जेल से बाहर आते ही आजम खान फिर गिरफ्तार,जौहर विवि में 426 करोड़ का घपला बना कारण
जेल से बाहर आते ही आजम खान को ED ने किया गिरफ्तार, किस मामले में हुई कार्रवाई?
Azam Khan ED Custody: समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान रामपुर जेल से रिहा होते ही ईडी की कस्टडी में चले गए। वे दो पैनकार्ड मामले में हाईकोर्ट से जमानत पर छूटे थे।
जेल से बाहर आने के बाद आजम खान
रामपुर जेल से रिहा होते ही ईडी ने आजम खान को कस्टडी में लिया।
बेटे अब्दुल्ला आजम भी उनके साथ जेल से बाहर आए।
दो पैनकार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से मिली थी जमानत।
रामपुर 31 अक्टूबर 2026 । समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान को रामपुर जेल से छूटते ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पकड़ लिया। आजम खान बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ जेल से बाहर निकले तो ईडी टीम ने उन्हें अपने अधिकार में ले लिया। दो पैन कार्ड मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को आजम खान की जमानत मानी थी।
हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर आजम खान और अब्दुल्ला की ओर से एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट और मजिस्ट्रेट कोर्ट में अलग-अलग मामलों में जमानतें दी गई थी। अदालत ने इनके सत्यापन के आदेश पुलिस और राजस्व प्रशासन को दिए थे। शुरुआत में शुक्रवार को ही दोनों के छूटने के आदेश थे। एमपी-एमएलए सेशन कोर्ट ने आजम खान के विचाराधीन पांच मुकदमों में छोड़ने के आदेश दिए थे।
ईडी ने आजम खान को पकड़ा
एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट से छोड़ने के आदेश नहीं हो सके थे। इससे दोनों की मुक्ति टल गई थी। शनिवार को सभी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने पर आजम खान और अब्दुल्ला रामपुर जेल से बाहर आए। लेकिन जेल से बाहर निकलते ही ईडी ने आजम खान को पकड़ लिया।
हाईकोर्ट से जमानत मिलने से आजम खान के समर्थक खुश थे। उनके स्वागत की तैयारियां भी शुरू हो गई थीं। शुक्रवार को रिहाई टलने से समर्थक निराश हुए, लेकिन शनिवार को जेल से बाहर आने के बाद एक बार फिर खुशी की हवा बनी। हालांकि, ईडी के हस्तक्षेप से यह उत्सव निराशा में बदल गया।
जेल से रिहा होकर निकले तो आजम खान ने मीडिया से बात कहा कि अब कहने को बचा ही क्या है? मैं क्या कहूं? कानून तो जैसे खत्म ही हो गया है.क्या मुसलमान होने की यही सजा है?
जेल से छूटते ही आजम को ईडी ने जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय में धांधली में पकड़ा है। बताते हैं,ईडी उन्हें गाजियाबाद कोर्ट पेश करेगी।
ईडी ने 13 अक्टूबर को अजीमनगर थाने में आजम खान, उनके जौहर ट्रस्ट समेत पांच लोगों के खिलाफ विश्वविद्यालय निर्माण में सरकारी धन के गबन और धोखाधड़ी में FIR कराई थी। भ्रष्टाचार के इस मामले में पुलिस आजम खान को रिमांड पर लेना चाहती है। इसको न्यायालय में प्रार्थना पत्र दिया गया है। इस पर सोमवार को सुनवाई होगी। कोर्ट ने आजम खान को सोमवार को उपस्थित होने को कहा है।
आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी पर ED की बड़ी कार्रवाई, ₹426.46 करोड़ की संपत्तियां अटैच
Jauhar University ED Action: रामपुर की जौहर यूनिवर्सिटी पर ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में कार्रवाई करते हुए ₹426.46 करोड़ की संपत्तियां अस्थायी रूप से अटैच की हैं। बाजार मूल्य ₹1,170 करोड़ बताया गया।
जौहर यूनिवर्सिटी(सोर्स- सोशल मीडिया)- रामपुर जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतें अटैच
- ₹1,170 करोड़ बताया गया बाजार मूल्य
- किसानों की जमीन और सरकारी धन इस्तेमाल के आरोप
- ED जांच में निर्माण लागत और घोषित खर्च में मिला अंतर
रामपुर में आजम खान के मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के लखनऊ जोनल कार्यालय ने मनी लॉन्ड्रिंग मामले में जौहर यूनिवर्सिटी की जमीन और इमारतों को अस्थायी रूप से अटैच कर लिया है। बता दें कि टैच की गई संपत्तियों का मूल्य 426.46 करोड़ रुपये बताया गया और इनका मौजूदा बाजार मूल्य करीब 1170 करोड़ रुपये आंका गया है। ईडी की यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 में की गई है।
28 अक्टूबर 2026 को ईडी द्वारा जारी प्रेस रिलीज के मुताबिक, यह मामला मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट और सपा नेता मोहम्मद आजम खान और अन्य लोगों के खिलाफ चल रही जांच से जुड़ा है। यूनिवर्सिटी का संचालन जौहर ट्रस्ट करता है, जबकि इसकी स्थापना आजम खान ने की थी।
किसानों की जमीन हथियाने का आरोप
ईडी की यह जांच रामपुर के थाना अजीमनगर में 26 FIR के आधार पर जांच शुरू हुई थी। इनमें आरोप था कि यूनिवर्सिटी निर्माण को किसानों की कृषि भूमि छीनी गई। जिला प्रशासन की जांच में गांव सिंहनखेड़ा में 34 एकड़ क्षेत्रफल वाले 45 भूखंडों पर अवैध कब्जे की बात सामने आई थी।
ईडी ने बताया कि संबंधित जमीन की लीज निरस्त होने पर भी भूमि खाली नही की गई।शत्रु संपत्ति कस्टोडियन ने जिला प्रशासन से जमीन वापस ली।
यूनिवर्सिटी में सरकारी धन लगाने का आरोप
ईडी जांच में पता चला कि सरकारी निर्माण कार्यों को आवंटित धनराशि का प्रयोग यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में हुआ। आरोप यह भी है कि सरकारी ठेके पाने वाले ठेकेदारों ने ठेकों की धनराशि का एक हिस्सा दान में ट्रस्ट को वापस दिया।
ईडी ने यह जानकारी उत्तर प्रदेश पुलिस को दी। तब 13 अक्टूबर को थाना अजीमनगर में एफआईआर संख्या 0224/2026 हुई। इसके अनुसार आजम खान और जौहर ट्रस्ट के अन्य लोगों पर भारतीय न्याय संहिता व भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं में मुकदमा हुआ था।
23.41 करोड़ की सरकारी अनुमोदन का उल्लेख..
ईडी की प्रेस रिलीज में बताया गया कि विधायक और विधान परिषद सदस्य की स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से 6.60 करोड़ रुपये के कार्य यूनिवर्सिटी के निजी परिसर में हुए। इसके अलावा पंडाल, OBC बालक छात्रावास और अस्पताल ब्लॉक निर्माण को उत्तर प्रदेश सरकार से 23.41 करोड़ रुपये स्वीकृति का भी उल्लेख है।
ईडी के अनुसार 2015 में पंडाल निर्माण को मंजूर 12.16 करोड़ रुपये की राशि के साथ यह शर्तें थीं कि उसका स्वामित्व संस्कृति विभाग का रहेगा और राज्य सरकार को उसका निःशुल्क उपयोग की सुविधा होगी। लेकिन वर्ष 2016 में आदेश बदल कर पंडाल का स्वामित्व यूनिवर्सिटी को दिया गया और सरकारी उपयोग की शर्त हटा दी गयी।
यूनिवर्सिटी निर्माण की लागत पर सवाल
ईडी की दी जानकारी के अनुसार जिला मूल्यांकन अधिकारी की रिपोर्ट में यूनिवर्सिटी परिसर में 59 इमारतों की निर्माण लागत 494.46 करोड़ रुपये आंकी गई और जमीन की कीमत 4.63 करोड़ रुपये, दोनों को मिलाकर परिसर की कुल लागत 499.09 करोड़ रुपये बताई गई। ट्रस्ट ने आयकर रिटर्न में 78.32 करोड़ रुपये का पूंजीगत व्यय दिखाया। लेकिन जांच में 12.29 करोड़ रुपये के दान को गैर-वास्तविक बताए जाने पर एजेंसी ने 66.03 करोड़ रुपये को वास्तविक खर्च माना। ईडी के अनुसार, शेष 426.46 करोड़ रुपये की धनराशि का वैध स्रोत नहीं मिला। इसी आधार पर संपत्तियां अटैच हुई।
19 अगस्त को हुई थी छापेमारी
ईडी ने बताया कि मामले में 19 अगस्त को जौहर यूनिवर्सिटी और उससे जुड़े परिसरों की तलाशी हुई थी, तब इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और जांच संबंधित अभिलेख भी लिये गये थे। इसके अलावा रामपुर में वर्ष 2016 में मकान गिराए जाने, लोगों से मारपीट और नगर पालिका की सफाई मशीनों को यूनिवर्सिटी परिसर में पहुंचाने का का भी उल्लेख है। इन मामलों में पुलिस के एफआईआर और आरोपपत्रों को जांच में शामिल करना सामने आया है।
फिलहाल, ईडी ने स्पष्ट किया है कि आगे की जांच प्रचलित है। एजेंसी के आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया में ही होगा।


