विधान परिषद चुनाव में NDA भारी,
MLC Election Results NDA triumphs in 16 seats BJP secures six seats in Uttar Pradesh
विधान परिषद चुनाव: एनडीए का 16 सीटों पर परचम, उत्तर प्रदेश में भाजपा ने छह सीटें जीतीं
MLC Election Results NDA triumphs in 16 seats BJP secures six seats in Uttar Pradesh
देश के चार राज्यों, उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र और कर्नाटक में विधान परिषद की 28 सीटों पर हुए चुनाव में एनडीए ने 16 सीटें जीती हैं। अकेले भाजपा को इनमें से 13 सीटें मिली । उसकी सहयोगी जदयू, जदएस और शिवसेना (शिंदे) को एक-एक सीट मिली है। नागपुर में कांग्रेस जीती है। सपा ने उत्तर प्रदेश में अपनी सीटों में दो बढाकर चौका दिया है।
यूपी में भाजपा को छह सीटें मिलीं
यूपी की 11 सीटों में से भाजपा को छह व समाजवादी पार्टी को चार सीटें मिलीं। सपा एक पर आगे है। उत्तर प्रदेश की 11 सीटों में से छह पहले भी भाजपा जबकि तीन सपा व दो निर्दलीय के पास थी। कांग्रेस को उसके शासन वाले कर्नाटक में विपक्षी भाजपा और जद-एस गठबंधन ने चारों सीटों पर हरा दिया।
बिहार की 8 सीटों में भाजपा ने तीन जबकि सहयोगी जदयू ने एक सीट जीती। दो सीटें निर्दलीय, एक-एक सीट राजद और जनसुराज को मिली। बिहार की 8 सीटों में पहले भाजपा के पास तीन, जदयू की एक, कांग्रेस की एक, निर्दलीय दो व भाकपा के पास एक सीट थी। महाराष्ट्र की पांच सीटों में से भाजपा को एक, राकांपा (शरद) को दो और शिवसेना (शिंदे) को एक सीट मिली है।
एमएलसी चुनाव के नतीजे।
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कितनी सीटें मिलीं?
यूपी : एक सीट पर सपा आगे
उत्तर प्रदेश की लखनऊ शिक्षक सीट भाजपा के उमेश द्विवेदी ने जीती जबकि स्नातक सीट सपा की कांति सिंह ने जीती। मेरठ शिक्षक सीट भाजपा के श्रीचंद शर्मा व स्नातक सीट भाजपा के दिनेश गोयल ने जीती।
बरेली शिक्षक सीट भाजपा के हरि सिंह ढिल्लों जबकि गोरखपुर शिक्षक सीट भाजपा के ध्रुव त्रिपाठी ने जीती।
वाराणसी शिक्षक सीट सपा के लाल बिहारी यादव ने जीती, स्नातक पर सपा के आशुतोष सिन्हा आगे हैं।
आगरा शिक्षक सीट सपा के आकाश अग्रवाल व स्नातक सीट भाजपा के मानवेंद्र सिंह ने जीती।
इलाहाबाद स्नातक सीट पर सपा के मानसिंह यादव ने भाजपा के अशोक राठौर को हराया।
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: उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों पर कहां कौन जीता- पूरी सूची
उत्तर प्रदेश एमएलसी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच सीधी टक्कर देखने को मिली है। इसमें भाजपा ने 6 सीटों पर जीत दर्ज की है जबकि समाजवादी पार्टी 5 सीटों पर अपनी जीत दर्ज करने में सफल रही है। इन 11 सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था
उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में भारतीय जनता पार्टी 6 सीटें जीती हैं
उत्तर प्रदेश विधान परिषद की 11 सीटों के लिए हुए चुनाव के नतीजे अब पूरी तरह साफ हो चुके हैं। इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और समाजवादी पार्टी (SP) के बीच सीधी टक्कर दिखी। इसमें भाजपा ने 6 सीटें जीती है जबकि समाजवादी पार्टी 5 सीटें जीतने में सफल रही है। इन 11 सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था और मंगलवार से मतों की गिनती शुरू हुई। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हुए विधान परिषद चुनाव दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों में प्रतिष्ठा की बड़ी लड़ाई मानी जा रही थी।
जानिए कहां से किस पार्टी और प्रत्याशी ने दर्ज की जीत
विधान परिषद की इन 11 सीटों में से 5 स्नातक और 6 शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे:-
भारतीय जनता पार्टी के विजेताओं की लिस्ट
आगरा स्नातक क्षेत्र: भाजपा के डॉ. मानवेंद्र प्रताप सिंह ने इस सीट पर जीत हासिल की।
बरेली-मुरादाबाद शिक्षक क्षेत्र: भाजपा प्रत्याशी डॉ. हरि सिंह ढिल्लों ने जीत दर्ज की।
लखनऊ शिक्षक क्षेत्र: भाजपा के उमेश द्विवेदी ने इस सीट पर लगातार तीसरी बार जीत हासिल कर हैट्रिक बनाई।
मेरठ-सहारनपुर शिक्षक क्षेत्र: भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने जीत हासिल की।
मेरठ-सहारनपुर स्नातक क्षेत्र: भाजपा उम्मीदवार दिनेश कुमार गोयल ने चुनाव में बाजी मारी।
गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक क्षेत्र: भाजपा प्रत्याशी ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने जीत दर्ज की।
समाजवादी पार्टी के विजेताओं की लिस्ट
इलाहाबाद-झांसी स्नातक क्षेत्र: समाजवादी पार्टी के डॉ. मान सिंह यादव ने इस सीट पर जीत दर्ज की।
वाराणसी शिक्षक क्षेत्र: सपा उम्मीदवार लाल बिहारी यादव ने जीत हासिल की।
आगरा-अलीगढ़ शिक्षक क्षेत्र: सपा प्रत्याशी डॉ. आकाश अग्रवाल ने जीत दर्ज की।
लखनऊ स्नातक क्षेत्र: सपा प्रत्याशी कांति सिंह ने भाजपा के अवनीश कुमार सिंह को हराकर जीत दर्ज की और उन्हें निर्वाचन प्रमाण पत्र भी जारी कर दिया गया है। आठ से अधिक राउंड की मतगणना के बाद कांति सिंह को 51,168 वोट मिले। जबकि भाजपा प्रत्याशी को 36,313 वोट प्राप्त हुए।
वाराणसी स्नातक क्षेत्र: सपा के आशुतोष सिन्हा ने 50,462 वोट प्राप्त कर जीत हासिल की। नौवें राउंड की प्रथम वरीयता के वोटों की गिनती के बाद भाजपा प्रत्याशी केदार नाथ सिंह (33,478 वोट) ने अपनी हार स्वीकार कर ली।
भाजपा उम्मीदवार केदार नाथ सिंह ने स्वीकार किया जनादेश
वाराणसी स्नातक क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी केदार नाथ सिंह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर कर अपनी हार स्वीकार की। उन्होंने मतदाताओं का धन्यवाद करते हुए कहा कि वे लोकतंत्र की मर्यादाओं के अनुरूप इस जनादेश को विनम्रता से स्वीकार करते हैं।केदार नाथ सिंह ने लिखा कि भले ही इस चुनाव में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी लेकिन जनता का स्नेह और विश्वास हमेशा अमूल्य रहेगा। उन्होंने भाजपा नेतृत्व, सहयोगी दलों और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि वे आगे भी स्नातक क्षेत्र के हित में काम करना जारी रखेंगे क्योंकि जनसेवा की प्रतिबद्धता चुनावी नतीजों पर निर्भर नहीं करती।
इन चुनावों से पहले 11 सीटों के राजनीतिक समीकरण की बात करें तो भाजपा के पास 6 सीटें (आगरा, मेरठ-सहारनपुर और लखनऊ स्नातक सीट और बरेली-मुरादाबाद, लखनऊ और मेरठ-सहारनपुर शिक्षक सीट) थीं। वहीं समाजवादी पार्टी के पास 3 सीटें (वाराणसी और इलाहाबाद-झांसी स्नातक सीट तथा वाराणसी शिक्षक सीट) थीं। बाकी बची 2 सीटों (आगरा और गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक क्षेत्र) पर निर्दलीय उम्मीदवारों का कब्जा था। चुनाव में सपा ने अपनी पुरानी सीटें बचाए रखने के साथ-साथ लखनऊ स्नातक और आगरा शिक्षक सीटें जीत कर अपनी सीटों में वृद्धि की है।
Nagpur MLC Seat: कौन हैं अभिजीत वंजारी? फडणवीस, गडकरी और RSS के गढ़ नागपुर में कांग्रेस उम्मीदवार ने BJP को दी मात, बरकार रखी एमएलसी सीट
Nagpur MLC Seat: महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार और मौजूदा एम.एल.सी. अभिजीत वंजारी ने नागपुर संभाग की स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सीट पर जीत दर्ज की है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह क्षेत्र में अभिजीत वंजारी ने बीजेपी के सुधाकर कोहाले को 3,271 मतों के अंतर से हराया
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Nagpur MLC Seat: कौन हैं अभिजीत वंजारी? फडणवीस, गडकरी और RSS के गढ़ नागपुर में कांग्रेस उम्मीदवार ने BJP को दी मात, बनाये रखी एमएलसी सीट
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के मुख्यालय और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के गृह क्षेत्र नागपुर में भारतीय जनता पार्टी को बड़ा झटका लगा है। नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र सीट के लिए हुए चुनाव में कांटे के मुकाबले में कांग्रेस उम्मीदवार और मौजूदा विधान परिषद सदस्य (MLC) अभिजीत वंजारी ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी तथा भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार को 3,271 मतों से हराकर सीट बरकरार रखी है।
मतगणना मंगलवार (27 अक्टूबर) सुबह शुरू हुई और गुरुवार (29 अक्तूबर) तड़के समाप्त हुई। कांग्रेस ने मौजूदा विधान परिषद सदस्य वंजारी को उम्मीदवार बनाया था जिन्हें 67,231 वोट मिले। जबकि बीजेपी ने पूर्व विधायक सुधाकर कोहले को मैदान में उतारा था, जिन्हें 63,960 वोट मिले।
बीजेपी के लिए क्यों झटका है?
यह BJP के लिए बड़ा झटका है क्योंकि उसे महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के गृह क्षेत्र में हार का सामना करना पड़ा। दोनों नेताओं ने कोहले के लिए व्यापक प्रचार किया था। इतना ही नहीं यहीं पर आरएसएस का मुख्यालय भी है। बुधवार को मतगणना के दूसरे दौर के बाद कोहले, कांग्रेस के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी से 4,294 मतों से आगे थे।
गडकरी कर चुके हैं इस सीट का प्रतिनिधित्व
निर्वाचन अधिकारी ने पीटीआई को बताया कि पहली वरीयता के मतों के आधार पर मतगणना के दूसरे दौर के बाद कोहले को 60,924 वोट मिले थे। जबकि वंजारी को 56,630 वोट मिले थे। इसके अलावा निर्दलीय उम्मीदवार नितेश कराले को 24,249 वोट मिले थे। हालांकि, किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी मतों का कोटा नहीं मिलने के कारण दूसरी वरीयता के मतों की गिनती की गई।
बीजेपी के लिए इस सीट से हारना इसलिए बड़ा झटका है क्योंकि नागपुर संभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र का लंबे समय तक केंद्रीय मंत्री गडकरी प्रतिनिधित्व करते रहे थे। वह कई कार्यकाल तक इस सीट से विधान परिषद सदस्य रहे।
गडकरी जुलाई 1990 से मई 2014 तक 24 वर्षों तक नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य रहे थे। पिछले चुनाव में भी वंजारी ने BJP उम्मीदवार संदीप जोशी को हराया था। इसके अलावा आरएसएस का यहां पर मुख्यालय भी है। वहीं, यह एरिया मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का भी गढ़ माना जाता है।
अभिजीत वंजारी ने जीत के बाद क्या कहा?
अपनी जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए अभिजीत वंजारी ने कहा कि बीजेपी नेतृत्व के गहन प्रचार के बावजूद कांग्रेस ने जीत दर्ज की। अभिजीत वंजारी ने कहा, “भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह की ताकत लगाई, BJP के सभी नेता नागपुर में मौजूद थे; उन्होंने पूरी ताकत लगा दी थी मगर मतदाता हमारे साथ थे। हमारी पार्टी अखंड थी, महाविकास अघाड़ी (MVA) के नेता और कार्यकर्ता अखंड थे। सारे के सारे संगठन मेरे साथ में थे। मैंने अपने जाहिरात में भी उल्लेख किया था कि 48 संगठन मेरे साथ है और उन्हीं संगठनों के कार्यकर्ताओं और नेताओं का यह विजय है।”
वंजारी ने इस जीत का श्रेय कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (MVA) की एकजुटता को दिया, जिसमें कांग्रेस, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) शामिल हैं। उन्होंने बताया कि 48 संगठनों ने उनके चुनाव अभियान का समर्थन किया था। इसलिए यह जीत उन्हीं संगठनों के कार्यकर्ताओं और नेताओं की है। वोटों की गिनती के दौरान मानकापुर इंडोर स्टेडियम के बाहर उस समय तनाव देखने को मिला जब बीजेपी और कांग्रेस कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए। बाद में नागुपर पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति पर काबू पाया।
कौन हैं अभिजीत वंजारी?
अभिजीत वंजारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, वकील, शिक्षाविद और दो बार से महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) के सदस्य हैं। वह नागपुर विभाग स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से एमएलसी (MLC) हैं। जानिए उनके बारे में बड़ी बातें:-
पारिवारिक और शैक्षणिक पृष्ठभूमिजन्म: 10 मई 1973 को नागपुर में हुआ।
पारिवारिक विरासत: उनके पिता स्व. गोविंदराव वंजारी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नागपुर दक्षिण विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक (MLA) रह चुके थे।
शिक्षा और पेशा: उन्होंने राष्ट्रसंत तुकडोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय से B.A. LLB (कानून की डिग्री) प्राप्त की है। वह एक पेशेवर वकील (Advocate) होने के साथ-साथ शिक्षाविद भी हैं
राजनीतिक सफरछात्र एवं युवा राजनीति: उन्होंने अपनी राजनीति की शुरुआत कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI से की।
वह 1998 से 2002 तक महाराष्ट्र NSUI के प्रदेश महासचिव रहे और बाद में महाराष्ट्र प्रदेश युवा कांग्रेस के सचिव पद पर भी कार्य किया।
संगठनात्मक भूमिकाएं: वह नागपुर जिला कांग्रेस कमेटी के महासचिव और प्रवक्ता रहे हैं।
‘बीजेपी के गढ़’ नागपुर में बड़ी जीत से चर्चा में नागपुर क्षेत्र पारंपरिक रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) का मुख्यालय और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी एवं मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस का गढ़ माना जाता है।
2020 की ऐतिहासिक जीत: 2020 के एमएलसी चुनाव में वंजारी ने बीजेपी के संदीप जोशी को करीब 18,910 वोटों के बड़े अंतर से हराकर इतिहास रचा था। उन्होंने दशकों पुराने बीजेपी के इस किले में सेंध लगाई थी।
2026 में दूसरी बार जीत: नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से दोबारा चुनाव लड़ते हुए उन्होंने कड़े मुकाबले और वरीयता (preference) वोटों की गिनती में बीजेपी प्रत्याशी सुधाकर कोहले को 3,271 वोटों से हराकर अपनी सीट बरकरार रखी है।

