संदीप बंसल का हत्यारा सलीम खान निकला एक्स मुस्लिम सलीम अहमद वास्तिक,पुलिस को मिली थी टिप
31 साल पहले बच्चे को मारा, फिर कागजों में खुद का ‘कत्ल, ‘Ex मुस्लिम’ सलीम वास्तिक के खूनी अतीत की पूरी कथा
खुद को ‘एक्स मुस्लिम’ कहने वाले चर्चित यूट्यूबर सलीम वास्तिक को पुलिस ने शनिवार को गिरफ्तार कर लिया. पुलिस के रिकॉर्ड और दुनिया की नजरों में वह बरसों पहले ही ‘दम तोड़’ चुका था, लेकिन इंटरनेट पर मिली नई पहचान ने ही उसे सलाखों के पीछे पहुंचा दिया.
13 साल के बच्चे की हत्या के लिए आजीवन कारावास की सजा काट रहे अपराधी ने कागजों में खुद की ही ‘हत्या’ कर दी. पुलिस रिकॉर्ड और दुनिया की नजरों में वह ‘दम तोड़’ चुका था, लेकिन इंटरनेट ने उसे जिंदा कर दिया. वह न सिर्फ जिंदा हुआ बल्कि यूट्यूब पर बैठकर लोगों को मजहबी कुरीतियों पर ज्ञान बांटने लगा. लेकिन इसी प्रसिद्धी ने उसे जेल पहुंचाने का रास्ता साफ कर दिया. शनिवार को पुलिस ने खुद को ‘एक्स मुस्लिम’ बताते चर्चित यूट्यूबर सलीम वास्तिक को पकड़ लिया. कैसे उसने 31 साल पहले बच्चे की हत्या की, आजीवन कारावास होने पर कैसे कानून की आंखों में धूल झोंककर नई पहचान ओढ़ ली, और अब कैसे पुलिस ने उसे जेल पहुंचाया, पूरी कहानी किसी क्राइम थ्रिलर से कम नहीं है.
बच्चे का अपहरण, फिरौती, फिर हत्या
साल था 1995. महीना जनवरी का. नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के एक सीमेंट कारोबारी सीताराम का 13 साल का बेटा संदीप बंसल घर से स्कूल के लिए निकला, लेकिन न स्कूल पहुंचा, न घर वापस लौटा. अगले दिन संदीप के पिता के पास फोन आया. 30 हजार रुपये दो, वरना बेटे को मार दिया जाएगा. फिरौती दी जाती, उससे पहले ही पुलिस को संदीप के स्कूल में मार्शल आर्ट्स टीचर सलीम खान पर संदेह हो गया. पुलिस ने उसे धर दबोचा. कठोर पूछताछ में उसने अपराध स्वीकार कर लिया. निशानदेही पर दिल्ली के मुस्तफाबाद में नाले से बच्चे की लाश भी मिल गई.
अदालत ने दिया आजीवन कारावास
दिल्ली पुलिस के डीसीपी (क्राइम) संजीप यादव ने बताया कि बच्चे के अपहरण और हत्या के इस अपराध में सलीम खान का एक जोड़ीदार भी था- अनिल. पुलिस ने उसे भी पकड़ लिया. अनिल ने ही संदीप के पिता को फिरौती का फोन किया था . दोनों पर कोर्ट में मुकदमा चला. दो साल बाद 1997 में दिल्ली की अदालत ने दोनों को हत्या का दोषी मान आजीवन कारावास सुना दिया.
जमानत पर छूटा तो फिर नहीं लौटा
सजा काटते तीन साल बाद साल 2000 में दिल्ली हाईकोर्ट ने सलीम खान की अंतरिम जमानत स्वीकार कर ली. वह जेल से बाहर आया, लेकिन फिर वापस नहीं लौटा. वह कानून की आंखों में धूल झोंककर गायब हो चुका था. इस बीच समय बीता और 2011 में दिल्ली हाईकोर्ट ने उसकी आजीवन कारावास सजा यथावत रखने का फैसला सुनाया. इस बीच सलीम खान ने अपनी मौत की झूठी खबर फैला दी और सरकारी फाइलों में खुद को मरा घोषित करवा लिया.
सलीम अहमद बनकर ओढ़ी नई पहचान
सलीम खान ने नई पहचान ओढ़ ली. पुलिस के अनुसार, वह सलीम खान से सलीम अहमद (सलीम वास्तिक) बन गया. कई साल तक हरियाणा और उत्तर प्रदेश में अलग-अलग जगह घूमता रहा. फर्नीचर कारीगर से लेकर कई तरह के काम किए. बाद में गाजियाबाद के लोनी में अपना मकान लेकर बीवी-बच्चों के साथ सेटल हो गया. यहां उसने दुकान खोली. महिलाओं के कपड़े और अन्य सामान बेचने लगा.
सोशल मीडिया पर बना ‘एक्स मुस्लिम’
सलीम खान उर्फ सलीम अहमद ने धीरे-धीरे क्षेत्र में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी. लोग उसे सोशल एक्टिविस्ट रूप में जानने लगे. 2019 में उसने सलीम वास्तिक 0007 नाम से यूट्यूब चैनल खोला. इस पर वह खुद को ‘एक्स मुस्लिम’ कहकर इस्लाम की कुरीतियों पर वीडियो बनाने लगा. देखते ही देखते उसकी फैन फॉलोइंग बढ़ने लगी. हजारों लोग उसके वीडियो देखने लगे. उसके सब्सक्राइबर्स की संख्या 62 हजार से अधिक हो गई.
Saleem Wastik
जानलेवा हमले में बाल-बाल बची जान
इस्लाम के खिलाफ उसकी बातें कई लोगों को अच्छी लगीं तो कइयों को चुभने लगीं. फरवरी 2026 में दो लोग हेलमेट लगाकर लोनी में उसके दफ्तर में घुसे और उस पर चाकू और पेपर कटर से दनादन वार किए. गला चीरने की भी कोशिश हुई. 4 मिनट तक वार करते रहे. भीड़ जुटी तो दोनों भाग गए. बाद में पुलिस ने दोनों को धर दबोचा. वे अमरोहा निवासी जीशान और गुलफाम दोनों सगे भाई थे.
यूट्यूब से बॉलीवुड का सफर
इधर सलीम वास्तिक अस्पताल में मौत से जूझ रहा था, उधर पुलिस ने हमलावर जीशान और गुलफाम का एनकाउंटर कर दिया. सलीम वास्तिक पर हमले के तार पाकिस्तान से भी जुडे. एक पाकिस्तानी यूट्यूबर ने एक वीडियो जारी करके हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया. उसी ने सलीम के घर का पता सार्वजनिक किया था, जिसके बाद हमला हुआ. सलीम वास्तिक को खतरा बताते हुए उसे पुलिस सुरक्षा भी दी गई. बताते है कि हाल ही में उसने एक बॉलीवुड फिल्म भी साइन की थी.
प्रसिद्धि ने पहुंचाया फिर जेल
इस्लामी कट्टरपंथियों के हमले ने सलीम वास्तिक को चर्चा में ला दिया. यही प्रसिद्धि उसका संकट बन गई. दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच को एक टिप मिली. बताया गया कि सलीम वास्तिक वही सलीम खान है, जिसने 1995 में स्कूली छात्र संदीप बंसल की हत्या की थी और आजीवन कारावास काटे बिना भाग गया. खबर मिलते ही पुलिस के कान खड़े हो गए.
क्राइम ब्रांच ने पुरानी फाइल्स निकालकर खंगाली. सलीम वास्तिक पर सर्विलांस लगा दी. दो हफ्ते तक उसकी गतिविधियों पर नजर रखी. उसके पुराने फोटो और फिंगरप्रिंट्स निकाले. प्रमाणों ने साफ कर दिया कि सलीम वास्तिक ही सलीम खान है. इसके बाद दिल्ली पुलिस ने लोनी पुलिस से मिलकर शनिवार को रेड मारी और आखिरकार उसे गिरफ्तार कर लिया.
