मुर्दा कौमें डरकर बोलने लगती हैं वंदे मातरम’:मौलाना महमूद मदनी

जब तक जुल्म होगा, तब तक जिहाद… SC को ‘सुप्रीम’ कहलाने का अधिकार नहीं’, मदनी के बिगड़े बोल
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने बाबरी मस्जिद और तलाक जैसे मामलों के फैसलों को लेकर न्यायपालिका पर सरकार के दबाव में काम करने का आरोप लगाया. उन्होंने 1991 के उपासना स्थल अधिनियम के बावजूद हुई कार्रवाइयों पर सवाल उठाए और कहा कि सुप्रीम कोर्ट तभी तक ‘सुप्रीम’ है जब तक वह संविधान की रक्षा करता है.

मदनी ने ‘जिहाद’ शब्द को लेकर सरकार और मीडिया पर इसे गलत तरीके से पेश करने का आरोप लगाया. (Photo: Screengrab)

मिलन शर्मा
भोपाल,29 नवंबर 2025,। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने भोपाल में एक कार्यक्रम में न्यायपालिका के हालिया फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि ‘बाबरी मस्जिद और तलाक जैसे मामलों के फैसलों से ऐसा प्रतीत होता है कि अदालतें सरकार के दबाव में काम कर रही हैं.’ उन्होंने कहा कि अदालतों के कई ऐसे फैसले सामने आए हैं, जिनमें संविधान में दिए गए अल्पसंख्यकों के अधिकारों का खुले तौर पर उल्लंघन हुआ है.

उन्होंने कहा, ‘1991 के उपासना स्थल अधिनियम (Places of Worship Act) के बावजूद अन्य मामलों में जिस तरह की कार्रवाई हुई, वह इसका उदाहरण है.’ मदनी ने कहा, ‘सुप्रीम कोर्ट को तभी तक ‘सुप्रीम’ कहा जा सकता है, जब तक वहां संविधान सुरक्षित है, अगर ऐसा नहीं होता तो वह इस नाम का हकदार नहीं रह जाता.’

60 प्रतिशत लोगों से बात करें मुसलमान’

मदनी ने कहा, ‘इस समय देश में 10 प्रतिशत लोग मुसलमानों के पक्ष में हैं, 30 प्रतिशत लोग मुसलमानों के खिलाफ हैं, जबकि 60 प्रतिशत लोग खामोश हैं.’ उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे इन 60 प्रतिशत खामोश लोगों से संवाद करें, अपनी बात उनके सामने रखें, क्योंकि अगर यही वर्ग मुसलमानों के खिलाफ हो गया तो देश में बड़ा खतरा पैदा हो सकता है.

जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा’

‘जिहाद’ को लेकर मौलाना मदनी ने कहा, ‘आज सरकार और मीडिया एक पवित्र शब्द को पूरी तरह गलत तरीके से दुनिया के सामने पेश कर रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि जिहाद को लव जिहाद, थूक जिहाद, जमीन जिहाद जैसे शब्दों के साथ जोड़कर बदनाम किया जा रहा है, जबकि जिहाद हमेशा पवित्र रहा है और दूसरों की भलाई और बेहतरी के लिए बताया गया है.

उन्होंने कहा, ‘जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा.’ उन्होंने इस बात को दोहराया भी- ‘जहां जुल्म होगा, वहां जिहाद होगा.’ उन्होंने कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष देश भारत में, जहां लोकतांत्रिक शासन व्यवस्था है, वहां जिहाद की कोई बहस नहीं है. यहां मुसलमान संविधान के प्रति वफादारी दिखाते हैं. नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है. अगर सरकार ऐसा नहीं करती है तो इसके लिए सरकार ही जिम्मेदार होगी.

मुर्दा कौमें डरकर बोलने लगती हैं वंदे मातरम’

वंदेमातरम के मुद्दे पर मौलाना मदनी ने कहा, ‘मुर्दा कौमें सरेंडर कर दिया करती हैं. वो कहेंगे वंदे मातरम बोलो तो पढ़ना शुरू कर देंगे. ये पहचान है मुर्दा कौम होने की. अगर जिंदा कौम है तो हालात का मुकाबला करना पड़ेगा.’

भोपाल में जमीयत उलेमा-ए-हिंद की गवर्निंग बॉडी की बैठक में शनिवार को मौलाना महमूद मदनी ने कहा कि मौजूदा दौर में इस्लाम और मुसलमानों के खिलाफ नफरत फैलाने की कोशिशें बढ़ गई हैं। जिहाद जैसे मुकद्दस शब्द को आतंक और हिंसा से जोड़ना जानबूझकर किया जा रहा है। उन्होंने कहा- ” लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद जैसे शब्द मुसलमानों को बदनाम करने के लिए गढ़े गए हैं। इस्लाम में जिहाद का मतलब अन्याय और जुल्म के खिलाफ संघर्ष है। जब-जब जुल्म होगा, तब-तब जिहाद होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमानों को लगातार टारगेट किया जा रहा है और उनके धार्मिक पहनावे, पहचान और जीवनशैली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मुसलमान इस देश के बराबर के नागरिक हैं, लेकिन शिक्षा, रोज़गार और सामाजिक बराबरी के अधिकार जमीनी स्तर पर कमजोर हो रहे हैं।

मदनी के भाषण की 5 बड़ी बातें

संविधान की पाबंदी करे तभी सुप्रीम कोर्ट सच में सुप्रीम मौलाना मदनी ने न्यायपालिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अदालतों को निष्पक्ष रहना चाहिए, लेकिन कुछ फैसलों से संदेह पैदा हुआ है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट तभी सुप्रीम कहलाएगा, जब वह संविधान की पूरी तरह पाबंदी करेगा। उन्होंने दावा किया कि देश की बड़ी आबादी आज भी खामोश है। अगर यह तबका नफरत फैलाने वालों की ओर गया तो देश के लिए खतरा पैदा हो सकता है।

मुसलमानों को असुरक्षित महसूस कराया जा रहा मुसलमानों के खिलाफ बुलडोजर कार्रवाई, मॉब लिंचिंग, आर्थिक बहिष्कार और नफरती अभियानों का माहौल बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि धर्मांतरण कानूनों से मुसलमानों की दावत और तालीम को अपराध बना दिया गया है, जबकि कुछ संगठनों को खुली छूट है। उन्होंने वक्फ संपत्तियों को लेकर भी सरकार के हस्तक्षेप का विरोध किया और कहा कि वक्फ मुसलमानों की अमानत है, इसमें दखल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत को याद किया

मौलाना मदनी ने गुरु तेग बहादुर साहिब की शहादत को याद करते हुए कहा कि यह सिर्फ सिख इतिहास नहीं, बल्कि पूरी भारतीय विरासत की अमानत है। गुरु तेग बहादुर साहिब का बलिदान इंसानियत, धर्म और आज़ादी की रक्षा का प्रतीक है। उनकी कुर्बानी हमें नफरत के खिलाफ खड़ा होना सिखाती है।

मुसलमानों को बदनाम किया जा रहा

आज की राजनीति में मुगलों के नाम पर मुसलमानों को बदनाम करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी शासक के अत्याचार को इस्लाम से जोड़ना सरासर गलत है। इस्लाम का पैगाम इंसाफ और इंसानियत है।

मुर्दा कौम घुटने टेक देती है

मुर्दा कौमें हालात के आगे सरेंडर कर देती हैं, लेकिन जिंदा कौमें अपने हक और पहचान पर समझौता नहीं करतीं। उन्होंने नौजवानों से मायूसी छोड़ने और संवैधानिक अधिकारों के लिए जागरूक रहने की अपील की।

भाजपा ने कहा- बयान देश को बांटने वाला

जमीयत उलेमा-ए-हिंद प्रमुख मौलाना महमूद मदनी के बयान पर भाजपा ने पलटवार किया गया है। संबित पात्रा ने कहा कि मौलाना का भोपाल में दिया गया बयान भड़काऊ और देश को बांटने वाला है। जिहाद के नाम पर जिस प्रकार से लोगों ने भारत में ही नहीं, बल्कि भारत के बाहर भी आतंक फैलाया है, वह हमने देखा है। मदनी ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट को सुप्रीम कहलाने का कोई अधिकार नहीं है। मौलाना मदनी के इस बयान को सुप्रीम कोर्ट को स्वतः संज्ञान में लेकर इसकी सुनवाई करनी चाहिए।

मंत्री विश्वास बोले- यह संवैधानिक व्यवस्था का अपमान

सहकारिता, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री विश्वास सारंग ने मौलाना मदनी के वंदे मातरम संबंधी बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की हवा-पानी में जीकर अगर कोई वंदे मातरम पर सवाल उठाता है, तो यह संवैधानिक व्यवस्था का अपमान है।

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