सी जोसेफ विजय ने दी प्रभाकरन को श्रद्धांजलि,कांग्रेस की होगी दुर्गति?
Tamil Nadu Cm Thalapathy Vijay Glorifies Rajiv Gandhi Killer Prabhakaran Bjp Blame On Congress Rahul Gandhi For Supporting Tvk
‘पिता के हत्यारे का गुणगान करने वाले से राहुल गांधी ने मिलाया हाथ’, प्रभाकरन को सलामी ठोक थलपति विजय ने मिट्टी पलीद कर दी!
LTTE Prabhakaran And Vijay: थलपति विजय ने उग्रवादी संगठन लिट्टे के प्रमुख रहे प्रभाकरन को श्रद्धांजलि दी। इसे लेकर बीजेपी ने कांग्रेस पर हमला बोला है। बीजेपी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि उन्होंने ऐसे नेता से हाथ मिला लिया, जो उनके पिता यानी पूर्व पीएम राजीव गांधी के हत्यारे का महिमामंडन करता है।
नई दिल्ली: कभी दुनिया के सबसे आत्मघाती संगठनों में शामिल रहे लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम यानी लिट्टे (LTTE) के संस्थापक वी प्रभाकरन को तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री थलपति विजय ने 18 मई को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद से ही विवाद पैदा हो गया है। विजय का समर्थन कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भी किया है। बीजेपी ने राहुल गांधी को घेरते हुए कहा है कि राहुल के पिता और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के पीछे इसी संगठन का हाथ माना जाता है।
BJP Vs Congress
बीजेपी बनाम कांग्रेस
बीजेपी बोली-प्रभाकरन का महिमामंडन करने वाले से मिलाया हाथ
बीजेपी नेता और प्रवक्ता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने एक वेबसाइट की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट करते हुए राहुल गांधी से सवाल किया है। उन्होंने कहा-तमिलनाडु सीएम विजय ने प्रभाकरन को श्रद्धांजलि दी है, यह वही आदमी है, जो पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या के पीछे जिम्मेदार था। अगर राहुल गांधी सत्ता के लिए किसी से हाथ मिलाते हैं, जो उनके पिता के हत्यारे को महिमामंडित करता है। कल्पना कीजिए कि अगर वह सत्ता में आते हैं तो किस तरह का समझौता करेंगे।
विजय ने प्रभाकरन को लेकर क्या कहा था
सीएम विजय ने प्रभाकरन को श्रद्धांजलि देते हुए सोशल मीडिया एक्स पर श्रीलंका के मुल्लीवाइक्कल नामक स्थान का जिक्र किया। विजय ने X पर लिखा-हम मुल्लीवाइक्कल की यादों को अपने दिलों में सहेजकर रखेंगे! हम समुद्र पार रहने वाले अपने तमिल भाई-बहनों के अधिकारों के लिए हमेशा उनके साथ खड़े रहेंगे! दरअसल मुल्लीवाइक्कल में 2009 में इसी दिन श्रीलंकाई सेना ने प्रभाकरन को गोली मार दी थी।
कांग्रेस ने सरकार बनाने में विजय का किया था समर्थन
234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में विजय की टीवीके को 108 सीटें ही मिली थीं। मगर, सरकार बनाने के लिए उन्हें 118 सदस्यों का समर्थन चाहिए था। फ्लोर टेस्ट में टीवीके को कांग्रेस के 5, सीपीआई के 2, सीपीएम-2, IUML के 2 विधायकों के अलावा VCK का समर्थन मिला। AIADMK में बगावत के बाद विजय को ज्यादा विधायकों का समर्थन मिला। विजय के साथ पहले से ही 121 विधायक थे, जो AIADMK के 25 बागियों से समर्थन के बाद 144 तक पहुंच गया। 22 विधायकों ने विरोध किया। डीएमके ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। 5 विधायक सदन से गायब रहे। विजय ने इसके बाद शपथ ले ली। इंस्टाग्राम पर भी लोग कांग्रेस की आलोचना कर रहे हैं।
लिट्टे पर राजीव गांधी की हत्या का आरोप
लिट्टे पर आरोप है कि उसने 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की थी। इसी वजह से भारत में LTTE पर पाबंदी लगी हुई है। इस मामले में प्रभाकरन को मुख्य आरोपी बनाया गया था। दुनिया भर में फैले श्रीलंकाई तमिल समुदाय और भारत में रहने वाले तमिलों का एक वर्ग 18 मई को ‘मुल्लीवाइक्कल स्मरण दिवस’ या ‘तमिल नरसंहार स्मरण दिवस’ के रूप में मनाता है। यह दिन 2009 में समाप्त हुए श्रीलंकाई गृहयुद्ध के दुखद अंत का प्रतीक है। इस दिन उन हजारों तमिल नागरिकों को याद किया जाता है जो मुल्लीवाइक्कल के तटीय गांव में हुए अंतिम और क्रूर सैन्य अभियान के दौरान मारे गए, घायल हुए या लापता हो गए थे।
LTTE Prabhakaran
लिट्टे प्रभाकरन
कौन था प्रभाकरन, जिसने बनाया था घातक लिट्टे
वेलुपिल्लई प्रभाकरन (1954–2009) दुनिया के सबसे खतरनाक गुरिल्ला संगठनों में से माना जाने वाला उग्रवादी संगठन ‘लिट्टे’ (LTTE – लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम) का संस्थापक और प्रमुख था। लिट्टे ने श्रीलंका में एक स्वतंत्र तमिल राज्य (तमिल ईलम) की मांग के लिए हिंसक संघर्ष किया। आत्मघाती हमले के चलन को बढ़ावा लिट्टे ने दिया था।
LTTE V Prabhakaran
लिट्टे फाउंडर वी प्रभाकरन
18 मई, 2009 को ही प्रभाकरन को मार गिराया था
दुनिया भर में फैले श्रीलंकाई तमिल समुदाय और भारत में रहने वाले तमिलों का एक वर्ग 18 मई को ‘मुल्लीवाइक्कल स्मरण दिवस’ या तमिल नरसंहार स्मरण दिवस के रूप में मनाता है। इसी दिन 2009 में श्रीलंकाई सेना ने मुल्लीवाइक्कल में LTTE चीफ प्रभाकरन को मार गिराया था। मुल्लीवाइक्कल के तटीय गांव में LTTE नेता प्रभाकरन के साथ-साथ हजारों तमिल नागरिक भी मारे गए, घायल हुए या लापता हो गए थे।
प्रभाकरन ने श्रीलंका में तमिलों के लिए अलग मातृभूमि की मांग
प्रभाकरन ने श्रीलंका में रहने वाले तमिलों के लिए एक अलग मातृभूमि की मांग के साथ सशस्त्र संघर्ष शुरू किया था। तमिलों का आरोप था कि उनके साथ सिंहली बहुल श्रीलंका में काफी भेदभाव होता है। प्रभाकरन का यह संघर्ष करीब 30 साल तक एक जातीय संघर्ष के रूप में चलता रहा।
श्रीलंका की सत्ता और राजनीति में सिंहली वर्चस्व
विकीपीडिया के अनुसार, श्रीलंका में सिंहली और तमिल दो प्रमुख जातीय और भाषाई समूह हैं। सिंहली लगभग 75% आबादी के साथ बहुमत में हैं,जो मुख्य रूप से बौद्ध धर्म को मानते है। वहीं, तमिल लगभग 15% आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं,जिनमें मुख्य रूप से हिंदू और कुछ ईसाई शामिल हैं। श्रीलंका की सत्ता और राजनीति में सिंहली (Sinhalese) समुदाय का प्रमुख वर्चस्व है। यही विवाद की प्रमुख वजह है। तमिल सत्ता, नौकरियों और सियासत में अपने लिए प्रतिनिधित्व की मांग करते रहे हैं। इसी असंतोष का फायदा प्रभाकरन ने उठाया।
विजय ने सितंबर, 2025 में भी प्रभाकरन की बात की थी
इस बार तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में भले ही तमिल का मसला चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया था, मगर विजय ने इसे भुनाने की कोशिश पहले ही कर दी थी। सितंबर 2025 में नागपट्टिनम जिले में दिए गए अपने एक भाषण में विजय ने इस मुद्दे के साथ भावनात्मक जुड़ाव बनाने की कोशिश करते हुए कहा था, ‘हमारे अपने खून के रिश्तेदार यानी ईलम तमिल चाहे वे श्रीलंका में हों या दुनिया के किसी भी कोने में, आज उस नेता को खोने के बाद गहरे दुख में हैं, जिसने उन्हें मां जैसा स्नेह दिया था।’ उनका यह बयान स्पष्ट रूप से प्रभाकरन की ओर ही इशारा कर रहा था। उन्होंने आगे कहा था, ‘उनके अधिकारों के लिए आवाज उठाना हमारा कर्तव्य है।’
