विशेषज्ञता फेल: उज्जैन के खड़े हनुमान जी अड़े, प्रशासन का U टर्न

हनुमान जी का दैवीय चमत्कार देख प्रशासन का यूटर्न, SDM बोले- बजरंगबली को हटाने की कोशिश ही नहीं हुई
उज्जैन के खड़े हनुमान जी की प्रतिमा हटाने की कोशिशों और उसके अपनी जगह से नहीं हिलने पर चर्चा तेज है. श्रद्धालु इसे बजरंगबली का दैवीय चमत्कार बता रहे हैं. इसी बीच प्रशासन ने यू-टर्न ले कहा है कि प्रतिमा हटाने या विस्थापन का कोई प्रयास ही नहीं हुआ.
उज्जैन में हनुमान जी की मूर्ति हटाने की कोशिश बीच प्रशासनिक बयान आया है

उज्जैन ,10 सितंबर 2026,उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों बीच सड़क चौड़ीकरण को लेकर खड़े हनुमान जी की प्रतिमा हटाने की कोशिश का मामला चर्चा में है.मंदिर की चाहरदीवारी और भवन का हिस्सा हटाए जाने के बाद बजरंगबली की मूर्ति दूसरी जगह ले जाने की तीन दिन कोशिश हुई लेकिन मूर्ति के नहीं हटने के दावे हो रहे थे.अब जिला प्रशासन ने पूरे मामले पर स्पष्टीकरण जारी किया है कि प्रतिमा हटाने या विस्थापित करने का अभी तक कोई प्रयास नहीं हुआ है.
उज्जैन के कंठाल चौराहे से छत्री चौक बड़ा सराफा मार्ग तक सड़क चौड़ीकरण चल रहा है. यह क्षेत्र शहर के पुराने और व्यस्त हिस्सा है. सिंहस्थ 2028 को शहर के आंतरिक मार्ग व्यवस्थित कर यातायात व्यवस्था सुधारने को बहुस्तरीय कार्य हो रहा है. इसी क्रम में 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर का भवन सड़क परिधि में आया. प्रशासन और नगर निगम टीम ने मंदिर की चाहरदीवारी और भवन का हिस्सा  हटाया, लेकिन मंदिर में विराजमान खड़े हनुमान जी की प्रतिमा पर स्थिति अलग हो गई. प्रतिमा हटायी नहीं जा सकी. प्रतिमा टस से मस नहीं हुई. मामला बढ़ा तो मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ी । राजनीतिक दल भी सामने आने लगे.
श्रद्धालु बता रहे चमत्कार
लोग इसे हनुमान जी का चमत्कार बता रहे हैं. मंदिर में दर्शनार्थियों की संख्या भी बढ़ी है. संतों  ने भी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की. उन्होने  प्रतिमा दूसरी जगह ले जाने का विरोध किया और प्रशासन से संवाद से समाधान निकालने की अपील की. श्रीराम जन्मभूमि के संत नृत्यगोपाल दास के शिष्य महंत राघवेंद्र दास महाराज ने कहा कि भगवान को बार-बार उठाने का प्रयास नहीं हो. यदि इसे चमत्कार माना जा रहा है तो तीन बार के प्रयास के बाद ही संकेत मिल चुका है और प्रतिमा यथास्थान रहने देनी चाहिए. महानिर्मोही अखाड़े के गादीपति महंत विनीत गिरी महाराज ने भी मंदिर पहुंच कहा कि प्रशासन जनभावनाओं का सम्मान करे. बातचीत और संवाद से  समाधान निकालें. संतों ने कहा कि विकास जरूरी है, लेकिन विकास की नींव विनाश पर न रखें. अभी मंदिर में कोई गहमागहमी नहीं है, बल्कि लोगों में उत्सुकता है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन को आ रहे हैं. मंदिर परिसर में बटुक मंडली ने भी हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ किया.

कांग्रेस भी मैदान में उतरी, भगवा ध्वज लेकर पहुंचे कार्यकर्ता

कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा को हटाए जाने की कथित योजना के विरोध में प्रदर्शन किया.विधायक महेश परमार,पूर्व विधायक दिलीप सिंह गुर्जर और शहर कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश भाटी समेत सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता भगवा ध्वज लेकर खड़े हनुमान मंदिर पहुंचे.यहां रामधुन गाई गई और हनुमान जी का पूजन किया गया.इसके बाद हनुमान चालीसा पाठ किया गया.कांग्रेस नेताओं ने प्रशासन पर कथित रुप से जल्दबाजी करने का आरोप लगाया और प्रतिमा को यथास्थान रखने की मांग की.

मंदिर में श्रद्धालुओं की बढ़ी भीड़

खड़े हनुमान मंदिर उज्जैन के पुराने धार्मिक स्थलों में एक महत्वपूर्ण आस्था केंद्र माना जाता है.  यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. लोग यहां ताबीज और झाड़नी आदि की धार्मिक परंपराओं को भी पहुंचते रहे हैं. यही वजह है कि मंदिर से स्थानीय लोगों का भावनात्मक जुड़ाव काफी गहरा है. मंदिर की चाहरदीवारी तोड़ फिलहाल खड़े हनुमान जी प्रतिमा टेंट लगाकर सुरक्षित रखी गयी है. आसपास से गुजरते लोग भी रुककर दर्शन कर रहे हैं. पिछले कुछ दिनों में मंदिर में सुबह से रात तक श्रद्धालुओं की आवाजाही बनी हुई है.

पुरातत्व विभाग की नजर भी प्रतिमा पर

मामले में एक और महत्वपूर्ण पक्ष है. बताया जा रहा है कि पुरातत्व विभाग प्रतिमा की प्राचीनता की जांच कर रहा है. शुरुआती स्तर पर प्रतिमा के 1000 साल पुरानी होने की संभावना जताई जा रही है. हालांकि इसकी वास्तविक आयु और ऐतिहासिक महत्व को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने से ही सामने आएगा. अगर प्रतिमा वास्तव में इतनी प्राचीन पाई जाती है तो मामला केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व भी सामने आएगा.

सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के बीच चुनौती बड़ी

उज्जैन में सिंहस्थ महापर्व 2028 को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां चल रही हैं. शहर के पुराने हिस्सों में सड़क चौड़ीकरण, यातायात सुधार और अन्य मौलिक सुविधायें सुधारना इसी तैयारी का हिस्सा है. कंठाल चौक से छत्री चौक का मार्ग भी इसी योजना में शामिल है. प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि सड़क विकास का काम भी आगे बढ़े और लोगों की धार्मिक भावनाओं का सम्मान भी बना रहे. बताया जा रहा है कि प्रशासनिक प्राथमिकता इस मार्ग को महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों से पहले तैयार करने की थी.अब संबंधित आयोजन निकल चुका है,ऐसे में प्रशासन भी इस मामले में कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता.

अब आगे क्या होगा?

अभी बड़ा सवाल यही है कि खड़े हनुमान जी प्रतिमा को लेकर अंतिम फैसला क्या होगा.एक ओर सड़क चौड़ीकरण और सिंहस्थ की तैयारियां हैं,दूसरी ओर प्रतिमा से जुड़ी लोगों की आस्था. संत बातचीत से समाधान चाहते हैं, राजनीतिक दल भी सक्रिय हो चुके । श्रद्धालु प्रतिमा उसी स्थान पर रहने देने की मांग कर रहे हैं. प्रशासन ने साफ किया है कि बिना संबंधित पक्षों की भावनाओं को ध्यान में रखे कोई निर्णय नहीं होगा.

प्रतिमा की विशेषता बताते हैं कि आठ फीट ऊंची यह मूर्ति बिना किसी बाहरी सहारे खड़ी है. बताते हैं कि प्रतिमा स्थिर रखने को शिला चार-पाँच फीट शिला जमीन में स्थापित है. अब विशेषज्ञ इसकी संरचना और गहराई का अध्ययन करने को तकनीकी परीक्षण कर रहे हैं.

श्रद्धालुओं की बढ़ी भीड़
सोशल मीडिया पर मामले की चर्चा बढ़ी तो मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या तेजी से बढ़ी. महाकाल दर्शन आये श्रद्धालु अब खड़े हनुमान जी दर्शन को भी पहुंच रहे हैं. मंदिर परिसर के आसपास विशेष व्यवस्था की गई है. प्रतिमा के नजदीक टेंट लगा है. प्रतिदिन पांच हजार से अधिक श्रद्धालु यहां पहुंच रहे हैं और अब तक एक लाख से अधिक लोग दर्शन कर चुके हैं.

प्रशासन ने दी सफाई
खड़े हनुमान जी की मूर्ति पर उज्जैन SDM एलएन गर्ग ने कहा, कि’विकास कार्य भी आवश्यक हैं और उज्जैन की धार्मिक आस्था भी हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है. विशेषज्ञों, संतों और श्रद्धालुओं के विश्वास के साथ ही समाधान निकालेंगें. यह श्रद्धालुओं की गहरी आस्था से जुड़ा विषय है. इसके साथ ही प्रतिमा की संरचनात्मक स्थिति का वैज्ञानिक परीक्षण भी आवश्यक है.’

एसडीएम ने कहा कि ‘खड़े हनुमान जी की प्रतिमा उज्जैनवासियों एवं श्रद्धालुओं की आस्था  है. प्रशासन के लिए श्रद्धालुओं की भावनाएं, प्रतिमा की सुरक्षा और उज्जैन की धार्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा सर्वोपरि है…सभी पक्षों की भावनायें ध्यान में रखे बिना प्रशासन कोई भी कदम अथवा निर्णय नहीं लेगा.’

सोशल मीडिया से सावधान
परगनाधीकारी ने कहा कि ‘सोशल मीडिया पर यह खबर भ्रामक प्रसारित हो रही है कि प्रशासन  श्री खड़े हनुमान जी की प्रतिमा विस्थापित करने को कई प्रयास कर चुका है. यह स्पष्ट है कि अभी तक प्रतिमा विस्थापित अथवा हटाने संबंधी कोई भी प्रयास; किसी भी मशीन अथवा मानवीय युक्तियों से नहीं किया गया है. इस संबंध में निर्णय लिया है कि विशेषज्ञों की वैज्ञानिक एवं तकनीकी राय प्राप्त किए बिना प्रतिमा के विस्थापन हेतु आगे कोई भी कार्रवाई नहीं होगी.

संत समाज को आपत्ति
प्रतिमा हटाने की संभावनाओं पर संत भी प्रतिक्रिया दे रहे हैं. फिरोजाबाद के महंत मनीष भारद्वाज और पुजारी रामकुमार ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण को मंदिर या प्रतिमा से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए. महंत मनीष भारद्वाज ने कहा कि हनुमान जी कलयुग के प्रमुख देवता मान्य हैं और जहां भी उनकी प्रतिमाओं से छेड़छाड़ हुई है, वहां धार्मिक भावनाएं प्रभावित हुई हैं. उन्होंने प्रशासन से प्रतिमा को यथास्थान सुरक्षित रखने या मंदिर पुनर्निर्माण की मांग की.

वैकल्पिक रास्ते की मांग
सूरत के अटल आश्रम के महामंडलेश्वर बटुकगिरी महाराज ने भी कहा कि प्रशासन को मंदिर हटाने की बजाय वैकल्पिक रास्ते तलाशने चाहिए. सिंहस्थ महाकुंभ सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण आयोजन है । प्राचीन मंदिर की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित होना चाहिए. आवश्यकता पड़ने पर सड़क का दिशा परिवर्तन या मंदिर परिसर के विकास जैसे विकल्पों पर विचार हो सकता है.

अपनी जगह से टस से मस तक नहीं हुए हनुमान जी… उज्जैन में मंदिर तो टूटा लेकिन बजरंगबली को हटाने में मशीनें भी फेल
उज्जैन में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने में बड़े से बड़े इंजीनियर और टेक्नोलॉजी फेल हो गई है. दरअसल, उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों में कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है. इसकी परिधि में आए 170 साल पुराने हनुमान मंदिर  तोड़ दिया गया, लेकिन प्रतिमा हटाने की कोशिश सफल नहीं हुई. तकनीकी विशेषज्ञ भी प्रतिमा नहीं हिला सके.

उज्जैन में मंदिर की बिल्डिंग तो टूट गई लेकिन हनुमान जी की प्रतिमा नहीं हटाई जा सकी
सड़क चौड़ी करने के लिए मंदिर का भवन तो तोड़ दिया गया, लेकिन जब हनुमान जी की प्रतिमा को हटाने की बारी आई तो मामला वहीं अटक गया. आधुनिक मशीनों और तकनीकी विशेषज्ञों की मदद से कई प्रयास हुए, लेकिन प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली. अब प्रशासन के सामने चुनौती सड़क चौड़ीकरण के साथ आस्था का सम्मान बनाए रखने की है.

मामला उज्जैन के कंठाल चौराहे से छत्री चौक यानी बड़ा सराफा मार्ग का है. सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले शहर के पुराने हिस्से में सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था सुधारने का काम चल रहा है. इसी की जद में करीब 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर का भवन आया था. प्रशासन ने मंदिर की चाहरदीवारी और भवन का हिस्सा तो हटा दिया, लेकिन मंदिर में विराजमान हनुमान प्रतिमा को सुरक्षित तरीके से दूसरी जगह ले जाने की कोशिश सफल नहीं हो सकी. अब प्रतिमा को टेंट लगाकर सुरक्षित रखा गया है. दूसरी ओर, हिंदू संगठनों और स्थानीय श्रद्धालुओं ने प्रतिमा को हटाने का विरोध शुरू कर दिया है.मंगलवार शाम मंदिर परिसर में सैकड़ों लोगों ने महाआरती की.ढोल-ताशे बजे, हनुमान चालीसा का पाठ हुआ और प्रशासन से प्रतिमा को उसी स्थान पर रखने की मांग की गई.

इंदौर से बुलाए गए विशेषज्ञ भी जुटे

प्रतिमा को नुकसान पहुंचाए बिना हटाने को उज्जैन प्रशासन ने तकनीकी विशेषज्ञों की मदद ली. इंदौर से इंजीनियरों और विशेषज्ञों की टीम भी बुलाई गई. विशेषज्ञों ने दो दिन तक प्रतिमा के आधार और आसपास की संरचना समझकर उसे हटाने का प्रयास किया. कोशिश थी कि प्रतिमा को कोई नुकसान न पहुंचे. लेकिन तमाम सावधानियों के बावजूद स्थिति अपरिवर्तित है. अब प्रशासन जल्दबाजी में कोई कदम उठाने के बजाय विशेषज्ञ राय के आधार पर आगे तकनीक तय करने की तैयारी में है.

प्रतिमा के नीचे डेढ़ फीट तक खोदाई

प्रशासन ने प्रतिमा के आधार की स्थिति जानने को डेढ़ फीट गहरा गड्ढा भी खोदा है. पता लगाने की कोशिश  है कि प्रतिमा कैसे स्थापित है और उसके नीचे संरचना कैसी है. प्रतिमा की स्थिति और आधार की जांच के बाद ही आगे की प्रक्रिया तय होगी. प्रशासन का कहना है कि प्रतिमा को कोई नुकसान पहुंचाए बिना सुरक्षित  दूसरे स्थान पर स्थापित करना प्राथमिकता है. प्रतिमा टंकी चौक पर स्थापित करने की योजना  है.

श्रद्धालुओं ने कहा- अब प्रतिमा को हाथ मत लगाना

प्रतिमा हटाने की कोशिश की जानकारी जैसे-जैसे  लोगों और हिंदू संगठनों तक पहुंची,विरोध बढ़ता गया. बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर परिसर में पहुंचे. यहां महाआरती हुई.ढोल-ताशे बजाए गए और हनुमान चालीसा पाठ हुआ.श्रद्धालुओं और हिंदू संगठनों का कहना है कि जब कई कोशिशों के बाद भी प्रतिमा अपनी जगह से नहीं हिली तो प्रशासन को इसे हटाने का फैसला दोबारा देखना चाहिए. सड़क चौड़ीकरण जरूरी है, लेकिन इसको प्रतिमा हटाना ही एकमात्र रास्ता नहीं होना चाहिए.

पुजारी ने रखी लिखित गारंटी की मांग

मंदिर के पुजारी सुलभ शांतनु शर्मा और मंदिर समिति ने भी प्रतिमा  हटाने पर आपत्ति जताई .उनका कहना है कि मंदिर के दोनों तरफ सड़क  है.ऐसे में प्रशासन को सड़क योजना पर पुनर्विचार करना चाहिए. अगर प्रशासन प्रतिमा दूसरी जगह ले जाना चाहता है तो लिखित गारंटी दे कि प्रतिमा बिना किसी नुकसान सुरक्षित टंकी चौक पर स्थापित की जाएगी.तभी प्रतिमा हटाने  दी जाएगी.

170 वर्ष पुराना मंदिर 

उज्जैन के इतिहास और धार्मिक स्थलों के जानकार भगवती लाल राजपुरोहित के  अनुसार प्रतिमा और मंदिर काफी पुराने हैं. मंदिर 170 वर्ष पुराना बताया जा रहा है. हालांकि, लंबे समय से सिंदूर चढ़ाए जाने से प्रतिमा की मूल आकृति और भाव-भंगिमा पूर्णत: स्पष्ट नहीं दिखती. फिर भी इसका उज्जैन के पुराने शहर के धार्मिक और ऐतिहासिक परिदृश्य में महत्व म है. इसी से सड़क चौड़ीकरण में प्रतिमा हटाना निर्माण कार्य तक सीमित नहीं रहा. यह धार्मिक भावनाओं से भी जुड़ गया है.

भक्तों की आस्था- भगवान स्थान से नहीं हिले

प्रतिमा न हटने पर श्रद्धालुओं में अलग आस्था दिख रही है. लोग इसे भगवान हनुमान की इच्छा मान रहे हैं. उनके अनुसार कई प्रयासों बाद भी प्रतिमा का अपनी जगह से नहीं हिलना संकेत है कि उसे वहीं रहना चाहिए. हालांकि, प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञ इसे धार्मिक मान्यता के बजाय तकनीकी और संरचनात्मक चुनौती मानते हैं.

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