तीन तलाक और हलाला पीड़िताओं को मिलेगा मुफ्त आवास: शादाब शम्स

तीन तलाक और हलाला पीड़िताओं को मिलेगा मुफ्त आवास, जल्द आएगा प्रस्ताव, पढ़िए डिटेल

सामाजिक सुधारों के बीच वक्फ बोर्ड ने तीन तलाक और हलाला की शिकार बेसहारा महिलाओं को मुफ्त आवास देने का बड़ा फैसला किया है.
UTTARAKHAND WAQF BOARD
उत्तराखंड वक्फ बोर्ड
देहरादून 25 सितंबर 2026 : उत्तराखंड में धामी सरकार लगातार एक के बाद एक कड़े और ऐतिहासिक सामाजिक सुधार लागू कर रही है. राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) को धरातल पर उतारने की तैयारी हो या फिर निकाहनामा में फर्जीवाड़े को रोककर पारदर्शिता लाना, हर मोर्चे पर कठोर फैसले लिए जा रहे हैं. इसके साथ ही, मदरसों के पारंपरिक ढर्रे में बदलाव करते हुए मदरसा बोर्ड को समाप्त करने और सामान्य शिक्षा से जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है.

वक्फ संपत्तियों के सालों पुराने दुरुपयोग पर नकेल कसने के बाद अब वक्फ बोर्ड के माध्यम से समाज के सबसे कमजोर वर्ग को सीधा फायदा पहुंचाने का खाका तैयार किया गया है. उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि राज्य सरकार और वक्फ बोर्ड मिलकर मुस्लिम समाज की पीड़ित महिलाओं को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं.

उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स ने बताया कि केंद्र सरकार द्वारा लाए जा रहे ‘वक्फ संशोधन विधेयक’ ने गरीब और जरूरतमंद मुस्लिम परिवारों में एक नई उम्मीद जगाई है. शादाब शम्स ने बताया वक्फ की ज़मीन और संपत्तियां मूल रूप से गरीबों, यतीमों, बेवाओं और मिस्कीनों का हक थीं, लेकिन लंबे समय से रसूखदारों के कब्जों की वजह से इसका फायदा असली हकदारों तक नहीं पहुंच पा रहा था. अब वक्फ अमेंडमेंट एक्ट के तहत एक पारदर्शी और ईमानदार कोशिश की जा रही है.

अगले महीने बोर्ड बैठक में आएगा मजबूत प्रस्ताव: शादाब शम्स ने समाज की जमीनी और दर्दनाक हकीकत का वर्णन करते हुए कहा कि जब किसी महिला को तीन तलाक दिया जाता है या उसे हलाला की भयानक प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. वह सामाजिक और मानसिक रूप से पूरी तरह टूट जाती है. अक्सर उनके पति उन्हें अचानक घर से बेदखल कर देते हैं. ऐसी विषम परिस्थिति में न तो ससुराल वाले उन्हें सहारा देते हैं और न ही मायके पक्ष से कोई आर्थिक मदद मिल पाती है. जब उनके साथ मासूम बच्चे होते हैं, तो उनके पास सिर छुपाने तक की जगह नहीं बचती है. वे दर-दर भटकने को मजबूर हो जाती हैं. इन्हीं दुखद और लाचार परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उत्तराखंड वक्फ बोर्ड अगले महीने (अगले माह के पहले हफ्ते में) होने वाली अपनी आधिकारिक बोर्ड बैठक में एक मजबूत प्रस्ताव लाने जा रहा है. इस प्रस्ताव के पास होते ही तीन तलाक और हलाला से पीड़ित, बेसहारा महिलाओं को रहने के लिए मुफ्त आवास (छत) की व्यवस्था दी जाएगी.

अवैध कब्जों पर चलेगा चाबुक, होगी कठोर मॉनिटरिंग: प्रदेश में चल रहे प्रशासनिक सुधारों की कड़ी में वक्फ बोर्ड अपनी संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराने के मूड में है. बोर्ड अध्यक्ष ने साफ़ चेतावनी दी है कि वक्फ की संपत्तियों पर जितने भी भू-माफियाओं या दबंगों के अवैध कब्जे (एंक्रोचमेंट) हैं, उन सभी को जल्द से जल्द हटाया जाएगा. इन अवैध कब्जों से जमीनों को मुक्त कराकर जो भी संसाधन और आय जुटेगी, उसका सीधा इस्तेमाल इन पीड़ित बहनों और बेटियों को बसाने तथा उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में किया जाएगा.

इस पूरी योजना की मॉनिटरिंग बेहद सख्ती से होगी. जिससे किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी न हो सके. उत्तराखंड वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष शादाब शम्स का मानना है कि इस पहल के बाद मुस्लिम बहनों और बेटियों को अब किसी के रहमों-कर्म या लाचारी में नहीं जीना पड़ेगा, बल्कि यह योजना उनके लिए एक नया और मजबूत सहारा बनेगी.

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