हरिद्वार: मृत बाघों की मां का सप्ताह भर बाद भी पता नहीं, सिर्फ पग चिह्न मिले

हरिद्वार बाघ शिकार मामला: खोजी कुत्ते भी ना ढूंढ सके लापता बाघिन, पग चिह्नों से विभाग को राहत
हरिद्वार में दो बाघों के शिकार मामले 4 आरोपित हो चुके बंदी, अभी भी बाघिन लापता, फुटप्रिंट मिलने से जगी आशा तो सवाल भी यथावत 
देहरादून 24 मई 2026 : हरिद्वार फॉरेस्ट डिवीजन में दो बाघों की मौत के बाद वन विभाग के पास सबसे बड़ा काम जहां अपराधी पकड़ना था,इससे भी बड़ी चिंता उस बाघिन को लेकर थी,जो इस घटना के बाद से ही लापता है. माना जा रहा है कि भैंस के शिकार में अपने बच्चों के साथ यह बाघिन भी मौजूद थी,लेकिन तब से अब तक एक हफ्ते में इसे कहीं भी नहीं देखा गया है.

हरिद्वार वन प्रभाग के श्यामपुर रेंज में दो बाघों की मौत के बाद वन विभाग की चिंता लगातार बढ़ रही है,एक तरफ विभाग शिकार के आरोपितों तक पहुंचने की कोशिश में जुटा है,तो दूसरी ओर उस बाघिन की तलाश सबसे बड़ी चुनौती बनी है, जो इस पूरी घटना के बाद से लापता है.

माना जा रहा है कि मारी गई भैंस का शिकार इसी बाघिन ने अपने दो शावकों के साथ किया था,लेकिन घटना के एक हफ्ते बाद भी बाघिन का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिला है. यही वजह है कि वन विभाग से लेकर मुख्यालय तक प्रकरण को लेकर बेचैनी बनी है. श्यामपुर रेंज में इन दिनों वन विभागीय गतिविधियां तेज हो गई हैं.

जंगलों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है और वन विभाग का पूरा तंत्र क्षेत्र में है. इसके अलावा Wildlife Crime Control Bureau डब्ल्यूसीसीबी टीम भी जांच में जुटी है. मामला शेड्यूल 1 श्रेणी के वन्यजीव के शिकार से जुड़ा होने से विभाग प्रकरण में बेहद गंभीर है.

इस जगह बाघों का शिकार (फाइल फोटो- Forest Department)
बाघ हत्या प्रकरण में अब तक 4 आरोपित बंदी: अब तक वन विभाग प्रकरण में चार लोग पकड़ चुका, लेकिन मुख्य आरोपित अभी भागा हुआ है.सबसे चिंताजनक यह है कि जिस हथियार से मृत बाघों के पंजे काटे गए, वो अब तक नहीं मिला है.इससे जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है.

बाघिन की तलाश लगातार जारी: वन विभाग की शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि एक भैंस का शिकार बाघिन और उसके दो शावकों ने मिलकर किया था.बाद में शिकारियों ने उसी मृत भैंस के मांस में जहर मिलाकर बाघ मार डाले.

इसके बाद दो अल्पायु बाघों के शव अलग-अलग स्थानों से मिले,लेकिन उनकी मां बाघिन तब से गायब है.यही बात पूरा प्रकरण और ज्यादा रहस्यमय बना रही है.वन विभाग का कहना है कि बाघिन की तलाश लगातार जारी है.

बाघ के शिकार में बंदी वन गुर्जर (फाइल फोटो- Forest Department)

शिकार से जुड़े प्रमाण इकट्ठा करने में खोजी कुत्तों की मदद से भी बाघिन खोजने का प्रयास हुआ. इसके अलावा पूरे क्षेत्र में 15 कैमरा ट्रैप लगे हैं. ताकि, बाघिन की मूवमेंट रिकॉर्ड हो सके, लेकिन आश्चर्य है कि एक सप्ताह बाद भी बाघिन किसी भी कैमरे में कैद नहीं हुई है.

बाघ के मिले पग चिह्न,लेकिन परिणाम नही: हालांकि, वन विभाग को कुछ राहत तब मिली,जब इसी क्षेत्र में बाघ के पग चिह्न मिलने का दावा किया गया. अधिकारियों का कहना है कि जंगल में पग मार्क संकेत हो सकते हैं कि बाघिन अभी जीवित है,लेकिन इसके बावजूद कई सवाल लगातार खड़े हो रहे हैं.

वन मंत्री सुबोध उनियाल ने किया मौका मुआयना (फाइल फोटो- Forest Department)
माना जा रहा है कि भैंस का शिकार बाघिन ने अपने शावकों के साथ किया था,तो संभव है कि उसने भी वही मांस खाया हो. ऐसे में यदि शिकार में विष प्रयोग हुआ था,तो बाघिन के प्रभावित होने की आशंका है.यही वजह है कि उसके सुरक्षित होने को लेकर संशय बना हुआ है.

अपने छोटे बच्चों को लंबे समय तक अकेला नहीं छोड़ती बाघिन: बड़ा सवाल ये भी है कि कोई भी बाघिन अपने छोटे बच्चों को लंबे समय तक अकेला छोड़कर नहीं जाती.खासतौर पर तब जब शावक पूरी तरह आत्मनिर्भर न हुए हों.

जानकारों का कहना है कि यदि शावक लंबे समय तक मां से दूर रहते हैं,तो जंगल में उनकी आवाज और गतिविधियां साफ दिखती हैं, लेकिन यहां स्थिति इसके उलट नजर आ रही है.न तो बाघिन दिखाई दे रही है और न ही उसके शावकों की कोई स्पष्ट गतिविधि सामने आई है.

प्रमुख वन सरंक्षक हॉफ आरके मिश्रा का बयान (फोटो- ETV Bharat GFX)
क्या छोटे शावक अकेले इतना बड़ा शिकार कर सकते थे? हालांकि,वन विभाग के इस तर्क पर भी सवाल उठते हैं.पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया है कि मृत बाघों की उम्र काफी कम थी और उनके दांत भी पूरी तरह विकसित नहीं हुए थे.

ऐसे में विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या इतने छोटे शावक अकेले इतनी बड़ी भैंस का शिकार कर सकते थे. यदि शावकों की उम्र दो वर्ष से कम थी,तो फिर उनकी मां उन्हें छोड़कर इतनी जल्दी कैसे अलग हो गई?

वन विभाग फिलहाल पग मार्क के आधार पर बाघिन के जीवित होने की संभावना जता रहा है,लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है,वैसे-वैसे संदेह भी गहरा रहा है. बड़ा सवाल यही है कि यदि बाघिन जंगल में है और उसके पग चिह्न भी मिल रहे हैं,तो फिर वो किसी भी कैमरा ट्रैप में रिकॉर्ड क्यों नहीं हो रही?

बाघों के शिकार के बाद वन महकमे में मचा हड़कंप (फाइल फोटो- Forest Department)
बाघिन की सुरक्षा और उसके अस्तित्व से जुड़ा है सवाल: वन विभाग को यह मामला केवल शिकार की जांच तक सीमित नहीं रह गया है,बल्कि अब यह बाघिन की सुरक्षा और उसके अस्तित्व से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका. जंगल में लगातार सर्च अभियान चल रहा है,लेकिन अभी तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है.

फिलहाल, पूरा वन विभाग इस बाघिन को लेकर चिंतित है. भविष्य में जांच किस दिशा में जाती है और बाघिन सुरक्षित मिलती है या नहीं,इस पर सबकी नजर बनी है, लेकिन इतना जरूर है कि दो बाघों की मौत के बाद पैदा हुआ यह मामला अब वन विभाग को बड़ी चुनौती बन चुका है और इसकी गुत्थी सुलझाना आसान नहीं होगा.

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बाघिन, पग चिह्नों से मिली महकमे को राहत

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