अंत्यपरीक्षण:जीवन संघर्ष का दुखद अंत,फांसी लगाने से ही हुई सुरेंद्र कोली की मृत्यु
सुरेंद्र कोली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुला मौत का रहस्य, ऐसे टूटी सांसों की डोर
निठारी कांड से चर्चा में आए सुरेंद्र कोली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है, जिसमें उसकी मौत का कारण फांसी लगाने के बाद दम घुटना बताया गया है।
हरिद्वार 23 सितंबर 2026 । निठारी कांड से चर्चा में आए अल्मोड़ा निवासी सुरेंद्र कोली की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। डॉक्टरों के पैनल ने रिपोर्ट में उसकी मौत का कारण फांसी लगाने से दम घुटना बताया है।
रिपोर्ट के प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार सुरेंद्र कोली ने जीवित अवस्था में फांसी लगाई जिसके चलते दम घुटने से उसकी मौत हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुरेंद्र कोली की गर्दन पर फंदे के दबाव से बने स्पष्ट निशान मिले हैं।
चिकित्सकों ने इसे फांसी में रस्सी या अन्य वस्तु से गर्दन पर पड़े दबाव का संकेत माना है। इसके अलावा गर्दन में महत्वपूर्ण छोटी हड्डी और गले की संरचना में फ्रैक्चर के साक्ष्य भी मिले हैं।
रिपोर्ट में आंखों और चेहरे पर छोटे-छोटे रक्तस्राव के निशानों का भी उल्लेख है। चिकित्सकीय भाषा में ऐसे निशान फांसी या दम घुटने की स्थिति से जोड़े जाते हैं।
वहीं नाक और मुंह से खून आना भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया है, जिसे फांसी के मामलों में संभावित चिकित्सीय लक्षण माना जाता है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आते ही सुरेंद्र कोली की मौत को लेकर चल रही जांच में चिकित्सकीय साक्ष्य भी जुड़ गए हैं।
निठारी कांड से चर्चा में आए सुरेंद्र कोली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है, जिसमें उसकी मौत का कारण फांसी लगाने के बाद दम घुटना बताया गया है।
निठारी कांड से चर्चा में आए अल्मोड़ा निवासी सुरेंद्र कोली की मौत के मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई है। डॉक्टरों के पैनल ने रिपोर्ट में उसकी मौत का कारण फांसी लगाने के बाद दम घुटना बताया है।
रिपोर्ट के प्रारंभिक निष्कर्षों के अनुसार सुरेंद्र कोली ने जीवित अवस्था में फांसी लगाई थी और इसके चलते दम घुटने से उसकी मौत हुई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सुरेंद्र कोली की गर्दन पर फंदे के दबाव से बने स्पष्ट निशान मिले हैं।
चिकित्सकों ने इसे फांसी के दौरान रस्सी या अन्य वस्तु से गर्दन पर पड़े दबाव का संकेत माना है। इसके अलावा गर्दन के अंदर मौजूद एक महत्वपूर्ण छोटी हड्डी और गले की संरचना में फ्रैक्चर के साक्ष्य भी मिले हैं।
रिपोर्ट में आंखों और चेहरे पर छोटे-छोटे रक्तस्राव के निशान मिलने का भी उल्लेख है। चिकित्सकीय भाषा में ऐसे निशानों को फांसी या दम घुटने की स्थिति से जोड़ा जाता है।
वहीं नाक और मुंह से खून आने की बात भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आई है, जिसे फांसी के मामलों में संभावित चिकित्सीय लक्षण माना जाता है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद सुरेंद्र कोली की मौत को लेकर चल रही जांच में चिकित्सकीय साक्ष्य भी जुड़ गए हैं। रिपोर्ट में मौत का कारण फांसी के चलते दम घुटना बताया गया है।
लगभग 20 साल जेल में रहने के बाद सुरेंद्र कोली ने आरटीआई को हथियार बनाकर सुप्रीम कोर्ट से बरी होकर नई जिंदगी शुरू की थी। हरिद्वार में चाय की दुकान खोलने के बाद भी उसकी आत्महत्या का सवाल बना हुआ है, जो उसकी जीने की अदम्य इच्छा के विपरीत है।
कोली ने 20 साल जेल में रह आरटीआई से लड़ी लंबी लड़ाई
सुप्रीम कोर्ट से छूट हरिद्वार में चाय की दुकान खोली।
जीने की इच्छा के बावजूद उसकी आत्महत्या का सवाल गहराया।
बच्चों के अपहरण कर उनके साथ घिनौना कार्य और मांस पकाकर खाने जैसे अति गंभीर व संवेदनशील आरोप में लगभग 20 साल जेल में रहने के बाद भी सुरेंद्र कोली ने जीने की लालसा नहीं छोड़ी। उसने जेल में रहकर सूचना के अधिकार को हथियार बनाकर लंबी लड़ाई लड़ी।
मेहनत सफल होने पर सुप्रीम कोर्ट से बरी हुआ तो गांव में परिवार के सामाजिक बहिष्कार, मां की मौत, पत्नी-बच्चों के बिछड़ने तक की सभी बुरे घटनाक्रम भुलाकर उसने नौकरी व काम धंधा कर फिर नए सिरे से जिंदगी शुरू करने का प्रयास किया।
इससे साफ कि उसके अंदर जिजीविषा यानि जीने की अदम्य इच्छा कायम थी। सवाल फिर वहीं आकर रुक जाता है कि फिर उसने आत्महत्या क्यों की। कोली के परिचित नारायण सिंह रावत बताते हैं कि कोली ने जेल से आरटीआई में सूचना मांगी कि उसके जेल जाने के बाद नोएडा से कितने बच्चे लापता हुए हैं।
अच्छी खासी संख्या प्राप्त होने पर उसने सुप्रीम कोर्ट में खुद यह दलील दी कि यदि वह बच्चों के अपहरण में शामिल रहा है तो उसके जेल जाने के बाद बच्चों के अपहरण की घटनाएं क्यों नहीं रुकी। उसका तर्क था कि बच्चों के अपहरण में कोई और शामिल है। सर्वोच्च न्यायलय से कोली के इस तर्क पर गंभीरता से विचार किया था।
धर्मेंद्र की मां से बंधवाई थी राखी
हरिद्वार में कोली के मददगार बने धर्मेंद्र कौशिक बताते हैं कि सदाराम का व्यवहार बिल्कुल गाय जैसा था। अपने से छोटों को भी हाथ जोड़कर नमस्कार करता था।
कोली ने धर्मेंद्र की मां से रक्षाबंधन पर राखी बंधाई। मामा होने के नाते वह धर्मेंद्र कौशिक को शराब पीने से भी मना करता था। रक्षाबंधन पर तो उसने धर्मेंद्र को अपने सिर की कसम देकर शराब न पीने का वचन लिया था।
दिल्ली से चेन्नई तक भटकता रहा कोली
सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद सुरेंद्र कोली दिल्ली से लेकर चंडीगढ़, चेन्नई आदि शहरों में भटकता रहा। दिल्ली के मालवीय नगर में रहने के दौरान कुछ अधिवक्ता उसे चेन्नई ले गए। जहां चर्च की गौशाला में गायों की सेवा करने में लगा दिया।
उस दौरान भी कोली अल्मोड़ा के पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण रावत के संपर्क में रहा। गौशाला में ज्यादा काम कराने से वह परेशान हो गया और नारायण रावत के कहने पर वहां से आ गया।
उसे मालूम था कि हरिद्वार में जल्द ही अर्द्धकुंभ होने वाला है, इसलिए कोली लगभग सवा महीने पहले हरिद्वार आया और वॉचमैन की नौकरी की। सिडकुल में चाय की ठेली भी लगाई और बीते छह सितंबर को भूपतवाला में चाय की दुकान शुरू की थी।


