरीते की याचिका
पूर्व सपा विधायक किशोर समरीते ने 2011 में स्वयं को सुकन्या देवी, उनके पिता बलराम सिंह और मां सुमित्रा देवी का “next friend” बताते हुए हाईकोर्ट में habeas corpus याचिका दायर की। उन्होंने दावा किया कि तीनों को अवैध रूप से बंधक बनाकर रखा गया है। �
Indian Kanoon
लेकिन पुलिस ने बलराम सिंह, उनकी पत्नी और उनकी बेटी को अदालत के सामने पेश किया। बलराम सिंह के बयान के अनुसार उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ कभी ऐसी शिकायत नहीं की थी और न ही किसी को उनके behalf पर याचिका दायर करने के लिए अधिकृत किया था। �
S3WaaS
4. “सुकन्या” और बलराम सिंह के परिवार की पहचान पर बड़ा सवाल
सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड में एक महत्वपूर्ण तथ्य है: पुलिस जांच में बलराम सिंह की बेटी का नाम किर्ती सिंह पाया गया। अदालत के सामने पेश की गई बेटी ने कथित सुकन्या देवी के रूप में लगाए गए आरोपों का समर्थन नहीं किया। रिकॉर्ड में यह भी है कि बलराम सिंह ने पुलिस को बताया कि 2006 में कुछ लोग उनके घर आए थे और सुकन्या देवी की तस्वीर दिखाकर पूछा था कि क्या वह उनकी बेटी है; परिवार ने बताया कि तस्वीर वाली लड़की उनकी बेटी नहीं थी। �
S3WaaS
5. हाईकोर्ट ने क्या किया?
लखनऊ बेंच ने किशोर समरीते की 2011 वाली याचिका को गंभीर रूप से गलत और आधारहीन माना तथा ₹50 लाख का जुर्माना लगाया। इसमें ₹25 लाख कथित रूप से किर्ती सिंह और ₹20 लाख राहुल गांधी को देने का आदेश था। �
Indian Kanoon
6. सुप्रीम कोर्ट का 18 अक्टूबर 2012 का फैसला
यही सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के ₹50 लाख वाले आदेश को संशोधित किया, लेकिन उसने यह भी पाया कि याचिकाकर्ताओं ने झूठे तथ्यों, गलत दावों और अदालत की प्रक्रिया के दुरुपयोग के जरिए मामला खड़ा किया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि 3 दिसंबर 2006 की कथित घटना के संबंध में याचिकाओं में लगाए गए आरोप विश्वसनीय साक्ष्य से समर्थित नहीं थे। �
Juris Codex +1
सुप्रीम कोर्ट ने दोनों याचिकाओं से जुड़े “next friends” पर ₹5-5 लाख की exemplary costs लगाई और CBI को इस बात की जांच जारी रखने का निर्देश दिया कि राहुल गांधी को फंसाने की कोई साजिश रची गई थी या नहीं। �
Juris Codex
निष्कर्ष
इसलिए इस मामले को इस तरह समझना सबसे सही है:
2006 में राहुल गांधी पर सुकन्या देवी के साथ गैंगरेप का आरोप लगाने वाली इंटरनेट रिपोर्टें सामने आईं। बाद में इन्हीं आरोपों के आधार पर अदालत में याचिकाएं दाखिल हुईं। लेकिन सुकन्या देवी और उनके परिवार को लेकर लगाए गए दावों का समर्थन करने वाला विश्वसनीय साक्ष्य अदालत के सामने नहीं आया। संबंधित परिवार को पुलिस ने अदालत में पेश किया और उन्होंने ऐसे आरोपों से इनकार किया। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में याचिकाओं को अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग माना और राहुल गांधी को फंसाने की कथित साजिश की जांच का निर्देश दिया। �
Indian Kanoon +1
इसलिए “राहुल गांधी का सुकन्या देवी से बलात्कार सिद्ध हुआ” कहना तथ्यात्मक रूप से गलत है। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में ऐसा कोई दोषसिद्धि निर्णय नहीं है।
अगर आप चाहें तो �⁠मैं अगला महत्वपूर्ण हिस्सा भी खोज सकता हूँ—�⁠“सुकन्या देवी आखिर कौन थीं, उनके पिता बलराम सिंह कौन थे, 2006 में किन वेबसाइटों ने यह खबर चलाई और CBI जांच का बाद में क्या हुआ?” यह इस पूरे विवाद की सबसे दिलचस्प कड़ी है।

 

 

जी। सुप्रीम कोर्ट के 18 अक्टूबर 2012 के Kishore Samrite v. State of U.P. फैसले के महत्वपूर्ण हिस्सों को सरल हिंदी में समझें। �
Indian Kanoon
1. मूल आरोप क्या था?
किशोर समरीते ने 2011 में इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की। उसमें इंटरनेट पर प्रकाशित तीन वेबसाइटों की खबरों के आधार पर दावा किया गया कि 3 दिसंबर 2006 की रात अमेठी में राहुल गांधी और उनके छह मित्रों ने “सुकन्या देवी” के साथ बलात्कार किया था। साथ ही दावा किया गया कि सुकन्या और उसके माता-पिता को बाद में अवैध रूप से बंदी बना लिया गया। �
Indian Kanoon
महत्वपूर्ण: सुप्रीम कोर्ट ने इस आरोप को घटना के रूप में सत्यापित नहीं किया; वह इस बात की जांच कर रहा था कि ऐसी याचिका के लिए विश्वसनीय आधार था या नहीं।
2. 2009 में भी यही मामला अदालत पहुंचा था
राम प्रकाश शुक्ल नाम के अधिवक्ता ने 2009 में इसी इंटरनेट सामग्री के आधार पर हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। उन्होंने सुकन्या देवी और उसके माता-पिता को खोजकर अदालत में पेश कराने तथा FIR दर्ज कराने की मांग की।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 17 अप्रैल 2009 को याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि केवल इंटरनेट की खबर के आधार पर, बिना विश्वसनीय और ठोस साक्ष्य के, इस प्रकार की जांच या FIR का आदेश नहीं दिया जा सकता। �
Indian Kanoon
3. “सुकन्या देवी” की पहचान में क्या सामने आया?
यह सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है।
किशोर समरीते की 2011 की याचिका में सुकन्या देवी, बलराम सिंह और सुमित्रा देवी के लिए एक पता दिया गया था। पुलिस जांच में वह पता सही नहीं मिला।
पुलिस ने बलराम सिंह को खोज लिया। उनके अनुसार उनकी पत्नी और बच्चों के नाम याचिका में गलत लिखे गए थे। उनकी बेटी का नाम किर्ती सिंह था। बलराम सिंह ने यह भी बताया कि 2006 में कुछ लोग उनके घर आए थे और एक लड़की की तस्वीर दिखाकर पूछा था कि क्या वह उनकी बेटी है; परिवार ने बताया था कि तस्वीर वाली लड़की उनकी बेटी नहीं थी। �
Indian Kanoon
4. क्या बलराम सिंह ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया?
नहीं।
सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड के अनुसार, बलराम सिंह ने पुलिस/CBI के सामने उस कथित घटना की पुष्टि नहीं की। CBI ने अपनी प्रारंभिक जांच में पाया कि 3 दिसंबर 2006 की बताई गई घटना के संबंध में याचिका में दिए गए व्यक्ति और पते fictitious/non-existent पाए गए और बलराम सिंह ने आरोपों का खंडन किया। �
Indian Kanoon
5. तीन वेबसाइटों की कहानी
याचिका में तीन वेबसाइटों का उल्लेख था:
Indybay
Arizona Indymedia
Intellibriefs
समरीते ने इन्हीं वेबसाइटों की सामग्री को आधार बनाया था। CBI ने कहा कि ये वेबसाइटें भारत के बाहर होस्ट की गई थीं और उनके मूल IP स्रोत का पता नहीं लगाया जा सका। �
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यानी आरोप का मूल स्रोत स्वयं कोई प्रत्यक्ष FIR या पीड़िता का बयान नहीं, बल्कि इंटरनेट पर प्रकाशित सामग्री थी।
6. सुप्रीम कोर्ट ने किशोर समरीते के बारे में क्या कहा?
यह फैसला इस मामले का सबसे निर्णायक हिस्सा है।
सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि समरीते:
सुकन्या देवी और उसके परिवार को व्यक्तिगत रूप से नहीं जानते थे;
उनका सही पता तक नहीं जानते थे;
फिर भी उन्हें “next friend” बनकर अदालत में पेश किया;
और गंभीर आरोपों को हलफनामे के जरिए अदालत के सामने रखा। �
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अदालत ने निष्कर्ष दिया कि Writ Petition No.111/2011 झूठे तथ्यों पर आधारित, अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग और राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित थी। �
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7. राहुल गांधी के लिए अदालत का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के ₹50 लाख के आदेश को संशोधित किया, लेकिन किशोर समरीते पर ₹5 लाख की exemplary cost लगाई, जो राहुल गांधी को देय थी। दूसरी याचिका दाखिल करने वाले गजेंद्र पाल सिंह पर भी ₹5 लाख की लागत लगाई गई। �
CaseMine +1
8. सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष
इस पूरे प्रकरण को लेकर दो बातें अलग-अलग रखना जरूरी है:
आरोप: राहुल गांधी पर 3 दिसंबर 2006 को सुकन्या देवी के साथ बलात्कार का आरोप लगाया गया था।
न्यायिक निष्कर्ष: उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड में यह आरोप सिद्ध नहीं हुआ। उलटे, सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित याचिका को falsehood, abuse of process और political vendetta से जुड़ा पाया। �
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इसलिए इसे “राहुल गांधी का सुकन्या देवी से बलात्कार सिद्ध हुआ था” कहना गलत होगा।
साथ ही, यह कहना भी उचित नहीं होगा कि सुप्रीम कोर्ट ने किसी विदेशी सरकार को इस कथित मामले के पीछे दोषी ठहराया था। कोर्ट ने CBI की जांच और संभावित साजिश से जुड़े पहलुओं को आगे बढ़ाने की व्यवस्था की थी; यह किसी विदेशी सरकार की न्यायिक दोषसिद्धि नहीं थी। �
Indian Kanoon
सुप्रीम कोर्ट का पूरा 18 अक्टूबर 2012 का फैसला पढ़ें⁠�

हाँ। और इस बार मैं ठीक उसी कड़ी को आगे बढ़ा रहा हूँ, न कि फिर प्रश्न आपके सामने छोड़ रहा हूँ।
मेरी खोज से एक महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आई है:
1. Rohit Vyasmaan कौन थे?
2007 के उपलब्ध रिकॉर्ड में Rohit Vyasmaan/Vyasman स्वयं को HinduUnity (H.U.) का Chairman बताते दिखाई देते हैं। एक当時 के ऑनलाइन संदेश में उनके नाम के साथ वही East Norwich, New York का PO Box 174 दर्ज है, जो राहुल गांधी के वकील Joy Basu के 1 फरवरी 2007 के कानूनी नोटिस में दिया गया था। �
Google Groups +1
और इससे भी महत्वपूर्ण: हिन्दूUnity की ओर से कानूनी नोटिस के जवाब में प्रकाशित बयान Rohit Vyasmaan के नाम से था। उसमें उन्होंने आरोपों की जांच की मांग की और कथित पीड़िता की सुरक्षा की बात कही। �
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इसलिए इतना काफी मजबूत है कि Rohit Vyasmaan केवल किसी दूर के पाठक नहीं थे; वे HinduUnity के प्रमुख/चेयरमैन और उस सामग्री के सक्रिय प्रकाशक थे।
2. लेकिन क्या Rohit ही मूल लेखक थे?
अभी ऐसा कहना उचित नहीं होगा।
यहां एक बहुत दिलचस्प सुराग मिलता है।
IntelliBriefs पर प्रकाशित सामग्री में स्रोत के रूप में लिखा गया था:
“Source: HINDUUNITY.ORG Local reporters”
अर्थात HinduUnity स्वयं कह रहा था कि जानकारी उसके “local reporters” से आई थी। �
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इससे एक महत्वपूर्ण distinction बनता है:
Rohit Vyasmaan = प्रकाशक/संगठन के प्रमुख होने का मजबूत प्रमाण
Rohit Vyasmaan = अमेठी में जाकर मूल घटना रिपोर्ट करने वाले पत्रकार — प्रमाण नहीं।
3. अब हमें एक और पुराना दस्तावेज मिला है
Indybay पर 29 जनवरी 2007 की एक PDF उपलब्ध है, जिसका शीर्षक है:
“Rahul Gandhi: Involved in gang rape?”
यह काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें आरोपों का विस्तृत संस्करण है। इसमें दावा किया गया कि:
सुकन्या देवी को आखिरी बार 19 जनवरी को देखा गया;
पिता बलराम भी “missing” बताए गए;
National Commission for Women को ऑनलाइन शिकायत करने का दावा किया गया;
स्थानीय लोगों/घटना के वीडियो इंटरव्यू जल्द प्रसारित करने की बात कही गई;
और कथित घटना का विवरण दिया गया। �
Indybay
लेकिन ध्यान दीजिए—यह भी घटना का स्वतंत्र पुलिस/पत्रकारीय सत्यापन नहीं है। यह उसी आरोप-कथा का एक और प्रकाशन है।
4. फिर वीडियो कहाँ से आया?
यह शायद सबसे महत्वपूर्ण नई कड़ी है।
फरवरी 2007 के आसपास एक अलग ब्लॉग/वेब पेज पर “Videos say Rahul Gandhi and his friends raped Sukanya” शीर्षक से सामग्री मिली। उसमें कहा गया कि HinduUnity.org ने कथित घटना से संबंधित वीडियो इंटरव्यू host किए थे। �
ProbeRahulGandhiAllegations
और दूसरे archived material में 2007 में इन वीडियो को YouTube पर प्रसारित करने के लिंक भी मिलते हैं। वहां पोस्ट करने वाला व्यक्ति “n.krishna” दिखाई देता है। �
Google Groups
यहां सावधानी जरूरी है: n.krishna को मूल वीडियो पत्रकार या मूल स्रोत मानने का पर्याप्त प्रमाण अभी नहीं मिला है। वह केवल उस सामग्री को पुनः प्रकाशित करने वाला व्यक्ति भी हो सकता है।
5. सबसे महत्वपूर्ण बात: कहानी का “मूल स्रोत” अभी भी गायब है
अब तक की chain इस तरह बन रही है:
अज्ञात स्थानीय सूचना/व्यक्ति

HinduUnity.org के कथित “local reporters”

Rohit Vyasmaan / HinduUnity

IntelliBriefs, Indybay, Arizona Indymedia आदि

वीडियो/ब्लॉग转载

किशोर समरीते की 2011 की अदालत वाली याचिका
और यहीं सुप्रीम कोर्ट का फैसला बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है।
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, CBI ने इन इंटरनेट स्रोतों की जांच की, लेकिन कथित घटना के समर्थन में विश्वसनीय सामग्री नहीं मिली और मूल इंटरनेट स्रोत/आरोप की उत्पत्ति को निर्णायक रूप से स्थापित नहीं किया जा सका।
इसलिए अभी तक “यह खबर सबसे पहले फलां पत्रकार ने लिखी थी” कहना संभव नहीं है।
6. लेकिन Rohit Vyasmaan की पहचान पर एक और सुराग
मेरी खोज में पुराने Usenet/Google Groups रिकॉर्ड में Rohit Vyasmaan का नाम कई अन्य Hindu nationalist/राजनीतिक संदेशों के साथ मिलता है और वही East Norwich, NY पता दोहराया जाता है। कुछ जगह वे स्वयं को “Chairman, H.U.” बताते हैं। �
Google Groups +1
इससे यह निष्कर्ष काफी मजबूत होता है कि HinduUnity कोई केवल एक निष्क्रिय वेबसाइट नहीं थी; उसके पीछे एक संगठित व्यक्ति/समूह था और Rohit Vyasmaan उसका सार्वजनिक चेहरा था।
लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि उन्होंने राहुल गांधी के खिलाफ आरोप गढ़े थे।
इसलिए अभी तक मेरा निष्कर्ष
सबसे शुरुआती traceable publisher: HinduUnity.org
उसका सार्वजनिक प्रमुख: Rohit Vyasmaan
HinduUnity का बताया हुआ स्रोत: “local reporters”
उन local reporters की पहचान: अभी अज्ञात
मूल लेखक: अभी स्थापित नहीं
मूल घटना की स्वतंत्र पुष्टि: नहीं मिली
बाद में मामला: अदालत में आया और आरोपों का आधार अविश्वसनीय पाया गया।
और मुझे लगता है कि अब अगली खोज सबसे निर्णायक होगी: 1 फरवरी 2007 के Joy Basu legal notice और उसके जवाब की पूरी प्रति, क्योंकि उसमें संभवतः यह पता चल सकता है कि राहुल गांधी के वकील ने किस खास लेख, किस लेखक और किस URL को चुनौती दी थी। साथ ही यह देखना जरूरी है कि ezboard ने किस सामग्री के लिए माफी मांगी थी। यही दो दस्तावेज हमें “मूल कहानी” के और करीब ले जा सकते हैं। �
Scribd
मैं इसी दिशा में आगे जा सकता हूँ और �⁠2007 के मूल लेख/कानूनी नोटिस/ezboard apology के archival traces को जोड़कर एक दस्तावेजी chronology बना सकता हूँ।

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