14 के बाद उत्तराखण्ड में सात और भाजपाईयों को बांटे दायित्व
- Uttarakhand Government Releases Second List Seven More Leaders Entrusted with Responsibilities

देहरादून 05 अप्रैल 2026। मंत्रिमंडल विस्तार के बाद सरकार ने दायित्व बांटने का क्रम आज भी जारी रखा। शुक्रवार को 14 नेताओं की सूची जारी करने के बाद अब सात और नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है।
धामी सरकार ने प्रदेश में दायित्वधारियों की भाजपा नेताओं की दूसरी सूची भी जारी की है। रविवार को सरकार ने सात और लोगों को दायित्व बांटे हैं। वहीं, इससे पहले शुक्रवार को ही विभिन्न आयोगों, परिषदों और समितियों में 14 लोगों को नियुक्त कर कर दायित्व बांटे थे ।
इन्हें मिली जिम्मेदारी
राव काले खां – सदस्य, किसान आयोग
योगेश रजवार – सदस्य, बाल संरक्षक आयोग
दीप प्रकाश नेवलिया – सदस्य, समाज कल्याण अनुश्रवण समिति
मनोज गौतम – सदस्य, अनुसूचित जाति आयोग
प्रेमलता – सदस्य, महिला आयोग
रूचि गिरी – सदस्य, अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग
राजपाल कश्यप – सदस्य, अन्य पिछड़ा वर्ग कल्याण परिषद
पहले दी जा चुकी जिम्मेदारियां
देहरादून से कुलदीप बुटोला को राज्य स्तरीय खेल परिषद में अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है जबकि नैनीताल से ध्रुव रौतेला को मीडिया सलाहकार समिति उपाध्यक्ष बनाया गया है। वहीं, चंपावत से हरिप्रिया जोशी को राज्य महिला आयोग में, टिहरी से विनोद सुयाल को राज्य युवा कल्याण सलाहकार परिषद में, चंपावत से मुकेश महराना को चाय विकास सलाहकार परिषद में स्थान दिया गया है।
ऋषिकेश ( देहरादून) से चारु कोठारी को राज्य निर्माण आंदोलनकारी सम्मान परिषद में.चमोली से प्रेम सिंह राणा को जनजाति आयोग में, टिहरी से खेमसिंह चौहान को ओबीसी आयोग कल्याण परिषद में, टिहरी से ही सोना सजवाण को जड़ी बूटी सलाहकार समिति में, अल्मोड़ा से गोविंद पिलखवाल को हथकरघा एवं हस्तशिल्प विकास परिषाद में, देहरादून से
सरदार बलजीत सिंह सोनी को अल्पसंख्यक आयोग, काशीपुर की सीमा चौहान को मत्स्य विकास प्राधिकरण में उपाध्यक्ष बनाया गया है। इनके अलावा वरिष्ठ भाजपा नेता भावना मेहरा और देहरादून के अशोक वर्मा को भी जिम्मेदारी सौंपी गई थी।इनमें राव काले खां 2021 में और खर्चा वर्मा भी उसी के आसपास कांग्रेस से भाजपा में आये थे. सोनी शुरुआत से भाजपा में हैं.
दायित्वों से सरकार संगठन के भीतर संतुलन बनाने और कार्यकर्ताओं को सम्मानजनक जिम्मेदारी देने की कोशिश करती है. विशेष रूप से ऐसे समय में जब चुनावी राजनीति में सक्रिय नेताओं और कार्यकर्ताओं की संख्या ज्यादा होती है, तब सरकार के सामने उन्हें समायोजित करने की चुनौती भी रहती है. ऐसे में आयोग, बोर्ड और परिषद जैसे संस्थान राजनीतिक नियुक्तियों का एक बड़ा माध्यम बन जाते हैं.
उत्तराखंड की राजनीति में दायित्वों का विषय नया नहीं है. राज्य गठन के बाद पहली निर्वाचित सरकार के दौरान भी इस तरह की नियुक्तियां काफी चर्चा में रही थीं. उस समय नारायण दत्त तिवारी के नेतृत्व वाली सरकार पर यह आरोप लगा था कि बड़ी संख्या में राजनीतिक दायित्व बांटे गए. उस दौर में यह कहा गया था कि तिवारी सरकार ने 200 से अधिक नेताओं को विभिन्न पदों पर दायित्व दिया था.
हालांकि बाद के सालों में सरकारें बड़े पैमाने पर दायित्व बांटने से बचती रही हैं. इसके पीछे कई कारण बताए जाते रहे हैं, जिनमें राजनीतिक आलोचना और वित्तीय भार जैसे विषय भी शामिल रहे हैं. अब एक बार फिर उत्तराखंड में दायित्वों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. धामी सरकार के मौजूदा कार्यकाल में कितने नेताओं को दायित्व दिए गए हैं, इसका आधिकारिक आंकड़ा अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. हालांकि राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जरूर है कि पिछले चार वर्षों में यह संख्या लगातार बढ़ती रही है. अनुमान लगाया जा रहा है कि अब तक करीब 80 के आसपास नेताओं को विभिन्न आयोगों, बोर्डों और परिषदों में जिम्मेदारियां दी जा चुकी हैं.माना जा रहा है कि आगे दायित्वों की सूची और लंबी हो सकती है.
अभी मुख्य मंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गढ़वाल मंडल विकास निगम और वन निगम अध्यक्ष, उपाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण पद छोडे हुए है विधायकों को जा सकते हैं.

