### भारत का डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और 14 नवंबर 2025 को अधिसूचित नियम

### डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 और 14 नवंबर 2025 को अधिसूचित नियम

भारत का Digital Personal Data Protection Act, 2023 (DPDP Act) डिजिटल माध्यमों में व्यक्तियों के निजी डेटा की सुरक्षा, उसके इस्तेमाल पर नियंत्रण और डेटा एकत्र करने वाली संस्थाओं की जवाबदेही तय करने के लिए बनाया गया कानून है। इसके साथ 14 नवंबर 2025 को अधिसूचित Digital Personal Data Protection Rules, 2025 अधिनियम को लागू करने की विस्तृत व्यवस्था प्रस्तुत करते हैं।

इस विषय को समझने के लिए तीन पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है: नागरिकों के अधिकार, कंपनियों और सरकारी संस्थाओं की जिम्मेदारियाँ, तथा पत्रकारिता और डिजिटल समाचार पोर्टलों पर इसका प्रभाव।

### 1\. अधिनियम और नियमों की प्रमुख बातें

निजता और व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा

नाम, फोन नंबर, पता, पहचान संबंधी जानकारी और डिजिटल गतिविधियों से जुड़ा व्यक्तिगत डेटा कानून के दायरे में आ सकता है।

डेटा लेने और उपयोग करने की शर्तें

डेटा लेने वाली संस्था को निर्धारित कानूनी आधार पर काम करना होगा। जहाँ सहमति आवश्यक है, वहाँ व्यक्ति को स्पष्ट सूचना और सहमति वापस लेने का व्यावहारिक तरीका देना होगा।

नागरिकों के अधिकार

व्यक्ति को अपने डेटा की जानकारी प्राप्त करने, उसमें सुधार कराने, निर्धारित परिस्थितियों में उसे मिटवाने और शिकायत निवारण का अधिकार मिलता है।

जवाबदेही और आर्थिक दंड

भारतीय डेटा संरक्षण बोर्ड को कानून के उल्लंघनों पर कार्रवाई और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार आर्थिक दंड लगाने की शक्तियाँ दी गई हैं। कुछ उल्लंघनों पर अधिकतम दंड ₹250 करोड़ तक हो सकता है।

स्रोत: भारत सरकार की अधिसूचना और अधिनियम का पाठ। Press Information Bureau +1

### 2\. 14 नवंबर 2025 को अधिसूचित नियमों में क्या है?

नियमों में मुख्यतः निम्नलिखित विषयों की व्यवस्था है:

* नियम 3: व्यक्तिगत डेटा लेने से पहले दी जाने वाली सूचना का स्वरूप।

* नियम 4: सहमति प्रबंधक (Consent Manager) का पंजीकरण और दायित्व।

* डेटा सुरक्षा: उचित तकनीकी और संगठनात्मक सुरक्षा उपाय।

* डेटा उल्लंघन: डेटा लीक या सुरक्षा उल्लंघन की सूचना देने की प्रक्रिया।

* बच्चों का डेटा: बच्चों के व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण के लिए विशेष प्रावधान।

* अधिकारों का प्रयोग: व्यक्ति द्वारा अपने अधिकारों और शिकायतों के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया।

आधिकारिक नियम और उनकी व्याख्यात्मक टिप्पणी यहाँ उपलब्ध हैं: IndiaCode +1

* [इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय — नियम 2025](https://www.meity.gov.in/documents/act-and-policies/digital-personal-data-protection-rules-2025-gDOxUjMtQWa?pageTitle=Digital-Personal-Data-Protection-Rules-2025&utm_source=chatgpt.com)

* [India Code — अधिनियम 2023](https://www.indiacode.nic.in/indiacode/handle/123456789/22037?view_type=browse&utm_source=chatgpt.com)

### 3\. क्या पूरा कानून 14 नवंबर 2025 से लागू हो गया था?

नहीं। अधिनियम और नियमों की अधिसूचना तथा उनका प्रभावी होना अलग-अलग चरणों में निर्धारित किया गया है।

| प्रभावी होने की तारीख | प्रावधान |
| ——————— | ———————————————————————————————————————– |
| 14 नवंबर 2025 | अधिनियम की परिभाषाएँ, डेटा संरक्षण बोर्ड से संबंधित प्रमुख संस्थागत प्रावधान और कुछ अन्य धाराएँ |
| 14 नवंबर 2026 | धारा 6(9) तथा धारा 27(1)(d) का निर्दिष्ट प्रावधान |
| 14 मई 2027 | अधिनियम की मुख्य परिचालन धाराएँ, जिनमें डेटा प्रसंस्करण, सहमति, नागरिक अधिकार और दंड से संबंधित अनेक प्रावधान शामिल हैं |

यह समय-सारणी 13 नवंबर 2025 की राजपत्र अधिसूचना में निर्धारित समय-सीमा पर आधारित है। E-Gazette +1

इसलिए 29 अक्टूबर 2026 की स्थिति में भी यह मानना गलत होगा कि अधिनियम की सभी धाराएँ पूरी तरह प्रभावी हो चुकी हैं।

### 4\. पत्रकारिता और समाचार पोर्टलों पर इसका क्या असर पड़ सकता है?

यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण प्रश्न है, क्योंकि डिजिटल समाचार पोर्टल व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग करके समाचार प्रकाशित करते हैं।

A. खोजी पत्रकारिता

भ्रष्टाचार, सार्वजनिक पदों पर बैठे व्यक्तियों के आचरण या सार्वजनिक हित के मामलों की पड़ताल में जुटे पत्रकारों के लिए स्रोतों की पहचान, दस्तावेजों का उपयोग और व्यक्तिगत जानकारी प्रकाशित करने के नियम महत्वपूर्ण हो सकते हैं।

B. शिकायत और डेटा हटाने की माँग

कोई व्यक्ति अपने डिजिटल डेटा में सुधार या उसे मिटाने की माँग कर सकता है, लेकिन इससे हर प्रकाशित समाचार को अपने-आप हटाने का अधिकार नहीं मिल जाता। यह देखना होगा कि संबंधित डेटा पर कानून कैसे लागू होता है और कोई वैधानिक अपवाद उपलब्ध है या नहीं।

C. पत्रकारों के गोपनीय स्रोत

समाचार स्रोतों की पहचान, मुखबिरों की जानकारी और पत्रकारों के पास मौजूद दस्तावेजों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ सकते हैं। इनके लिए कानून के वास्तविक प्रावधान, अन्य लागू कानून और न्यायिक संरक्षण का अलग-अलग विश्लेषण आवश्यक है।

महत्त्वपूर्ण विवाद: 27 अक्टूबर 2026 की Reuters रिपोर्ट के अनुसार, समाचार प्रकाशकों ने कानून में पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट न होने को लेकर चिंता जताई है। उनकी आशंका है कि इससे खोजी पत्रकारिता और गोपनीय स्रोतों की रक्षा प्रभावित हो सकती है। इसे प्रकाशकों की कानूनी चिंता के रूप में समझना चाहिए, न कि इस बात के प्रमाण के रूप में कि प्रत्येक पत्रकारिता गतिविधि प्रतिबंधित हो गई है। Reuters

### 5\. आपके लिए किस पहलू का विस्तृत विश्लेषण उपयोगी होगा?

विशेष रूप से डिजिटल समाचार पोर्टल के संचालन और पत्रकारिता के संदर्भ में निम्न विकल्पों में से किसी एक पर आगे बढ़ सकते हैं।

किस विषय पर जानकारी चाहिए?

पत्रकारिता, प्रेस की स्वतंत्रता और खोजी रिपोर्टिंग

डिजिटल समाचार पोर्टल के लिए कानूनी अनुपालन

आम नागरिक के अधिकार और शिकायत की प्रक्रिया

सरकारी संस्थाओं और डेटा संरक्षण बोर्ड की शक्तियाँ

अधिनियम की सभी धाराओं और नियमों का विस्तृत विश्लेषण

विश्लेषण का स्वरूप

सरल हिंदी में व्याख्या

धारा और नियम के संदर्भ सहित कानूनी विश्लेषण

व्यावहारिक उदाहरणों और प्रभावों सहित

विस्तृत विश्लेषण

 

डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम 2023 और 14 नवंबर 2025 को अधिसूचित नियमों का विस्तृत विश्लेषण ।

विषय: पत्रकारिता, प्रेस की स्वतंत्रता और खोजी रिपोर्टिंग।

स्वरूप: व्यावहारिक उदाहरणों और प्रभावों सहित। वर्तमान प्रभावी तिथियां और आधिकारिक स्रोत।

### DPDP Act 2023: पत्रकारिता, प्रेस की स्वतंत्रता और खोजी रिपोर्टिंग पर प्रभाव

कानूनी एवं व्यावहारिक विश्लेषण · स्थिति: 29 अक्टूबर 2026

इस कानून का सबसे महत्त्वपूर्ण प्रश्न यह है: क्या किसी व्यक्ति की निजता की रक्षा करने वाला कानून पत्रकार को भ्रष्टाचार, सत्ता के दुरुपयोग, सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति के कथित कदाचार या सार्वजनिक हित के किसी मामले की जाँच करने से रोक सकता है?

इसका उत्तर केवल निजता बनाम प्रेस की स्वतंत्रता के सामान्य सिद्धांत से नहीं निकलेगा। अधिनियम की धारा 3, धारा 5 से 8, धारा 11 से 17, सूचना का अधिकार अधिनियम में किए गए संशोधन और उनके प्रभावी होने की तारीखों को साथ पढ़ना होगा।

एक महत्त्वपूर्ण ताजा घटनाक्रम भी है: 28 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार, डिजिटल समाचार प्रकाशकों के संगठन ने इस कानून को चुनौती दी है और सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से जवाब माँगा है। यह ध्यान रखना चाहिए कि याचिका में लगाए गए आरोप और न्यायालय का अंतिम निर्णय अलग बातें हैं। The Indian Express +1

### 1\. कानून का मूल उद्देश्य और पत्रकारिता से टकराव की आशंका

कानून के दो वैध उद्देश्य हैं:

नागरिक की निजता

किसी व्यक्ति की निजी जानकारी को बिना वैध आधार के एकत्र करने, इस्तेमाल करने, सुरक्षित रखने या दूसरों तक पहुँचाने पर नियंत्रण।

जनता का जानने का अधिकार

भ्रष्टाचार, सरकारी धन के दुरुपयोग, हितों के टकराव, सार्वजनिक पद के दुरुपयोग और जनहित से जुड़े तथ्यों की पड़ताल तथा प्रकाशन।

टकराव उस समय पैदा हो सकता है जब खोजी रिपोर्टिंग में किसी व्यक्ति की निजी जानकारी का इस्तेमाल जरूरी हो, लेकिन वही व्यक्ति जानकारी प्रकाशित होने पर निजता या डेटा संरक्षण का दावा करे।

उदाहरण के लिए, किसी सरकारी ठेके में अनियमितता की पड़ताल करते समय पत्रकार को ठेकेदारों, अधिकारियों, बैंक लेन-देन, कंपनियों के स्वामित्व और संबंधित व्यक्तियों के संबंधों के दस्तावेज मिल सकते हैं। इनमें से कुछ जानकारी निजी भी हो सकती है।

इसलिए सही प्रश्न यह नहीं है कि पत्रकारिता को निजता से पूरी छूट मिलनी चाहिए या नहीं। प्रश्न यह है कि क्या कानून सार्वजनिक हित में की गई पत्रकारिता के लिए पर्याप्त, स्पष्ट और प्रभावी सुरक्षा प्रदान करता है?

### 2\. सबसे महत्त्वपूर्ण कानूनी प्रश्न: क्या पत्रकारिता को छूट मिली है?

इस अधिनियम की धारा 17 में कुछ विशेष परिस्थितियों के लिए छूट दी गई है। लेकिन सामान्य पत्रकारिता, खोजी रिपोर्टिंग या सार्वजनिक हित में समाचार प्रकाशित करने के लिए अलग, व्यापक पत्रकारिता-छूट स्पष्ट रूप से नहीं दी गई है। यही इस विवाद का केंद्र है। IndiaCode +1

### धारा 17 को समझिए

धारा 17 में विभिन्न परिस्थितियों में कानून के कुछ प्रावधानों से छूट मिलती है, जैसे:

* किसी कानूनी अधिकार या दावे को लागू करने के लिए आवश्यक डेटा-प्रसंस्करण।

* न्यायिक, अर्ध-न्यायिक, नियामक या पर्यवेक्षी कार्यों के लिए अधिकृत संस्थाओं द्वारा डेटा का उपयोग।

* अपराधों या कानून के उल्लंघनों की रोकथाम, जाँच और अभियोजन के लिए आवश्यक डेटा-प्रसंस्करण।

* निर्धारित शर्तों के अंतर्गत शोध, अभिलेखीकरण और सांख्यिकीय प्रयोजनों के लिए डेटा का उपयोग।

इनमें से किसी प्रावधान का अस्तित्व अपने-आप यह नहीं बताता कि पत्रकार को हर खोजी रिपोर्ट के लिए छूट मिल जाएगी। यह देखना होगा कि संबंधित काम वास्तव में किस वैधानिक अपवाद के अंतर्गत आता है। IndiaCode +1

व्यावहारिक अंतर: पुलिस किसी अपराध की जाँच में निजी डेटा का इस्तेमाल कर सकती है, लेकिन इससे यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि पत्रकार भी उसी जाँच के नाम पर बिना किसी सीमा के वह सारा डेटा प्रकाशित कर सकता है।

इसी प्रकार, पत्रकार के पास किसी दस्तावेज का होना और उस दस्तावेज में दर्ज हर निजी विवरण को प्रकाशित करना दो अलग प्रश्न हैं।

### 3\. खोजी पत्रकारिता के पाँच व्यावहारिक उदाहरण

नीचे दिए गए उदाहरण काल्पनिक हैं। इनका उद्देश्य कानूनी जोखिम को समझाना है, किसी वास्तविक व्यक्ति के बारे में आरोप लगाना नहीं।

![Government of Uttarakhand Public Works Department: Bidding Document | PDF | Conflict Of Interest | Prices](https://images.openai.com/static-rsc-4/7trXJjrYRVbD16KKNvK1OfuiCd_DPRq30Ia33K8ZcJE2QiZOrcLR7TP4X5ASBwlkIr7f5wMjGfqrQkUHXKSUwUFYqeD5_9q62M15B19e4jkA-E9s5ZG6qk5aJFUockisXjCE-xUuQMwsx9QF4awNet0lhWIjVfNHxADhG06amGs9QS8NA-HEbzS8436nf0Hu?purpose=fullsize)

उदाहरण 1: सरकारी ठेके में भ्रष्टाचार

एक पत्रकार को दस्तावेजों से पता चलता है कि किसी अधिकारी के रिश्तेदार की कंपनी को बार-बार सरकारी ठेके मिले। वह कंपनी के रिकॉर्ड, ठेका आवंटन और भुगतान का मिलान करता है।

जनहित का आधार

ठेका, भुगतान और हितों के टकराव से संबंधित प्रमाणों की जाँच सार्वजनिक हित में हो सकती है। लेकिन निजी बैंक खाता संख्या, परिवार के असंबंधित सदस्यों का डेटा या घर का पता प्रकाशित करना जरूरी नहीं कि उचित हो।

व्यावहारिक उपाय: मूल दस्तावेज सुरक्षित रखें, सार्वजनिक हित से संबंधित तथ्य अलग करें और अनावश्यक निजी विवरण छिपाएँ।

![Investigative Reporting Course — Free | Certificate in 7 Languages – Catch Wisdom](https://images.openai.com/static-rsc-4/x2hAE4KSXC-VCaYWcymA6AWssJ14qMQWHDNKbdmDXE3rVcsXOrpIJbsvu5efXtdb1DzrirdQIww4iLiObxneFSmEoFHEZIR9-reoLwchuna3F20gVHQmzcpkRLn73O-FzmEjdQvFONQu0wJESOJDbDJT7pGoCngOQ-UFFoQH1euLN2aJSL3D15ObJJpN0LhH?purpose=fullsize)

उदाहरण 2: गोपनीय स्रोत से प्राप्त दस्तावेज

किसी सरकारी कर्मचारी ने पत्रकार को विभागीय अनियमितताओं के प्रमाण दिए। दस्तावेजों में शिकायतकर्ताओं, कर्मचारियों और अन्य लोगों के फोन नंबर तथा पहचान संबंधी विवरण भी हैं।

जोखिम

स्रोत की पहचान उजागर होने, व्यक्तिगत डेटा के प्रसंस्करण और दस्तावेजों के अनावश्यक प्रसार के प्रश्न उठ सकते हैं। DPDP Act में सामान्य पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट न होने के कारण कानूनी अनिश्चितता विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण है।

व्यावहारिक उपाय: स्रोत की पहचान सीमित लोगों तक रखें, मूल फाइलों की पहुँच नियंत्रित करें और प्रकाशन के लिए संपादित प्रतियाँ तैयार करें।

![India: Dalit journalists give a voice to the marginalized – DW – 06/29/2023](https://images.openai.com/static-rsc-4/1Tg6vRRsn0rTukdy5UfLdIxADKHiHQQvToZff2I6RphZaNJ6zAZYyTZS3eWHQoz1pKN7MiopK1rO1YLxQMWQHoFOl0pDvlaENLASlSXaOb3F_-KgaNNkQkyCdPV7VGm-gHOAPjGmAJyeWfXu0Dl3sI746UtagbvOBMgwR0p5DmCS7f3K4-WxqsNQdfp4Lsgs?purpose=fullsize)

उदाहरण 3: मंत्री या वरिष्ठ अधिकारी की संपत्ति

पत्रकार संपत्ति घोषणाओं, कंपनी रजिस्ट्रियों और सार्वजनिक अभिलेखों से किसी अधिकारी की घोषित संपत्ति और कारोबारी हितों की तुलना करता है।

मुख्य प्रश्न

सार्वजनिक पद से जुड़े वित्तीय हितों की रिपोर्टिंग और निजी जीवन की असंबंधित जानकारी प्रकाशित करना एक समान नहीं हैं। उपलब्ध दस्तावेजों की वैध उपलब्धता, सटीकता और प्रकाशन का उद्देश्य अलग-अलग जाँचना चाहिए।

व्यावहारिक उपाय: प्रकाशित दावों के साथ प्रमाण दें, संबंधित पक्ष का उत्तर लें और अपुष्ट आरोप को सिद्ध तथ्य की तरह न लिखें।

![NDTV Expose: Meet Karnataka’s Bribe-Paying Contractors](https://images.openai.com/static-rsc-4/FByxBPSoj4YGkO-AGcXO1QcUbRhuY-eJfI3AISdfusOd5aazawDcIPSp2-6pcevNa0wJoLu3KkARL4do50g4yNNd_Bf3t0iHYVBfLUcnyPCxJirp4ZBVFLxItz_bAAr1Uoj2h5KXx28XkQmqwkch-6pOc8mPO3O25l49hAcuMK4Tpjw_whMWN40FV6vZZWpq?purpose=fullsize)

उदाहरण 4: यौन अपराध या नाबालिग से संबंधित रिपोर्ट

पत्रकार को पीड़ित, गवाह या परिवार के सदस्यों की पहचान संबंधी जानकारी मिलती है।

यहाँ डेटा संरक्षण के अलावा अन्य कानूनों के तहत पहचान उजागर करने पर अलग प्रतिबंध लागू हो सकते हैं। खासकर नाबालिगों और यौन अपराध के पीड़ितों की पहचान को लेकर अत्यधिक सावधानी जरूरी है।

व्यावहारिक उपाय: पहचान छिपाएँ, संवेदनशील दस्तावेजों का प्रसार सीमित रखें और संबंधित दंड प्रक्रिया तथा विशेष कानूनों का पालन करें।

![Gemini AI Journalist Photo Prompts | Copy-Paste & Generate](https://images.openai.com/static-rsc-4/h8IiIFqCirSuzzx4od-xfWt10Rt2SYYnBkbQ1ap8cDLMs6Sdm-AU7-fnDb3tS7BqgncbMvs7JFr8hyx7BSWfBkBLnqyErgOcbQwCjBZ0XaJLsNWsw1MpVttFjjnzDENjeiBXctUvgvoc7q6wbYFHLBjuQksyzg8EPxfS6Og4RVPwhj8ZDdZEsGHc3caYP9tN?purpose=fullsize)

उदाहरण 5: समाचार प्रकाशित होने के बाद डेटा हटाने की माँग

कोई अधिकारी समाचार पोर्टल को नोटिस भेजकर अपना नाम, फोटो या संबंधित विवरण हटाने की माँग करता है।

केवल ऐसी माँग आ जाने से समाचार हटाना अनिवार्य है, ऐसा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। यह जाँचना होगा कि कानून का संबंधित प्रावधान प्रभावी है या नहीं, डेटा के प्रसंस्करण का आधार क्या है और व्यक्ति का दावा किस अधिकार पर आधारित है।

व्यावहारिक उपाय: शिकायत और उसके कानूनी आधार का रिकॉर्ड रखें, संपादकीय समीक्षा करें और जरूरत होने पर कानूनी सलाह लेकर जवाब दें।

### 4\. समाचार पोर्टल के लिए सबसे बड़ा जोखिम कहाँ है?

इस कानून का प्रभाव केवल प्रकाशित समाचार पर ही नहीं, बल्कि समाचार तैयार करने के दौरान जुटाए और सँभाले गए डिजिटल डेटा पर भी निर्भर करेगा।

| पत्रकारिता की गतिविधि | संभावित कानूनी प्रश्न |
| ————————————————– | —————————————————————————- |
| किसी व्यक्ति का फोन नंबर या पता इकट्ठा करना | डेटा किस उद्देश्य से लिया गया और क्या उसका उपयोग वैध है? |
| लीक हुई स्प्रेडशीट या ईमेल का विश्लेषण | उसमें मौजूद व्यक्तिगत डेटा को संसाधित करने का आधार क्या है? |
| स्रोत की पहचान सुरक्षित रखना | क्या अनधिकृत पहुँच या डेटा लीक का खतरा है? |
| किसी व्यक्ति के बारे में ऑनलाइन जानकारी एकत्र करना | सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होना क्या हर प्रकार के पुनः उपयोग की अनुमति देता है? |
| प्रकाशित समाचार में व्यक्तिगत विवरण शामिल करना | क्या हर विवरण जनहित के लिए आवश्यक है और क्या कोई अन्य कानून लागू होता है? |
| पुराने समाचार का संशोधन या हटाना | क्या सुधार, मिटाने के अधिकार या किसी वैधानिक दायित्व का प्रश्न उठता है? |

एक महत्त्वपूर्ण बारीकी यह है कि DPDP Act का दायरा डिजिटल व्यक्तिगत डेटा पर केंद्रित है। पूरी तरह ऑफलाइन व्यक्तिगत डेटा भी इसके दायरे में आ सकता है यदि उसे बाद में डिजिटल रूप दिया जाए; लेकिन कानून हर प्रकार के कागजी रिकॉर्ड को स्वतः एक समान तरीके से नियंत्रित नहीं करता। धारा 3 के दायरे को वास्तविक गतिविधि के संदर्भ में पढ़ना होगा। India Code +1

### 5\. सूचना का अधिकार अधिनियम (RTI) में बदलाव: पत्रकारिता के लिए दूसरा बड़ा प्रश्न

DPDP Act की धारा 44(3) ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 की धारा 8(1)(j) में संशोधन किया है। संशोधित शब्दावली व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित सूचना को अपवाद के रूप में रखती है। पहले के प्रावधान में व्यक्तिगत जानकारी के अतिरिक्त कुछ शर्तें और व्यापक जनहित में प्रकटीकरण का स्पष्ट प्रावधान था। IndiaCode +1

यह बदलाव पत्रकारों और RTI कार्यकर्ताओं के लिए महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि खोजी रिपोर्टिंग का एक बड़ा हिस्सा सरकारी रिकॉर्ड प्राप्त करने पर निर्भर करता है।

### व्यावहारिक उदाहरण

मान लीजिए कि कोई पत्रकार RTI के जरिए जानना चाहता है कि:

* किसी सरकारी अधिकारी ने सरकारी आवास या वाहन का कितना उपयोग किया;

* सरकारी नियुक्तियों में नियमों का पालन हुआ या नहीं;

* सार्वजनिक धन से संबंधित भुगतान किस आधार पर किए गए;

* किसी सरकारी योजना के लाभार्थियों के चयन में अनियमितता हुई या नहीं।

इन मामलों में सूचना का सार्वजनिक हित महत्त्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन संशोधित RTI अपवाद के कारण व्यक्तिगत जानकारी से संबंधित रिकॉर्ड प्राप्त करना कठिन हो सकता है।

इसका अर्थ यह नहीं कि प्रत्येक सरकारी रिकॉर्ड अब गोपनीय है। गैर-व्यक्तिगत सूचना, लागू कानूनी अपवाद, रिकॉर्ड के पृथक्करण की संभावना और अन्य प्रासंगिक प्रावधानों की जाँच करनी होगी। साथ ही, धारा 44(3) के प्रभावी होने की तारीख भी महत्त्वपूर्ण है।

मुख्य अंतर: RTI के तहत सरकारी विभाग से सूचना प्राप्त करना और DPDP Act के तहत किसी व्यक्ति के व्यक्तिगत डेटा का प्रसंस्करण दो अलग कानूनी प्रश्न हैं। दोनों का प्रभाव एक-दूसरे पर पड़ सकता है, लेकिन उन्हें एक ही व्यवस्था नहीं मानना चाहिए।

### 6\. संविधान और प्रेस की स्वतंत्रता

पत्रकारिता के संदर्भ में तीन संवैधानिक सिद्धांत विशेष रूप से प्रासंगिक हैं।

| संवैधानिक प्रावधान | पत्रकारिता के संदर्भ में महत्त्व |
| —————— | ————————————————————————————————– |
| अनुच्छेद 19(1)(a) | अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता; इसमें प्रेस की स्वतंत्रता भी शामिल है। |
| अनुच्छेद 21 | जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का संरक्षण; सर्वोच्च न्यायालय ने निजता को इसके अंतर्गत मान्यता दी है। |
| अनुच्छेद 14 | राज्य की कार्रवाई में समानता और मनमानी के विरुद्ध संरक्षण। |

सर्वोच्च न्यायालय के K.S. Puttaswamy v. Union of India (2017) के निर्णय ने निजता को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी। दूसरी ओर, लोकतांत्रिक व्यवस्था में प्रेस की स्वतंत्रता और जनता तक सूचना पहुँचाने की भूमिका भी संवैधानिक महत्त्व रखती है।

इसलिए दोनों अधिकारों के बीच संतुलन आवश्यक है। किसी पत्रकार को निजता के नाम पर हर वैध जाँच से रोकना और किसी पत्रकार को सार्वजनिक हित का नाम लेकर किसी भी निजी जानकारी के प्रकाशन की असीमित छूट देना—दोनों दृष्टिकोण समस्याग्रस्त हो सकते हैं।

### 7\. नियमों की प्रभावी तारीखें: पत्रकार और पोर्टल क्या ध्यान रखें?

अधिनियम और नियमों का कार्यान्वयन चरणबद्ध है। आधिकारिक राजपत्र अधिसूचनाओं के अनुसार समय-सारणी इस प्रकार है। IndiaCode +1

### 13–14 नव.

2025

प्रारंभिक प्रावधान लागू

अधिनियम की धारा 2, धारा 18–26 सहित कुछ संस्थागत प्रावधान तथा नियम 1, 2 और 17–21 प्रभावी हुए।

### नवंबर

2026

एक वर्ष वाला चरण

धारा 6(9), धारा 27(1)(d) और नियम 4 की अधिसूचित समय-सीमा पूरी होगी।

### मई

2027

मुख्य परिचालन चरण

अधिनियम की धाराएँ 3–17 सहित अधिकांश मुख्य प्रावधान तथा नियम 3, 5–16, 22 और 23 लागू होने के लिए निर्धारित हैं।

तारीखों के लिए मूल अधिसूचना की गणना निर्णायक है। राजपत्र में नियमों की अधिसूचना 13 नवंबर 2025 की है और सरकार की प्रेस विज्ञप्ति 14 नवंबर 2025 को जारी हुई। इसलिए अलग-अलग स्रोतों में एक दिन का अंतर दिखाई दे सकता है। IndiaCode +2

एक और महत्त्वपूर्ण बात: कोई प्रावधान अभी प्रभावी नहीं हुआ है, इसका अर्थ यह नहीं कि उससे संबंधित विषयों पर कोई अन्य कानून लागू नहीं होता। निजता, मानहानि, गोपनीयता, यौन अपराध के पीड़ितों की पहचान और सरकारी रिकॉर्ड के प्रकटीकरण से जुड़े दूसरे कानून स्वतंत्र रूप से लागू हो सकते हैं।

### 8\. डिजिटल समाचार पोर्टल के लिए व्यावहारिक अनुपालन योजना

यदि कोई हिंदी समाचार पोर्टल खोजी पत्रकारिता, स्थानीय प्रशासन, राजनीति और सार्वजनिक शिकायतों पर काम करता है, तो उसे अभी से निम्नलिखित व्यवस्था बनानी चाहिए।

1\. डेटा की सूची तैयार करें

पाठकों के फोन नंबर, ईमेल, शिकायतें, दस्तावेज, स्रोतों की पहचान, सदस्यता रिकॉर्ड और वेबसाइट के तकनीकी लॉग अलग-अलग श्रेणियों में दर्ज करें।

2\. स्रोतों की सुरक्षा करें

खोजी दस्तावेजों और स्रोतों की पहचान को सामान्य संपादकीय फाइलों से अलग रखें। पहुँच केवल आवश्यक कर्मचारियों तक सीमित करें।

3\. संपादकीय समीक्षा का रिकॉर्ड रखें

विवादित समाचार में जनहित, दस्तावेजों की पुष्टि, संबंधित पक्ष का उत्तर, निजी विवरण की आवश्यकता और पहचान छिपाने के निर्णय का रिकॉर्ड रखें।

4\. शिकायतों और हटाने की माँगों की प्रक्रिया बनाएँ

किसी व्यक्ति की शिकायत आने पर उसे स्वतः स्वीकार या खारिज करने के बजाय कानूनी आधार, तथ्यात्मक त्रुटि, निजता और सार्वजनिक हित की समीक्षा करें।

5\. डेटा सुरक्षा की तैयारी करें

पासवर्ड सुरक्षा, एन्क्रिप्शन, बैकअप, पहुँच का रिकॉर्ड, सुरक्षित फाइल हस्तांतरण और डेटा उल्लंघन से निपटने की प्रक्रिया विकसित करें।

ये उपाय जोखिम कम करने के लिए हैं; इन्हें पत्रकारिता के लिए वैधानिक छूट या पूर्ण कानूनी अनुपालन का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।

### 9\. 29 अक्टूबर 2026 की सबसे ताजा कानूनी स्थिति

विचाराधीन विवाद

डिजिटल समाचार प्रकाशकों की याचिका

27–28 अक्टूबर 2026 की प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, Digital News Publishers Association (DNPA) ने अधिनियम और नियमों के कुछ प्रावधानों को चुनौती दी है। संगठन का कहना है कि पत्रकारिता के लिए स्पष्ट छूट का अभाव खोजी रिपोर्टिंग, समय-संवेदनशील समाचार और गोपनीय स्रोतों की सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है।

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार से जवाब माँगा और मामले की अगली सुनवाई 17 नवंबर 2026 के लिए सूचीबद्ध की। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, उस समय अंतरिम रोक देने की माँग पर तत्काल राहत नहीं दी गई थी। Legal News – The Indian Express +1

इस स्थिति में अगली सुनवाई या बाद के किसी आदेश से कानूनी स्थिति बदल सकती है। इस विश्लेषण में 29 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध जानकारी का उपयोग किया गया है।

सरकार की ओर से इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 28 अक्टूबर की Reuters रिपोर्ट के अनुसार कहा कि सरकार मीडिया की चिंताओं को सुनने के लिए तैयार है और संवैधानिक रूप से संरक्षित पत्रकारिता की स्वतंत्रता को कमजोर करने का उसका इरादा नहीं है। यह सरकार का सार्वजनिक रुख है; इसका अर्थ यह नहीं कि अधिनियम में पत्रकारिता-छूट जोड़ दी गई है। Reuters

### 10\. निष्कर्ष: प्रेस की स्वतंत्रता के लिए वास्तविक कसौटी

इस कानून का मूल्यांकन करते समय चार प्रश्न निर्णायक होंगे:

* क्या सार्वजनिक हित में की जाने वाली खोजी पत्रकारिता के लिए स्पष्ट और व्यावहारिक सुरक्षा उपलब्ध है?

* क्या निजी डेटा के दुरुपयोग को रोकते हुए भ्रष्टाचार और सार्वजनिक पद के दुरुपयोग की रिपोर्टिंग संभव बनी रहती है?

* क्या RTI के तहत सूचना प्राप्त करने और व्यक्तिगत निजता की रक्षा के बीच उचित संतुलन कायम रहता है?

* क्या समाचार संस्थाओं को शिकायतों, डेटा सुरक्षा और व्यक्तिगत जानकारी के उपयोग के लिए स्पष्ट, अनुपातिक तथा लागू किए जा सकने वाले नियम मिलते हैं?

सबसे महत्त्वपूर्ण बात: DPDP Act को न तो पत्रकारिता पर पूर्ण प्रतिबंध मानना सही होगा, न ही यह मानना कि सार्वजनिक हित में समाचार प्रकाशित करने से डेटा संरक्षण संबंधी हर प्रश्न समाप्त हो जाता है। वास्तविक प्रभाव अधिनियम के लागू प्रावधानों, अन्य कानूनों, न्यायिक व्याख्या और प्रस्तावित पत्रकारिता-छूट के संबंध में आगे होने वाले निर्णयों पर निर्भर करेगा।

### आधिकारिक स्रोत और आगे पढ़ने के लिए

* [डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 — India Code](https://www.indiacode.nic.in/bitstream/123456789/22037/1/a2023-22.pdf?utm_source=chatgpt.com)

* [डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम, 2025 — राजपत्र अधिसूचना](https://egazette.gov.in/WriteReadData/2025/267647.pdf?utm_source=chatgpt.com)

* [MeitY — नियम, प्रवर्तन समय-सारणी और संबंधित अधिसूचनाएँ](https://www.meity.gov.in/documents/act-and-policies/digital-personal-data-protection-rules-2025-gDOxUjMtQWa?pageTitle=Digital-Personal-Data-Protection-Rules-2025&utm_source=chatgpt.com)

* [प्रेस सूचना ब्यूरो — सरकार की नियमों पर आधिकारिक व्याख्या](https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2190014&lang=2&reg=3&utm_source=chatgpt.com)

* [Indian Express — प्रेस की स्वतंत्रता पर सर्वोच्च न्यायालय की सुनवाई, 28 अक्टूबर 2026](https://indianexpress.com/article/legal-news/supreme-court-notice-to-centre-after-digital-news-publishers-association-move-against-privacy-law-10938539/?utm_source=chatgpt.com)

यह सामान्य कानूनी और नीतिगत विश्लेषण है, किसी विशिष्ट मामले पर कानूनी राय नहीं। किसी वास्तविक समाचार, नोटिस या डेटा हटाने के विवाद में लागू तारीख और संबंधित प्रावधानों की वर्तमान स्थिति की पुष्टि आवश्यक है।

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