20 अरब की नेशनल हेराल्‍ड की संपत्ति हडप रहे थे सोन‍िया-राहुल: कोर्ट में ED

National Herald Case Sonia And Rahul Gandhis Troubles May Increase Over Allegations Of Seizing 2000 Crore Property

2000 करोड़ की संपत्ति हथियाने का षड्यंत्र… नेशनल हेराल्ड केस में सोनिया-राहुल गांधी की बढेंगी मुश्किलें, ईडी का चौंकाने वाला दावा


नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी ने राउज एवेन्यू कोर्ट में बड़ा दावा किया है। ईडी के अनुसार, कांग्रेस पार्टी नेशनल हेराल्ड की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति हड़पना चाहती थी।

नई दिल्ली 03 जुलाई 2025 : नेशनल हेराल्ड केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ा दावा किया है। बुधवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में सुनवाई के दौरान ईडी ने बताया कि कांग्रेस नेशनल हेराल्ड की करीब 2,000 करोड़ रुपये की संपत्ति हड़पना चाहती थी। ईडी की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) एसवी राजू राउज एवेन्यू कोर्ट में पेश हुए। उन्होंने कोर्ट में कहा, ‘नेशनल हेराल्ड की संपत्तियों पर कंट्रोल करने के लिए यंग इंडियन लिमिटेड बनाने की साजिश रची गई थी, जिसमें कांग्रेस संसदीय पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्षी नेता राहुल गांधी प्रमुख हिस्सेदार हैं। इसका लक्ष्य पार्टी नेतृत्व को व्यक्तिगत लाभ पहुंचाना था।’

एएसजी राजू ने दावा किया कि कांग्रेस के कई सीनियर नेता एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को किए गए ‘फर्जी लेनदेन’ में शामिल थे। ईडी के मुताबिक, कांग्रेस के बड़े नेताओं के निर्देश पर कुछ लोगों ने फर्जी तरीके से किराए का भुगतान किया था। इन लेन-देन के साथ फर्जी किराया रसीदें तैयार की गई थीं। ईडी ने दावा किया कि षड्यंत्र था कि यंग इंडिया के माध्यम से 2,000 करोड़ की संपत्ति कब्जे में लेकर 90 करोड़ का कर्ज लिया जाए।

ईडी ने ये भी बताया कि कांग्रेस कमेटी ने सार्वजनिक टेंडर निकाले बिना एजीएल की संपत्ति यंग इंडिया को 50 लाख रुपये में बेच दी, जबकि एजीएल की संपत्ति 2,000 करोड़ की थी। यंग इंडिया के पास इसे चुकाने के लिए पैसे नहीं थे, जिसके बाद यह मामला कोलकाता में शेल कंपनियों तक पहुंचा। एक करोड़ रुपए का लोन यंग इंडिया को दिया गया, जबकि इसकी बैलेंस शीट नेगेटिव थी।

एएसजी राजू ने कोर्ट को बताया कि ईडी की जांच में यह भी सामने आया है कि यंग इंडिया पर राहुल गांधी और सोनिया गांधी का नियंत्रण था। दोनों ने मिलकर 76 प्रतिशत शेयर अपने पास रखे थे। वास्तव में ये कंपनियां उनके नियंत्रण में थीं और इनके संचालन के लिए वो जिम्मेदार थे।

सुनवाई में कोर्ट के सवाल, ईडी के जवाब

नेशनल हेराल्‍ड केस में करप्‍शन के आरोपों से घिरे सोन‍िया गांधी और राहुल गांधी पर ईडी ने कई आरोप लगाए हैं. लेकिन बुधवार को कोर्ट ने ईडी से सख्‍त सवाल पूछे, जिसका जवाब देना मुश्क‍िल हो गया.

नेशनल हेराल्‍ड केस में ईडी ने सोन‍िया गांधी राहुल के ख‍िलाफ कई आरोप लगाए.
कोर्ट ने पूछा लपेटने वाला सवाल-सबसे पहले ये बताए क‍ि नेशनल हेराल्‍ड शुरू कब हुआ.

सुनवाई में ईडी ने सोन‍िया गांधी, राहुल गांधी पर एक के बाद एक आरोप लगाए. कहा, इस केस में तो 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति उपलब्ध थी, फिर सिर्फ 50 लाख रुपये में 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति क्यों दी गई? गोलमोल क‍िया , ताकि संपत्‍त‍ि कब्‍जा सके. इसी बीच कोर्ट ने ईडी के वकील से ऐसा सवाल पूछ द‍िया क‍ि जो कायदे से सोनिया-राहुल के वकील को पूछना था.

ईडी ने नेशनल हेराल्‍ड केस में सोन‍िया गांधी और राहुल गांधी का नाम लिया.

दरअसल, ईडी से पेश ASG एसवी राजू कोर्ट को आरोपितों के ख‍िलाफ दायर चार्जशीट बता रहे थे. उन्‍होंने सवाल उठाया, यंग इंडियन, जिसके ज्‍यादातर शेयर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पास हैं, ऐसा कर्ज क्यों लेगी जिसकी कागजों पर कोई वैल्यू नहीं है? क्या वे इतने नासमझ हैं कि ऐसा कर्ज अपने ऊपर ले लेंगे? इस पर कोर्ट ने कहा, यह अखबार (National Herald) आजादी से पहले शुरू हुआ और गांधी परिवार से जुड़ा कोई व्यक्ति इसका संस्थापक था. आप कह रहे हैं कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) और अखबार गांधी परिवार के आने से पहले से मौजूद थे. यह स्‍पष्‍ट कीजिए.
यह ऐसा सवाल था जहां ईडी के वकील अटके. उन्‍होंने तर्क द‍िया, मनी लॉन्ड्रिंग कांट‍िन‍िऊ अफेंस है.  यह जरूरी नहीं कि एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड को पहले कौन कंट्रोल कर रहा था. इस पर कोर्ट ने फ‍िर पूछा, यह महत्वपूर्ण इसलिए है क्योंकि आपने कहा कि गांधी परिवार ने एजेएल की हिस्सेदारी कब्जाने को ही इसमें प्रवेश किया. तो वे पहले एजेएल का हिस्सा थे या नहीं, यह अब प्रासंगिक हो जाता है.

बैंक भी तो ऐसा करते हैं?
ASG राजू ने कहा, उधारकर्ता (Borrower) ने कहा कि मेरे पास कर्ज चुकाने के पैसे नहीं हैं, फिर भी उधारदाता (Lender) पैसे भेजता रहा. इस पर फ‍िर कोर्ट ने सवाल पूछा, अगर कांग्रेस ने यह लोन माफ कर दिया होता तो क्या होता? बैंक भी तो ऐसा करते हैं. कांग्रेस ने लोन माफ कर दिया लेकिन उन्हें आरोपित नहीं बनाया गया? यह कैसे बाकी कंपनियों से अलग है? ऐसा क्या खास था कि ईडी ने इसे जांचने लायक समझा? पीएसयू (सरकारी कंपनियां) भी तो करोड़ों रुपये राइट-ऑफ करती हैं.

2000 करोड़ की संपत्‍त‍ि क्‍यों दी गई?
ईडी के वकील ने जवाब द‍िया. क्‍योंक‍ि बैंकों के पास खुद संपत्ति नहीं होती, इसलिए उन्हें कर्ज देना ही होता है. ऐसी स्थिति में बैंक उधारकर्ता से समझौता करते हैं. लेकिन इस केस में तो 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति उपलब्ध थी।फिर सिर्फ 50 लाख रुपये में 2000 करोड़ रुपये की संपत्ति क्यों दी गई? कोर्ट ने फ‍िर पूछा, क्‍या यह मामला एनपीए (Non Performing Asset) जैसा था? ED के वकील राजू ने कहा, नहीं, इस केस में तो संपत्ति की पूरी वैल्यू थी.

कांग्रेस भी बनेगी आरोपित?
ईडी का कहना है कि अभी कांग्रेस को आरोपित नहीं बनाया गया है, लेकिन भविष्य में ऐसा किया जा सकता है. ईडी ने कोर्ट से कहा, अगर AICC यानी अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी को आरोपित बनाया जाता है, तो राहुल गांधी और सोनिया गांधी की भूमिका उनके खिलाफ पीएमएलए की धारा 70 में मामला मजबूत करने में सहायक हो सकती है. हालांकि, ईडी ने स्पष्टीकरण दिया  कि बिना ठोस प्रमाण ऐसा कदम नहीं उठाएंगे.

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