CAA विरोधी दिल्ली दंगे:51 जानलेवा वार, नाले में फेंक दी थी लाश… फिर टला IB अफसर अंकित शर्मा की हत्या में फैसला
दिल्ली दंगों में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या मामले में अगले महीने आएगा फैसला
2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में हुए आईबी अधिकारी अंकित शर्मा केस में कड़कड़डूमा कोर्ट आज फैसला सुनाना था. मुख्य आरोपित पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन सहित 11 आरोपितों पर इस केस में मुकदमा चला है
कड़कड़डूमा कोर्ट
नई दिल्ली 11 जून 2026 । दिल्ली की कड़कड़डूमा कोर्ट ने दिल्ली दंगों में आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में फैसला टाल दिया है. एडिशनल सेशंस जज प्रवीण सिंह ने जुलाई में फैसला सुनाने का आदेश दिया. इस मामले में ताहिर हुसैन समेत 11 आरोपत हैं. ताहिर हुसैन के अलावा आरोपितों में हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, नाजिम, कासिम, समीर खान, अनस, फिरोज, जावेद, गुलफाम, शोएब आलम ऊर्फ बॉबी और मुंतजिम ऊर्फ मुसा शामिल हैं. दिल्ली पुलिस की क्राईम ब्रांच ने 3 जून, 2020 को इस मामले में आरोपपत्र दाखिल किया था.
साल 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों में देश को झकझोर देने वाले इंटेलिजेंस ब्यूरो के युवा अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश परवीन सिंह की अदालत मुख्य आरोपित और आम आदमी पार्टी के
पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन सहित सभी 11 आरोपितों की किस्मत का फैसला करेगी. फैसला 4 जून को आना था, फिर 11 जून तक को टल गया था.
इस मामले में दोनों पक्षों की लंबी और तीखी तर्क सुन अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था. मामला सिर्फ हत्या का नहीं, बल्कि दंगों के एक गहरे और भयावह षड्यंत्र का हिस्सा था, जिसने देश की सुरक्षा एजेंसियों और सामान्य जनता दोनों को हिला दिया था. समझते हैं कि 25 फरवरी 2020 की उस काली शाम को क्या हुआ था, पुलिस ने जांच में क्या पाया और अदालत में अब तक क्या-क्या कानूनी मोर्चेबंदी हुई.
क्राइम ब्रांच के आरोप पत्र में कहा गया कि 24 और 25 फरवरी, 2020 को ताहिर हुसैन ने अपने घर और चांद बाग पुलिया के पास मस्जिद से भीड़ का नेतृत्व किया और उसे मजहबी रूप दिया. साथ ही कहा गया है कि अंकित शर्मा हत्या को षड्यंत्र रचा गया था. अंकित शर्मा को ताहिर हुसैन के नेतृत्व में भीड़ ने विशेष रूप से टारगेट किया. खजूरी खास इलाके में ताहिर हुसैन के घर के बाहर हत्या हुई. हत्या के बाद भीड़ ने नाले में अंकित शर्मा का शव फेंक दिया.
अंकित शर्मा की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में डॉक्टरों ने पाया था कि तेज धार वाले हथियार से 51 वार के निशान थे. आरोपपत्र में ताहिर हुसैन को मास्टरमाइंड बताया गया है. दिल्ली पुलिस ने अंकित के पिता के बयान पर ताहिर हुसैन पर मुकदमा किया है. ताहिर हुसैन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं में एफआईआर अंकित हुई है. उसकी छत से काफी मात्रा में हिंसा में इस्तेमाल सामान बरामद हुए. बता दें कि, फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों में 53 लोग मारे गए थे और दो सौ घायल हुए थे.
क्या हुआ था 25 फरवरी 2020 को…
नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध और समर्थन को फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली सुलग रही थी. चांद बाग, खजूरी खास, और मुस्तफाबाद हिंसा में झुलस रहे थे. पथराव, आगजनी और गोलियों की आवाज के बीच चारों तरफ चीख-पुकार मची थी. आईबी में तैनात 26 साल के अंकित शर्मा 25 फरवरी शाम अपने दफ्तर से घर लौटे थे. घर के बाहर बेहद तनाव था. स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और पुलिस आरोपपत्र के अनुसार , अंकित शर्मा गली में हिंसक भीड़ को शांत कराने और लोगों को समझाने-बुझाने घर से बाहर निकले थे. वे चांद बाग पुलिया के पास पहुंचे थे, जहां उपद्रवियों का तांडव चल रहा था. अचानक चांद बाग पुलिया के पास मस्जिद और ताहिर हुसैन के घर के पास सक्रिय हिंसक भीड़ ने अंकित शर्मा को घेर लिया. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार भीड़ हिंदू-हिंदू चिल्लाते हुए आगे बढ़ी. अंकित शर्मा ने भागने की कोशिश की, लेकिन उन्हें बेरहमी से घसीटते हुए ताहिर हुसैन के घर के पास ले जाया गया. वहां उन पर धारदार हथियारों से ताबड़तोड़ वार किए गए और हत्या के बाद उनका शव पास के ही खजूरी खास नाले में फेंक दिया गया.
लाश मिलने पर पता चली क्रूरता 
अगले दिन 26 फरवरी 2020 को अंकित के पिता पुलिस से रिटायर रविंदर कुमार ने दयालपुर थाने में बेटे की गुमशुदगी की रिपोर्ट कराई. खोजबीन में स्थानीय लड़कों ने बताया कि एक युवक को मारकर नाले में फेंका गया है. पुलिस गोताखोरों ने खजूरी खास नाले से अंकित का शव निकाला, तो पूरा देश दहल गया. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मानवता को लज्जित करने वाले अनावरण थे. अंकित शर्मा के शरीर पर चाकू और अन्य धारदार हथियारों से किए 51 गहरे चोटों के निशान थे. डॉक्टरों के अनुसार, उनके फेफड़ों और मस्तिष्क पर इतने घातक वार किए गए थे कि अत्यधिक खून बहने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई थी. पहचान मिटाने और सबूत नष्ट करने को शव गंदे नाले के कीचड़ में फैंक दिया गया था.
ताहिर हुसैन समेत मामले में 11 आरोपित
दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मामले की जांच कर आरोपपत्र दिया. पुलिस जांच में पूर्व आप पार्षद ताहिर हुसैन इस पूरे हत्याकांड का मुख्य सूत्रधार और मास्टरमाइंड है. पुलिस का दावा था कि ताहिर हुसैन का घर दंगाइयों का ठिकाना बना था, जहां से तेजाब की बोतलें, गुलेल और पत्थर मिले थे. मार्च 2023 में अदालत ने ताहिर हुसैन समेत कुल 11 आरोपितों पर हत्या, दंगा भड़काने और आपराधिक षड्यंत्र की धाराएं तय की थीं. इस मामले के आरोपित हैं- मोहम्मद ताहिर हुसैन (मुख्य आरोपित ,पूर्व पार्षद) हसीन उर्फ मुल्लाजी उर्फ सलमान, नाजिम, कासिम, समीर खान,अनस,फिरोज,जावेद,गुलफाम,शोएब आलम उर्फ बॉबी,मुंतजिम उर्फ मूसा
कोर्ट में अब तक क्या-क्या हुआ
अदालत में यह मामला लंबे समय तक कानूनी दांव-पेचों से गुजरा. आरोपितों के लिए कई बार जमानत याचिकाएं दी गईं. सितंबर 2025 में दिल्ली हाई कोर्ट ने ताहिर हुसैन की जमानत याचिका को यह कहते हुए सिरे से निरस्त कर दी थी कि यह एक युवा खुफिया अधिकारी की बर्बर हत्या का बेहद चौंकाने वाला मामला है, जिसमें जमानत का कोई आधार नहीं बनता.
सुनवाई में कोर्ट रूम में रखी गईं दलीलें
सरकारी वकील की दलीलें
सरकारी वकील ने कोर्ट में साफ कहा कि यह अचानक हमला नहीं था. आरोपितों का साझा उद्देश्य और गहरा षड्यंत्र बहुसंख्यक समुदाय को निशाना बनाना था. अंकित शर्मा वहां अकेले पड़ गए, इसलिए भीड़ ने उन्हें पहचानकर पकड़ लिया.अदालत ने आरोप तय करते समय भी टिप्पणी की थी कि ताहिर हुसैन ने भीड़ उकसायी थी.अंकित भीड़ की तरफ बढ़े, तो ताहिर हुसैन के इशारे पर ही उन्हें निशाना बनाया गया.पुलिस ने कोर्ट के सामने कई स्थानीय गवाहों के बयान, सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स दिये, जो सिद्ध करते हैं कि वारदात के वक्त सभी आरोपित घटना स्थल पर ही थे और एक-दूसरे के संपर्क में थे.
आरोपितों के वकील की दलीलें
ताहिर हुसैन के वकीलों ने लगातार तर्क दिये कि उन्हें राजनीतिक द्वेष में फंसाया गया है. दंगों में वे खुद अपनी जान बचाने की कोशिश में थे और उन्होंने पुलिस को भी फोन किया था.बचाव पक्ष का कहना था कि पुलिस के पास ऐसा कोई सीधा वीडियो या कोई दूसरा सबूत नहीं है, जो यह दिखाए कि ताहिर हुसैन या अन्य आरोपियों ने अपने हाथों से अंकित शर्मा पर चाकू से वार किए थे. वे सिर्फ भीड़ का हिस्सा होने से सभी को हत्यारा नहीं ठहरा सकते.
अदालत की पिछली महत्वपूर्ण टिप्पणियां
मामले की गंभीरता देखते हुए पूर्व में एडिशनल सेशंस जज ने आरोप तय करते हुए एक बेहद तीक्ष्ण टिप्पणी की थी, जिसने इस केस की दिशा तय कर दी. कोर्ट ने कहा, ’यह जरूरी नहीं है कि षडयंत्र विशेष रूप से केवल अंकित शर्मा को ही मारने की रचा गया हो. जब आरोपित हिंदुओं को मारने के सामान्य उद्देश्य और षडयंत्र में काम कर रहे थे, तो उसमें अंकित शर्मा की हत्या भी शामिल हो गई. अंकित को इसलिए मारा गया क्योंकि वह हिंदू थे और वहां अकेले पड़ गए थे.’
अब फैसले पर टिकीं सबकी निगाहें
मामले में आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 (दंगा), 148 (घातक हथियार से दंगा), 153A (धर्म के आधार पर दुश्मनी बढ़ाना), 120B (अपराधिक षड्यंत्र) और धारा 302 (हत्या) में मुकदमे चलाए गए हैं. ताहिर हुसैन पर इसके अतिरिक्त धारा 109 (उकसाने) और धारा 505 (सार्वजनिक शरारत फैलाने वाले बयान) के भी आरोप हैं. अदालत इन सभी या इनमें से कुछ आरोपितों को दोषी उम्रकैद से लेकर फांसी तक की सजा दे सकती है. 6 साल से न्याय की प्रतीक्षा करता अंकित शर्मा के परिवार और पूरे देश की नजरें कड़कड़डूमा कोर्ट के फैसले पर टिकी हैं. यह फैसला दिल्ली दंगों के इतिहास में न्याय की कसौटी पर एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा.

