अमेरिकी फेडरेल रिजर्व बैंक दरों में 25 बेसिस प्वाइंट कटौती,भारतीय बाजार और ₹ पर होगा सकारात्मक असर?

USA: अमेरिका के फेडरेल रिजर्व बैंक की दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती, भारतीय बाजार पर क्या पड़ेगा असर?

आशानुरूप अमेरिकी फेडरल रिजर्व बैंक नीतिगत दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती हुई है। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतिगत दरें 3.75 प्रतिशत से चार प्रतिशत के बीच आ गई हैं।  जानिए इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार और निवेश पर क्या  पड़ सकता है।
US Federal Reserve Bank cuts rates by 25 basis points, what will be the impact on the Indian market?जेरोम पॉवेल, यूएस फेडरल रिजर्व प्रमुख

आशानुरूप अमेरिका के फेडरल रिजर्व बैंक ने अपनी नीतिगत दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर दी है। इससे अमेरिकी केंद्रीय बैंक की नीतिगत दरें 3.75 प्रतिशत से चार प्रतिशत के बीच आ गई हैं। यह अमेरिकी बैंक की तीसरी लगातार की गई कटौती है। इससे अमेरिका में सस्ती दरों पर व्यापार और नए निवेश को धन उपलब्ध होने और रोजगार अवसरों में वृद्धि होने का अनुमान जताया गया है। इससे अमेरिकी बाजार को गति मिलने की संभावना है, लेकिन इसका सीधा असर भारतीय शेयर बाजार और निवेश पर भी पड़ सकता है।

आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार एफडीए दर कटौती से अमेरिकी बाजारों में व्यापार और निवेश की संभावना बढ़ेगी। इससे अमेरिकी बाजार में तेजी आने की संभावना है। अमेरिकन फेडरल बैंक लगातार ऐसी कटौती कर रहा है। अब और कटौती होने की संभावना कम है, लेकिन इससे महंगाई नियंत्रण और ठहरी व्यापारिक गतिविधियां तेज होंगी। इससे अमेरिकी-यूरोपीय बाजारों के निवेशकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बन सकती है। तब वे भारतीय शेयर बाजार सहित टूट रहे एशियाई बाजारों से दूरी बना सकते हैं।

विदेशी संस्थागत निवेशकों ने अकेले दिसंबर महीने के पहले सप्ताह में ही भारतीय शेयर बाजार से 11,820 करोड़ रुपये निकाले है। इसके पहले नवंबर महीने में भी विदेशी निवेशकों ने लगभग 3765 करोड़ रुपए निकाले थे। इसका सबसे बड़ा कारण रूपये की गिरावट मानी जा रही है। रुपया कमजोर होने से निवेशक भारतीय बाजारों से दूरी बना रहे हैं।

क्यों भाग रहे विदेशी निवेशक
भारतीय रुपया लगातार नीचे जा रहा है। डॉलर की तुलना में यह मनोवैज्ञानिक सीमा 90 रुपये को भी कई बार पार कर चुका। आज भी डॉलर की कीमत 89.86 रुपये के आसपास बनी हुई है। रुपये की कीमतों में और गिरावट आने की संभावना भी जताई जा रही है। विदेशी संस्थागत निवेशकों में अपने रिटर्न को लेकर घबराहट देखी जा रही है। भारतीय बाजार में रूपये की कीमत गिरने से निकासी के दौरान उन्हें डॉलर के रूप में कम रकम मिल रही है, उनका लाभ गिर रहा है। इस नुकसान से घबराए निवेशक भारतीय बाजार से अपना पैसा निकालकर अमेरिका, चीन सहित दूसरे बाजारों में लगा रहे हैं।

बाजार संभलने का अनुमान
हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि भारतीय रुपये की गिरावट अब थम सकती है। इसका बड़ा कारण यह है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में तेजी बनी हुई है। रूस का भारत से तेल व्यापार को लेकर समझौता हो चुका। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतें भी स्थिर रह सकती हैं। भारत और रूस के बीच रुपया और रूबल में ट्रेड करने पर भी सहमति बनी है। इन सभी घटनाओं का मिलाजुला असर यह हो सकता है कि डॉलर की कीमतें स्थिर रहें। यदि ऐसा होता है तो रुपये की गिरावट में विराम लग सकता है। इससे भारतीय बाजार की स्थिति भी संभल सकती है और विदेशी निवेशक पलायन पर रोक लगा सकते हैं।

बैंक ऑफ अमेरिका ग्लोबल रिसर्च की एक रिपोर्ट में अब रुपये की गिरावट के थमने और इसकी कीमतों में तेजी आने की संभावना जताई गई है। रिपोर्ट के अनुसार, 2026 में रुपया मजबूत होकर 86 रुपये प्रति डॉलर तक हो सकता है। इसका कारण भी भारतीय बाजार में तेजी बतायी गयी है।

आंतरिक निवेशकों ने बाजार को संभाला  
विदेशी निवेशकों की घबराहट के कारण बाजार में गिरावट बनी हुई है। लेकिन इसके बाद भी भारतीय शेयर बाजार में एक सीमा से अधिक गिरावट नहीं आई है। इसका सबसे बड़ा कारण है कि स्थानीय निवेशकों का बाजार पर भरोसा बना हुआ है और वे म्यूचुअल फंडों से बाजार में लगातार निवेश कर रहे हैं।

फिर नई ऊंचाई को छू सकता है बाजार
सेबी के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय निवेशकों ने अकेले अक्टूबर महीने में 20,718 करोड़ रूपये निवेश किया था। विदेशी निवेशकों के  दिसंबर में निकाले गए रूपये से यह करीब 1.75 गुना ज्यादा है। लेकिन भारतीय निवेशकों का यह उत्साह नवंबर के महीने में और अधिक बढ़ गया और उन्होंने अक्टूबर की तुलना में लगभग दो गुना अधिक 43,465 करोड़ रुपये निवेश किया है। भारतीय निवेशकों के बाजार पर इस विश्वास ने विदेशी निवेशकों के असर को बहुत हद तक बेअसर कर दिया है। लेकिन यदि अमेरिकी बाजार की स्थितियों के बदलने पर भारतीय बाजार की ओर रुख करते हैं तो इससे बीएसई नई ऊंचाई को छू सकता है।

30 साल का रिकॉर्ड टूटा! पिछले 5 वर्षों में भारत ने ₹148 लाख करोड़ की नई दौलत जोड़ी

मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOSFSL) की रिपोर्ट बताती है कि सबसे ज्यादा पैसे बनाने वाले सेक्टर में वित्तीय क्षेत्र जैसे कि बैंक और बीमा कंपनियां हैं.

2020 से 2025 तक टॉप-100 कंपनियों ने भारतीय इक्विटी बाजार में 148 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति जोड़ी है
बैंक और बीमा कंपनियां जैसे वित्तीय क्षेत्र में इन वर्षों में सबसे अधिक पैसा बनाने वाले सेक्टर के रूप में उभरे
भारत की जीडीपी 17 वर्षों में 4 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ी है, आने वाले 17 वर्षों में यह 4 गुना बढ़ सकती है

भारतीय इक्विटी बाज़ार में Wealth Creation ने पिछले तीन दशकों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है. ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 2020 से 2025 तक पांच साल में टॉप-100 कंपनियों ने मिलकर 148 लाख करोड़ रुपये की रिकॉर्ड संपत्ति जोड़ी. यह उछाल मुख्यत: कोविड-19 महामारी में निचले स्तर पर पहुंचे बाजार में आई तेज वापसी से संभव हुआ है.

बैंक, बीमा कंपनियों ने सबसे ज्यादा पैसे बनाए
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (MOSFSL) की रिपोर्ट के अनुसार सबसे ज्यादा पैसे बनाने वाले सेक्टर में वित्तीय क्षेत्र बैंक और बीमा कंपनियां हैं. फिर उद्योग, टेक्नोलॉजी और यूटिलिटी (सार्वजनिक सेवाएं) सेक्टर हैं. सरकारी कंपनियां (पीएसयू) भी रक्षा और ऊर्जा जैसे सेक्टर में तेजी से आगे बढ़ी हैं.

भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शेयर मार्केट
रिपोर्ट में कहा गया कि 5 साल की अवधि में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स (एचएएल) ने सबसे ज्यादा वेल्थ क्रिएट की है. इस रिपोर्ट के मुताबिक, भारत अब दुनिया का चौथा सबसे बड़ा शेयर बाजार बन चुका है.

पैसा बनाने का मंत्र- अच्छी कंपनियों में निवेश
मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने कहा कि भारत अब सबसे तेज वेल्थ क्रिएशन के दौर में है. जैसे-जैसे हमारी अर्थव्यवस्था 4 ट्रिलियन डॉलर से 16 ट्रिलियन डॉलर की ओर बढ़ेगी, निवेश के नए बड़े मौके बनेंगें. हालांकि दीर्घकालिक संपत्ति वही बनाएंगे,जो अच्छी कंपनियों में निवेश करेंगे.सही कंपनियां चुनना बहुत जरूरी है.

17 वर्षों में 4 गुना बढ़ सकती है GDP
रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की जीडीपी पिछले 17 वर्षों में 1 ट्रिलियन डॉलर से 4 ट्रिलियन डॉलर तक बढ़ी है और आने वाले 17 वर्षों में यह चार गुना बढ़ सकती है. रिपोर्ट के अनुसार इस मल्टी-ट्रिलियन डॉलर (एमटीडी) युग में वित्तीय क्षेत्र और उपभोक्ता सामान वाहन, स्मार्टफोन और दैनिक आवश्यकता की चीजें बनाने वाली कंपनियां बहुत तेजी से आगे बढ़ेंगी.

रिपोर्ट में यह भी है कि इस दौर में कई कंपाउंडिंग स्टॉक्स (ग्रोथ स्टॉक्स) दिखेंगे. इसके अलावा लार्ज कैप बड़ी कंपनियां भविष्य में और भी बेहतर प्रदर्शन कर सकती हैं.

 

 

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