जन.खंडूड़ी अंतिम दर्शन भाजपा कार्यालय 10.30 बजे,अंतिम संस्कार हरिद्वार 12 बजे


भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन, भावुक हुए मनीष, ऋतु खंडूड़ी ने लिखा विशेष संदेश
‘मैं भाग्यशाली हूं कि वो मेरे पिता थे..’ बीसी खंडूड़ी के निधन पर बोले दोनों बच्चे. जानिए कैसे थे भुवन चंद्र खंडूड़ी
BHUWAN CHANDRA KHANDURI
भुवन चंद्र खंडूड़ी निधन
देहरादून 19 मई 2026 : उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी ने देहरादून के मैक्स अस्पताल में अंतिम सांसे ली. उनके निधन के बाद हर कोई उन्हें याद कर रहा है. आम से लेकर खास लोग तक उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए उनके बसंत बिहार स्थित पहुंच रहे हैं. सीएम धामी समेत कई कैबिनेट मंत्रियों ने भुवन चंद्र खंडूड़ी को श्रद्धांजलि अर्पित की. इस दौरान सभी ने उनके पुत्र मनीष खंडूड़ी, ऋतु खंडूड़ी को ढांढस बंधाया.
भुवन चंद्र खंडूड़ी के पुत्र मनीष खंडूड़ी देश और विदेश में IT सेक्टर के एक बड़े प्रोफेशनलिस्ट रह चुके हैं. हाल के कुछ सालों में उन्होंने राजनीति में भी हाथ आजमाया. आखिरी समय में भी वे अपने पिता के बेहद करीब थे. पिता के अंतिम समय में वे काफी भावुक नज़र आए. ईटीवी भारत से बातचीत करते हुए मनीष ने कहा कि ‘यह मेरा सौभाग्य है कि भुवन चंद्र खंडूड़ी मेरे पिता थे. लोग उनकी बातें करते हैं, मगर मैनें उन्हें जीया है.’
पिता के निधन पर भावुक हुए मनीष खंडूड़ी
मनीष खंडूड़ी ने कहा उनके पिता पर ईश्वर की कृपा रही है, लोगों ने बहुत प्यार दिया. उन्होंने एक लंबा जीवन जिया. मनीष बताते हैं कि लोग उनके अनुशासन और सख्त व्यक्तित्व की बाते करते हैं, मगर उन्होंने अपने पिता को एक कोमल हृदय वाले व्यक्ति के रूप में हमेशा अपने पास पाया. उन्होंने बताया जब हम छोटे थे तो उनके अनुशासन से लगता था कि वो बहुत सख्त हैं, लेकिन जब दुनियादारी की समझ आई तो समझ आया की वो अंदर से बहुत सॉफ्ट हैं. उन्होंने कहा ‘ऐसे व्यक्तिव वाले लोग दुनिया में बहुत कम आते हैं.’ ऐसे में वो खुद को भाग्यशाली समझते हैं. उन्होंने कहा ‘मैं अपने पिता को देवता मानता हूं.’
वहीं, इसके अलावा पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी की बेटी ऋतु खंडूड़ी हैं. ऋतु खंडूड़ी वर्तमान में उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष हैं. उन्होंने कहा कि आज वो जो कुछ हैं अपने पिता की वजह से हैं.
उन्होंने कहा उनके पिता ने बचपन से उनमें अनुशासन का बीज बोया है. इसके अलावा वे घर में हमेशा देशभक्ति की बातें करते थे. उन्होंने बताया कि पिता ने कहा था ‘जिस जिम्मेदारी को लो, उनको ईमानदारी से निभाओ, जो भी पद मिलता है या जगह आप अपने लिए बनाते हो उसको सार्थक करो.’
धामी ने घर पहुंचकर दी श्रद्धांजलि: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित बसंत विहार में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूड़ी के आवास पहुंचकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की. छत्तीसगढ़ प्रवास से देहरादून पहुंचने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री धामी सीधे स्वर्गीय खंडूडडी के निवास पहुंचे. उन्होंने दिवंगत आत्मा को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हें विनम्र नमन किया. मुख्यमंत्री ने कहा स्वर्गीय मेजर जनरल भुवन चंद्र खंड़ूड़ी का जीवन अनुशासन, राष्ट्रसेवा, ईमानदारी और जनकल्याण के मूल्यों का प्रेरणादायी उदाहरण रहा है.
भारतीय सेना में उत्कृष्ट सेवाएं देने के पश्चात उन्होंने राजनीति और सार्वजनिक जीवन में भी उच्च आदर्श स्थापित किए. मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड राज्य के विकास, सुशासन और पारदर्शी प्रशासन को मजबूत आधार प्रदान करने में स्वर्गीय खंड़ूड़ी का महत्वपूर्ण योगदान रहा है. उन्होंने अपने कार्यकाल में जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए राज्यहित में अनेक दूरदर्शी निर्णय लिए, जिनका लाभ आज भी प्रदेशवासियों को प्राप्त हो रहा है।
लोकायुक्त, भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस, पारदर्शी नियुक्ति और ट्रांसफर पॉलिसी,जानिये जनरल खंडूड़ी के बड़े फैसले
भुवन चंद्र खंडूड़ी का 91 साल की उम्र में निधन हो गया है. उन्होंने मैक्स अस्पताल में अंतिम सांस ली.
BHUWAN CHANDRA KHANDURI
उत्तराखंड के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूड़ी का निधन हो चुका है. बीसी खंडूड़ी देहरादून के मैक्स अस्पताल में भर्ती थे. जहां आज उनका निधन हुआ. बीसी खंडूड़ी के निधन के बाद प्रदेशभर में शोक की लहर है. हर कोई भुवन चंद्र खंडूड़ी को अपनी अपनी तरह से याद कर रहा है. इस मौके पर जनरल खंडूड़ी के बड़े फैसलों को याद किया जा रहा है. केंद्र से लेकर उत्तराखंड की राजनीति में खंडूड़ी ने कई बड़े काम किये.
भुवन चंद्र खंडूड़ी की प्रमुख उपलब्धियां और फैसले
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: उन्होंने सरकारी कामकाज में पारदर्शिता लाने के लिए कई कठोर कदम उठाए.
सड़क और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास: पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया.
भूमि कानूनों में कठोरता: राज्य की जमीन को बाहरी अतिक्रमण से बचाने के लिए कड़े नियम लागू किए.
सैनिक पृष्ठभूमि का प्रभाव: पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के लिए कई योजनाएं शुरू कीं.
उनकी प्रशासनिक शैली में अनुशासन और जवाबदेही स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी, जो उनके सैन्य जीवन का प्रभाव था.
लोकायुक्त विधेयक सबसे बड़ा फैसला: लोकायुक्त विधेयक को लेकर जनरल खंडूड़ी ने ऐतिहासिक कदम उठाया था. 2011 में भुवन चंद्र खंडूड़ी ने उत्तराखंड में सबसे कठोर लोकायुक्त कानून पास करवाया. उत्तराखंड में पास इस लोकायुक्त में मुख्यमंत्री, मंत्री, विधायक, आईएएस, आईपीएससहित सभी अधिकारी लोकायुक्त की जांच के दायरे में थे. इसमें भ्रष्टाचार पर कठोर कार्रवाई का नियम था.
ई-गवर्नेंस और पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी: जनरल खंडूड़ी ने फाइल प्रोसेसिंग में तेजी, जन शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत करने पर जोर दिया. साथ ही उन्होंने सरकारी कर्मचारियों के ट्रांसफर में पारदर्शिता लाने की कोशिशें की. इसके लिए उन्होंने कई सुधार किये.बीसी खंडूड़ी को ई-गवर्नेंस और पारदर्शी ट्रांसफर पॉलिसी के लिए जाना जाता है.
भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस: बीसी खंड़ूड़ी सैनिक अधिकारी रहे. इसलिए वे भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति का पालन करते थे. इसके लिए वे सख्त राजनेता के तौर पर जाने जाते थे. वे किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई करते थे. उन्होंने भ्रष्टाचार मुक्त शासन का नारा दिया. जिससे राज्य़ के साथ ही देश में उनकी अलग छवि बनी.
खंडूड़ी ईमानदार छवि के नेता थे. इसलिए उन्होंने सरकारी खर्च में कटौती की. साथ ही सरकार में अनुशासन को प्राथमिकता थी. उन्होंने सीएम बनते ही नेताओ, मंत्रियों और अधिकारियों से समय का पालन करने की अपील की. साथ ही वे खुद परियोजनाओं में फंड के खर्च खे पक्षधर थे.
भुवन चंद्र खंडूड़ी को जानिये
भुवन चंद्र खंडूड़ी का जन्म 1 अक्टूबर 1934 को हुआ था.
उन्होंने अपने करियर की शुरुआत भारतीय सेना से की.
भुवन चंद्र खंडूड़ी ने एक अनुशासित सैन्य अधिकारी के रूप में पहचान बनाई.
सेना से रिटायर्ड होने के बाद भुवन चंद्र खंडूड़ी राजनीति में आये.
भुवन चंद्र खंडूड़ी भारतीय जनता पार्टी से जुड़े.
भारतीय जनता पार्टी ने भुवन चंद्र खंडूड़ी को केंद्र में मंत्री बनाया.
वे अटल सरकार में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) थे.
जहां उन्होंने अपनी ईमानदार छवि का परिचय दिया.
केंद्र में उन्हें गोल्डन क्वाड्रिलेटरल और नेशनल हाईवे डेवलपमेंट प्रोजेक्ट को गति दी.
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