भरत तिवारी एनकाउंटर:पुलिस जनों पर मुकदमें,महापंचायत आज
महापंचायत से ठीक पहले बड़े एक्शन, मुकदमे बाद अब SDPO हटाए गए
पटना 24 जून 2026। भोजपुर के चर्चित भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में महापंचायत से पहले प्रशासन ने बड़ा कदम उठा जगदीशपुर एसडीपीओ हटाया है.इससे पहले भरत तिवारी की मां की शिकायत पर एसडीपीओ, तत्कालीन थानाध्यक्ष समेत कई पुलिसकर्मियों पर मुकदमा लिखा गया था. मामले की न्यायिक जांच जारी है, स्थानीय लोग और जनप्रतिनिधि एनकाउंटर पर सवाल उठा रहे हैं।
भोजपुर के शाहपुर में भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर पर बिहार की राजनीति,प्रशासन और पुलिस में हलचल लगातार बढ़ रही है.आज प्रस्तावित महापंचायत से ठीक पहले सरकार और पुलिस मुख्यालय से लगातार बड़े फैसले हुए हैं. पहले भरत तिवारी की मां के आवेदन पर एनकाउंटर के पुलिस अधिकारियों और कर्मियों पर हत्या समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमा हुआ.अब जगदीशपुर के एसडीपीओ राजेश वर्मा हटाकर अगले आदेश तक पुलिस मुख्यालय अटैच किया गया है.
महापंचायत से पहले बड़ा प्रशासनिक फैसला
भोजपुर के बिलौती गांव में आज प्रस्तावित महापंचायत से पहले राज्य सरकार और पुलिस मुख्यालय की सक्रियता बढ़ गई है.जगदीशपुर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) राजेश वर्मा को तत्काल प्रभाव से हटाया अगले आदेश तक पुलिस मुख्यालय से संबद्ध किया गया है. पंकज मिश्रा को जगदीशपुर का नया एसडीपीओ बनाया गया है. यह फैसला मुख्यमंत्री और वरिष्ठ प्रशासनिक स्तरीय समीक्षा बाद लिया गया.
एक दिन पहले दर्ज हुई थी FIR
कल भरत तिवारी की मां के आवेदन पर शाहपुर थाने में मुकदमा लिखा गया. एफआईआर में एसडीपीओ राजेश कुमार शर्मा, शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश मालाकार और एनकाउंटर में शामिल पुलिसकर्मी नामांकित हैं. परिजनों का आरोप है कि भरत तिवारी की मौत पुलिस कार्रवाई नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या है.इसी आधार पर हत्या और अन्य धाराओं में मुकदमा होने पर मामला और गंभीर हो गया.
आज बिलौती गांव में महापंचायत
भरत तिवारी के गांव बिलौती में आज बड़ी महापंचायत है.आयोजन कुंडेश्वर महादेव मंदिर के पास प्रस्तावित है. स्थानीय लोगों, सामाजिक संगठनों और भरत तिवारी के समर्थकों के बड़ी संख्या में शामिल होने की संभावना है. गांव में पिछले कई दिनों से गर्मागर्मी है. लोगों का कहना है कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं होगी, तब तक सवाल खत्म नहीं होंगे. प्रशासन भी महापंचायत देख पूरी तरह सतर्क है.
कौन थे भरत भूषण तिवारी
28 वर्षीय भरत भूषण तिवारी भोजपुर जिले के शाहपुर प्रखंड बिलौती गांव के थे. उनकी पहचान किसी राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक विषय उठाने वाले युवा की थी. फेसबुक और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर काफी सक्रिय थे.सड़क,बिजली,पेयजल,बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और स्थानीय समस्याओं पर लगातार पोस्ट और वीडियो करते थे. विशेषत: सोन नदी किनारे बसे गांवों के लोगों की समस्यायें वह जोर-शोर से उठाते थे.ग्रामीणों का दावा है कि भरत गरीबों,दलितों और विस्थापित परिवारों की आवाज बने थे.हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों को लेकर उनकी भाषा आक्रामक भी मानी गई.कुछ पोस्ट में अधिकारियों को चेतावनी और क्रांतिकारी युद्ध जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर भी विवाद हुआ था.
पुलिस के सामने भी उठ रहे सवाल
एनकाउंटर बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठा कि ऐसी कौन परिस्थितियां थीं,जिनमें पुलिस को गोली चलानी पड़ी. सरकार ने न्यायिक जांच आदेश दे यह भी स्पष्ट किया कि केवल एनकाउंटर नहीं,बल्कि पुलिस भूमिका भी जांची जायेगी.साथ ही यह भी देखा जाएगा कि भरत तिवारी के पास हथियार था,कहां से आया और किन परिस्थितियों में उसके इस्तेमाल की नौबत आई.
मंत्रियों के बयान
मंत्री दिलीप जायसवाल ने कहा था कि सरकार ने संवेदनशीलता दिखा तुरंत न्यायिक जांच आदेश दिया है. जांच निष्पक्ष होगी और पुलिस भूमिका की भी समीक्षा होगी.सच सामने आए ताकि कोई भी आशंका या भ्रम खत्म हो सके. कृषि मंत्री विजय कुमार सिंह ने भी मामला गंभीर और दुखद बताया. उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया लापरवाही दिखी है, इसलिए कार्रवाई भी हुई है. उन्होंने कहा कि बिहार सरकार किसी निर्दोष को प्रताड़ित नहीं होने देगी.साथ ही यह भी कि अधिकारी या कर्मचारी लापरवाही के दोषी मिले,छूटेगें नही.
पवन सिंह के सवाल
भोजपुरी अभिनेता – गायक पवन सिंह ने सोशल मीडिया पर कहा कि भरत तिवारी सामाजिक संघर्ष से गरीबों की आवाज उठाते थे. वायरल वीडियो और सामने आई जानकारी सही है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष,पारदर्शी और न्यायसंगत जांच हो. इस बयान से यह मामला और ज्यादा चर्चित हुआ. बक्सर भाजपा विधायक आनंद मिश्रा ने भी घटना दुर्भाग्यपूर्ण बता कहा कि स्थानीय पुलिस प्रशासन समय रहते अधिक संवेदनशील और व्यावहारिक होती, तो दुर्घटना टाल सकती थी. नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने एनकाउंटर को लेकर सरकार पर सवाल उठाए .
अब सबकी नजर न्यायिक जांच पर
न्यायिक जांच परिणाम प्रतीक्षित है. एक तरफ पुलिस की कार्रवाई तो दूसरी तरफ परिजनों और ग्रामीणों के गंभीर आरोप. एफआईआर हो चुकी, एसडीपीओ हटाए जा चुके,महापंचायत के जनदबाव से मामला केवल एनकाउंटर तक सीमित नहीं रहा प्रशासनिक जवाबदेही, पुलिस कार्रवाई और जनविश्वास की परीक्षा बन चुका.
भरत तिवारी एनकाउंटर केस: सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला, CBI जांच की मांग
बिहार के भोजपुर में भरत भूषण तिवारी की पुलिस मुठभेड़ मौत मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है. अधिवक्ता विशाल तिवारी ने जनहित याचिका दाखिल कर इसे कथित फर्जी एनकाउंटर बता CBI जांच और सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की निगरानी में स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की है.
जनहित याचिका (PIL) में कहा गया है कि मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में गठित स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति की निगरानी में हो, ताकि निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके.
याचिकाकर्ता विशाल तिवारी भरत भूषण तिवारी की मौत ‘फर्जी मुठभेड़’ बता पूरे मामले की जांच CBI को सौंपने की मांग की है.
याचिकाकर्ता के अनुसार मामला कथित ‘न्यायेतर हत्या’ का है. ऐसे में कानून के शासन और नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा को स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच जरूरी है. इसी आधार पर सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की अपील की गई है.
रिटायर्ड जज की निगरानी में जांच समिति गठित करने की मांग
जनहित याचिका के अनुसार पूरे मामले की जांच को स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति हो जिसकी अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज करें. तर्क है कि इससे जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता बनी रहेगी.
याचिका है कि एनकाउंटर के पुलिसकर्मियों पर विधिसम्मत कार्रवाई हो और जांच स्वतंत्र एजेंसी को सौंपी जाए.
पहले से गरमाया हुआ है मामला, सरकार ने बैठाई है न्यायिक जांच
भरत भूषण तिवारी की मौत के बाद यह मामला पहले से ही राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में है. बिहार सरकार ने मुठभेड़ की न्यायिक जांच कराने की घोषणा की है. थानाध्यक्ष प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मी निलंबित चुके हैं।
रविवार को जन सुराज पार्टी ने मामले को लेकर पटना में कैंडल मार्च निकाल न्यायिक जांच के साथ-साथ मृतक के परिजन को एक करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति और एक परिजन को सरकारी नौकरी मांगी है.
जन सुराज पार्टी प्रदेशाध्यक्ष मनोज भारती ने कहा कि एनकाउंटर में इस सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या दुखद और निंदनीय है.उन्होंने दावा किया कि तिवारी लंबे समय से जनहित विषय उठा रहे थे और लोगों के अधिकारों को लड़ते रहे थे.
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में क्या निर्देश देती है और जांच की दिशा आगे किस तरह तय होती है,देखा जायेगा।
“उसकी किस्मत में मरना लिखा था”, भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर, निलंबित थानाध्यक्ष राजेश मालकार के बयान से बवाल
आरा. बिहार के भोजपुर जिले के भरत भूषण तिवारी कथित एनकाउंटर मामले में शाहपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजेश मालाकार ने बिहार के एक वरिष्ठ पत्रकार से बातचीत में एक बेहद हैरान करने वाला बयान दिया है. राजेश मालाकार ने दोटूक कहा, “भरत की किस्मत में मरना लिखा था.” खास बात यह कि यह बात कहते वक्त थानाध्यक्ष के चेहरे पर न कोई शिकन थी, न कोई दुख और न ही एक बेदाग युवक को मौत के घाट उतारने का कोई पछतावा. थानाध्यक्ष ने दावा किया कि भरत ने उनके जवानों पर गोलियां चलाई थीं, जिसके जवाब में वह मारा गया. हालांकि, उनका यह दावा सोशल मीडिया पर वायरल सरेंडर वाले वीडियो और आम कट्टों और पिस्तौल की तकनीकी क्षमता के सामने पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गया है.
थानाध्यक्ष की संवेदनहीनता, चेहरे पर न पछतावा, न कोई मलाल
जब वरिष्ठ पत्रकार थानेदार से सवाल कर रहे थे तो इसमें सबसे विचलित करने वाला पहलू थानाध्यक्ष राजेश मालाकार का बर्ताव था. उनका अहंकार साफ दिख रहा था और राज्य में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार कानून के राज और मानवाधिकारों की रक्षा के दावे की खिल्ली उड़ा रहा था. मूल बात यह कि ऊपर के स्तर पर सरकार जो भी दावे करे, लेकिन जमीनी स्तर पर खाकी के रक्षक ही भक्षक बने दिख रहे हैं. एक वरिष्ठ पत्रकार के सामने बेहद सामान्य तरीके से यह कह देना कि “उसकी (भरत तिवारी) किस्मत में मरना लिखा था”, साफ बताता है कि कई पुलिसकर्मियों के भीतर कानून और मानव जीवन के प्रति कोई सम्मान शेष नहीं रह गया. पुलिसिया संवेदनहीनता ही इस एनकाउंटर की पूरी थ्योरी को सुनियोजित हत्या की श्रेणी में ला खड़ा करती है.
15 राउंड फायरिंग का संदेहास्पद दावा, पिस्टल का तकनीकी सच
वरिष्ठ पत्रकार से इस बातचीत में अपनी आत्मरक्षा की कहानी सही साबित करने को थानाध्यक्ष राजेश मालाकार ने दावा किया कि भरत तिवारी ने पुलिस टीम पर पूरे 15 राउंड फायरिंग की थी. ऐसे में भोजपुर पुलिस कप्तान और जांच टीम के सामने अब यह एक बड़ा तकनीकी सवाल बना है कि क्या एक साधारण या प्रतिबंधित बोर की सिंगल पिस्तौल से एक बार में 15 राउंड फायरिंग संभव है? जबकि, तथ्य यह है कि एक आम पिस्तौल की मैगजीन की क्षमता अमूमन 6 से 8 कारतूस की होती है. ऐसे में 15 राउंड गोली चलाने के दावे पर खुद रक्षा विशेषज्ञ भी हैरान हैं.
गायब खोखे खोलते हैं पुलिसिया स्क्रिप्ट की पोल
हालांकि, पुलिस का यह दावा एक पल को सच मान भी लिया जाए कि भरत ने 15 राउंड गोलियां दागी थीं, तो फिर सबसे बड़ा सवाल यह है कि वे भरत की पिस्तौल से निकले 55 खोखे कहां हैं ? एनकाउंटर साइट से पुलिस की खोजी टीम को भरत की पिस्तौल से चली गोलियों के खोखे क्यों नहीं मिले? खोखे मिले हैं, तो पुलिस को दिखाने होंगें, और अगर नहीं तो साफ है कि 15 राउंड फायरिंग की यह पूरी कहानी कागजी और मनगढ़ंत है, जिसे अपनी चमड़ी और वर्दी बचाने को थाने में बैठकर बुना गया है.
वायरल वीडियो बनाम खाकी की कहानी, अब जांच पर टिकी नजरें
थानाध्यक्ष राजेश मालाकार की पूरी कहानी फर्जी लगती है, जब सोशल मीडिया पर वायरल लाइव वीडियो को देखा जाता है. वीडियो में साफ और स्पष्ट रूप से दिख रहा है कि भरत भूषण तिवारी ने पुलिस के सामने अपने हथियार डाल दिए थे और वह पूरी तरह आत्मसमर्पण कर चुका था. कानून के जानकार कहते हैं कि एक निहत्थे और सरेंडर कर चुके व्यक्ति पर चार-चार गोलियां दागना मुठभेड़ नहीं बल्कि ‘कस्टोडियल किलिंग’ का सीधा मामला बनता है. कानून के जानकार कहते हैं कि पुलिस की वर्दी सिर्फ शक्ति का प्रतीक नहीं, बल्कि संयम और संवेदनशीलता का भी प्रतीक होती है. एक जिम्मेदार अधिकारी से अपेक्षा होती है कि वह जांच पूरी होने तक तथ्यों पर ही बात करे, न कि ऐसे बयान दे जो निष्पक्षता पर सवाल खड़े करें.
सबसे बड़ा सवाल कानून के शासन की है…
भरत तिवारी की मौत एनकाउंटर थी या कुछ और, इसका फैसला मीडिया, सोशल मीडिया या पुलिस नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया करेगी. लेकिन इतना जरूर है कि जब किसी एनकाउंटर पर सवाल उठ रहे हों, तब पुलिस के हर शब्द का महत्व है. पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि गोली किसने चलाई, बल्कि यह भी है कि क्या कानून के शासन में किसी पुलिस अधिकारी को यह कहने का नैतिक अधिकार है कि “उसकी किस्मत में मरना लिखा था.” लोकतंत्र में किसी नागरिक की किस्मत का फैसला कानून करता है, न कि किसी वर्दीधारी की धारणा.

