Ex CS उत्तराखंड रामास्वामी का बेटा यशोवर्धन निकला ठग,बंदी

देहरादून पुलिस की गिरफ्त में पूर्व मुख्य सचिव का बेटा आर. यशोवर्धन।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के 35 वर्षीय बेटे आर. यशोवर्धन को देहरादून पुलिस ने फर्जी IPS अधिकारी बनकर ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपित खुद को कभी IPS, कभी RAW, CBI, CRPF, NIA और सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को झांसे में लेता था।

पुलिस ने उसे गुरुवार को मसूरी रोड स्थित CSI तिराहे से गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपित ने बताया कि उसके पिता सेवानिवृत्त वरिष्ठ आईएएस अधिकारी एस रामास्वामी  हैं। बचपन से अधिकारियों की धाक देखकर वह भी IPS बनना चाहता था।

उसने कई साल UPSC की तैयारी की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद उसने फर्जी आईडी कार्ड, विजिटिंग कार्ड और वर्दियां बनवाकर खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताना शुरू कर दिया।

देहरादून पुलिस की गिरफ्त में पूर्व मुख्य सचिव का बेटा आर. यशोवर्धन।

उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस. रामास्वामी के 35 वर्षीय बेटे आर. यशोवर्धन को देहरादून पुलिस ने फर्जी IPS अधिकारी बनकर ठगी करने के आरोप में गिरफ्तार किया है। आरोपित खुद को कभी IPS, कभी RAW, CBI, CRPF, NIA और सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लोगों को झांसे में लेता था।

पुलिस ने उसे गुरुवार को मसूरी रोड स्थित CSI तिराहे से गिरफ्तार किया। पूछताछ में आरोपित ने बताया कि उसके पिता वरिष्ठ सेवानिवृत्त अधिकारी हैं। बचपन से अधिकारियों का रोब देखकर वह भी IPS बनना चाहता था।

उसने कई साल UPSC की तैयारी की, लेकिन सफल नहीं हो सका। इसके बाद उसने फर्जी आईडी कार्ड, विजिटिंग कार्ड और वर्दियां बनवाकर खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताना शुरू कर दिया।

आरोपित यशोवर्धन से 5 फर्जी आईडी, 8 विजिटिंग कार्ड, सेना की 3 वर्दियां, वायरलेस सेट और लैपटॉप मिले।

दो मामलों में 19.60 लाख की ठगी का आरोप

राजपुर थाने में दर्ज दो मुकदमों में आरोपित पर एक MBBS छात्र से कंपनी रजिस्ट्रेशन और स्टार्टअप फंडिंग के नाम पर 15 लाख रुपए, जबकि एक महिला वैज्ञानिक से रक्षा मंत्रालय में डेटा साइंस कंसल्टेंट की नौकरी दिलाने के नाम पर 4.60 लाख रुपए ठगने का आरोप है।

पुलिस को आरोपित से 5 फर्जी आईडी कार्ड, 8 फर्जी विजिटिंग कार्ड, पुलिस और सेना के 25 लोगो, सेना/पैरामिलिट्री की 3 जोड़ी वर्दियां, 3 फर्जी रिबन, एक वायरलेस सेट और एक लैपटॉप मिला है।

आर. यशोवर्धन कई सालों से धोखाधड़ी कर रहा था। पुलिस अब उसके अन्य पीड़ितों और संभावित आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच कर रही है।

दो शिकायतें मिलने के बाद वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून के निर्देश पर राजपुर थाना पुलिस ने विशेष टीम बनाई। सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपित पकड़ा गया। पुलिस अब यह पता लगा रही है कि उसने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और क्या इस गिरोह में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है।

पढ़िए पूरी खबर…

1. बड़े अधिकारियों के सामने खुद को बताया RAW एजेंट- देहरादून की राजपुर थाना पुलिस ने खुद को फर्जी IPS, रॉ (RAW) एजेंट और सेना का वरिष्ठ अधिकारी बताकर लाखों रुपए की ठगी करने वाले एक हाई-प्रोफाइल धुरंधर आरोपित  पकड़ा है।

पकड़ा  अभियुक्त आर० यशोवर्धन (35 वर्ष ) है, जो उत्तराखंड के पूर्व मुख्य सचिव एस० रामास्वामी का बेटा है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक देहरादून की सटीक रणनीति पर राजपुर थाना पुलिस ने चेकिंग में अभियुक्त को CSI तिराहा, ओल्ड मसूरी रोड से दबोच लिया।

2. ठगी के दो बड़े मामले (19.60 लाख की धोखाधड़ी)- राजपुर थाने में आरोपित यशोवर्धन के खिलाफ दो अलग-अलग मुकदमों के आधार पर BNS की धाराओं 318(4), 336(3), 338 और 340(2) में मुकदमा अंकित है।

पहला मामला (15 लाख रुपए) – 8 जुलाई 2026 को वादी अंशुल उपाध्याय (निवासी डाकरा बाजार) ने शिकायत लिखाई कि यशोवर्धन ने खुद को वरिष्ठ अधिकारी बताकर उन्हें होटल जिंजर में बुलाया। उसने अंशुल की दिवंगत माता की स्मृति में कंपनी का पंजीकरण और स्टार्टअप फंडिंग जल्द कराने के नाम पर 15 लाख रुपए ठग लिए।

दूसरा मामला (4.60 लाख रुपए) – 15 जुलाई 2026 को सोशल स्टेज हॉस्टल, कैनाल रोड निवासी एक महिला वैज्ञानिक/पीएचडी स्कॉलर (डॉक्टर अनुषा) ने शिकायत दी। यशोवर्धन ने खुद को IPS बताकर रक्षा मंत्रालय में ‘डेटा साइंस कंसलटेंट’ की नौकरी दिलाने का झांसा दे उनसे 4,60,000 रुपए ऐंठ लिए।

3. UPSC में फेल हुआ, तो चुना जालसाजी का रास्ता- पुलिस अधीक्षक नगर प्रमोद कुमार के अनुसार

उसने कई साल तक UPSC की तैयारी की, लेकिन सफल नहीं हो सका। असफलता हाथ लगने पर उसने लोगों पर रौब झाड़ने के लिए फर्जी आईडी, विजिटिंग कार्ड और वर्दियां बनवा खुद को IPS, RAW, CBI, CRPF, NIA और वरिष्ठ सैन्य अधिकारी बताना शुरू कर दिया। वह प्रभावशाली बातचीत से लोगों का भरोसा जीतकर टेंडर, नौकरी और सरकारी काम दिलाने का झांसा देता था।

4. पुराना हाई-प्रोफाइल मारपीट का मामलापूर्व विधायक के बेटे पर आरोप-

इस पूरे ठगी के घटनाक्रम के पीछे एक पुराना और गंभीर मारपीट का मामला भी याद आता है, जिसमें यही महाठग (यशोवर्धन) पीड़ित था-

14 नवंबर की रात की घटना दिलाराम चौक से साईं मंदिर जाते समय, पूर्व भाजपा विधायक प्रणव सिंह के बेटे दिव्य प्रताप सिंह की लैंड क्रूजर कार (UK07DN00 01) ने यशोवर्धन की कार का पीछा किया। मसूरी डायवर्जन के पास फिल्मी स्टाइल में गाड़ी के आगे कट मारकर रास्ता रोका गया और पीछे से एक बोलेरो (UK17) ने ब्लॉक कर दिया।

चैंपियन के बेटे ने दोनों युवकों को बुरी तरह पीटा था।

फिल्मी स्टाइल में गुंडई- गाड़ियों से उतरे 5-6 लोगों ने (जिसमें लाल स्वेटशर्ट में दिव्य प्रताप सिंह सोशल मीडिया वीडियो में दिख रहा है) खुद को विधायक का बेटा बताते हुए यशोवर्धन और उसके ड्राइवर को बाहर खींचकर लात-घूंसों व डंडों से बेरहमी से पीटा।

 पीड़ित की ओर से एफआईआर में ड्राइवर पर पिस्टल तानकर जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है, जिसका वीडियो भी खूब वायरल हुआ था।

अभी देहरादून पुलिस ने फर्जी IPS यशोवर्धन को पकड़ उसे कोर्ट पहुंचाने की कानूनी कार्रवाई पूरी कर ली है। पुलिस अब उसके जाल में फंसे अन्य पीड़ितों का पता लगाने और उसके संभावित पुराने आपराधिक रिकॉर्ड की गहराई से जांच कर रही है।

भारतीय प्रशासनिक सेवा के सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी एस. रामास्वामी, का जन्म 22 अप्रैल, 1960 को हुआ था और वे उत्तराखंड कैडर के 1986 बैच के आईएएस हैं। उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातक और स्नातकोत्तर की उपाधि प्राप्त की। करियर में, उन्होंने सहायक कलेक्टर, संयुक्त सचिव, विशेष सचिव, विशेष कार्य अधिकारी, संयुक्त विकास आयुक्त (निदेशक और उप सचिव के समकक्ष), निदेशक, कार्यकारी निदेशक, आयुक्त, राज्यपाल के सचिव और प्रधान सचिव सहित विभिन्न पदों पर कार्य किया। 14 मई, 2010 योजना विभाग में प्रधान सचिव और नवंबर 2016 से मई 2017 तक उत्तराखंड के मुख्य सचिव (Chief Secretary) के रूप में अपनी सेवाएं दीं।इसके बाद वे उत्तराखंड के ‘मुख्य सेवा का अधिकार आयुक्त’ (Chief RTS Commissioner) भी रहे हैं।

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