legal Supreme Court Commercial Activities In Residential Areas Orders
रिहायशी इलाकों में व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, उल्लंघन मिलने पर पहले सीलिंग का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जहां पर राज्य सरकारों ने रहवासी इस्तेमाल की अनुमति दी है, वहां मक्शल गतिविधियां नहीं की जा सकती हैं। ऐसी जगहों पर एक्शन लेते हुए परिसर को पहले चरण में सील किया जाएगा।
नई दिल्ली 20 अक्टूबर 2026 : सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित इलाकों में कमर्शल गतिविधियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए अधिकारियों को ऐसी गतिविधियों को प्राथमिकता के आधार पर रोकने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि जहां किसी क्षेत्र को विशेष रूप से आवासीय घोषित किया गया है और राज्य सरकार ने वहां केवल आवासीय उपयोग की अनुमति दी है, वहां कमर्शल गतिविधि पाए जाने पर संबंधित परिसर को पहले चरण में सील किया जाए।
पिक एंड चूज पर दिखाई कठोरता
पीठ ने यह भी कहा कि अधिकारियों को कार्रवाई में ‘पिक एंड चूज’ यानी चुनिंदा तरीके से कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। नियमों का समान रूप से पालन कराया जाना चाहिए और भेदभावपूर्ण कार्रवाई को अदालत गंभीरता से देखेगी। जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने 22 सितंबर (अब अपलोड हुए आदेश) को पारित अपने आदेश में ये निर्देश दिए। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संपत्ति के मालिकाना हक या अन्य अधिकारों को लेकर मुकदमा लंबित होने का आधार लेकर भी ऐसे परिसर की सीलिंग नहीं रोकी जा सकती, यदि वहां जमीन या भवन के स्वीकृत उपयोग के विपरीत गतिविधि हो रही है। पीठ ने कहा कि जिन इलाकों को स्पष्ट रूप से आवासीय उपयोग के लिए चिन्हित किया गया है और जहां राज्य सरकार की अनुमति केवल आवासीय इस्तेमाल के लिए है, वहां किसी भी तरह की व्यावसायिक गतिविधि नहीं होनी चाहिए। ऐसी गतिविधि मिलने पर परिसर को पहले चरण में सील किया जाए।
मिक्स लैंड यूज में यथास्थिति
सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि उन इलाकों के संबंध में फिलहाल यथास्थिति बनाए रखने को कहा है, जिन्हें किसी खास उपयोग, जैसे व्यावसायिक या आवासीय के लिए स्पष्ट रूप से निर्धारित नहीं किया गया है। ऐसे क्षेत्रों में मिश्रित उपयोग की अनुमति के सवाल पर बाद में विचार किया जा सकता है। कोर्ट ने कहा कि इस संबंध में कागजी कार्रवाई और कार्यवाही जारी रह सकती है, लेकिन फिलहाल मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं किया जाए।
मुकदमा लंबित होने पर भी सीलिंग
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि किसी भवन या जमीन के संबंध में निजी पक्षों के बीच स्वामित्व या अन्य विवाद लंबित हो अथवा सरकार और संबंधित पक्ष के बीच मुकदमा चल रहा हो, इससे प्राधिकरण को नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करने से नहीं रोका जा सकता। यदि भवन या जमीन का इस्तेमाल उस उद्देश्य के विपरीत हो रहा है जिसके लिए उसका आवंटन किया गया और सक्षम प्राधिकारी ने योजना मंजूर की, तो परिसर को सील किया जा सकता है।
सील-ध्वस्त करने का निर्देश
यह मामला मूल रूप से एक अनधिकृत जी+1 भवन से जुड़े विवाद से शुरू हुआ था। मार्च 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने इसे देशभर में आवासीय क्षेत्रों के गैर-आवासीय उपयोग की जांच से जुड़े व्यापक मामले में बदल दिया था। राजधानी वाले राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के नगर निकायों को जांच के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट ने वरिष्ठ अधिवक्ता अजीत कुमार सिन्हा को कोर्ट सलाहकार नियुक्त किया है। मामले में मेरठ, जयपुर, लखनऊ और दिल्ली समेत कई शहरों में भूमि उपयोग के उल्लंघन की जांच हुई है। मेरठ में 44 संपत्तियों को सील किए जाने और ऐसे परिसरों में चल रहे कोचिंग सेंटर समेत अन्य संस्थानों की भी जांच की गई है। कोर्ट ने पूरी तरह अनधिकृत निर्माणों को कानून के मुताबिक सील या ध्वस्त करने का निर्देश भी दिया है। मामले की अगली सुनवाई 23 नवंबर 2026 को होगी।

