रेखा-गिरधारी विवाद पर मुमं धामी-22 साल बाद आरोप? बिना जांच कोई निष्कर्ष नही

 ’22 साल साथ के बाद अब आरोप क्यों?’, मंत्री रेखा-गिरधारी विवाद पर बोले मुख्यमंत्री, कहा- बिना जांच कोई निष्कर्ष नहीं

मंत्री रेखा आर्य विवाद पर खुद मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रश्न करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की बात कही है.
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मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी
देहरादून 22 अक्टूबर 2026  : उत्तराखंड की मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू ने एक-दूसरे पर जो गंभीर आरोप लगाए हैं, उसे लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का मत आया है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामला बेहद संवेदनशील बताते हुए कहा कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी. जिसे कानून दोषी मानेगा, वही दोषी होगा.

दरअसल, सरकार और भारतीय जनता पार्टी संगठन के कार्यक्रमों को लेकर आज 22 अक्टूबर को मुखयमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भाजपा प्रदेश मुख्यालय देहरादून में प्रेस वार्ता की. इसी में पत्रकारों ने मुख्यमंत्री धामी से मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू में चल रहे विवाद और दोनों तरफ से एक-दूसरे पर लगाए आरोपों पर सवाल किया.

इस सवाल पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि यह पूरा मामला जांच का विषय है. साथ ही यह भी समझना जरूरी है कि आरोप किस परिस्थिति में लगाए गए हैं. मुख्यमंत्री  धामी ने किसी का नाम लिए बिना स्वयं प्रश्न किया कि 22 साल तक साथ रहे तो इतने लंबे समय तक आरोप क्यों नहीं लगाए गए? अब इन आरोपों के सामने आने का कारण क्या है?

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कहा कि किसी के आरोप लगाने भर से किसी को दोषी नहीं माना जा सकता. आरोपों की सच्चाई जांच से ही सामने आएगी और कानून के अनुसार ही आगे की कार्रवाई होनी चाहिए. मुख्यमंत्री धामी ने ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर किसी को दोषी ठहराने पर भी सवाल उठाए.

ऑडियो मामले पर उर्मिला और सुरेश राठौर के वायरल ऑडियो को लेकर भी सवाल किए गए, क्योंकि मंत्री रेखा आर्य ने भी अपने पति गिरधारी लाल साहू के कथित ऑडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किए थे और उसी पर साहू पर मुकदमा लिखा गया था. इस पर मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी ने साफ कहा कि सभी ऑडियो की जांच होनी चाहिए, क्योंकि यह मामले बेहद संवेदनशील हैं. ऐसे मामलों का असर सीधे लोगों के जीवन पर पड़ता है. अगर इनकी जांच सही तरीके से नहीं होती, तो इससे न्याय व्यवस्था और जांच एजेंसियों पर भी सवाल खड़े होते हैं.

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है, ताकि किसी निर्दोष के साथ अन्याय न हो, और दोषी व्यक्ति कानून की पकड़ से बच न सके. जांच इस तरह होनी चाहिए कि किसी भी तरह का संदेह बाकी न रहे. दूध का दूध और पानी का पानी होना चाहिए. लेकिन किसी को बिना सबूत के दोषी भी नहीं ठहराया जाना चाहिए. मुख्यमंत्री के बयान से साफ है कि सरकार इस मामले में आरोपों के बजाय जांच के नतीजों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर निष्कर्ष निकालने की बात कह रही है.

ये है मामला: दरअसल, मंत्री रेखा आर्य ने अपने पति गिरधारी लाल साहू पर देहरादून के कैंट थाने में मुकदमा कराया है. रेखा आर्य ने अपने पति पर घरेलू हिंसा और मारपीट समेत कई गंभीर आरोप लगाए.  मुकदमा होते ही गिरधारी लाल साहू ने भी अपनी पत्नी रेखा आर्य के खिलाफ एक वीडियो जारी कर अपनी पत्नी और मंत्री रेखा आर्य पर 220 करोड़ रुपए के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है.

रेखा आर्या-साहू विवाद: एसआईटी जुटा रही साक्ष्य, पति भाग सकता है विदेश… एयरपोर्ट पर चौकसी
मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू से जुड़े विवाद में एसआईटी देहरादून और बरेली से साक्ष्य जुटा रही है। जांच आधार पर हवाई अड्डों पर निगरानी बढ़ाई जायेगी, क्योंकि साहू के विदेश भागने की आशंका है।

मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू से जुड़े विवाद में विशेष जांच दल (एसआईटी) साक्ष्य जुटाने और उपलब्ध तथ्यों की पड़ताल में जुटा है।

मामले की जांच में एसआईटी बरेली और देहरादून से काफी हद तक साक्ष्य एकत्र कर चुकी । अब इन साक्ष्यों की जांच और उनके आपसी संबंधों को खंगाला जा रहा है। जांच में सामने आये तथ्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की दिशा तय होगी।

मामले की संवेदनशीलता देखते हुए एसआईटी हर पक्ष गंभीरता से जांच रही है। जांच का उद्देश्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति समझ विवाद से जुड़े तथ्य पुष्ट करना है। इसको संबंधित स्थानों से जुटाई गई जानकारी, अभिलेखों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण हो रहा है।

जांच में बरेली और देहरादून महत्वपूर्ण कड़ी
एसआईटी जांच में बरेली और देहरादून महत्वपूर्ण कड़ी बने हैं। दोनों स्थानों से काफी साक्ष्य एकत्र होने की जानकारी है। अब इन साक्ष्यों का विश्लेषण कर घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने की कोशिश हो रही है। जांच में सामने आये तथ्यों का मिलान होगा, ताकि किसी भी निष्कर्ष से पहले उसकी पुष्टि हो सके।

जांच एजेंसी के सामने चुनौती उपलब्ध साक्ष्यों की प्रमाणिकता सुनिश्चित करने के साथ ही विवाद से जुड़े सभी पक्ष स्पष्ट करने की है। इसको जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों से पूछताछ और अतिरिक्त साक्ष्य जुटाने को जरुरी कदम उठाये जायेंगें। हालांकि, एसआईटी जांच के निष्कर्षों को लेकर आधिकारिक पुष्टि के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।

जांच बाद एयरपोर्ट पर बढ़ सकता है पहरा
विवाद के विभिन्न पक्षों की जांच के बीच नजदीकी हवाई अड्डों पर निगरानी बढाने की भी चर्चा है। उपलब्ध साक्ष्यों की जांच और उससे जुड़े सुरक्षा आकलन के बाद एयरपोर्ट पर पहरा बढ़ाने पर विचार हुआ है, क्योंकि गिरधारी लाल साहू के विदेश भागने की भी आशंका है। अभी एसआईटी का मुख्य फोकस विवाद से जुड़े साक्ष्यों की जांच और घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने पर है।

 

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