फर्जी प्रमाणपत्र मामले में सरकारी जनाधार बंद, ई-डिस्ट्रिक्ट केंद्र से हटाए गए कर्मी
फर्जी प्रमाणपत्र मामले में सरकारी जनाधार बंद, ई-डिस्ट्रिक्ट केंद्र से हटाए गए कर्मी
फर्जी प्रमाण पत्र मामले में देहरादून कलेक्ट्रेट स्थित जनाधार से हटाए गए कर्मी, प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी नजर
Dehradun E District Centre
ई-डिस्ट्रिक्ट केंद्र देहरादून
देहरादून 11 अक्टूबर 2026 : फर्जी प्रमाण पत्र प्रकरण पर सरकारी जनाधार (ई-डिस्ट्रिक्ट केंद्र) भी कार्रवाई की जद में आ गया है. स्थिति यह है कि सरकारी केंद्र में तैनात कर्मचारियों को हटाने के आदेश हो चुके हैं और इस सरकारी केंद्र को बंद करने के भी आदेश कर दिए गए हैं. कलेक्ट्रेट स्थित जन आधार केंद्र से भी फर्जी प्रमाण पत्र बनाए जाने की बात सामने आई थी, जिसके बाद इस केंद्र को फिलहाल बंद रखने का निर्णय लिया गया है.
बता दें कि मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस दाखिले के लिए फर्जी आश्रित प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल का मामला अब सरकारी प्रमाण पत्र जारी करने वाली व्यवस्था तक पहुंच गया है. देहरादून के कलेक्ट्रेट परिसर में संचालित जनाधार केंद्र को बंद कर दिया गया है. केंद्र में काम कर रहे तीनों कर्मचारियों को भी हटा दिया गया है. प्रशासन का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद यहां नए कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी. इसके बाद ही केंद्र का संचालन दोबारा शुरू होगा.
इस मामले में पुलिस की जांच के दौरान स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रित होने के नाम पर फर्जी प्रमाण पत्र तैयार कराए जाने का खुलासा हुआ था. इन प्रमाण पत्रों के आधार पर एमबीबीएस सीटों के आवंटन में लाभ लेने की बात सामने आई. जांच में देहरादून के जनाधार केंद्र से भी ऐसे प्रमाण पत्र जारी होने की जानकारी मिली, जिसके बाद केंद्र की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे.
दो पटवारी पहले ही निलंबित: प्रकरण में देहरादून डीएम आशीष चौहान पहले ही दो पटवारियों को निलंबित कर चुके हैं. संबंधित फर्जी प्रमाण पत्रों को निरस्त करने की कार्रवाई भी की गई है. अब जनाधार केंद्र के तीनों कर्मचारियों को हटाकर केंद्र बंद करने का फैसला लिया गया है. प्रशासन की इस कार्रवाई को प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच और व्यवस्था में बदलाव से जोड़कर देखा जा रहा है.
हालांकि, जांच पूरी होने से पहले केंद्र में तैनात कर्मचारियों की भूमिका को लेकर किसी अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा. एसआईटी इस पूरे प्रकरण की जांच कर रही है. एमबीबीएस पाठ्यक्रमों में कथित फर्जी दाखिलों से जुड़े मामलों की पड़ताल के साथ प्रमाण पत्रों की सत्यता भी जांच की जा रही है.
प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया पर भी नजर: फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर मेडिकल सीट हासिल करने का मामला सामने आने के बाद यह सवाल भी अहम हो गया है कि दस्तावेजों के सत्यापन और प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में चूक कहां हुई? यदि प्रमाण पत्र जारी करने के स्तर पर अनियमितता हुई है, तो उसकी जिम्मेदारी तय करना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा. वहीं, देहरादून जिलाधिकारी डाॅक्टर आशीष चौहान ने जनाधार केंद्र बंद किए जाने की पुष्टि की है.
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