नॉर्वे की ‘स्वतंत्र’ मीडिया का असली चेहरा,मोदी का नस्लभेदी कार्टून

Racist Cartoon Depicting Pm Modi As A Snake Charmer Published In Norway Largest Newspaper
PM Modi Cartoon: प्रधानमंत्री मोदी का सपेरे के रूप में नस्लभेदी कार्टून: नॉर्वे की ‘स्वतंत्र’ मीडिया का असली चेहरा सामने आया
नॉर्वे के सबसे बड़े अखबार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओस्लो यात्रा में एक व्यंग्यात्मक चित्र प्रकाशित किया, जिसमें उन्हें “सपेरे” के रूप में दर्शाया गया था। भारतीय समुदाय ने इस चित्र की कड़ी आलोचना करते हुए इसे एक औपनिवेशिक रूढ़िवादी सोच करार दिया है। इस कार्टून की जबरदस्त आलोचना हो रही है।

ओस्लो 19 मई 2026: नॉर्वे के सबसे बड़े अखबार आफ्टेनपोस्टेन ने एक चौंकाने वाला कार्टून छापकर बेशर्मी की हद पार कर दी है। इस कार्टून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक सपेरे के रूप में दिखाया गया है, जिसकी हेडलाइन बेहद आपत्तिजनक है। इस कार्टून को लेकर सोशल मीडिया में जमकर बवाल मचा हुआ है। लोगों का कहना है कि नॉर्वे की मीडिया भारत के उदय को पचा नहीं पा रही है।

प्रधानमंत्री और भारत की आर्थिक प्रगति  को लक्षित नस्लवादी कार्टून

प्रेस फ्रीडम की आड़ में नस्लभेद

नॉर्वे खुद को प्रेस फ्रीडम का चैंपियन बताता है। उसका दावा है कि नॉर्वे में मीडिया स्वतंत्र है और उस पर किसी भी तरह की कोई रोक या पाबंदी नहीं है। लेकिन, सवाल यह है कि इस स्वतंत्रता की आड़ में किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष, जो आपका मेहमान हो, उसका अपमानजनक कार्टून छापना कितना उचित है।

सोशल मीडिया पर कार्टून की आलोचना

इस कार्टून पर भारतीय मूल के लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने इसकी आलोचना करते हुए इसे नस्लवादी और भारत के बारे में पुराने औपनिवेशिक रूढ़ियों पर आधारित बताया। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया, जब मोदी का नॉर्वे दौरा मुख्य रूप से कूटनीति, व्यापार और भारतीय समुदाय के साथ जुड़ाव पर केंद्रित था।

भारत की उन्नति को पचा नहीं पा रहे पश्चिमी देश

पश्चिमी मीडिया के कुछ हिस्सा ऐतिहासिक रूप से सपेरे की छवि का उपयोग भारत और उसके नागरिकों के प्रतीक के रूप में करता रहा है। अक्टूबर 2022 में,एक स्पेनिश समाचार पत्र ला वैनगार्डिया ने भारत की आर्थिक वृद्धि दर्शाने को एक सपेरे के चित्र का इस्तेमाल किया था।

Norwegian Journalist Helle Lyng Explained Why She Asked Question Regarding Press Freedom In India To Pm Modi
प्रेस फ्रीडम और मानवाधिकारी उल्लंघन: नॉर्वे की विवादित पत्रकार को भारत से क्या दिक्कत
नॉर्वे की विवादित पत्रकार हेला लेंग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सवाल पूछने पर मचे बवाल को लेकर अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने भारत में प्रेस की स्वतंत्रता का राग अलापा और इसे लोकतंत्र से जोड़ दिया। हेला ने भारत में लोकतंत्र पर सवाल उठाए हैं।

नॉर्वे की विवादित पत्रकार हेला लेंग ने भारत से जुड़े मुद्दों को लेकर अपने विचार व्यक्त किए हैं। हेला लेंग ने यह भी बताया है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जबरन सवाल पूछने की कोशिश क्यों की। उन्होंने यह भी दावा किया कि वहां मौजूद पत्रकारों को पहले यह नहीं बताया गया था कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीडिया से सवाल नहीं लिए जाएंगे। हेला लेंग ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि एक पत्रकार होने के नाते सवाल पूछना उनका काम है। ऐसे में जब कोई ताकतवर देश उनके छोटे से देश में आता है और उनसे संबंध मजबूत करना चाहता है, तो सवाल पूछना उनकी जिम्मेदारी है।
Norwegian journalist Helle Lyng
नॉर्वे की पत्रकार हेला लेंग

हेला लेंग उस समय चर्चा में आई थीं, जब उन्होंने ओस्लो में पीएम मोदी से सवाल पूछने की कोशिश की थी। पीएम मोदी जब नॉर्वे के प्रधानमंत्री योनास स्टोरे के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस खत्म कर जाने लगे, तब उन्होंने असभ्यता दिखाते हुए चिल्लाते हुए पूछा “प्रधानमंत्री मोदी, आप दुनिया की सबसे स्वतंत्र प्रेस के सवालों को क्यों नहीं लेते?” हेला लेंग के बर्ताव से ऐसा लगा कि वह सवाल पूछना कम लेकिन खुद को चर्चा में लाने की ज्यादा कोशिश कर रही थीं।

भारत में लोकतंत्र पर उठाया सवाल

इस घटनाक्रम के बाद बीबीसी हिंदी के साथ बातचीत में हेला लेंग ने कहा, “भारत में प्रेस की आजादी और मानवाधिकारों के उल्लंघन की मौजूदा स्थिति को देखते हुए, जाहिर है, इस विशाल देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति से सवाल पूछने की कोशिश करना मेरा फर्ज है। उन्होंने आगे कहा, हमें पहले से ही पता था कि सवालों का कोई दौर नहीं होगा। तो इससे एक पत्रकार के तौर पर मेरा काम और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाता है, क्योंकि हम विदेशी नेताओं को सिर्फ लोकतंत्र की बातें करते हुए नहीं देख सकते। आखिर लोकतंत्र है क्या? और आपके प्रधानमंत्री (पीएम मोदी) तो दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का नेतृत्व करने का दावा करते हैं।”

हेला लेंग ने प्रेस फ्रीडम को बताया लोकतंत्र का मानक

हेला लेंग ने आगे कहा, एक रिपोर्टर के तौर पर मेरा फर्ज है कि मैं इन राजकीय दौरों के तौर-तरीकों पर भी सवाल उठाऊं। और भारत में प्रेस की आजादी की मौजूदा स्थिति, और साथ ही मानवाधिकारों के उल्लंघन की घटनाओं को देखते हुए, यह मेरा फर्ज बनता है कि मैं इस विशाल देश के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति से सवाल पूछने की कोशिश करूं। नॉर्वे में हमें इस बात पर बहुत गर्व है कि हमारा समाज कैसे काम करता है। हमें इस बात पर गर्व है कि जब हमारे प्रधानमंत्री नॉर्वे की छोटी से छोटी जगहों पर भी जाते हैं – ऐसे गांव भी हो सकते हैं जहाँ सिर्फ कुछ हजार लोग रहते हों – तो भी वे स्थानीय न्यूज स्टेशनों या अख़बारों से बात करने के लिए समय निकालते हैं।

हेला लेंग को भारत पर एम्नेस्टी की रिपोर्ट पर भरोसा

उन्होंने आगे कहा कि वह एम्नेस्टी और ह्यूमन राइट्स वॉच जैसी संस्थाओं की इंटरनेशनल रिपोर्ट्स पर भरोसा करती हूं। उन्होंने आगे कहा कि कल के बाद से मुझे आपके देश के कई भारतीयों से बहुत सारे मैसेज मिले हैं; वे जिन चीज़ों का ज़िक्र कर रहे हैं, वे सचमुच बहुत चिंताजनक हैं। लेकिन ज्यादातर, जैसा कि मुझे पता है, मौजूदा सरकार के समर्थक और विरोधी लोगों के बीच काफी मतभेद हैं। इसलिए, मैं ज्यादातर उन स्रोतों पर भरोसा करती हूं जिन पर मुझे आज भी विश्वास है। और मुझे पता है कि कुछ लोगों के लिए एम्नेस्टी एक विवादित संस्था है। लेकिन मेरे लिए यह विवादित नहीं है।

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